दुनिया

दुनिया (2822)

एक 10 साल की बच्ची ने ऐसा कमाल कर दिया है कि वह पूरी दुनिया में मशहूर हो गई है। स्वीडन की रहने वाली इंद्रा लुंक्विस्ट ने वेट लिफ्टिंग में 65 किलो का वजन उठाकर एक वर्ल्ड रिकॉर्ड बनाया है। बताया जा रहा है इंद्रा 70 किलो वजन उठाने की तैयारी में है। वेटलिफ्टिंग की सारी ट्रेनिंग इंद्रा को उसके पिता डेनियल लुंक्विस्ट देते हैं। सात वर्ष की उम्र से ही वह इसकी ट्रेनिंग ले रही है। उसके पिता डेनियल खुद एक पावर लिप्टर और फिजियोथेरेपिस्ट है।इंद्रा का कहना है कि वह दुनिया की सबसे मजबूत लड़की बनना चाहती है। वर्ल्ड कप के साथ-साथ कई अन्य पुरस्कार जीतना चाहती है। इंद्रा के इंस्टाग्राम पर करीब 4600 फॉलोअर हैं। इंद्रा पॉवरलिफ्टर इजाबेल को अपना आदर्श मानती हैं। इजाबेल का वजन 72 किलोग्राम है और उसने 212 किलोग्राम तक वेटलिफ्टिंग का रिकॉर्ड बनाया है, जो उसके वजन से तीन गुणा ज्यादा है।65 किलोग्राम वेटलिफ्टिंग के अलावा इंद्रा के और भी रिकॉर्ड हैं। बैठकर भार उठाने में उसका रिकॉर्ड 55 किलोग्राम है और बेंचप्रेस में इंदिरा का रिकॉर्ड 30 किलोग्राम तक है।

कुछ दिनों पहले ही दुनियाभर में चंद्रमा अपने सबसे बड़े रूप में देखा गया था जिसे 'सुपरमून कहा जाता है। अब पूरी दुनिया को फिर एक बार आसमान में ऐसा ही अनोखा नजारा देखने को मिलेगी जिसे 'तारों की बारिश' बोला जा सकता है।दरअसल आसमान में होने वाली ये प्रक्रिया 'Geminid' कहलाती है, जिसमें कई तारे और उल्का (meteor) एक झुंड में जमीन पर बरसते हुए दिखाई देते हैं। इसे 'Geminid meteor shower' के नाम से जाना जाता है। ये खूबसूरत नजारा 13 और 14 दिसंबर की रात को दुनिया के लगभग हर इलाके में देखा जा सकेगा।
हर साल होती है ऐसी बारिश
आपको बता दें कि उल्कापात या मीटियोर की ये बारिश एक सालना प्रक्रिया है। ये हर वर्ष दिसंबर के समय आसमान में साफ दिखाई देती है। वैज्ञानिकों ने बताया कि इस बार 13 और 14 तारीख को ये अपने चरम पर होगी। इसे विश्व के उत्तरी हिस्सों के सभी देशों में खुली आंखं से देखा जा सकेगा।
इस कारण से होती है 'तारों की बारिश'
दरअसल हर साल जब पृथ्वी '3200 Phaethon' नाम की पथरीली अंतरिक्ष वस्तु के पास से गुजरती है तो इसके आप-पास का कचरा पृथ्वी के वातारण में आने के कारण जल जाता है। जब अंतरिक्ष के कचरे के ऐसे कई छोटे-छोटे तत्व एकसाथ जलते हैं तो ये धरती पर आसमान से हो रही किसी चमकीली तारों की बारिश जैसे लगते हैं।
इस तरह देख सकते हैं आप ये नजारा
इस खूबसूरत नजारे को 13 और 14 दिसंबर की रात में आसमान में खुली आंखों से देखा जा सकता है। आपको बस रौशनी वाले इलाके से अलग हटकर अंधेरे में खड़े होकर आसमान की ओर देखना है। इसके अलावा अगर आपके इलाके में बादल छा जाएं तो आप नासा की वेबसाइट पर जाकर इस खूबसूरत नजारे को लाइव देख सकते हैं।

इंजीनियरों ने एक ऐसा स्पेस सूट बनाया है जो अंतरिक्ष वैज्ञानिकों को स्पेस में खो जाने से बचा लेगा। इस सूट की खास बात ये है कि इसमें एक ऐसा बटन दिया है जिसे दबाने के बाद अंतरिक्ष में मौजूद लोग अपने आप अपने स्पेस स्टेशन पहुंच जाएंगे।
ऐसे काम करता है ये सूट
वैज्ञानिकों के लिए उपकरण बनाने वाली कंपनी 'Draper'ने दावा किया है कि उनका स्पेस सूट बिना किसी की मदद के अपने आप अंतरिक्ष में मौजूद शख्स को स्पेस स्टेशन तक पहुंचा देगा। इसके चलते अंतरिक्ष में अगर कोई वैज्ञानिक खो जाए तो वो घर लौटने की उम्मीद कर सकता है। दरअसल इस सूट में एक बटन लगा है जिसे दबाने के बाद वो टीम के बाकी साथियों की लोकेशन और उनका मूवमेंट ट्रैक कर लेता है, जिसके बाद वो दल से भटक गए एस्ट्रोनॉट को वापस स्पेस स्टेशन की ओर ले जाता है। इसके फीचर की खास बात ये है कि इसे सूट पहने हुए शख्स के अलावा धरती पर स्पेस स्टेशन में बैठे लोग भी एक्टिवेट कर सकते हैं।
सूट को बनाने में सामने आई कई दिक्कतें
इंजीनियरों ने कहा इस तरह के सूट के निर्माण में उन्हें काफी पेचीदा बातों का ध्यान रखना पड़ा। वापस लौटाने वाले इस सिस्टम के लिए GPS का इस्तेमाल होना संभव नहीं था क्योंकि स्पेस में ये सिस्टम लोकेशन ढूंढने में काम नहीं करता। इसी के चलते इंजीनीयरों को इस सूट में एक ऐसा रास्ता ढूंढने वाला सिस्टम फीड करना था जो समय, ऑक्सीजन की खपत, सुरक्षा जैसी जरूरी चीजों के हिसाब से हो। ड्रैपर कंपनी के इंजीनियर डॉ. केविन डुडा ने कहा, 'स्पेस में वैज्ञानिकों को रास्ता और लोकेशन समझने में काफी मुश्किल होती है क्योंकि वहां गुरुत्वाकर्षण नहीं होने के कारण आप ये नहीं बता सकते कि आप ऊपर जा रहे हैं या नीचे।'
पांच साल बाद आएगा ये सूट
डॉ. डुडा ने कहा, 'अंतरिक्ष में जाने वाले वैज्ञानिक हमेशा इस खतरे में जीते हैं कि अगर वो काम करते हुए स्पेस में भटक गए तो वो हमेशा के लिए अंतरिक्ष में खो जाएंगे। फिलहाल वैज्ञानिकों के लिए ये सूट कब तक आएगा इसे लेकर हमारे पास कोई डेट नहीं है। हम NASA के साथ मिलकर इस पर काम कर रहे हैं। हालांकि हमें उम्मीद है कि अगले 5-10 साल में ये सूट पूरी तरह इस्तेमाल के लिए तैयार होगा।'

नेपाल में हो रहे ऐतिहासिक प्रांतीय और संसदीय चुनाव में वामपंथी गठबंधन को अब तक घोषित 30 संसदीय सीटों के नतीजों में से कम से कम 26 सीटों पर जीत मिली है और वह विपक्षी पार्टी नेपाली कांग्रेस के खिलाफ बढ़त बनाए है। नेपाली कांग्रेस को सिर्फ तीन सीटों पर ही जीत हासिल हुई है। अधिकारियों ने शनिवार को यह जानकारी दी। नेकपा एमाले (सीपीएन-यूएमएल) ने 18 सीटें जीती जबकि उसके सहयोगी दल सीपीएन माओइस्ट सेंटर ने आठ सीटों पर जीत हासिल की। विपक्षी पार्टी नेपाली कांग्रेस ने तीन सीट पर जीत दर्ज की। वहीं एक स्वतंत्र उम्मीदवार को भी जीत हासिल हुई है।मतों की गणना में सीपीएन-यूएमएल 44 सीटों पर आगे चल रही है, जबकि सीपीएन माओइस्ट सेंटर 18 सीटों पर आगे है। नेपाली कांग्रेस 12 सीटों पर आगे है। संसदीय चुनाव के लिए कुल 1,663 उम्मीदवार जबकि राज्य विधानसभा चुनाव के लिए 2,819 उम्मीदवार मैदान में थे। कई लोगों को यह उम्मीद है कि इस ऐतिहासिक चुनाव से इस हिमालयी देश में राजनीतिक स्थिरता आएगी। इस चुनाव से संसद के लिए 128 सदस्यों और विधानसभा के लिए 256 सदस्यों का चुनाव होगा। राज्य और संघीय चुनाव के लिए दो चरणों में 26 नवंबर और 27 दिसंबर को मतदान आयोजित किया गया था।
72 घंटे तक बंद रहा इंडो नेपाल बॉर्डर
नेपाल में आयोजित हुए इस चुनाव को संघीय लोकतंत्र अपनाने की दिशा में अंतिम कदम माना जा रहा है। यह देश साल 2006 तक एक दशक तक चले गृहयुद्ध से गुजर चुका है। इस युद्ध ने 16,000 लोगों की जानें गईं। कई लोगों को आशा है कि नेपाल में पहली बार राज्य में हो रहे चुनाव से क्षेत्र का विकास तेजी से होगा। वहीं कई लोगों को आशंका है कि इससे ताजा हिंसा पैदा होगी। साल 2015 में नेपाल द्वारा संविधान स्वीकार किए जाने के बाद देश को सात राज्यों में बांटा गया था। इसके बाद क्षेत्र और अधिकार को लेकर हुई जातीय लड़ाई में दर्जनों लोगों की मौत हुई थी।
नेपाल चुनाव में पुलिस ने की 14 राउंड फायरिंग
नेपाल में नए संविधान स्वीकार किए जाने के बाद जातीय मधेसी समूह (ज्यादातर भारतीय मूल के हैं) ने कई महीनों तक विरोध प्रदर्शन किया था। समूह का कहना था कि उन्हें एक प्रांत में ज्यादा क्षेत्र नहीं दिया जा रहा है और वह भेदभाव का भी सामना कर रहे हैं। नए संविधान को लागू करने की दिशा में इस चुनाव का बड़े कदम के रूप में देखा जा रहा है।

 

 


बीजिंग - चीन ने जोर देकर कहा है कि परमाणु आपूर्तिकर्ता समूह (एनएसजी) में भारत की सदस्यता के विरोध पर उसके रुख में कोई बदलाव नहीं आया है। चीन का कहना है कि उसके प्रयास 48 सदस्यीय परमाणु क्लब में नए सदस्यों के प्रवेश को लेकर आम राय कायम करने के हैं।
चीन के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता गेंग शुआंग ने गुरुवार को अपना रुख रूस के उप विदेश मंत्री सर्गेई राबकोव के बयान की प्रतिक्रिया में दिया है। राबकोव ने विगत बुधवार को नई दिल्ली में बयान दिया था कि रूस एनएसजी में भारत की सदस्यता पर चीन से बात कर रहा है।
चीनी विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता गेंग शुआंग ने रूस के इसी बयान पर कहा कि चीन पारदर्शी तरीके से और उचित अंतरसरकारी प्रक्रिया के जरिए ही इस मुद्दे पर परामर्श कर रहा है। ताकि वह आम सहमति के लि एनएसजी के सिद्धांतों का पालन कर सके। उन्होंने कहा कि एनएसजी के प्रमुख सदस्य चीन ने प्रमुखता से भारत की सदस्यता का इसलिए विरोध कर रहा है क्योंकि भारत ने परमाणु अप्रसार संधि पर दस्तखत नहीं किए हैं। चीन के विरोध के चलते ही भारत का एनएसजी में प्रवेश मुश्किल हो गया है क्योंकि एनएसजी आम सहमति के सिद्धांत पर काम करता है।
उल्लेखनीय है कि एनएसजी की सदस्यता के लिए चीन का बार-बार भारत की राह में रोड़े अटकाना द्विपक्षीय संबंधों में बिगाड़ ला रहा है। परमाणु कारोबार पर नियंत्रण करने वाले एनएसजी की सदस्यता के लिए भारत के आवेदन करने के बाद चीन के सदाबहार साथी पाकिस्तान ने भी चीन की ही शह पर एनएसजी की सदस्यता के लिए आवेदन किया है।

 


लॉस एंजिल्‍स - अमेरिका के दक्षिण पश्चिमी प्रांत न्यू मेक्सिको में आज एक हाईस्कूल में गोलीबारी होने से दो किशोर मारे गए। पुलिस ने बताया कि हमलावर भी मारा गया। पुलिस ने ट्विटर पर बताया कि टना एज्टेक हाईस्कूल में हुई। घटना में किसी और के घायल होने की खबर नहीं है और इसकी जांच की जा रही है। सुरक्षा अधिकारी एज्टेक हाईस्कूल में तलाशी कर रहे हैं। पुलिस ने बताया कि मतकों के परिवारों को सूचित कर दिया गया है। इस घटना में करीब दर्जनभर लोग घायल हुए हैं।
एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में न्यू मैक्सिको के गर्वनर सुसान मार्टिनेज ने कहा कि वह इस बात की कल्पना भी नहीं कर सकती है कि बच्चे, स्टाफ और अध्यापकों की मानसिक हालत क्या होगी। उनका कहना था कि घटना से उबरने में कुछ समय लगेगा।

लंदन - यरुशलम को राजधानी बनाने के इजरायल के दावे पर मुहर लगाने वाले फैसले पर अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप अकेले पड़ते नजर आ रहे हैं। मुस्लिम जगत, संयुक्त राष्ट्र और यूरोपीय यूनियन ही नहीं अमेरिका के हर फैसले में साथ रहने वाले ब्रिटेन और सऊदी अरब के सुर भी बदले हुए हैं।ब्रिटेन ने कहा है कि ट्रंप के फैसले से शांति प्रयासों में सहायता नहीं मिलेगी तो सऊदी अरब…
बीजिंग - रूस ने भारत के साथ अपनी दोस्ती का उदाहरण पेश करते हुए परमाणु आपूर्तिकर्ता समूह की स्थायी सदस्यता का समर्थन किया है। इस मुद्दे पर चीन और पाकिस्तान को झटका देते हुए रूस ने भारत को एनएसजी समूह का स्थायी सदस्य बनाए जाने का समर्थन किया है। रूस ने साफ कहा कि एनएसजी की सदस्यता के लिए भारत की पाकिस्तान के साथ तुलना नहीं की जा सकती है।…
लंदन - अगर आपका बेटा दिनभर कमरे में खुद को बंद करके कंप्यूटर गेम्स खेलता रहता है तो आप उसके भविष्य को लेकर परेशान तो होते ही होंगे। लेकिन एक 26 साल के युवक ने ऑनलाइन गेम खेलकर जबरदस्त कमाई की है। डैन मिडलटन नामक युवक ने ऑनलाइन गेम्स के वीडियो बनाकर सोशल मीडिया वेबसाइट यूट्यूब पर अपलोड किए। इससे एक साल में उसकी कमाई 12.3 मिलियन ब्रिटिश पाउंड (…
गाजापट्टी - तेल अवीव स्थित अमेरिकी दूतावास को येरुशलम ले जाने की अमेरिकी घोषणा के बाद अलकायदा और इस्लामिक स्टेट ने अमेरिका पर हमले की धमकी दी है। आईएस की प्रोपगेंडा प्रैक्टिस के तौर पर बहुत सारे आईएस समर्थकों ने धमकी भरे ग्राफिक्स अंग्रेजी, अरबी और हिब्रू भाषाओं में पोस्ट की हैं। आतंकी संगठन अलकायदा ने मुसलमानों से ओसामा बिन लादेन और फलस्तीन नेताओं के बयान के साथ इस मुद्दे…
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