देहरादून - ऑस्ट्रेलिया, नाम सुनते ही पांच बार विश्व कप खिताब कब्जा चुके इस देश की क्रिकेट में बादशाहत जेहन में उभर आती है। पर, अगर आपको पता चले कि इसी ऑस्ट्रेलिया के भावी क्रिकेटरों का ‘द्रोण’ एक भारतीय युवा है तो यकीनन सर गर्व से ऊंचा हो जाता है। मूलत: कोटद्वार (उत्तराखंड) के रहने वाले मानवेंद्र बिष्ट ऑस्ट्रेलियन क्रिकेट बोर्ड क्रिकेट ऑस्ट्रेलिया से संबद्ध अंडर 9, अंडर 14 बालक टीम और अंडर 13 बालिका टीम के कोच की जिम्मेदारी संभाल रहे हैं। खास बात यह है कि हाल में क्रिकेट ऑस्ट्रेलिया से संबद्ध सिडनी सिक्सर्स की ओर से जूनियर टीमों के लिए आयोजित बिग बैश लीग में मानवेंद्र की कोचिंग में गार्डोन डिस्ट्रिक्ट क्रिकेट क्लब की अंडर-13 बालिका टीम ने खिताब हासिल किया।
सिडनी से फोन पर ‘हिन्दुस्तान’ से बातचीत में मानवेंद्र ने बताया कि सेंट जोसफ कॉन्वेंट और डीएवी पब्लिक स्कूल कोटद्वार से उनकी स्कूली शिक्षा पूरी हुई। स्कूली पढ़ाई के साथ ही क्रिकेट का शौक बढ़ता गया। इसके बाद यहीं डॉ. पीतांबर दत्त बड़थ्वाल राजकीय स्नातकोत्तर महाविद्यालय से बीएससी किया। इसी दौरान कॉलेज की क्रिकेट टीम में चयन हुआ और गढ़वाल विश्वविद्यालय की टीम में कई बार प्रतिनिधित्व किया। एमसीए के बाद गुरुग्राम में आईटी जॉब के दौरान कई कारपोरेट टूर्नामेंट में प्रतिभाग किया।
मानवेंद्र बताते हैं कि ऑस्ट्रेलियाई बच्चों में क्रिकेट का जज्बा बचपन से ही दिखता है। इसे और बढ़ाने में क्रिकेट ऑस्ट्रेलिया से मिलने वाली सुविधाएं भी बड़ी मदद करती हैं। उन्होंने बताया कि ऑस्ट्रेलियाई बच्चे ‘बैकफुट’ में सबसे मजबूत होते हैं। इसकी एक वजह ऑस्ट्रेलिया में हरे घास के मैदान और एस्ट्रोटर्फ पिच पर अभ्यास करना है।
ऑस्ट्रेलिया में जूनियर क्रिकेट मानक
स्टेज एक (अंडर 10/11)
मैच का समय: 120 मिनट
ओवर (एक पारी): 20
पिच की लंबाई: 16 मीटर,
खिलाड़ी: 07, बाउंड्री: 40 मीटर
स्टेज 2 (अंडर 12/ 13)
मैच का समय: 120 या 180 मिनट,
ओवर: टी-20 (अधिकतम 30),
पिच लंबाई: 18 मीटर,
खिलाड़ी: 09, बॉल: 142 ग्राम
क्रिकेट ऑस्ट्रेलिया तीन श्रेणी कम्युनिटी कोच, रिप्रजेंटेटिव कोच और हाई परफॉर्मेंस कोच के तौर पर कोचों को तैयार कर रहा है। मानवेंद्र ने बताया कि हाल में उन्होंने एकवर्षीय कम्युनिटी कोच कोर्स पूरा कर लिया है। अब उनकी नजर रिप्रजेंटेटिव कोच और उसके बाद क्रिकेट ऑस्ट्रेलिया में कोचिंग की सबसे ऊंची श्रेणी यानी हाई परफॉर्मेंस कोच के कोर्स पर है। वह बताते हैं कि जिन तीन टीमों की जिम्मेदारी उन्हें मिली है, उनका बेहतर प्रदर्शन ही उनके अगले कोर्स की बुनियाद बनेगा। मानवेंद्र कहते हैं कि उच्चतम कोर्स करने के बाद उनका लक्ष्य भारत में क्रिकेट कोचिंग को नए आयाम देना है।

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