नई दिल्ली - ट्राइब्यूनल ने उन 15 बैंकों पर जुर्माने के आदेश को रद्द कर दिया है जिन पर कथित रूप से मनी लॉन्ड्रिंग में मदद करने का आरोप लगा था। इन बैंकों पर जुर्माना फाइनैंशल इंटेलिजेंस यूनिट की ओर लगाया गया था। इन बैंकों की ओर से मनी लॉन्ड्रिंग में मदद का यह दावा एक डिजिटल मैग्जीन कोबरा पोस्ट की ओर से करीब चार साल पहले किया गया था।
इकोनॉमिक टाइम्स में प्रकाशित खबर के मुताबिक प्रिवेंशन ऑफ मनी लॉन्ड्रिंग ऐक्ट के तहत काम करने वाले अपीलेट ट्राइब्यूनल ने 88 पेज के अपने आदेश में इन बैंकों पर लगाए गए जुर्मानों को खारिज कर दिया। ट्राइब्यूनल का कहना है कि एफआईयू बैंकों के खिलाफ आरोपों की जांच करने में विफल रही और वह केवल इलेक्ट्रॉनिक सबूत पर भरोसा करती रही, जिसे स्वीकार नहीं किया जा सकता था।
क्या कहा ट्राइब्यूनल ने:
ट्राइब्यूनल ने अपने आदेश में कहा, “यह साफ है कि डायरेक्टर (एफआईयू) ने आदेश को जारी करने से पहले एडिटेड टेपों और ट्रांसक्रिप्ट्स से अलग कोई जांच नहीं की। निसंदेह, एफआईयू को अब तक पूरे और अनएडिटेड टेप्स नहीं मिले हैं। लिहाजा यह साफ है कि प्रतिवादी इलेक्ट्रॉनिक सबूत के आधार पर मामला साबित करने में सफल नहीं रहा है। ऐसे में ऑनलाइन अपलोड की गईं ट्रांसक्रिप्ट्स को स्वीकार नहीं किया जा सकता और यह कानून के तहत अधिकृत नहीं हैं।”

Share this article

AUTHOR

Editor

हमारे बारे में

नार्थ अमेरिका में भारत की राष्ट्रीय भाषा 'हिन्दी' का पहला समाचार पत्र 'हम हिन्दुस्तानी' का शुभारंभ 31 अगस्त 2011 को न्यूयॉर्क में भारत के कौंसल जनरल अम्बैसडर प्रभु दियाल ने अपने शुभ हाथों से किया था। 'हम हिन्दुस्तानी' साप्ताहिक समाचार पत्र के शुभारंभ का यह पहला ऐसा अवसर था जब नार्थ अमेरिका में पहला हिन्दी भाषा का समाचार पत्र भारतीय-अमेरिकन्स के सुपुर्द किया जा रहा था। यह समाचार पत्र मुख्य सम्पादकजसबीर 'जे' सिंह व भावना शर्मा के आनुगत्य में पारिवारिक जिम्मेदारियों को निर्वाह करते हुए निरंतर प्रकाशित किया जा रहा है Read more....

ताज़ा ख़बरें