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नई दिल्ली। अक्सर विवादों में रहने वाली जेएनयू छात्रसंघ की पूर्व नेता शेहला रशीद ने माफिया डॉन रवि पुराजी के खिलाफ केस दर्ज कराया है। शेहला ने रवि पुजारी गैंग पर जान से मारने की धमकी देने का आरोप लगाया है। सोमवार को राजधानी दिल्ली में जेएनयू छात्र नेता उमर खालिद पर हुए कथित हमले के एक दिन बाद शेहला ने यह केस दर्ज कराया है। रवि पुजारी गैंग के खिलाफ धारा 506 के तहत जम्मू-कश्मीर पुलिस ने मामला दर्ज कर लिया है।
शेहला रशीद का ट्वीट:-शेहला रशीद ने ट्वीट कर इस मामले की जानकारी दी। उन्होंने एक स्क्रीन शॉट ट्विटर पर शेयर किया, जिसमें डॉन पुजारी के नाम के साथ लिखा है, 'अपना मुंह बंद रखो वरना हम लोग हमेशा के लिए तुम्हारा मुंह बंद कर देंगे। उमर खालिद और जिग्नेश मेवाणी को भी ये कह दो।'बता दें कि 13 अगस्त को दिल्ली में उमर खालिद पर हुए कथित हमले की शेहला ने कड़ी आलोचना की थी। इसके बाद से उन्हें धमकियां मिलने लगी थीं। दरअसल, सोमवार को उमर खालिद ने दावा किया था कि उन पर हमला किया गया है। फिलहाल दिल्ली पुलिस उमर के दावों की जांच कर रही है। उमर यहां 'खौफ से आजादी' कार्यक्रम में शामिल होने आए थे। इस बीच पुलिस ने सीसीटीवी फुटेज से एक तस्वीर जारी की है, जिसमें एक शख्स कॉन्स्टिट्यूशन क्लब के पास विट्टलभाई मार्ग पर भागता दिखाई दे रहा है। हालांकि इस हमले में कितनी सच्चाई है और सीसीटीवी में दिख रहा शख्स कौन है, इसकी जांच की जा रही है।
कौन हैं शेहला रशीद?:-बता दें कि जेएनयू छात्रसंघ की पूर्व नेता शेहला रशीद जम्मू-कश्मीर के श्रीनगर की रहने वाली हैं। वे जेएनयू से पीएचडी कर रही हैं। वे 2016 में जेएनयू छात्रसंघ की उपाध्यक्ष चुनी गई थीं।
शेहला और विवाद
- हाल ही में शेहला रशीद का केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी को लेकर किए एक ट्वीट से विवाद खड़ा हो गया था। शेहला ने अपने इस ट्वीट में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ और केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी पर पीएम की हत्या की साजिश में शामिल होने का आरोप लगाया था, जिसके बाद अब गडकरी ने ट्वीट पर आपत्ति जताते हुए कानूनी कार्रवाई करने की बात कही थी। गडकरी के कानूनी कार्रवाई करने की चेतावनी के बाद शेहला ने इस ट्वीट को मजाकिया बता दिया।
- शेहला रशीद का नाम उस वक्त भी विवादों से घिरा रहा, जब जेएनयू में देशविरोधी नारे लगाने और अफजल गुरु व कश्मीर की आजादी की मांग के आरोपों में गिरफ्तार हुए जेएनयू छात्र संघ अध्यक्ष कन्हैया कुमार के पक्ष में वे खुलकर सामने आईं और लगातार केंद्र सरकार व भाजपा के खिलाफ बयानबाजी करती दिखीं।

नई दिल्ली। 15 अगस्त को भारत अपने स्वतंत्रता दिवस की 72वीं सालगिरह धूमधाम से मनाने जा रहा है। पूरे देश में स्वतंत्रता दिवस को लेकर देशभक्ति का एक जज्बा उमड़ रहा है। इस मौके पर देश के लिए मर मिटने वाले जवानों को सम्मानित भी किया जाएगा। इस बार स्तंवत्रता दिवस पर भारतीय सेना के राष्ट्रीय राइफल के शहीद जवान औरंगजेब और मेजर आदित्य कुमार को सम्मानित किया जाएगा इन दोनों ही जवानों को शौर्यचक्र देकर भारत सरकार सम्मानित करेगी।आपको बता दें कि भारतीय सेना के राष्ट्रीय रायफल के जवान औरंगजेब का पुलवामा से आतंकियों ने 14 जून को अपहरण कर लिया था। आतंकियों ने औरंगजेब का मरने से पहले का वीडियो भी जारी किया था। वो ईद की छुट्टी मनाने घर जा रहे थे। औरंगजेब के पिता हनीफ सेना से रिटायर्ड हैं। साल 2014 में आतंकियों ने औरंगजेब के चाचा को भी अगवा किया था बाद में उनकी हत्या कर दी थी। आतंकवादियों ने अपहरण कर लिया था, बाद में आतंकियों ने औरंगजेब को गोलियों से छलनी कर उनका शव पुलवामा जिले के गुस्सू इलाके में फेंक दिया था। औरंगजेब के चेहरे, गर्दन और सिर पर कई गोलियों के निशान मिले थे।वहीं गढ़वाल राइफल्स के मेजर आदित्य को भी शौर्य चक्र से सम्मानित किया जाएगा। आपको बता दें कि मेजर आदित्य ने जम्मू-कश्मीर के शोपियां में पत्थरबाजों की भीड़ पर कड़ी कार्वाई करते हुए उनपर फायरिंग करवा दी थी जिसको लेकर उनपर एफआइआर भी दर्ज की गई थी बाद में सुप्रीम कोर्ट के हस्तक्षेप करते हुए कहा था कि अगर मेजर आदित्य पर कार्रवाई होती है तो इससे सेना के कर्तव्य निर्वहन में और आर्मी जवानों के मनोबल पर असर पड़ेगा। उनकी वीरता के लिए उन्हें भी स्वतंत्रता दिवस के मौके पर शौर्य चक्र देकर सम्मानित किया जाएगा।

बिलासपुर। चुनौतियों को मात देने के लिए लगन और मेहनत जितनी जरूरी है, उससे भी अधिक जरूरी है एक बड़ी सोच। फिर चुनौती पेट भरने की हो तो संघर्ष और भी बड़ा हो जाता है। लेकिन सोच बड़ी हो तो तमाम संघर्ष अंत में छोटे पड़ जाते हैं। रायगढ़, छत्तीसगढ़ के तारापुर गांव में ऐसी ही बड़ी सोच लेकर बड़ी-बड़ी चुनौतियों को पार करने वाले युवा आइपीएस भोजराम पटेल की कहानी युवाओं को प्रेरणा देती है।माता निरक्षर और पिता प्राइमरी पास। जीविकोपार्जन के लिए दो बीघा जमीन के अतिरिक्त और कुछ नहीं। गांव के सरकारी स्कूल में पढ़े भोजराम ने इन चुनौतियों को स्वीकार किया। कुछ कर गुजरने का इरादा लेकर शिक्षा को सीढ़ी बनाने का प्रण लिया। संविदा शिक्षक बने। लेकिन यह मंजिल नहीं थी। आज वह आइपीएस अफसर बन चुके हैं। कहते हैं, मैंने गरीबी को करीब से देखा है। एक दौर था, जब पेट भरना सबसे बड़ी चुनौती थी। घर में अनाज न होता तो मां दाल या सब्जी में मिर्च अधिक डाल देती थीं, ताकि भूख कम लगे और कम भोजन में ही क्षुधा शांत हो जाए।गांव के जिस सरकारी स्कूल में पढ़ा, आज उसी स्कूल के बच्चों को पढ़ने में मदद करता हूं। उन्हें बताता हूं कि शिक्षा ही एकमात्र साधन है। भोजराम दुर्ग, छत्तीसगढ़ में बतौर सीएसपी के पद पर तैनात हैं। कहते हैं, माता-पिता महेशराम पटेल व लीलावती पटेल ने कम पढ़े-लिखे होने के बाद भी पढ़ाई का महत्व समझा और मुझे पढ़ने के लिए प्रेरित किया।स्कूल में पढ़ाई के दौरान भोजराम अपने माता-पिता के साथ खेतों में भी हाथ बंटाते थे। कॉलेज की पढ़ाई के बाद शिक्षाकर्मी वर्ग-दो के पद पर चयन हुआ। तब शिक्षक बनकर उन्होंने मिडिल स्कूल में अध्यापन किया और स्कूल से अवकाश के बाद सिविल सेवा परीक्षा की पढ़ाई पर फोकस किया। माता-पिता की मेहनत व बेटे की लगन काम आई और फिर यह उपलब्धि हाथ लगी। अपने व्यस्त सेवाकाल से समय निकालकर वह स्कूल में आकर बच्चों को समय देते हैं। स्कूल के प्रति इसे अपना कर्ज मानकर बच्चों व गांव के युवाओं को करियर में आगे बढ़ने का सक्सेस मंत्र भी दे रहे हैं।

नई दिल्ली। अपनी फिल्मों से सामाजिक संदेश देने वाले मशहूर फिल्म अभिनेता अक्षय कुमार अब आपको ट्रैफिक पुलिस की वर्दी में 'सड़क सुरक्षा, जीवन रक्षा' का संदेश देते नजर आएंगे। अक्षय कुमार ने मंगलवार को दिल्ली के ली मैरेडियन होटल में केंद्रीय सड़क परिवहन एंव राजमार्ग मंत्री नीतिन गड़करी के साथ 'सड़क सुरक्षा, जीवन रक्षा' जागरूकता अभियान की शुरूआत की है। केंद्रीय सड़क परिवहन एंव राजमार्ग मंत्रालय ने इस अभियान के लिए अक्षय कुमार को ब्रांड एम्बेसडर बनाया है।मंगलवार को आयोजित अभियान के उद्घाटन समारोह में नीतिन गड़करी और अक्षय कुमार ने 'सड़क सुरक्षा, जीवन रक्षा' अभियान के तहत बनाई गई तीनों लघु फिल्मों को रिलीज किया। तीनों लघु फिल्मों में अक्षय कुमार ने ट्रैफिक पुलिसकर्मी की भूमिका निभाई है। वीडियो में वह पुलिस की यूनिफार्म में अपने चिर-परिचित अंदाज में लोगों को यातायात नियमों के प्रति जागरूक करते दिख रहे हैं। लोकार्पण कार्यक्रम में अक्षय कुमार व नितिन गड़करी के साथ राज्यमंत्री मनसुख लाल मांडविया भी मौजूद रहे। मालूम हो कि अक्षय कुमार इससे पहले भी मुंबई पुलिस के सड़क सुरक्षा अभियान का चेहरा बन चुके हैं।इस मौके पर नितिन गड़करी ने कहा कि हमारा लक्ष्य देश में होने वाली सड़क दुर्घटनाओं में कमी लाना है। हमें उम्मीद है कि लोगों के पसंदीदा अभिनेता अक्षय कुमार के इस अभियान से जुड़ने के बाद सड़क सुरक्षा को लेकर जागरूकता बढ़ेगी।वहीं अक्षय कुमार का कहना है कि जैसे ही उन्हें हर वर्ष देश में होने वाले सड़क हादसों और उसके शिकार लोगों के आंकड़ों का पता चला वह हैरान रह गए। और उन्होंने तुरंत इस जागरूकता अभियान से जुड़ने का फैसला कर लिया।
अक्षय ने लोगों को ‘सड़क सुरक्षा’ का पढ़ाया पाठ:-जागरूकता अभियान के लिए बनाए गए हर एक एड में अक्षय कुमार रास्ते पर लगे एक बोर्ड की तरफ इशारा करते हुए गाड़ी रुकवाकर लोगों से कहते हैं कि ये रास्ता आपके बाप का है, जिस पर लोग जवाब देते हैं नहीं ये रास्ता मेरे बाप का नहीं है। और फिर अक्षय चालान काटकर उन्हें देते हैं। और फिर सड़क सुरक्षा के बारे में लोगों को जानकारी देते हैं। जागरूता अभियान के लिए तैयार किए गए तीनों वीडियो को अक्षय ने मंगलवार दोपहर अपने ट्वीटर हैंडल से शेयर किया है।एक ट्वीट में वह कह रहे हैं कि अपनी और दूसरों की सुरक्षा के लिए ट्रैफिक नियमों का पालन करें, क्योंकि रोड किसी के बाप की नहीं। दूसरे वीडियो संदेश में वह कह रहे हैं कि माफी मांगने से सुरक्षित चलना हमेशा बेहतर होता है। तीसरे वीडियो के जरिए उन्होंने संदेश दिया है कि कभी न पहुंचने से अच्छा है कि देरी से पहुंचे। तीनों वीडियो संदेश के साथ अक्षय ने पंच लाइन के तौर पर कहते हैं कि अपनी और दूसरों की सुरक्षा के लिए ट्रैफिक नियमों का पालन करें, क्योंकि रोड किसी के बाप की नहीं है।

 

पुणे। महाराष्ट्र के पुणे में सबसे पुराने बैंक कॉसमॉस को-ऑपरेटिव बैंक में साइबर अटैक कर करोड़ों रुपये विदेशी बैंक के खातों में ट्रांसफर कर दिए गए। यह साइबर अटैक बैंक के गणेशखंड रोड स्थित मुख्यालय में किया गया है। हैकर्स ने बैंक से दो बार में 94 करोड़ रुपए विदेश के बैंक खातों में ट्रांसफर किए हैं। मामले में बैंक की ओर से पुणे के चतुशृंगी थाने में रिपोर्ट दर्ज कराई गई है। रिपोर्ट के अनुसार, हैकर्स ने इस अटैक को दो बार में अंजाम दिया है। पहली बार 11 अगस्त को और दूसरी बार 13 अगस्त को पैसे ट्रांसफर किए गए।कॉसमॉस बैंक के मुख्यालय में 11 अगस्त की दोपहर 3 बजे से रात 10 बजे और 13 अगस्त की 11:30 बजे साइबर हमला किया गया है। साइबर अपराधियों ने बैंक सर्वर हैक कर 15 हजार से भी जयादा ट्रांजेक्शन किए। बैंक की ओर से पुलिस को दी गई सूचना के अनुसार हैकर्स ने कॉसमॉस को-ऑपरेटिव बैंक के मुख्यालय के एटीएम को निशाना बनाया। बैंक के अधिकारियों का कहना है कि हैकर्स ने 80.5 करोड़ रुपए डेबिट कार्ड से, 14849 ट्रांजेक्शन के जरिए और 13.9 करोड़ रुपए स्विफ्ट ट्रांजेक्शन के जरिए विदेशी खातों में ट्रांसफर किए हैं। पुलिस और साइबर क्राइम सेल की अलग-अलग टीमें मामले की जांच में जुट गई हैं।बैंक अधिकारियों के अनुसार हैकर्स ने मालवेयर अटैक के जरिए घटना को अंजाम दिया है। हैकर्स ने पहले मालवेयर अटैक के जरिए ग्राहकों के डेबिट कार्ड्स का डाटा चुरा लिया। डाटा मिलने के बाद अपराधियों ने घटना को अंजाम दिया। बैंक के शीर्ष अधिकारियों के अनुसार प्रेस कॉन्फ्रेंस में पूरी घटना की जानकारी दी जाएगी। गौरतलब है कि कॉसमॉस बैंक भारत के पुराने सहकारी बैंकों में से एक है। कॉसमॉस बैंक की स्थापना सन 1906 में हुई थी।

 

 

 

 

नई दिल्ली। मुख्य सचिव अंशु प्रकाश के साथ हुई मारपीट के मामले में पुलिस की ओर से दाखिल किया गया आरोप पत्र आम आदमी पार्टी के साथ केजरीवाल सरकार के लिए भी गले की फांस बन सकता है। चार्जशीट के बाद एक पुलिस अधिकारी ने बताया कि वीके जैन ने अपने बयान में कहा था कि विधायक अमानतुल्लाह खान व प्रकाश जारवाल ने मुख्य सचिव का गला दबाकर सात थप्पड़ व घूंसे मारे थे।
केजरीवाल के करीबी देंगे उनके खिलाफ गवाही:-आरोप पत्र का मूल आधार सेवानिवृत्त आइएएस अधिकारी वीके जैन का बयान है। वीके जैन के अलावा सीएम अरविंद केजरीवाल के करीबी ही उनके लिए मुश्किल हालात पैदा कर चुके हैं।उत्तरी दिल्ली के एडिशनल डीसीपी हरेंदर सिंह के मुताबिक, वीके जैन ने मुख्यमंत्री केजरीवाल के खिलाफ बयान दिया है। पुलिस ने वीके जैन को सरकारी गवाह बनाया है।
वीके जैन ने फोन कर अंशु प्रकाश को बुलाया था;-चार्जशीट के मुताबिक, वीके जैन के माध्यम से ही केजरीवाल ने मुख्य सचिव को 19 फरवरी की सुबह से देर रात तक बार-बार फोन करवाकर बैठक के बहाने अपने आवास पर बुलवाया था। मुख्य सचिव के मोबाइल की कॉल डिटेल निकलवाकर उसे भी आरोप पत्र में रखा गया है।घटना के दूसरे दिन 21 फरवरी की सुबह सिविल लाइंस थाना पुलिस ने वीके जैन से थाने में बुलाकर पूछताछ की थी। इसके बाद पुलिस ने 22 फरवरी को मजिस्ट्रेट के सामने बंद कमरे में उनका बयान दर्ज करवा दिया था। बयान में उन्होंने घटना की पूरी सत्यता उजागर कर दी थी। तभी पुलिस ने उन्हें केस का मुख्य चश्मदीद गवाह बना लिया था।पुलिस अधिकारी के अनुसार, प्रोटोकॉल के तहत मुख्य सचिव से केवल मुख्यमंत्री व उपमुख्यमंत्री ही पूछताछ कर सकते हैं और उन्हें बैठक के लिए बुला सकते हैं, लेकिन इस केस में मुख्य सचिव को बुलाने के बाद केजरीवाल ने उन्हें विधायकों के सवालों के जवाब देने को कहा था। ऐसा करना भी नियम के खिलाफ था। उन्हें सोफे पर दो विधायकों के बीच में बैठाना भी गलत था। इन सब बातों को भी आरोप पत्र में रखा गया है।
वीके जैन को छोड़ किसी ने स्वीकार नहीं की थी मुख्य सचिव से मारपीट की बात:-मुख्य सचिव के साथ मारपीट मामले में दिल्ली पुलिस ने 25 से ज्यादा लोगों से पूछताछ की थी। सबसे पहले मुख्यमंत्री के आवास पर हुई कथित बैठक में मौजूद रहे आप के 11 विधायकों और मुख्यमंत्री के तत्कालीन सलाहकार वीके जैन से पूछताछ की गई थी। इसके बाद मुख्यमंत्री व उपमुख्यमंत्री, मुख्यमंत्री के निजी सचिव विभव कुमार, मुख्यमंत्री आवास पर रहने वाले आप कार्यकर्ता, मुख्य सचिव के चालक व पीएसओ से पूछताछ की गई थी, लेकिन वीके जैन को छोड़कर सभी ने मुख्य सचिव से मारपीट की बात से इन्कार किया था, जबकि मेडिकल रिपोर्ट में मारपीट की पुष्टि हो गई थी।
एफएसएल की रिपोर्ट का भी जिक्र:-मुख्य सचिव अंशु प्रकाश के साथ हुई बदसुलूकी व मारपीट की घटना के अगले दिन 20 फरवरी को पुलिस ने मुख्यमंत्री कार्यालय से संपर्क कर जांच के लिए सीसीटीवी कैमरे का डीवीआर (डिजिटल वीडियो रिकार्डस) देने की मांग की थी। कोई जवाब नहीं आने पर 23 फरवरी को मुख्यमंत्री आवास पहुंची पुलिस की टीम ने उस कमरे की जांच की थी जिसमें मुख्य सचिव की पिटाई की गई थी। जांच के दौरान पता चला था कि उस कमरे में सीसीटीवी कैमरा नहीं है। पुलिस टीम ने मुख्यमंत्री आवास में लगे अन्य सीसीटीवी कैमरों के डीवीआर की जांच की थी तो इनकी टाइमिंग 40 मिनट 42 सेकेंड पीछे मिली थी। मुख्यमंत्री आवास में कुल 21 सीसीटीवी कैमरे लगे थे, जिनमें सात खराब पाए गए थे। 14 कैमरे ठीक थे, जिनके डीवीआर जब्त कर पुलिस ने जांच के लिए रोहिणी स्थित फोरेंसिक साइंस लैब (एफएसएल) में भेज दिया था। पुलिस को शक था कि घटना को अंजाम देने से पूर्व जानबूझकर कैमरे की टाइमिंग और डीवीआर के साथ छेड़छाड़ की गई है। सवा चार महीने बाद एफएसएल की रिपोर्ट आई तो उसमें केवल इतना बताया गया था कि कैमरे की टाइमिंग 40 मिनट 42 सेकेंड पीछे थी। उनके साथ छेड़छाड़ की गई थी या नहीं, कब टाइमिंग पीछे सेट की गई, इसकी कोई जानकारी नहीं दी गई। लिहाजा, पुलिस ने आरोप पत्र में इसको भी रखा है।
लगीं 13 धाराएं, अधिकतम सात साल सजा का प्रावधान:-दिल्ली पुलिस ने मुख्यमंत्री, उपमुख्यमंत्री समेत 13 विधायकों पर भारतीय दंड संहिता (आइपीसी) की 13 धाराओं के तहत आरोप पत्र दायर किया है। इन धाराओं के तहत अधिकतम सात साल सजा का प्रावधान है। वारदात के समय पुलिस ने आठ धाराएं ही लगाई थीं, लेकिन जांच के बाद आरोप पत्र में पांच अन्य धाराएं भी जोड़ दी गईं। इनमें कई धाराएं गैर जमानती हैं। बावजूद इसके पुलिस ने मुख्यमंत्री व उपमुख्यमंत्री समेत नौ अन्य विधायकों को मामले में गिरफ्तार किए बगैर ही आरोप पत्र दायर कर दिया है। पुलिस अब कोर्ट से निर्देश मिलने के बाद 11 आरोपितों को गिरफ्तार करेगी।
AAP का आरोप, मुख्य सचिव ने रचा षड्यंत्र:-मुख्य सचिव से मारपीट मामले में दिल्ली पुलिस द्वारा कोर्ट में आरोप पत्र दाखिल करने के बाद आम आदमी पार्टी (आप) ने मुख्य सचिव पर आरोपों की झड़ी लगा दी है। आप के मुख्य प्रवक्ता सौरभ भारद्वाज ने कहा है कि मुख्य सचिव अंशु प्रकाश लंबे समय से भाजपा के वरिष्ठ नेताओं से जुड़े रहे हैं। दिल्ली की चुनी हुई सरकार को अस्थिर करने के लिए ही उनको दिल्ली में तैनात किया गया। मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल को बदनाम करने और चुनी हुई सरकार को अस्थिर करने का यह षड्यंत्र 19 फरवरी 2018 की रात को उपराज्यपाल के निवास पर रचा गया। मुख्य सचिव अंशु प्रकाश, उपराज्यपाल अनिल बैजल और वरिष्ठ पुलिस अफसर की मौजूदगी में पीएमओ के इशारे पर यह षड्यंत्र रचा गया।

चेन्नई। थूथुकुडी पुलिस फायरिंग मामले में तमिलनाडु सरकार को बड़ा झटका लगा है। मद्रास हाईकोर्ट ने मामले की जांच सीबीआइ को सौंपने का आदेश दिया है। 22 मई को तमिलनाडु के थूथुकुडी जिले में हुई पुलिस फायरिंग में 13 एंटी- स्टरलाइट प्रदर्शनकारियों की मौत हो गई थी।न्यायमूर्ति सीटी सेल्वम और ए एम बशीर अहमद की खंडपीठ ने राष्ट्रीय सुरक्षा अधिनियम के तहत पुलिस फायरिंग और प्रदर्शनकारियों की हिरासत के खिलाफ दायर याचिकाओं पर सुनवाई के दौरान यह आदेश दिया। बता दें कि बेंच ने मद्रास हाईकोर्ट की मुख्य पीठ को ऑर्डर पास कर दिया। अदालत ने मूल रूप से एक अगस्त को अदालत के मदुरै खंडपीठ में अपना आदेश आरक्षित कर दिया था।हालिया सुनवाई के दौरान कोर्ट के दिशा-निर्देश अनुसार राज्य सरकार ने पुलिस केस डायरी और समीक्षा समिति की बैठकों के सभी पहलुओं को अदालत में पेश किया और दोहराया कि सीआरपीसी की धारा 144 के तहत जारी किए गए आदेश का उल्लंघन करने की वजह से आंदोलनकारियों को नियंत्रित करने के लिए पुलिस फायरिंग हुई थी। इसके अलावा अधिकारियों ने खुफिया रिपोर्ट, पुलिस स्थायी आदेश और ड्रिल मैनुअल की कॉपी भी अदालत में पेश की।अदालत में पेश सभी पहलुओं को समझने के बाद खंडपीठ ने राष्ट्रीय सुरक्षा अधिनियम के तहत छह लोगों की हिरासत को रद करने का आदेश सुनाया। पीठ ने कहा कि पुलिस शूटिंग से संबंधित सभी मामलों की जांच सीबीआइ द्वारा कराई जाएगी।गौरतलब है कि तमिलनाडु के थूथुकुडी जिले में वेदांता स्टरलाइट तांबा संयंत्र के खिलाफ चल रहा प्रदर्शन 22 मई को हिंसक को गया। हिंसा पर उतारू प्रदर्शनकारियों को नियंत्रित करने के लिए पुलिस ने गोली चलाईं, जिसमें 13 लोगों की मौत हो गई, जबकि कई अन्य घायल हो गए।

अहमदाबाद। देश को खुले में शौच से मुक्त करने के लिए तौ शौचालय जरूरी है ही, तकनीक के साथ इसका उपयोग हो तो खाना पकाने के लिए इंधन भी यही मुहैया करा सकता है। गांधी आश्रम के बगल में बने सफाई विद्यालय में यह प्रयोग वषरें से चल रहा है। इसके किचन का सारा काम यहां बने दीनबंधू बायोगैस प्लांट से निकली मीथेन गैस से होता है, रोशनी का प्रबंध भी इससे हो सकता है।आश्रम रोड पर बने गांधी आश्रम में देश व दुनिया के लोग आते हैं लेकिन इसी से सटे सफाई विद्यालय के बारे में कम लोगों को जानकारी है। यहां स्वच्छता, सफाई व मानव शरीर से निकले अपशिष्ट को रिसायकल कर कार्बनिक खाद बनाने, बायोगैस प्लांट से गैस बनाने व स्वच्छता अभियान से जुडे विविध परियोजनाओं पर काम चल रहा है। छह लोगों का परिवार हो तथा दो पालतु पशु हों तो घर में बने शौचालय से ही रसोई गैस का पूरा इंतजाम हो सकता है। प्लांट लगाने में 60-70 हजार रुपये लगते हैं। सामान्य भाषा में इस प्लांट से निकली गैस को टट्टी गैस कहते हैं जो एलपीजी की तरह ही रसोई में खाना पकाती है। इसी के साथ पेट्रोमेक्स के लेम्प को जोडकर रोशनी भी की जा सकती है। मजे की बात यह भी है कि सुलभ शौचालय में आपको शौच जाने के लिए 5 रु देने पडते हैं पर यहां शौच करने के बाद आपको 5 रु मिलते हैं।महात्मा गांधी जी के करीबी परीक्षित मजमूदार,अप्पा पटवर्धन व ईश्र्वर भाई पटेल ने वर्ष 1963 में यह काम शुरु किया था, सफाई विद्यालय के संचालन का काम पिछले ढाई दशक से ईश्र्वर भाई के पुत्र जयेश पटेल देख रहे हैं। जयेश पटेल बताते हैं कि व्यक्ति का शरीर अपने आप में एक फर्टीलाइजर कंपनी है, शरीर से निकलने वाले मल को रिसायकल कर खाद व गैस बनाई जा सकती है।चेम्बर में मल के साथ फल,सब्जी व चाय पत्ती डालनी पडती है यदि गोबर डाला जाए तो और भी अच्छा रहेगा। उत्तर गुजरात व सौराष्ट्र में 20 हजार बायोगैस टॉयलेट बनाए गए हैं। 1963 से अब तक इस संस्था के जरिए साढे तीन लाख लोगों को प्रशिक्षित किया जा चुका है। आश्रम शाला, ग्राम भारती व सुघड संस्था में भी इसी तरह का बायोगैस प्लांट कार्यरत है। उनका कहना है कि देश में मन की शुद्वि के लिए टेम्पल जरूरी है तो शरीर की शुद्वी के लिए टॉयलेट भी जरूरी है।

मेरठ। 23 नवंबर, 1946। समूचा देश आजाद भारत में सांस लेने को व्याकुल था। इधर, मेरठ, उत्तर प्रदेश के विक्टोरिया पार्क मैदान में कांग्रेस का 55वां अधिवेशन शुरू होने जा रहा था। पंडित जवाहर लाल नेहरू, सरदार बल्लभ भाई पटेल, आचार्य जेबी कृपलानी, सिद्धरमैया और शाहनवाज खान जैसे रणनीतिकारों ने चार दिनों तक गहन चिंतन-मंथन के बाद राजनीतिक प्रस्ताव पास किया और घोषणा हुई कि अब कांग्रेस का अगला अधिवेशन आजाद भारत में होगा... हुआ भी ऐसा ही।
गांधी नहीं आ सके थे:-विक्टोरिया पार्क में आजादी से पहले हुए कांग्रेस के अंतिम अधिवेशन में सभी राजनीतिज्ञों को आभास हो गया था कि आजादी अब दूर नहीं। मेरठ में आयोजित इस अधिवेशन में महात्मा गांधी शामिल नहीं हो सके थे क्योंकि वे पूर्वी बंगाल के नौखाली में फैली अशांति को शांत करने में जुटे थे।
चंदे में चवन्नी, पहुंचे थे 20 हजार:-अधिवेशन में देशभर से करीब 20 हजार लोग पहुंचे थे। कुछ ही दूरी पर तंबुओं की उपनगरी बसाई गई थी। जहां आज शर्मा नगर है। इस अधिवेशन में चंदे के रूप में 25 पैसे (चवन्नी) प्रत्येक सदस्य से लिए जाते थे।
प्रथम स्वाधीनता संग्राम का गवाह:-विक्टोरिया पार्क की गाथा 1857 के गदर से भी जुड़ती है। चमड़ी लगे कारतूस का विरोध करने वाले 85 भारतीय सैनिकों को कोर्ट मार्शल की कार्रवाई के बाद यहीं स्थित जेल में लाया गया था। बाद में शहरभर में क्रांति फूटने के बाद भारतीय सिपाहियों के साथी यहां पहुंचे और जेल तोड़कर सभी 85 सैनिकों को छुड़ा ले गए। इसके बाद ही दिल्ली कूच किया गया।
फहराया गया था तिरंगा:-23 नवंबर 1946 में आजादी के पहले मेरठ के विक्टोरिया पार्क में आयोजित कांग्रेस अधिवेशन के दौरान गुलामी के बावजूद आचार्य कृपलानी की अगुवाई में तिरंगा फहराया गया था। यह झंडा हस्तिनापुर निवासी देव नागर के पास धरोहर के रूप में रखा गया। जिस स्तंभ पर तिरंगा फहराया गया, वह आज भी मैदान के बीचोबीच सीना ताने खड़ा है।
मेरठ से हुईं तीन घोषणाएं
- आजाद भारत ऐसा होगा, जिसकी संसद में माफिया व बाहुबलियों को कोई जगह नहीं मिलेगी।
- लोकतंत्र में किसी एक परिवार के हाथों में सत्ता नहीं होगी। जाति-धर्म के आधार पर मतदान नहीं होगा।
- न्याय मिलने में देरी नहीं होगी, आम आदमी को सरल और सुलभ न्याय मिलेगा

 

 

 

बेंगलुरु। चंद्रयान-2 का प्रक्षेपण अब अगले साल जनवरी से मार्च के बीच किया जाएगा। पहले इसका प्रक्षेपण अक्टूबर में होना था, लेकिन डिजाइन में बदलाव के चलते इसे टाल दिया गया था। वहीं, भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) अगले साल 22 उपग्रहों को अंतरिक्ष में भेजने जा रहा है। इसरो प्रमुख डॉ. के. शिवन ने यह जानकारी दी है।
तीन जनवरी को प्रक्षेपण की योजना:-उन्होंने कहा, ‘हमारी योजना तीन जनवरी को चंद्रयान-2 के प्रक्षेपण की है। हम इसी तारीख को ध्यान में रखकर तैयारी कर रहे हैं, लेकिन प्रक्षेपण मार्च तक भी जा सकता है। यह स्थिति पर निर्भर करेगा।’ अक्टूबर में प्रक्षेपण टालने के संबंध में डॉ. शिवन ने कहा कि यह चंद्रमा की सतह पर आसानी से उतर सके, इसके लिए इसके डिजाइन में बदलाव किया गया था। इसके चलते प्रक्षेपण के समय में बदलाव किया गया है।
बढ़ाया गया 600 किलो वजन:-चंद्रयान-2 का वजन 600 किलो बढ़ाने के संदर्भ में इसरो प्रमुख का कहना था कि कई परीक्षणों के दौरान यह देखा गया कि मून लैंडर जब निकलता है तो उपग्रह हिल जाता है। इसको ध्यान में रखते हुए इसकी सुरक्षित लैंडिंग के लिए इसका वजन बढ़ाना पड़ा।
तीन वर्षो में होगा 50 सेटेलाइट का प्रक्षेपण:-इसरो चेयरमैन ने बताया, ‘अगले तीन वर्षो के दौरान हम 50 सेटेलाइट लांच करने जा रहे हैं। 22 उपग्रह तो हम सिर्फ अगले साल ही लांच करेंगे। हो सकता है कि हम इस लक्ष्य को हासिल नहीं कर सकें, लेकिन हमारी तैयारी इसी को ध्यान में रखकर की जा रही है।’ डॉ. के. शिवन के अनुसार, वर्ष 2018 के बाकी बचे महीनों में भी इसरो बहुत व्यस्त रहेगा। उसने हर महीने दो उपग्रह अंतरिक्ष में भेजने का लक्ष्य तय किया है।सितंबर में इसरो पीएसएलवी सी-42 का प्रक्षेपण करेगा। इसके माध्यम से नोवासेट और एस 1-4 सेटेलाइट लांच किए जाएंगे।
टीवी चैनल भी लाने की तैयारी:-लोगों में वैज्ञानिक गतिविधियों को बढ़ावा देने और स्कूली छात्रों को प्रशिक्षित करने के लिहाज से इसरो टीवी चैनल लांच करने जा रहा है। इस संबंध में चेयरमैन डॉ. के. शिवन ने बताया कि हमारे पास कोई विज्ञान टीवी चैनल नहीं है। यह चैनल लोगों के बीच वैज्ञानिक समझ पैदा करेगा।
कम लागत के एसएसएलवी रॉकेट बना रहा इसरो:-लागत में कटौती और मांग को ध्यान रखते हुए इसरो स्माल सेटेलाइट लांच व्हीकल (एसएसएलवी) रॉकेट बना रहा है। इसके माध्यम से पेलोड को मात्र तीन दिनों में लांच किया जा सकता है। इसको बनाने में भी तीन से छह लोगों की जरूरत पड़ती है। इसरो चेयरमैन डॉ. के. शिवन ने बताया कि पीएसएलवी के मुकाबले यह 10 गुना सस्ता होगा। यह 500 से 700 किलो पेलोड ले जाने में सक्षम होगा। इसकी लंबाई 34 मीटर होगी, जबकि व्यास दो मीटर होगा। वहीं, इसे मांग के आधार पर तैयार किया जा सकता है। इसका डिजाइन तैयार है। अगले साल मई या जून में इससे उड़ान संभव हो सकेगी।
चंद्रयान-2 इसरो के लिए एक बहुत बड़ा मिशन:-बता दें कि चंद्रयान-1 और मंगलयान मिशन के बाद चंद्रयान-2 इसरो के लिए एक बहुत बड़ा मिशन है। इसरो कोई भी जोखिम नहीं लेना चाहते है। ऐसे में अब चंद्रयान-2 मिशन को जनवरी में रवाना किया जाएगा। अप्रैल में उन्होंने सरकार को अक्टूबर-नवंबर में होने वाले प्रक्षेपण को टालने की सूचना दी थी। चंद्रयान-2 की समीक्षा करने वाली एक राष्ट्रीय स्तर की समिति ने इस मिशन से पहले कुछ अतिरिक्त परीक्षण की सिफारिश की थी। चंद्रयान-2 को सबसे पहले अप्रैल में ही पृथ्वी से रवाना किया जाना था।
इसरो के लिए था बड़ा धक्का:-इससे पहले इसरो एक साल के भीतर दो बड़ी असफलताओं को झेल चुका है। इस साल की शुरुआत में इसरो ने सैन्य उपग्रह जीएसएटी-6ए प्रक्षेपित किया था, लेकिन इस उपग्रह के साथ इसरो का संपर्क टूट गया था। इसके बाद इसरो ने फ्रेंच गुयाना से प्रक्षेपित होने वाले जीएसएटी-11 के प्रक्षेपण को यह कहते हुए टाल दिया था कि इसकी कुछ अतिरिक्त तकनीकी जांच की जाएगी।पिछले साल सितंबर में आइआरएनएसएस-1एच नौवहन उपग्रह को लेकर जा रहे पीएसएलवी-सी-39 मिशन अभियान भी असफल रहा था, क्योंकि इसका हीट शील्ड नहीं खुलने की वजह से उपग्रह नहीं छोड़ा जा सका।

 

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