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प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में आज नीति आयोग गवर्निंग काउंसिल की चौथी बैठक हुई। बैठक राष्ट्रपति भवन में हुई। इस बैठक में ओडिशा के मुख्यमंत्री नवीन पटनायक और दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल को छोड़ कर सभी राज्यों के सीएम मौजूद रहे। बैठक के दौरान देश की आर्थिक वृद्धि दर समेत अन्य मुद्दों पर चर्चा हुई। आइए जानते हैं
बैठक की महत्वपूर्ण बातें
1. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने आज राष्ट्रपति भवन के सांस्कृतिक केंद्र में नीति आयोग की संचालन परिषद की चौथी बैठक के उद्घाटन सत्र को संबोधित किया। उन्होंने कहा कि बीते वित्त वर्ष 2017-18 की चौथी तिमाही में भारतीय अर्थव्यवस्था ने मजबूत 7.7 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की है और ''अब चुनौती इस वृद्धि दर को दहाई अंक में ले जाने की है।
2. पीएम मोदी ने कहा कि 2022 तक न्यू इंडिया का सपना अब हमारे देश के लोगों के का एक संकल्प है। मोदी ने इसी संदर्भ में आज की बैठक के एजेंडा में शामिल मुद्दों का जिक्र किया। इसमें किसानों की आय को दोगुना करना, आंकाक्षारत (अपेक्षाकृत पीछे रह गए) जिलों का विकास, आयुष्मान भारत, मिशन इंद्रधनुष, पोषण मिशन और महात्मा गांधी की 150वीं जयंती का उल्लेख किया।
3. इससे पहले नीति आयोग के उपाध्यक्ष राजीव कुमार ने मुख्यमंत्रियों और अन्य प्रतिनिधियों का स्वागत किया। सत्र का संचालन गृह मंत्री राजनाथ सिंह ने किया।
4. बैठक में मुख्यमंत्रियों तथा अन्य प्रतिनिधियों का स्वागत करते हुए मोदी ने जोर देकर कहा कि संचालन परिषद ऐसा मंच जो 'ऐतिहासिक बदलाव ला सकता है। उन्होंने कहा कि नीति आयोग की संचालन परिषद ने राजकाज से जुटे जटिल मुद्दों को 'टीम इंडिया के रूप में ''सहयोगपूर्ण, प्रतिस्पर्धापूण संघवाद की भावना के साथ लिया है।
5. प्रधानमंत्री ने कहा कि माल एवं सेवा कर (जीएसटी) का लागू होना टीम इंडिया की इस भावना का एक जीता जागता उदाहरण है।
6. पीएम मोदी ने बाढ़ प्रभावित राज्यों के मुख्यमंत्रियों को बाढ़ से उत्पन्न स्थित से निपटने में हरसंभव मदद का आश्वासन दिया।
7. प्रधानमंत्री ने कहा कि राज्यों के मुख्यमंत्रियों ने उप समूहों और समितियों में अपने कार्यों के जरिये स्वच्छ भारत मिशन, डिजिटल लेनदेन और कौशल विकास जैसे मुद्दों पर नीतियां बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है।
8. प्रधानमंत्री ने नीति आयोग की बैठक में कहा कि राज्यों को इस वित्त वर्ष में केंद्र से 11 लाख करोड़ रुपये मिलेंगे। यह पिछली सरकार के आखिरी साल की तुलना में छह लाख करोड़ रुपये अधिक हैं।
9. महात्मा गांधी की जयंती दो अक्टूबर 2014 से देश में स्वच्छ भारत अभियान की शुरुआत की गई थी। सरकार 2019 में गांधी की 150वीं जयंती को भी धूमधाम से मनाने की योजना बना रही है। यही वजह है कि नीति आयोग भी उस पर आमंत्रित सुझावों को प्रधानमंत्री के सामने सभी राज्यों से साझा कर एक अच्छी रणनीति बनाने की पहल कर रहा है।
10. बैठक में इस पर जोर दिया गया कि भारत की तस्वीर 2022 तक कैसे बदली जाए, तब भारत आजादी की 75वीं सालगिरह मनाएगा।

 

कांग्रेस ने कहा है कि अगर बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार भाजपा का साथ छोड़ने का फैसला करते हैं तो उन्हें महागठबंधन में वापस लेने के लिए वह सहयोगी दलों के साथ विचार करेगी।कांग्रेस का यह बयान उस वक्त आया है जब हाल के दिनों में अगले लोकसभा चुनाव में सीटों के तालमेल के संदर्भ में जदयू और भाजपा के बीच कुछ विरोधाभासी बयान आये हैं जिस वजह से यह कयास लगाए जा रहे हैं कि दोनों दलों के बीच सबकुछ ठीक नहीं है।कांग्रेस के बिहार प्रभारी शक्ति सिंह गोहिल ने रामविलास पासवान और उपेंद्र कुशवाहा का जिक्र करते हुए यह दावा भी किया कि बिहार में यह आम धारणा बन चुकी है कि नरेंद्र मोदी सरकार 'पिछड़े और अतिपिछड़े वर्गों के खिलाफ' है, ऐसे में पिछड़ों और अतिपिछड़ों की राजनीति करने वालों के पास भाजपा का साथ छोड़ने के सिवाय कोई दूसरा विकल्प नहीं है।उन्होंने यह भी कहा कि भाजपा के खिलाफ राष्ट्रीय स्तर पर बनने वाले गठबंधन का नेतृत्व स्वाभाविक रूप से कांग्रेस के पास होगा और अगले लोकसभा चुनाव में देश की जनता 'राहुल गांधी के नेतृत्व में' नरेंद्र मोदी को हराएगी।कांग्रेस के राष्ट्रीय प्रवक्ता गोहिल ने कहा, ''अभी नीतीश कुमार फासीवादी भाजपा के साथ हैं। हमें नहीं पता कि उनकी क्या मजबूरी है कि उनके साथ चले गए। दोनों का साथ बेमेल है।'' यह पूछे जाने पर कि अगर नीतीश फिर से महागठबंधन में वापसी का मन बनाते हैं तो कांग्रेस का क्या रुख होगा तो उन्होंने कहा, ''अगर ऐसी कोई संभावना बनती है तो हम अपने सहयोगी दलों के साथ बैठकर इस पर जरूर चर्चा करेंगे।''गौरतलब है कि कुछ महीने पहले बिहार में कुछ स्थानों पर हुई सांप्रदायिक हिंसा का हवाला देते हुए तेजस्वी ने हाल में कहा था कि अब नीतीश के लिए महागठबंधन के दरवाजे बंद हो चुके हैं। वैसे, हाल के दिनों में भाजपा और जदयू के बीच भी कुछ ऐसी बयानबाजी हुई है जिससे यह कयास लगाए जा रहे हैं कि दोनों के बीच सबकुछ ठीक नहीं है।गोहिल ने कहा, "बिहार में यह सपष्ट सन्देश है कि नरेंद्र मोदी के नेतृत्व वाली भाजपा सरकार पिछड़ों और अतिपिछड़ों के खिलाफ है। ऐसे में जिसको भी पिछड़ों और अतिपिछड़ों की राजनीति करनी है तो उसे राजग से अलग होना पड़ेगा। अगर वे ऐसा नहीं करते हैं तो राजग तो डूबेगा ही, साथ मे उनको भी डूबना पड़ेगा।''

दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल का एलजी हाउस पर धरना सातवें दिन भी जारी है। इस बीच आईएएस एसोसिएशन ने पत्रकार वार्ता कर स्पष्ट किया कि हमारी कोई हड़ताल नहीं है। जो भी यह कह रहा है कि दिल्ली के आईएएस अधिकारी काम नहीं कर रहे हैं, वो हमारे बारे में अफवाह फैला रहा है। आईएएस एसोसिएशन की तरफ से मनीषा सक्सेना ने कहा कि हम सभी बैठकों में भाग ले रहे हैं, सभी तरह के काम किए जा रहे हैं। इतना ही नहीं कई बार तो हम छुट्टियों में भी काम कर रहे हैं।उन्होंने कहा कि हमें राजनीति से कोई लेना देना नहीं है। हमारा किसी भी राजनीतिक दल से कोई संबंध नहीं है।दिल्ली में मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल एलजी हाउस पर अपने तीन मंत्रियों के साथ सात दिन से धरने पर बैठे हैं। एलजी उनको मिलने का वक्त ही नहीं दे रहे हैँ। इस बीच केजरीवाल ने प्रधानमंत्री को एक पत्र भी लिखा था। उन्होंने उसमें लिखा '' आईएएस की हड़ताल के कारण कई सारे काम प्रभावित हो रहे हैं। चूंकि उपराज्यपाल आईएएस अधिकारियों की हड़ताल खत्म कराने के लिए कुछ नहीं कर रहे हैं तो दिल्ली सरकार और दिल्ली के लोग आपसे हाथ जोड़कर अनुरोध करते हैं कि तुरंत हड़ताल समाप्त कराई जाए ताकि दिल्ली का कामकाज फिर से शुरू हो सके।उन्होंने कहा कि नालों की सफाई मानसून से पहले शुरू होनी चाहिए लेकिन अधिकारी बैठकों में शामिल नहीं हो रहे हैं जिससे काम प्रभावित हो रहा है। हड़ताल के कारण नए मोहल्ला क्लीनिक और पॉली क्लीनिक खुलने का काम रुक गया है। मुख्यमंत्री ने आरोप लगाया, ''दिल्ली में प्रदूषण सबसे बड़ी समस्या है। पहले इस मुद्दे पर हर 15 दिन में समीक्षा और योजना बैठक होती थी लेकिन हड़ताल के कारण पिछले तीन महीने से ऐसी कोई बैठक नहीं हुई।

गैर भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) शासित चार राज्यों के मुख्यमंत्रियों ने दिल्ली के उपराज्यपाल अनिल बैजल और मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल के बीच विवाद का मुद्दा प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के समक्ष उठाकर इसे हल करने का आग्रह किया है।नीति आयोग की रविवार को नयी दिल्ली में आयोजित बैठक में भाग लेने के लिए आए आंध्र प्रदेश के मुख्यमंत्री एन चंद्रबाबू नायडू, पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ,कनार्टक के एच डी कुमारस्वामी और केरल के मुख्यमंत्री पिनारई विजयन ने प्रधानमंत्री मोदी से अलग से मुलाकात कर दिल्ली के उपराज्यपाल और मुख्यमंत्री के बीच विवाद को सुलझाने के लिए बातचीत की। ममता बनर्जी ने ट्वीट कर इसकी जानकारी दी। चारों मुख्यमंत्रियों ने शनिवार को भी एक संवाददाता सम्मेलन कर इस मामले को उठाया था। केजरीवाल के घर संवाददाता सम्मेलन को संबोधित करते हुए ममता बनर्जी ने कहा,' हम लोगों ने केजरीवाल से मिलने के लिए उपराज्यपाल से अनुमति मांगी थी, लेकिन उन्होंने इन्कार कर दिया। जो आज दिल्ली में हो रहा है, ऐसा ही संकट किसी और राज्य में भी हो सकता है। दिल्ली में अगर छोटी-सी समस्या नहीं निपट रही है, तो देश का क्या होगा। ऐसी कोई भी समस्या नहीं होनी चाहिए जिससे सरकार और आम जनता कठिनाई महसूस करे। दिल्ली में दो करोड़ लोग हैं और इस राज्य में चार माह से कामकाज नहीं हो रहा है। इससे अधिक दुभार्ग्यपूर्ण और कुछ नहीं हो सकता। उपराज्यपाल ने हमें मिलने का समय नहीं दिया तो हम किसके पास जायें। हमारी मांग है कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी इस मामले में हस्तक्षेप करें। रविवार को होने वाली नीति आयोग की बैठक में हमलोग श्री मोदी से इस संबंध में बात करेंगे।'चंद्रबाबू नायडू ने कहा,' दिल्ली के मुख्यमंत्री को समर्थन देने के लिए यहां आए हैं। केन्द्र और राज्य को मिलकर काम करना चाहिए। उधर उपराज्यपाल और मुख्यमंत्री के बीच विवाद को लेकर पूर्व मुख्यमंत्री शीला दीक्षित और दिल्ली कांग्रेस अध्यक्ष अजय माकन ने केजरीवाल पर निशाना साधा। दीक्षित ने कहा कि 15 साल दिल्ली में उन्होंने भी सरकार चलाई और कभी ऐसी स्थिति उत्पन्न नहीं हुई। उन्होंने कहा कि कोई भी सरकार किसी कायदे कानून के मुताबिक ही चलती है। ऐसा नहीं है कि जो आप का मन करे वह करें।दिल्ली की पूर्व मुख्यमंत्री ने कहा कि केजरीवाल को सरकार चलाने के लिए जो अधिकार मिले हुए हैं उन्हें उनका इस्तेमाल कर दिल्ली की जनता के लिए काम करना चाहिए। प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष अजय माकन ने कहा कि केजरीवाल का माफी मांगने का रिकार्ड है। उन्होंने 2०14 में 49 दिन की सरकार का इस्तीफा देने के बाद माफी मांगी। हाल ही में मजीठिया,जेटली और सिब्बल से माफी मांगी तो उसी तरह दिल्ली के मुख्य सचिव से क्यों नहीं मांग लेते और सरकार चलाते। माकन ने कहा कि केजरीवाल के अहम का खामियाजा दिल्ली की जनता को क्यों भुगतना पड़े। केजरीवाल पिछले सात दिन से राजनिवास कायार्लय में अपने तीन मंत्रियों के साथ धरने पर हैं। उनका आरोप है कि दिल्ली के नौकरशाह तीन माह से अधिक समय से हड़ताल पर हैं जिससे सरकार काम नहीं कर पा रही है। मुख्य सचिव अंशु प्रकाश के साथ फरवरी में मुख्यमंत्री आवास पर कथित मारपीट के बाद सरकार और नौकरशाही के बीच विवाद चल रहा है।गौरतलब है कि मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल और उनके मंत्रिमंडल का राजभवन में जारी धरना आज छठे दिन में प्रवेश कर गया, लेकिन अब तक उपराज्यपाल ने उन्हें मिलने का समय नहीं दिया है।आईएएस अधिकारियों के राज्य सरकार के साथ कथित असहयोग को लेकर केजरीवाल और उनके मंत्री 11 जून से ही राजभवन में धरने पर बैठे हैं। उनकी माँग है कि उपराज्यपाल अनिल बैजल अधिकारियों को सरकार के साथ सहयोग करने का निर्देश दें। उनके बार-बार आग्रह पर भी उपराज्यपाल उनसे नहीं मिल रहे हैं।

आम आदमी पार्टी (आप) के प्रधानमंत्री कायार्लय तक मार्च को देखते हुए दिल्ली मेट्रो के 5 स्टेशनों को बंद कर दिया गया है। इससे यात्रियों को काफी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।जानकारी के मुताबिक पटेल चौक, केन्द्रीय सचिवालय, उद्योग भवन और जनपथ मेट्रो स्टेशन दो बजे के बाद बंद कर दिए गए हैं। लोक कल्याण मार्ग स्टेशन पहले से ही 12 बजे से बंद है।दिल्ली मेट्रो के प्रवक्ता ने बताया कि पुलिस की सलाह के अनुसार, लोक कल्याण मार्ग मेट्रो स्टेशन को 12 बजे यात्रियों के आवागमन के लिए बंद कर दिया गया था। इसके अलावा पटेल चौक , केन्द्रीय सचिवालय, उद्योग भवन और जनपथ स्टेशनों को भी दो बजे के बाद बंद करने का निर्णय लिया गया है। ये स्टेशन अगले आदेश तक बंद रहेंगे और इनसे यात्रियों का आवागमन नहीं होगा। हालांकि यात्री येलो लाइन के लिए केन्द्रीय सचिवालय पर मेट्रो बदल सकेंगे। अन्य लाइनों पर सेवाएं सामान्य रहेंगी।उल्लेखनीय है कि भारतीय प्रशासनिक सेवा के अधिकारियों की हड़ताल के विरोध में आम आदमी पार्टी आज मंडी हाउस से प्रधानमंत्री कायार्लय तक मार्च निकाल रही है। इसे देखते हुए दिल्ली पुलिस ने लुटियन जोन में सुरक्षा के कड़े इंतजाम किये हैं और कुछ क्षेत्रों में धारा 144 लागू कर दी है।

 

नीति आयोग की बैठक में दिल्ली के उपराज्यपाल अनिल बैजल के उपस्थिति संबंधी खबरों पर मुख्यमंत्री अरविन्द केजरीवाल ने आज कहा कि उन्होंने शहर के संवैधानिक प्रमुख को बैठक में शामिल होने के लिए अधिकृत नहीं किया है। वहीं नीति आयोग के मुख्य कार्यकारी अधिकारी अमिताभ कांत ने बैजल की उपस्थिति का दावा करने वाली खबरों को झूठा करार दिया है। केजरीवाल ने ट्वीट किया है, ''संविधान के किस अनुच्छेद के तहत उपराज्यपाल को मुख्यमंत्री का स्थान लेने का अधिकार है? मैंने उन्हें अपने स्थान पर जाने के लिए अधिकृत नहीं किया है। ट्विटर पर किसी ने दावा किया था कि उपराज्यपाल बैजल नीति आयोग की बैठक में दिल्ली का प्रतिनिधित्व कर रहे हैं और बैठक स्थल पर पहुंच गये हैं। केजरीवाल ने इसी पर प्रतिक्रिया देते हुए ट्वीट किया था। खबर पर प्रतिक्रिया देते हुए नीति आयोग के सीईओ कांत ने कहा, ''यह बिलकुल गलत है। दिल्ली के उपराज्यपाल नीति आयोग के संचालन परिषद की चौथी बैठक में उपस्थित नहीं हैं। केजरीवाल, दिल्ली के उपमुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया और मंत्रियों सत्येन्द्र जैन तथा गोपाल राय के साथ सोमवार से ही उपराज्यपाल कार्यालय में धरने पर बैठे हैं। उनकी मांग है कि सरकार आईएएस अधिकारियों की तथाकथित ''हड़ताल'' खत्म कराये और घर-घर राशन पहुंचाने की उनकी सरकार की योजना को मंजूरी दे। नीति आयोग के संचालन परिषद की चौथी बैठक आज हो रही है जिसमें मुख्य एजेंडा किसानों की आय दुगुनी करने के लिए उठाए गए कदमों और सरकार की महत्वाकांक्षी योजनाओं में हुई प्रगति पर चर्चा है। राष्ट्रपति भवन में चल रही बैठक की अध्यक्षता प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी कर रहे हैं। आज की बैठक में पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी, आंध्रप्रदेश के मुख्यमंत्री चन्द्रबाबु नायडू , केरल के मुख्यमंत्री पिनरई विजयन , कर्नाटक के मुख्यमंत्री एच . डी . कुमारस्वामी , राजस्थान की मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे और उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ आदि भाग ले रहे हैं। केन्द्रीय मंत्रियों मे जेपी नड्डा और नितिन गडकरी इसमें हिस्सा ले रहे हैं।

देश के सभी महानगरों में मेट्रो रेल, लोकल बस और ऑटो टैक्सी आदि सार्वजनिक परिवहन के सभी साधनों के किराए का भुगतान एक ही कार्ड से करने की सुविधा में टोल टैक्स और पार्किंग के भुगतान को भी शामिल कर लिया गया है। केन्द्रीय आवास एवं शहरी मामलों के मंत्रालय ने 'नेशनल कॉमन मोबिलिटी कार्ड (एनसीएमसी) से मिलने वाली सुविधाओं में इजाफा करते हुए टोल प्लाजा और पार्किंग एजेंसियों से इस कार्ड को अपनी ऑनलाइन भुगतान सेवा से जोड़ने को कहा है। आवास एवं शहरी मामलों के राज्यमंत्री हरदीप सिंह पुरी ने हाल ही में इस परियोजना की समीक्षा बैठक में एनसीएमसी की सुविधाओं का दायरा बढ़ाते हुए संबद्ध प्राधिकरणों को यथाशीघ्र कार्ड को भुगतान सेवा से जोड़ने को कहा है।
दिल्ली और कोच्चि में मेट्रो और बस में एक ही कार्ड से भुगतान:-परियोजना से जुड़े मंत्रालय के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि शुरुआती चरण में एनसीएमसी का उपयोग मेट्रो रेल परियोजनाओं से जुड़े सभी स्मार्ट शहरों में किया जायेगा। पायलट प्रोजेक्ट के तौर पर फिलहाल दिल्ली और कोच्चि में मेट्रो रेल और लोकल बस में एक ही कार्ड से किराये का भुगतान किया जा रहा है। अधिकारी ने बताया मंत्रालय की ओर से नेशनल कॉमन मोबिलिटी कार्ड सेवा राष्ट्रीय स्तर पर शुरु करने की तैयारी पूरी कर ली गयी है। सभी शहरों में इस्तेमाल किये जा सकने वाले कार्ड भी बनकर तैयार है। सिर्फ टोल प्लाजा और पार्किंग का संचालन करने वाली एजेंसियों द्वारा इसे अपनी ऑनलाइन भुगतान सेवा से जोड़ने का इंतजार है।
एनसीएमसी को डेबिट कार्ड की तरह इस्तेमाल करने की योजना:-परियोजना का उद्देश्य भविष्य में एनसीएमसी को डेबिट कार्ड की तरह इस्तेमाल करने की सुविधा से लैस करना है। इससे कार्डधारक सार्वजनिक परिवहन के साधनों के किराये, टोल टैक्स, पार्किंग और सामान्य खुदरा खरीददारी का भुगतान भी इससे कर सकेंगे। उल्लेखनीय है कि एनसीएमसी को लागू करने के लिये मंत्रालय के अतिरिक्त सचिव की अध्यक्षता में गठित समिति की रिपोर्ट के आधार पर सितंबर 2015 में भारतीय राष्ट्रीय भुगतान निगम (एनपीसीआई) को स्थानीय परिवहन सेवा के लिये पूरे देश में एक ही भुगतान कार्ड को विकसित करने की जिम्मेदारी दी गयी थी। इसके अलावा सार्वजनिक क्षेत्र की सॉफ्टवेयर कंपनी 'सीडेक को देश भर में मेट्रो रेल के किराया वसूली की स्वचालित प्रणाली विकसित करने के कहा गया था।
ईएमवी ओपन लूप कार्ड अपनाने का सुझाव:-एनपीसीआई और सीडेक द्वारा विकसित प्रणाली से एनसीएमसी के इस्तेमाल को दिल्ली और कोच्चि के अलावा मुंबई, नागपुर, बेंगलुरु और अहमदाबाद में लोकल बस और मेट्रो प्राधिकरणों ने लागू करने की मंजूरी दे दी है। मंत्रालय ने बाद में इस कार्ड के द्वारा टोल, पार्किंग और मामूली खरीददारी के भुगतान को भी जोड़ने का फैसला किया। इसे लागू करने के लिये राष्ट्रीय सूचना केन्द्र (एनआईसी), सीडेक, एनपीसीआई, भारतीय मानक ब्यूरो और वित्त मंत्रालय के विशेषज्ञों की एक समिति ने दुनिया भर में प्रचलित कॉमन कार्ड के मॉडल का अध्ययन कर भारत में 'ईएमवी ओपन लूप कार्ड अपनाने का सुझाव दिया है।अधिकारी ने बताया कि समिति की सिफारिशों के आधार पर एनसीएमसी की कार्यप्रणाली तय करते हुये कार्ड तैयार कर लिया गया है। भविष्य में इसे देश के सभी छोटे बड़े शहरों में लागू करने की महत्वाकांक्षी योजना है।

केंद्र सरकार ने जम्मू-कश्मीर को लेकर एक बड़ा फैसला किया है। अब वहां जारी संघर्षविराम को आगे नहीं बढ़ाया गया है। सेना अब फिर से आतंकियों के खिलाफ अभियान शुरू करेगी। गृहमंत्री ने साफ कहा है कि आतंकवादियों को रोकने के लिए सुरक्षा बलों को सभी जरूरी कदम उठाने की छूट है। जम्मू-कश्मीर में आतंक और हिंसा से मुक्त पर्यावरण बनाने का सरकार का प्रयास जारी रहेगा।दरअसल वहां संघर्षविराम को दौरान आतंकियों ने राइफलमैन औरंगजेब को अगवा कर हत्या कर दी। इसके अलावा पत्रकार शुजात बुखारी की हत्या भी कर दी गई। इनसभी वारदातों के बाद केंद्र सरकार के इस फैसले की काफी आलोचना हो रही थी। अब ईद के बाद दिल्ली में हुई बैठक में केंद्रीय गृहमंत्री राजनाथ सिंह ने इस सीजफायर को आगे नहीं बढ़ाने का फैसला किया है।गृह मंत्री राजनाथ सिंह ने इस बात की घोषणा करते हुए ट्वीट किया कि 17 मई 2018 को, भारत सरकार ने निर्णय लिया कि सुरक्षा बल रमजान के पवित्र महीने के दौरान जम्मू-कश्मीर में अभियान नहीं चलाएंगे। यह निर्णय जम्मू-कश्मीर के शांतिप्रिय लोगों के हित में लिया गया ताकि उन्हें रमजान के दौरान एक अनुकूल महौल प्रदान किया जा सके।उन्होंने लिखा कि मुस्लिम भाइयों और बहनों को शांतिपूर्ण तरीके से रमजान मनाने के लिए सुरक्षाबलों ने सरकार के फैसले को जैसे लागू किया, हम उसकी सराहना करते हैं। अगले ट्वीट में उन्होंने लिखा, 'यह फैसला जम्मू-कश्मीर के साथ-साथ पूरे देश के लोगों की तरफ से सराहा गया और आम नागरिकों के लिए राहत लेकर आया।

विदेश मंत्री सुषमा स्वराज आज से इटली, फ्रांस, लग्जमबर्ग और बेल्जियम की यात्रा पर रवाना हो गईं। इस यात्रा का उद्देश्य यूरोपीय देशों के साथ भारत के कूटनीतिक संबंधों को मजबूत करना है। विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रवीश कुमार ने ट्वीट किया कि यूरोप के साथ संबंधों को प्रगाढ़ बनाने की पहल के तहत विदेश मंत्री सुषमा स्वराज 17 से 23 जून तक चार देश इटली, फ्रांस, लग्जमबर्ग और बेल्जियम की यात्रा पर रवाना हुईं।इससे पहले विदेश मंत्रालय ने बताया कि 17 से 23 जून तक की यात्रा का उद्देश्य राजनीतिक नेतृत्व के साथ वैश्विक, क्षेत्रीय और द्विपक्षीय मुद्दों पर व्यापक बातचीत करना और यूरोपीय संघ के साथ कूटनीतिक संबंधों को मजबूत करना है। सुषमा पहले इटली के दौरे पर जा रही हैं, जहां वह वहां के प्रधानमंत्री एवं अन्य नेताओं से मुलाकात करेंगी। गुइसेप कोंटे के इटली का नया प्रधानमंत्री बनने के बाद दोनों देशों के बीच पहली बड़ी राजनीतिक वार्ता होगी। सुषमा कोंटे और अपने समकक्ष एन्जो मोवावेरो मिलानेसी से भी मिलेंगी।इसके बाद विदेश मंत्री 18-19 जून को फ्रांस जाएंगी। वह 19-20 जून को लग्जमबर्ग और 20-23 जून को बेल्जियम के दौरे पर होंगी।

पाकिस्तान प्रायोजित आतंकवाद के कारण वर्ष 1990 से अब तक घाटी में 14 हजार से ज्यादा लोगों को अपनी जान गंवानी पड़ी है। इसमें पांच हजार से ज्यादा सुरक्षा बल के जवान शहीद हुए हैं।मानवाधिकार पर यूएन के उच्चायुक्त कार्यालय की कश्मीर पर रिपोर्ट के बाद भारत ने यूएन को तथ्यात्मक जानकारी देकर घाटी में पाक की नापाक हरकतों का काला चिठ्ठा खोला है। भारत ने कहा है कि सुरक्षा बलों ने घाटी में उकसावे के बावजूद लगातार संयम का परिचय दिया है। इसकी गवाही इस बात से साबित होती है कि केवल एक साल में वर्ष 2017 के दौरान करीब 1936 जवान आतंकी हिंसा के कारण घायल हो गए। रिपोर्ट में कहा गया है कि जीवन का अधिकार सबसे प्रमुख मानवाधिकार है। लेकिन घाटी में सीमा पार से टल रहे आतंकवाद के कारण यह बुनियादी अधिकार खतरे में पड़ गया है।
आतंकी संगठनों को पनाह दे रहा पाक:-भारत ने मानवाधिकार पर यूएन के उच्चायुक्त कार्यालय को भेजे गए जवाब में घाटी में पाक प्रायोजित आतंकवाद के अभिशाप से मानवाधिकार के सामने पैदा हो रहे संकट का हवाला देते हुए इन तथ्यों पर ध्यान देने को कहा है। भारत ने कहा है कि लश्कर, जैश-ए-मोहम्मद, हिज्बुल मुजाहिदीन जैसे अंतरराष्ट्रीय स्तर पर घोषित आतंकी संगठनों को पीओके में शरण और प्रशिक्षण दिया जाता है। यह संगठन जम्मू कश्मीर के लोगों पर हमला करते हैं। रिपोर्ट में कहा गया है कि हिज्बुल का सरगना सरेआम पाक के टीवी चैनलों पर धमकी देकर स्वीकार करता है कि वह भारत में आतंकी हमलों के लिए कहीं भी हथियार भेज सकता है।
कवर फायरिंग की आड़ में घुसपैठ जारी:-पाकिस्तान की ओर से सीमा पर कवर फायरिंग की आड़ में होने वाली घुसपैठ और आतंकियों को दी जाने वाली वित्तीय मदद की जानकारी भी यूएन को देकर यूएन मानवाधिकार उच्चायुक्त कार्यालय पर तथ्यों की अनदेखी का आरोप लगाया गया है।
सुरक्षा बलों की चुनौती:-पाकिस्तान की ओर से आतंकियों को मोर्टार, राकेट लांचर, ग्रेनेड, विस्फोटक सहित अन्य हथियार व उपकरण मुहैया कराने का जिक्र भी किया गया है। भारत ने कहा है कि इस तरह के हथियारों का बड़े पैमाने पर घाटी में जब्त किया जाना बताता है कि सुरक्षा बल किस तरह की चुनौती का सामना यहां पाक प्रायोजित आतंक की वजह से कर रहे हैं।

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