नई दिल्ली। जेपी इन्फ्राटेक के वर्षो से अटके हाउसिंग प्रोजेक्टों में फ्लैट पाने का इंतजार कर रहे हजारों खरीदारों के लिए नई उम्मीद बनी है। कर्ज में फंसे जेपी समूह की कंपनी जेपी इन्फ्राटेक के प्रोजेक्टों को पूरा करने के लिए 20 कंपनियों और उद्योग समूहों ने 2000 करोड़ रुपये निवेश करने में दिलचस्पी दिखाई है। इनमें जेएसडब्ल्यू स्टील और लोढा समूह भी शामिल है।सूत्रों के अनुसार सज्जन जिंदल की जेएसडब्ल्यू ने जेपी समूह की फ्लैगशिप कंपनी जयप्रकाश एसोसिएट्स के साथ मिलकर परियोजना में रुचि दिखाई है। इसके अलावा मुंबई की रियल्टी कंपनी लोढा डवलपर्स ने भी आवेदन किया है। इन कंपनियों ने जेपी इन्फ्राटेक के इंसॉल्वेंसी रिजोल्यूशन प्लान के तहत परियोजनाएं पूरी करने के लिए आवेदन किया है। जेपी इन्फ्रा पर बकाया बैंकों के कर्जो की वसूली और अटके प्रोजेक्टों को पूरा करने के लिए इंसॉल्वेंसी प्रक्रिया के तहत इंसोल्वेंसी रिजोल्यूशन प्रोफेशनल (आइआरपी) ने 2000 करोड़ रुपये निवेश करने में सक्षम कंपनियों से आवेदन मांगे थे। इसके विरुद्ध इन कंपनियों व उद्योग समूहों ने आशय पत्र (ईओआइ) भेजे हैं।नेशनल कंपनी लॉ टिब्यूनल (एनसीएलटी) ने इंसॉल्वेंसी एंड बैंक्रप्सी कोड (आइबीसी) के तहत जेपी इन्फ्रा के रिजोल्यूशन यानी निस्तारण के लिए आइडीबीआइ की अगुआई वाले कंसोर्टियम के आवेदन पर इंसॉल्वेंसी प्रक्रिया शुरू की थी। इसके लिए एनसीएलटी ने अनुज जैन को आइआरपी नियुक्त किया था। उन्होंने जेपी इन्फ्रा के निस्तारण और अटके प्रोजेक्ट पूरे करने के लिए इच्छुक कंपनियों से आवेदन आमंत्रित किये थे। इसकी आखिरी तारीख सात नवंबर तय की गई थी।जेपी इन्फ्रा पर आइडीबीआइ बैंक का 526.11 करोड़ रुपये कर्ज बकाया है। सड़क निर्माण और रियल्टी कारोबार करने वाली इस कंपनी ने दिल्ली-आगरा के बीच यमुना एक्सप्रेसवे का निर्माण किया है। कंपनी नोएडा में 30 हजार से ज्यादा फ्लैट बना रही है। इन अधूरे फ्लैटों के लिए आवंटी कई वर्षो से इंतजार कर रहे हैं।आइआरपी अनुज जैन ने आम सूचना जारी करके आवेदन आमंत्रित करते समय शर्तो का भी उल्लेख किया था। इनके अनुसार 31 मार्च 2017 को आवेदक कंपनी की नेटवर्थ कम से कम 1000 करोड़ रुपये होनी चाहिए। नेटवर्थ में शेयर कैपिटल और फ्री रिजर्व शामिल होता है। आवेदक अटके हाउसिंग प्रोजेक्टों में 2000 करोड़ रुपये या इससे भी ज्यादा राशि निवेश करने की स्थिति में होना चाहिए।इस सप्ताह के शुरू में सुप्रीम कोर्ट ने 400 करोड़ रुपये जमा कराने के जेपी एसोसिएट्स के प्रस्ताव को खारिज कर दिया था। कोर्ट ने 2000 करोड़ रुपये जमा करने को कहा था। मामले की सुनवाई कर रही बेंच ने थोड़ी राहत देते हुए 13 नवंबर तक कम से कम 1000 करोड़ रुपये जमा करवाने को कहा है।

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