इस्लामाबाद - पाकिस्तान में प्रधानमंत्री नवाज शरीफ के वकीलों ने पनामा पेपर लीक मामले में संयुक्त जांच दल की रिपोर्ट को गैरकानूनी ठहराते हुए अस्वीकार कर दिया। सुप्रीम कोर्ट से भी उसे अस्वीकार करने की मांग की है। इस रिपोर्ट में प्रधानमंत्री शरीफ और उनके परिजनों के खिलाफ भ्रष्टाचार के मामले में मुकदमा चलाने की सिफारिश की गई है। सुप्रीम कोर्ट मंगलवार को भी मामले की सुनवाई करेगा।
सोमवार को सुप्रीम कोर्ट में मामले की सुनवाई शुरू होते ही प्रधानमंत्री शरीफ के वकीलों ने संयुक्त जांच दल की रिपोर्ट पर सवाल उठा दिये। कहा, यह रिपोर्ट गैरकानूनी और पक्षपातपूर्ण है। जांच दल ने किस अधिकार से विदेशी सरकार के साथ पत्र व्यवहार किया और वहां से दस्तावेज मंगवाए। कहा, सुप्रीम कोर्ट ने जब जांच दल को स्पष्ट दिशानिर्देश दिये थे, तब उसने कैसे सीमा से बाहर जाकर कार्य किया ? ख्वाजा हैरिस की अगुआई वाली वकीलों की टीम ने रिपोर्ट पर अपनी आपत्तियों को लेकर सुप्रीम कोर्ट में अर्जी दाखिल कर दी है। अर्जी में लिखा गया है कि जांच दल की रिपोर्ट न केवल गैरकानूनी है बल्कि संविधान के भी विरुद्ध है। जांच दल की सिफारिशों की कोई कानूनी हैसियत नहीं है। ख्वाजा हैरिस ने कोर्ट से रिपोर्ट के दसवें संस्करण की प्रतिलिपि दिलवाए जाने की मांग की, जिसे जांच दल के अनुरोध पर गोपनीय रखा गया है। जांच दल ने अपनी अंतिम रिपोर्ट दस जुलाई को दाखिल की थी।
पाकिस्तान के वित्त मंत्री इशाक डार ने जांच दल की रिपोर्ट पर अलग से अपनी आपत्ति दर्ज कराई। इससे पहले इमरान खान की पार्टी तहरीक-ए-इंसाफ (पीटीआइ) की ओर से अधिवक्ता नईम बोखारी ने पेश होकर जांच दल की रिपोर्ट की प्रशंसा की। कहा, इस रिपोर्ट ने सब कुछ साफ कर दिया है। उनके आरोपों को सही साबित किया है। अब सुप्रीम कोर्ट को नवाज शरीफ को संसद की सदस्यता के अयोग्य घोषित करने में देर नहीं करनी चाहिए। उल्लेखनीय है कि इसी मांग को लेकर पीटीआइ व अन्य दलों ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका दाखिल की है। सुनवाई के बाद पीटीआइ नेता फवाद चौधरी ने कहा, प्रधानमंत्री शरीफ ने पद पर रहने का नैतिक और राजनीतिक आधार खो दिया है। वह न केवल पद के अयोग्य घोषित होंगे बल्कि जेल भी जाएंगे। देश की सूचना राज्य मंत्री मरियम औरंगजेब ने कहा है कि सरकार कोर्ट का फैसला मंजूर करेगी।

 

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