लखनऊ: उत्तर प्रदेश की जेलों में बंद कैदियों को अब जेल की रसोई में खाना पकाने से निजात मिलने वाली है। खाना पकाने के काम में लगे कैदियों की बिगड़ती सेहत को देखते हुए जेल प्रशासन अब अंग्रेजों के जमाने की इस व्यवस्था को बदल रहा है और जेलों में आधुनिक मशीनों से खाना पकाने की व्यवस्था की गई है। फिलहाल 25 जेलों में यह सुविधा प्रदान की गई है और जल्दी ही राज्य की सभी 72 जेलों की रसोई आधुनिक होने वाली है।आधिकारियों के अनुसार राजधानी लखनऊ सहित प्रदेश की 25 जेलों में अत्याधुनिक माडयूल किचन की शुरुआत की गयी है । राज्य की शेष जेलों में भी इस वर्ष के अंत तक यह सुविधा शुरु हो जाएगी। पहले चरण में इस काम में जेल विभाग ने चार करोड. 71 लाख रुपये खर्च किये हैमहानिरीक्षक (आईजी) जेल प्रमोद कुमार मिश्रा ने बताया कि अंग्रेजों के जमाने से जेल में खाना बनाने का काम कैदी ही करते आ रहे हैं। कैदियों को सजा काटने के दौरान तरह तरह के कामों में लगाया जाता है और खाना पकाना भी उनमें से एक है, लेकिन हाल में देखा गया कि गर्मी में कई कई घंटे रसोई में खाना बनाने वाले कैदियों के स्वास्थ्य पर विपरीत असर पड़ता था और वह बीमार हो जाते थे।उन्होंने बताया कि इस नई व्यवस्था में रोटी बनाने से लेकर सब्जी काटने तक का काम मशीन से किया जाएगा। पाकशाला में इलेक्ट्रॉनिक चिमनी लगाई जाएगी जो अंदर का धुआं बाहर निकाल देगी। जेल प्रशासन की ओर से करवाए गए अध्ययन में पाया गया कि करीब दो हजार कैदियों और बंदियों का खाना पकाने की जिम्मेदारी, जिन आठ से दस कैदियों को सौंपी गई वह बाकी कैदियों की अपेक्षा कमजोर हो जाते हैं और उनके बीमारी की चपेट में आने की आशंका बढ़ जाती। शासन को इसकी रिपोर्ट भेजने के साथ जेल प्रशासन ने मॉड्यूलर किचन का प्रस्ताव भी भेजा। शासन से अनुमति मिलने के बाद जेलों में आधुनिक उपकरणों की मदद से खाना बनाने की व्यवस्था शुरु की जा रही है। मॉड्यूल किचन में रोटी बनाने के लिए चपाती मेकर खरीदे गए हैं। यह मशीन एक घंटे में एक हजार रोटियां तैयार करेगी। ऐसी दो दो मशीनें सभी जेलों को मुहैया करवाई जा रही हैं। इसके अलावा आटा गूंथने, लोई बनाने और गेहूं की छनाई के लिए भी मशीनें खरीदी गई हैं। सब्जियां छीलने और काटने के उपकरणों की खरीदारी की गई है। उन्होंने बताया कि इन मशीनों के उपयोग से एक घंटे में दो हजार कैदियों के लिए सब्जी आसानी से तैयार हो जाएगी। इससे समय की बचत तो होगी ही कैदियों को मेहनत भी कम करनी पड़ेगी। उन्होंने बताया कि एक साथ एक से दो हजार कैदियों का भोजन बनाने के लिए अब तक पांच से छह घंटे का समय लगता था। अब यह काम इससे कहीं कम समय में पूरा हो सकेगा। आईजी जेल ने बताया कि फिलहाल यह योजना राज्य की 25 जेलों में लागू की गई है और आने वाले कुछ समय में यह योजना प्रदेश की सभी 72 जेलों में लागू कर दी जाएगी। जेल, कैदी और सजा का जिक्र आते ही वह फिल्मी दृश्य आंखों के सामने आ जाते हैं, जिनमें कैदी या तो भारी पत्थर तोड़ रहे हैं या महिलाएं चक्की पीस रही हैं, लेकिन अब यह तस्वीर बदल जाएगी क्योंकि कैदियों के प्रति समाज और जेल प्रशासन का नजरिया बदल रहा है।

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