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लुधियाना (हम हिंदुस्तानी)- लुधियाना स्थित मां बगुलामुखी धाम में प्रबंधकों द्वारा 192 घंटे अखंड महायज्ञ का आयोजन किया गया। जिसकी सम्पूर्ण सफलता के अवसर पर जहां विभिन्न अनुयायियों द्वारा प्रबंधकों को बधाई दी गई वहीं पर मां बगुलामुखी के समक्ष विश्व में शांति व सुख बनाए रखने की प्रार्थना की।


मुंबई (हम हिंदुस्तानी)-बीते दिनों में नायिका फैमिनी ब्यूटी अवॉर्ड फंक्शन का आयोजन किया गया। अवॉर्ड फंक्शन के रैड कार्पेट पर रेखा, नीतु चंद्रा और ऐश्वर्या ने अपने स्टाइल से सबको अपना दीवाना कर लिया। सबकी ही निगाहें रेखा, नीतु चंद्रा और ऐश्वर्या पर आकर टिक गईं। पूरे अवॉर्ड फंक्शन में रेखा और ऐश्वर्या की अदाएं ही छाई रहीं। रेखा अवार्ड फंक्शन में गोल्डन कलर की साड़ी में ग्लैमर्स लुक में नजर आईं वहीं दूसरी तरफ ऐश्वर्या राय ब्लैक और ऑफ व्हाइट कलर की स्टाइलिश गाऊन में नजर आईं। ऐश्वर्या ने बाल खोल रखे थे तो वहीं रेड कलर की लिपस्टिक लगा रखी थी। ऐश्वर्या ने अलग-अलग पोज में फोटोज क्लिक करवाईं। अवॉर्ड के रैड कार्पेट पर मलाइका अरोड़ा, पूजा हेगड़े, अदिति राव हैदरी, तारा शर्मा, दिशा पाटनी, पूजा चोपड़ा, एवलिन शर्मा, कियारा अडवाणी, नुसरत भ्रूचा, अदा शर्मा, सुरविन चावला, नीतु चंद्रा, तनिषा मुखर्जी, शिवानी डांडेकर के अलावा अर्जुन कपूर, कार्तिक आर्यन, अक्षय ओबेरॉय, मसाबा गुप्ता आदि सेलेब्स नजर आए।


न्यूयॉर्क (हम हिन्दुस्तानी)-सीनियर सैंटर न्यूयॉर्क में इनसाइट फॉर क्रिएटिविटी एल.एल.सी. के अध्यक्ष अशोक व्यास द्वारा शांति और सद्भाव के विचारों को प्रसारित करने के उद्देश्य के साथ आई.टी.वी. गोल्ड के प्रोग्राम डायरैक्टर के सहयोग के साथ 'डायलॉग जैनरेशन स्क्वॉयर-ए ब्रिज एक्रॉस जैनरेशन' की शुरूआत की गई। उल्लेखनीय है कि दो पीढिय़ों के मध्य किस तरह का संचार होना चाहिए, के संदर्भ में जहां विस्तृत जानकारी इस प्रोग्राम के माध्यम से दी गई वहीं पर मैडीकयर, मैडीकेएटड, स्वास्थ्य एवं कानूनी विषयों के संदर्भ में भी कई तरह के प्रश्न उठाए गए। इस प्रोग्राम की विशेष बात यह रही कि दो पीढिय़ों अर्थात वरिष्ठ नागरिकों व युवाओं के मध्य चर्चा करवाने के लिए 'जैनरेशन गैप एंड टैक्नोलॉजी' व 'सम्मान के लिए आयु व ज्ञान' के विषयों पर वार्तालाप किया गया। उल्लेखनीय है कि इस चर्चा में डा. हिमांश पंड्या, मुकंद मेहता वरिष्ठ के रूप में जबकि नील जवेरी एवं रजनी रघुनाथ युवा प्रतिभागी के रूप में शामिल हुए। जबकि इसके दूसरे चरर्ण डा. निलेश सोनी और गोपी उदीशी वरिष्ठ व शामिक शाह एवं सपना व्यास युवा प्रतिभागी के रूप में शामिल रहे। इस दौरान अशोक व्यास ने वरिष्ठता एवं युवाओं को बेहतर समझने और पीडिय़ों के बीच की गई खाई को दूर करने हेतु अनेकों उदाहरणों पर प्रकाश डाला। उन्होंने जहां इस चर्चा में भाग लेने हेतु प्रतिभागियों की विशेष रूप से प्रशंसा की वहीं पर सीनियर सैंटर न्यूयॉर्क के अध्यक्ष मुकुंद मेहता ने कहा कि यह चर्चा भविष्य में प्रेरणा प्रदान करेगी। 2 घंटे से अधिक समय तक चले इस प्रोग्राम में अशोक व्यास ने जहां असंख्य सवाल उठाए वहीं पर उपस्थिति के सवालों के जवाब भी दिए। जिनमें दोनों पीढिय़ों के बीच कुछ मुद्दों पर अलग-अलग दृष्टिकोण सामने आया, जिसका मुख्य कारण टैक्नोलॉजी का विकास होना माना गया क्योंकि सोशल मीडिया ने युवाओं की सोच का आकार बहुत अधिक बढ़ा दिया जबकि पहले ऐसा नहीं था। अंत में सीनियर सैंटर न्यूयॉर्क के अध्यक्ष मुकुंद मेहता ने अशोक व्यास व उनकी टीम का विशेष रूप से आभार व्यक्त किया और कहा कि भविष्य में इस तरह से कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे ताकि सीनियर सिटीजन को भी समय की दौड़ में शामिल किया जा सके।


कोलम्बस (हम हिन्दुस्तानी)- अमेरिकन एसोसिएशन ऑफ फिजिशियंस ऑफ इंडियन आर्गेन के अध्यक्ष डा. गौतम समदर्द ने घोषणा की है कि एसोसिएशन की 36वीं वार्षिक कन्वैंशन एंड साइंसटिफिक असैम्बली 4 अगस्त 2018 को कोलम्बस कन्वैंशन सैंटर (ओ.एच.) में होगी। इस कन्वैंशन में फिजिशियंस, हैल्थ प्रोफैशनल, शैक्षणिक क्षेत्र के अलावा अनेकों वैज्ञानिक भाग लेंगे और अपने-अपने विचार पेश करेंगे। डा. समदर्द ने जानकारी देते हुए बताया कि इस कन्वैंशन में मुख्यातिथि के रूप में वरिष्ठ अमेरिकन डिप्लोमेट एवं यू.एस. अम्बैसडर यूनाइटेड नेशंस अम्बसैडर निक्की हैले तथा यू.एस. में भारतीय अम्बैसडर डा. नवतेज सिंह सरना उपस्थित होंगे क्योंकि उपरोक्त द्वारा कन्वैंशन में भाग लेने के लिए अपनी सहमति प्रकट कर दी गई है। उन्होंने बताया कि इसके अलावा वाशिंगटन डी.सी. में भी उन्होंने भारतीय दूतावास में भारतीय मूल के शीर्ष राजनायिक से भेंट की और उन्हें भी इस कन्वैंशन में भाग लेने हेतु निमंत्रण दिया और जिसे उन्होंने भी स्वीकार कर लिया है। उन्होंने कहा कि मेरिकन एसोसिएशन ऑफ फिजिशियंस ऑफ इंडियन आर्गेन की यजह 36वीं कन्वैंशन शानदार होगी और इस कन्वैंशन की सारी तैयार कन्वैंशन चेयर डा. जोहन ए. जोहनसन को सौंपी गई है।


मुम्बई (हम हिन्दुस्तानी)-भारतीय हिंदी सिनेमा की विश्वस्तरीय कम्पनी एरोज इंटरनैशनल ने बैस्ट सैलिंग लेखक अश्विनी संघी से उनके थ्रिलर उपन्यास 'दि कृष्णा की' के राइट्स प्राप्त कर लिए हैं और शीघ्र इस उपन्यास पर फिल्म का निर्माण शुरू कर दिया जाएगा। उल्लेखनीय है कि एरोज़ इंटरनैशनल द्वारा एरोज़ नाऊ के माध्यम से साऊथ एशियन एंटरटेनमैंट प्लेटफार्म पर एक नया अध्याय लिखने की तैयारी की जा रही है। काफी समय के उपरांत यह राइट्स मिले हैं और जिसे 2019 में फिल्म के रूप में रूपातंर करके दर्शकों के सम्मुख पेश करने की योजना है। इस संदर्भ में जानकारी देते हुए चीफ कॉन्टैंट ऑफिसर एरोज इंटरनैशनल रिदिमा लूला ने कहा कि यह बहुत ही खुशी की बात है क्योंकि अब इस उपन्यास को एक फिल्म के माध्यम से दर्शकों के रू-ब-रू करवाया जाएगा। उल्लेखनीय है कि जिस समय इस उपन्यास को मार्कीट में उतारा गया था तो यह सबसे अधिक बिक्री वाला उपन्यास घोषित हुआ था।


न्यूयॉर्क (हम हिन्दुस्तानी)-नेवादा की राजधानी को कार्सन सिटी ऑफ सुपरवाइजर द्वारा यूनिवर्सल सोसायटी ऑफ हिंदूज्म के अध्यक्ष राजन जैद की अध्यक्षता में गायत्री मंत्रोच्चारण के साथ खोला गया। उल्लेखनीय है कि गायत्री मंत्रोच्चारण को हिंदू धर्म का सबसे पवित्र मंत्र माना जाता है। श्री जैद ने पहले प्राचीन संस्कृत शास्त्रों से आह्वान किया तथा बाद में संस्कृत भाषा के साथ प्रार्थना को अंग्रेजी में पढ़ा। जिसके उपरांत नेवादा की राजधानी को कार्य हेतु खोला गया। इस अवसर पर श्री जैद द्वारा गायत्री मंत्र की महत्ता के संदर्भ में विस्तृत जानकारी दी।

पब्लिक गणेश सकूल में श्री गणेश का मंदिर निर्माण करने की मांग
कैलिर्फोनिया स्थित पब्लिक गणेश हाईस्कूल में भगवान श्री गणेश का मंदिर निर्माण करने की मांग जोर पकड़ती जा रही है। हिंदू संगठनों के प्रतिनिधियों ने कहा कि इस स्कूल का नाम हिंदू देवी-देवताओं में आराध्य भगवान श्री गणेश जी के नाम पर रखा गया है, इसलिए स्कूल प्रबंधकों व स्थानीय सरकार का दायित्व बनता है कि वे स्कूल में श्री गणेश मंदिर निर्माण करें। यूनिवर्सल सोसायटी ऑफ हिंदूज्म के अध्यक्ष राजन जैद ने पीमोना यूनिफाइड स्कूल डिस्ट्रिक्ट ट्रस्टियों से मांग की है कि इस मसले का गंभीरता से हल करें क्योंकि इससे ङ्क्षहदू समुदाय की धार्मिक भावनाएं भी जुड़ी हुई हैं।

पेंस्लिवेनिया के सभी स्कूलों को दीवाली पर बंद करने की मांग
यूनिवर्सल सोसायटी ऑफ हिंदूज्म के अध्यक्ष राजन जैद ने मांग की है कि पेंस्लिवेनिया के सभी स्कूलों को दीवाली के उपलक्ष्य में अवकाश घोषित होने पर बंद किया जाए। उन्होंने कहा कि परिषद् की ओर से दीवाली के दिन अवकाश घोषित किया गया है। इस बार दीवाली 7 नवम्बर को आ रही है तथा जिसके अवकाश की घोषणा कौंसिल रॉक स्कूल डिस्ट्रिक्ट द्वारा की गई है। उन्होंने कहा कि दीवाली हिंदूओं का पवित्र त्यौहार है और जिसे पूरे जोश एवं उमंग के साथ मनाया जाता है। उन्होंने समूह स्कूल प्रबंधकों व शिक्षा बोर्ड के अधिकारियों से मांगा की कि इस संदर्भ में विशेष आदेश जारी किए जाएं ताकि हिंदूओं की धार्मिक भावनाएं आहत न हो सकें।

विक्टोरिया सरकार की प्रशंसा धन मंदिर, हिंदुओं ने ऑस्ट्रेलिया सरकार से आग्रह किया राष्ट्रमंडल निधि मंदिरों
न्यूयॉर्क : विक्टोरिया सरकार द्वारा श्री शिव विष्णु मंदिर के रख-रखाव एवं संरक्षण हेतु विशेष वित्तीय सहायता प्रदान करने की जहां हिंदु संगठनों द्वारा प्रशंसा की गई है वहीं पर आस्टे्रलिया सरकार से मांग की है कि वे भी हिंदु मंदिरों हेतु वित्तीय सहायता प्रदान करे ताकि मंदिरों की उचित देखभाव एवं सरंक्षण हो सके। उल्लेखनीय है कि विक्टोरियन सरकार के मंत्री रॉबिन स्टॉक ने एक प्रैस विज्ञप्ति में ऐलान किया है कि श्री शिव विष्णु मंदिर के उत्थान हेतु सरकार की ओर से वित्तीय सहायता प्रदान की जाएगी ताकि मंदिर को और अधिक सुंदर एवं विशालकाय बनाया जा सके। जिसकी हिंदु संगठनों द्वारा प्रशंसा की जा रही है। दूसरी ओर यूनिवर्सल सोसायटी ऑफ हिंदूज्म के अध्यक्ष राजन जैद ने जहां विक्टोरिया सरकार की प्रशंसा की है वहीं आस्टे्रलिया सरकार से मांग की है कि वे भी हिंदु आबादी वाले स्थानों में मंदिरों का निर्माण करने में सहायता प्रदान करने के साथ-साथ अन्य मंदिरों के संरक्षण हेतु वित्तीय सहायता प्रदान की जाए। उन्होंने कहा कि आस्ट्रेलिया की उन्नति में हिंदु समुदाय द्वारा बहुमूल्य योगदान डाला है तथा अब सरकार का कत्र्तव्य बनता है कि वे मंदिरों हेतु वित्तीय सरकार प्रदान करे।


मुंबई (हम हिंदुस्तानी)-पर्दे पर बेहतरीन व्यक्तित्व को निभाने वाले केवल कुछ ही अदाकार हैं, जो उन किरदारों को निभाने का साहस करते हैं जो कि आगे चलकर यादगार बन जाते हैं। विद्या बालन को एक बार डर्टी पिक्चर नाम की एक फिल्म में इस तरह का मौका मिला था और उन्हें इस फ़िल्म से बहुत फ़ायदा भी हुआ था। उस समय इस फ़िल्म को ज़ोरदार क़ामयाबी मिली थी, जबकि उन दिनों में आमतौर स्त्रीओं पर आधारित फ़िल्में नहीं बनायीं जाती थीं। अब इस क्लब में शामिल होने जा रही हैं, रिचा चड्ढा, जो शकीला के जीवन पर आधारित फ़िल्म में अभिनय करने के लिए पूरी तरह तैयार हैं, जो केरल की 90 के दशक की सबसे बड़े अभिनेत्रियों में से एक और जिन्होंने तमिल, तेलगू, मलयालम और कन्नड़ जैसी भाषाओं में अनेकों अडल्ट फिल्मों में काम किया है।
रिचा के प्रमुख रोल वाली यह बायोपीक शकीला की उस वक़्त की कहानी को बयां करेगी जब उन्होंने 16 साल की उम्र में फिल्मों में काम करना शुरू किया था और यह फ़िल्म उस समय से शुरू हुए उनके जीवन के सफ़र को दर्शायेगी। शकीला ने सिनेमाघरों में शानदार सफलता हासिल की और इतनी धूम मचाई और एक ऐसा इतिहास रच दिया जितना कि पहले कभी नहीं हुआ था। उनकी फिल्मों को केवल पूरे भारत की अलग-अलग भाषाओं में ही डब नहीं किया गया था बल्कि चीनी, नेपाली और कई दूसरी भाषाओं में भी को डब किया गया। शकीला एक ऐसे वक़्त पर फिल्म उद्योग में एक जानी-मानी हस्ती बन गई जब कि फ़िल्म इंडस्ट्री में सिर्फ़ मर्दों का दबदबा था और बस उन्हें ही सारी तारीफ़ मिला करती थी।
यह फिल्म इंद्रजीत लंकेश के द्वारा निर्देशित की जा रही है जिन्होंने 2001 में अपना करियर शुरू किया था और अब तक बहुत से लोकप्रिय इनाम जीत चुके हैं। यह फिल्म इस साल अप्रैल में बननी शुरू होगी और 2019 के शुरु में रिलीज़ होगी।

 


- राजेश कुमार शर्मा"पुरोहित"
भारत के सुप्रसिद्ध पार्श्व गायक तलत महमूद का जन्म नवाबों के शहर लखनऊ उत्तर प्रदेश में 24 फरवरी 1924 को हुआ था। उनके पिता का नाम मंजूर महमूद था। घर में संगीत कला का परिवेश इन्होंने जन्म से ही देखा। इनके पिताजी नात गाते थे। महमूद की लरजती आवाज़ इनकी बुआजी को काफी पसंद आई। उन्होंने इनका दाखिला मोरिष कॉलेज में करा दिया। मात्र 16 वर्ष की उम्र में तलत महमूद ने लखनऊ आकाशवाणी से गाने की शुरुआत की। इनकी थरथराती आवास में गजब की मिठास थी। ग़ज़ल गायिकी में साठ के दशक में कोई नहीं था। केवल ग़ज़ल गायिकों में तलत महमूद साहब का नाम चलता था।
इनके तीन बहिने व दो भाई थे। ये छठे नम्बर की संतान थे। जिन्होंने देश विदेश में अपना नाम कमाया। तलत महमूद कहते थे "ग़ज़ल की पवित्रता को नष्ट नहीं करना चाहिए यह प्यार का गीत है।
तलत महमूद एक अच्छे संगीतकार भी थे महमूद अभिनेता बना चाहते थे। उन्होंने अपने जीवनकाल में 200 फिल्मों में 500 फिल्मी व 250 गैर फिल्मी गाने गाए। लगभग 13 फिल्मों में अभिनेता के रूप में काम किया। उस जमाने की मशहूर अभिनेत्रियां सुरैया, नूतन,माला सिन्हा जी के साथ काम किया।
1945 में राजलक्ष्मी फ़िल्म में "जागो मुसाफिर जागो" गीत प्रसिद्ध हुआ। 1949 में"तुम ओर वो', "समाप्ति" आदि फिल्मों में काम किया। 1944 से 1949 तक महमूद कोलकाता ही रहे लेकिन यहां से वो मुम्बई रवाना हुए। जहां फ़िल्म आरज़ू में अनिल विश्वास जी नर उन्हें मौका दिया।"ए दिल मुझे ऐसी जगह ले चल" उनका गीत हिट हुआ।1950 में बाबुल फ़िल्म जो दिलीप कुमार जी की फ़िल्म थी में "दिल हुआ दीवाना किसी का" गाना सबको पसंद आया। शमशाद के साथ महमूद ने गाने गाए। 16 गाने बहुत पसंद किए।
नोशाद साहब को महमूद की बुरी आदत सेट पर धूम्रपान करना अच्छी नहीं लगी। उनको हटा दिया गया। कुंदन लाल सहगल के जीवन से प्रभावित होकर गायक बने तलत साहब ने देश विदेश में ख्याति अर्जित की।
शुरू में इन्होंने तपन कुमार के नाम से गाना शुरू किया।
तलत महमूद की मशहूर फिल्में, दीवाली की रात,सोने की चिड़िया,एक गांव की कहानी,रफ्तार,डाकबाबू,दिल के नादान,तुम और मैं, राजलक्ष्मी प्रमुख थी। उनकी अंतिम फ़िल्म जहां आरा थी जिसमे मदन मोहन जी ने संगीत दिया था।1942 मे स्वयमसिद्धा से पार्श्व गायक का श्री गणेश करने वाले महमूद साहब 1956 में दक्षणी अफ्रीका
कार्यकम देने वाले ये भारत के एकमात्र ग़ज़ल गायक थे। जिन्होंने लन्दन,अमेरिका,वेस्टइंडीज़ आदि देशों में कई कार्यक्रम दिए। महमूद नाइट के नाम से भी लगातार कई कार्यक्रम विदेशों में हुए।
फ़िल्म मधूमती में"गमे आशिकी से कह दो" में संगीत तलत महमूद ने दिया। एक अच्छे अभिनेता बनने के बजाय महमूद यदि एक अच्छे संगीतकार बनना चाहते तो सबसे ज्यादा सफल रहते।
"रिमझिम क येे गीत प्यारे प्यारे गीत लिये, इतना ना मुझसे प्यार बढ़ा, जो खुशी से चोट खाये,वो नज़र कहाँ से लाऊँ। आदि गाने उनके हिट हुए।
मखमली आवाज़ के धनी तलत महमूद ने बारह भारतीय भाषाओं में गीत गाये। अभिनेता के रुप मे 13 फिल्मों में काम किया। अपने करियर के चालीस सालों में आठ सौ गीत गाये।
1992 में पद्मभूषण से इन्हें सम्मानित किया गया।1995-96 में लता मंगेशकर सम्मान प्रदान किया गया। लखनऊ, कोलकाता व मुंबई माया नगरी का ये था महमूद का सफरनामा।

-98, पुरोहित कुटी,श्रीराम कॉलोनी,भवानीमंडी,जिला-झालावाड़, राजस्थान
पिन-326502
मोबाइल -7073318074
E mail- 123rkpurohit@gmail.com


- देवेंद्रराज सुथार
भारत में ‘स्वच्छ भारत अभियान’ की शुरुआत किसने की थी ? आपके पास इसका उत्तर देने के लिए दो विकल्प हैं - पहला नीरव मोदी और दूसरा नरेंद्र मोदी। यदि आपका उत्तर दूसरा विकल्प यानि नरेंद्र मोदी है तो आपका यह उत्तर बिलकुल ही गलत है ! सत्य और तथ्य यह है कि नरेंद्र मोदी से पहले ही नीरव मोदी ने 2010 में ‘स्वच्छ भारत अभियान’ की शुरुआत कर दी थी। खैर ! गांधी का यह सपना नीरव मोदी साकार करे या नरेंद्र मोदी, क्या फर्क पड़ता ! आखिर दोनों जाति भाई ही तो हैं। स्वच्छता अभियान में नीरव मोदी ने जो अपना अतिमहत्वपूर्ण योगदान दिया, वह वाकई काबिले तारीफ है। नरेंद्र मोदी का स्वच्छता अभियान तो केवल सेल्फी अभियान था। जबकि असल में देश की सफाई तो नीरव भाई मोदी ने की है। जिसका जमीनी धरातल पर जबरदस्त असर देखने को मिला है। इतना असर हुआ है कि खबरिया चैनलों को नीरव मोदी नाम का दौरा पड़ गया है। यकीनन ! नीरव मोदी के इस महत्वपूर्ण योगदान की हम जितनी तारीफ करे उतनी कम है। और उनके इस कारनामे से कई बैंक उपभोक्ताओं की आंखें खुशी के मारे नम हैं। अब नीरव मोदी का नाम स्वर्णिम अक्षरों में देश के सफाई पुरोधाओं की लिस्ट में लिख दिया गया है। इस लिस्ट में पहले से ही हर्षद मेहता, रामलिंगा राजू, विजय माल्या आदि का नाम शामिल है। यह सब देश के स्वच्छता मिशन के ब्रांड एंबेसडर हैं। वैसे भी भारत की संपत्ति तो राष्ट्रीय संपत्ति है। इसलिए कहा जाता है कि लूट सको लूटो और ऐश करो। पर शर्त यह है कि संसद में घाटे का बजट मत पेश करो। वैसे भी हमारे देश को तो घोटालों की आदत हैं। इसमें कोई नया नहीं है। आजादी के बाद हमें विकास के रूप में गड्ढे और घोटाले ही तो मिले हैं। न तो भारत में सत्तर साल बाद सड़क के गड्ढे भर पाए और न ही घोटाले थम पाए। इसलिए अब हमें घोटाले को होते देखने की बजाय इन गड्ढों में डूबकर मर नहीं जाना चाहिए ? ताकि कुछ तो राष्ट्र निर्माण में अपना भी योगदान हो। दिलचस्प बात यह है कि लगभग आठ सालों से नीरव मोदी देश को साफ करने के लिए प्लानिंग कर रहा था। और इसकी किसी को कानों कान खबर भी नहीं लगी। किसी ने ध्यान नहीं दिया। क्योंकि हम तो आंख मारने वाली लड़की के पीछे अंधे थे। हम तो यह जानने में व्यस्त थे कि बाहुबली ने कटप्पा को क्यों मारा, अध्योया में राम मंदिर बनेगा या मस्जिद आदि में मस्त थे। इसलिए नीरव मोदी ने मौका देखते ही घंटे का पूर्ण सदुपयोग करके धन को लूटकर देश का चत्मकार कर दिया। और न खाऊंगा और न खाने दूंगा कहने वाले चौकीदार जी देखते ही रहे। हमारे देश गजब के चौकीदार है, जिनके पांव अपने ही घर में नहीं टिकते। इसलिए चोरी होना तो लाजमी है। ऐसे में नीरव मोदी को वतन से भागकर अपने पर भगौड़े होने का कलंक नहीं लगाना चाहिए था। वैसे भी पकड़े जाते तो सलमान खान की तरह छूट ही जाते। क्योंकि भारत में घोटालो के बाद आज तक केवल 2-4 प्रतिशत मामलों मे ही आरोपी को सजा हुई है बाकी सब आजाद घूम रहें हैं कई तो विदेश मे मौज ले रहे हैं।

संपर्क - गांधी चौक, आतमणावास, बागरा, जिला-जालोर, राजस्थान। 343025
मोबाइल - 8107177196


-निर्मल रानी
एक ओर तो देश की जनता पहले ही मंहगाई की मार से बुरी तरह से जूझ रही है। $खासतौर पर रोज़मर्रा के इस्तेमाल में आने वाले खाद्य पदार्थ,अन्न,दालें,तेल,घी, सब्जि़यां तथा रसोई में काम आने वाली ऐसी अनेक दैनिक उपयोगी वस्तुओं के मूल्य आसमान को छू रहे हैं। यदि ऐसे में नागरिकों को मंहगे मूल्य पर मिलने वाला कोई सामान भी असली के बजाए न$कली अथवा रसायनयुक्त मिले या उन्हें कृत्रिम तरी$कों से तैयार की गई ज़हरीली सामग्री परोस दी जाए फिर तो यह जले पर नमक छिड़कने जैसी ही बात है। परंतु यह एक ऐसी ह$की$कत है जो भले ही सरकार की चाटुकारिता में लीन कारपोरेट घरानों के स्वामित्व में चलने वाले टीवी चैनल्स अथवा बड़े समाचार पत्रों द्वारा क्यों न नज़रअंदाज़ कर दी जाए परंतु इंटरनेट और सोशल मीडिया के अनियंत्रित माध्यमों ने तो इनकी पेाल खोल कर रख ही दी है। आए दिन $फेसबुक,व्हाट्सएप और दूसरे माध्यमों से आम जनता कोई न कोई ऐसे राज़ खोलती रहती है जिससे आम जनता स्वयं को असहाय एवं ठगा हुआ सा महसूस करती है। इस प्रकार से खुलेआम बाज़ार में ऐसी रसायन युक्त,कृत्रिम तथा न$कली व ज़हरीली वस्तुओं का उसके उत्पादन स्त्रोत से लेकर बाज़ारों व गली-कूचों तक की दुकानों तक पहुंचाना निश्चित रूप से बेहद चिंता का विषय है। परंतु बड़े दु:ख की बात है कि जिधर देखिए उधर सरकारें केवल अपनी पीठ थपथपाने में व्यस्त हैं। जिस आम जनता को उसकी मेहनत की कमाई के बदले में शुद्ध व स्वच्छ खाद्य सामग्री मिलनी चाहिए वह तो नहीं मिल पा रही है परंतु जनता के टैक्स के पैसों से राजनेता पूरी ऐशपरस्ती के साथ चुनाव लडऩे की मुद्रा में हर समय ज़रूर दिखाई देते हैं। क्या एक प्रगतिशील देश की यही परिभाषा है?
एक-दो या चार नहीं बल्कि सैकड़ों वीडियो इस आशय के सोशल मीडिया पर अलग-अलग लोगों द्वारा वायरल किए जा चुके हैं जिनमें यह दिखाया जाता है कि आम आदमी की थाली में इन दिनों प्लास्टिक अथवा किसी अन्य कृत्रिम तरी$के से तैयार किए गए चावल पहुंच चुके हैं। यह चावल केवल दुकानों में ही नहीं मिल रहे बल्कि इनकी आपूर्ति रेलवे कैंटीन व रेल पैंट्री कार तक भी हो चुकी है। इस संबंध में वीडियो तैयार करने वाले जागरूक उपभोक्ताओं ने हर बार यह दिखाने की कोशिश की कि किस प्रकार उनकी थाली में परोसे गए चावल को देखकर जब उन्हें संदेह हुआ तो वे पके हुए चावल को मु_ी में लेकर उसे टेनिस बॉल की तरह मु_ी में दबाकर गोल गेंद की शक्ल देते हैं। उसके बाद जब उस टेनिस बॉल रूपी चावल की गेंद को टेबल अथवा ज़मीन पर ज़ोर से फेंकते हैं तो वह बिल्कुल गेंद की ही तरह उछलती है। जबकि प्राकृतिक चावल के साथ ऐसा नहीं होता। ऐसी वीडियो दिखाने वालों ने बाद में जब रेस्टोरेंट अथवा कैंटीन के मालिक से इस विषय पर अपना प्रतिरोध दर्ज कराया तो वे आनाकानी करते, वीडियो बनाने से रोकते तथा उस संदेहपूर्ण चावल की थाली को बदलकर दूसरा असली चावल उनकी थाली में परोसते भी दिखाई दिए। हद तो तब हो गई जबकि एक जागरूक रेल यात्री ने संदेह होने पर रेल पैंट्री में परोसे गए ऐसे ही कथित प्लास्टिक अथवा कृत्रिम चावल की गेंद उछालती हुई वीडियो बना डाली। कोई आश्चर्य नहीं कि यदि भ्रष्टाचारियों व अपराधियों का संयुक्त नेटवर्क यूं ही फलता-फूलता रहा तो भविष्य में प्रस्तावित बुलेट ट्रेन में भी ऐसे ही चावल परोसे जाएं। इसी प्रकार की एक वीडियो में कई जागरूक नागरिकों ने यह साबित करने की कोशिश की कि चीनी के टुकड़ों में भी इसी प्रकार के प्लास्टिक के अथवा किसी केमिकल के क्रिस्टल बड़ी मात्रा में मिलाए गए हैं। इसका निरीक्षण करने के लिए जब उसने चीनी को गर्म पानी में मिलाया तो चीनी पूरी तरह से घुल गई। परंतु जब वही चीनी उसने एक चाय की छलनी में डालकर उस पर ठंडा पानी डाला तो चीनी के दाने तो घुल गए परंतु उन्हीं चीनी के दानों के साथ बड़ी मात्रा में मिलाए गए कृत्रिम चीनी के टुकड़े जोकि प्लास्टिक अथवा किसी अन्य रसायन से तैयार किए गए प्रतीत हो रहे थे वे नहीं गल सके। छलनी में बचा हुआ पदार्थ हाथ से छूने पर चिपचिपा सा कोई लसदार तत्व दिखाई दिया। बताया तो यह भी जा रहा है कि इस तरह की वस्तुएं चीन से बनकर हमारे देश के बाज़ारों में धड़ल्ल्ेा से आ रही हैं और बेची जा रही हैं। इसी प्रकार की और भी अनेक खाद्य सामग्रियां इन दिनों संदेह के घेरे में हैं। ऐसा नहीं है कि सोशल मीडिया पर अपनी पैनी नज़र रखने वाली सरकार या गुप्तचर एजेंसियों की नज़रों के सामने से ऐसे वीडियो नहीं गुज़रते। स्वतंत्र सोशल मीडिया की ता$कत ने जनता को जागरूक करने तथा सरकारों के नुमाइंदों व सरकारी मशीनरी की आंख व कान खोलने में निश्चित रूप से बड़ी सहायता की है। पंरतु उसके बावजूद सरकार या प्रशासन इस तरह की गंभीर चुनौतियों का सामना कर पाने में विफल है।
हालांकि इसी सोशल मीडिया के माध्यम से अनेक ऐसे वीडियो भी आते हैं जो सत्य से परे प्रतीत होते हैं। परंतु इसके बावजूद जनता को इन वीडियो में दिखाए जा रहे तथ्यों के विषय में पूरी सही जानकारी मिलना ज़रूरी है। मिसाल के तौर पर आजकल यह भी चर्चा छिड़ी हुई है और सोशल मीडिया पर ज़बरदस्त तरी$के से प्रचारित किया जा रहा है कि चीन भारत में न$कली अंडे भी बनाकर भेज रहा है। बंद गोभी जैसी सब्जि़यों के बारे में भी यही बात कही जा रही है। संभव है कि यह सब अ$फवाह मात्र हो। परंतु चावल व चीनी जैसी वस्तुएं जिनके बिना भारतीय लोग रह ही नहीं सकते और इसकी खपत व बिक्री प्रतिदिन पूरे देश में बड़ी मात्रा में होती है ऐसी वस्तुओं पर सरकार का संज्ञान लेना बेहद ज़रूरी है। हमारे देश की आम जनता पहले ही खेतों में इस्तेमाल की जाने वाली अत्यधिक पेस्टीसाईज़, यूरिया तथा खेतों में छिड़काव की जाने वाली अनेक ज़हरीली दवाईयों के प्रभाव से ग्रसित है। बाज़ार में मिलने वाली सब्जि़यों को कैसे जल्दी व समय से पूर्व तैयार किया जाता है यह सब कई बार विभिन्न टीवी चैनल्स पर भी दिखाया चुका है और इसपर कई स्टिंग आप्रेशन भी हो चुके हैं।
इसी प्रकार दूध में होने वाली मिलावट या रासायनिक दूध की आम लोगों तक होने वाली आपूर्ति का तो यह आलम है कि अब बाज़ार में बिकने वाला कोई भी दूध, दूध जैसा स्वादिष्ट या शुद्ध तो प्रतीत ही नहीं होता। ज़ाहिर है जब दूध और चीनी ही शुद्ध नहीं तो शुद्ध मिठाई या शुद्ध खोए की उ मीद करना ही बेमानी है। इसी तरह बाज़ार में बिकने वाले फल, उत्पादन से लेकर उन्हें पकाए जाने तक की प्रक्रिया में भी जिस प्रकार केमिकल्स तथा ज़हरीली दवाईयों के संपर्क से गुज़रते हैं वह भी प्रत्येक व्यक्ति भलीभांति जानता है। कहना $गलत नहीं होगा कि इन दिनों मरीज़ों की निरंतर बढ़ती जा रही सं या,कम उम्र में बच्चों को होने वाली $खतरनाक बीमारियां,कैंसर व हृदय रोग के लगातार बढ़ते जा रहे मरीज़, छोटे-छोटे बच्चों की आंखों पर चश्मे लगने जैसी समस्याएं,छोटे-छोटे बच्चों को पीलिया,हृदय रोग तथा डाईबिटिज़ जैसी होने वाली बीमारियां अपने-आप में इस बात का द्योतक हैं कि हमारे देश में खाद्य पदार्थों व सामग्रियों के उत्पादन,आपूर्ति तथा इसके क्रय-विक्रय में सबकुछ ठीक-ठाक नहीं चल रहा है। ऐसे में देश की भोली-भाली जनता को जिसे कि इन चीज़ों के परखने की बिल्कुल समझ नहीं है उसे ऐसी ज़हरीली व रसायनयुक्त वस्तुओं के उपयोग से बचाने की पूरी जि़ मेदारी देश की उन जनप्रतिनिधि सरकारों की है जो इसी जनता के वोट पर ऐशपरस्ती करते हैं और $फर्श से अर्श पर भी पहुंच जाते हैं। जनता के सेवक के रूप में कार्य करने वाले प्रशासनिक लोगों को भी इस विषय पर गंभीर होने की ज़रूरत है। निर्मल रानी

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