वाशिंगटन - आतंकवाद के मुद्दे पर पाकिस्‍तान के खिलाफ अमेरिका की कार्रवाई लगातार जारी है। इस बीच, अमेरिकी विदेश मंत्रालय के एक अधिकारी ने कहा है कि पाकिस्‍तान आतंकियों के खिलाफ प्रतिबंधों पर संयुक्‍त राष्‍ट्र सुरक्षा परिषद के प्रस्‍तावों का अनुपालन नहीं कर रहा है। गौरतलब है कि यह बयान ऐसे समय में सामने आया है, जब भारत के साथ मिलकर अमेरिका टेरर फंडिंग को लेकर पाकिस्‍तान को निगरानी वाले देशों की सूची में डालने का प्रयास कर रहा है।
आपको बता दें कि 18 से 23 फरवरी के बीच पेरिस में फाइनेंशियल एक्‍शन टास्‍क फोर्स (एफएटीएफ) की एक अहम बैठक आयोजित होने जा रही है। अमेरिका और उसके यूरोपीय सहयोगियों ने टेरर फंडिंग पर रोक लगाने में असफल रहने पर पाकिस्तान को ग्लोबल वॉचलिस्ट में शामिल करने के लिए एफएटीएफ में एक प्रस्ताव लाया है, जिस पर चर्चा होनी है।
संभवत: यह पहली बार है जब अमेरिका ने सार्वजनिक तौर पर पाकिस्‍तान पर आरोप लगाया है कि वह आतंकियों के खिलाफ प्रतिबंधों पर संयुक्‍त राष्‍ट्र सुरक्षा परिषद के प्रस्‍तावों का अनुपालन नहीं कर रहा है।दरअसल, संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद की '1267 समिति' आतंकी गतिविधियों में शामिल संगठनों और आतंकियों को प्रतिबंधित सूची में शामिल करती है और संबंधित देशों को उनके खिलाफ कार्रवाई का निर्देश देती है। सुरक्षा परिषद ने सदस्य देशों से सूची में शामिल संगठनों और आतंकियों से जुड़ी संपत्तियों को फ्रीज करने, उनके आवागमन पर रोक लगाने, उनके पास प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष तौर पर हथियारों और सैन्य उपकरणों की सप्लाइ पर रोक लगाने को कहा है।
एक शीर्ष पाक अधिकारी के बयान पर पूछे गए सवाल के जवाब में अमेरिकी विदेश मंत्रालय के अधिकारी ने अपनी प्रतिक्रिया दी। पाक अधिकारी ने कहा था कि अमेरिका ने पाकिस्‍तान को एक 'ग्रे लिस्‍ट' में डालने के लिए एफएटीएफ से संपर्क किया है। फ्रांस और जर्मनी भी इस कदम में अमेरिका के साथ हैं।
आतंकियों को पनाह देने के लिए अमेरिकी राष्‍ट्रपति डोनाल्‍ड ट्रंप कई वैश्विक मंचों से पाकिस्‍तान को फटकार लगा चुके हैं। इस साल की शुरुआत में ही उन्‍होंने पाकिस्‍तान को धोखेबाज बताते हुए कहा था कि एक तरफ वो सालों से आतंकवाद के खिलाफ आर्थिक मदद ले रहा है और दूसरी तरफ उन्‍हीं का इस्‍तेमाल आतंकियों को पनाह देने में कर रहा है। ट्रंप ने स्‍पष्‍ट रूप से कह दिया था कि पाकिस्‍तान अमेरिका को कई सालों से धोखा देते आ रहा है। मगर अब और नहीं, पैसा और आतंकवाद एक साथ नहीं चलेगा। इसके बाद ट्रंप प्रशासन ने कड़ी कार्रवाई करते हुए पाकिस्‍तान को सालों से दी जाने वाली कई अमेरिकी आर्थिक मदद पर रोक भी लगा दी।

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