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आतंकी संगठन आईएस सोशल मीडिया के जरिए लोन वुल्फ हमलावर तैयार कर रहा है और कार को हथियार बनाकर हमले करने के लिए उन्हें भड़का रहा है। लंदन की संसद के बाहर हुआ हमला आईएस की इस योजना की एक बानगी भर है। जमीनी जंग हार रहे आईएस के पास आने वाले दिनों में तीन हथियार ही होंगे। सोशल मीडिया, लोन वुल्फ और कार या दूसरे वाहन।अमेरिकी मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक आईएस पिछले कई महीनों से अपनी ऑनलाइन पत्रिका के जरिए लोन वुल्फ आतंकियों को कार से हमले करने के लिए कह रहा है। इन ऑनलाइन मैग्जीन में वीडियो के जरिए कार से हमला करने, भीड़ वाली जगह चुनने की तरकीब बताई जाती है। लंदन में हुआ हमला आईएस की इसी पसंद की याद दिलाता है।

घातक है यह हथियार:-कार से होने वाले आतंकी हमले काफी घातक हैं क्योंकि इसके लिए आतंकी को कहीं ट्रेनिंग की जरूरत नहीं पड़ती है। ऐसे हमले रोकना भी काफी मुश्किल होता है।

वाहन से हुए बड़े आतंकी हमले

-दिसंबर, 2016 में बर्लिन में ट्यूनिशियन मूल के आतंकी ने क्रिसमस बाजार में ट्रक चढ़ा दी। हमले में 12 लोग मारे गए और 50 घायल हुए

-जुलाई, 2016 में ट्यूनिशिया के आतंकी ने फ्रांस के नीस में भीड़ पर ट्रक चढ़ाकर 86 लोगों को मार डाला। हमले में सैकड़ों लोग घायल भी हुए 

-नवंबर, 2016 सोमालिया के छात्र ने अमेरिका की ओहियो स्टेट यूनिवर्सिटी के छात्रों पर कार चढ़ा दी

फिलिस्तीनी आतंकियों ने सबसे ज्यादा किए वाहन से हमले:-वाहन का हथियार के रूप में इस्तेमाल आईएस ने शुरू नहीं किया था। दूसरे आतंकी संगठन भी ऐसे हमले करते रहे हैं। फिलिस्तीनी आतंकियों ने इजराइल में 48 से ज्यादा ऐसे हमले किए हैं। अलकायदा भी अरब में भीड़ पर वाहनों के जरिए हमले करता रहा है।

सीआईए ने किया अलर्ट:-सीआईए विश्लेषक पॉल पिलर ने अलर्ट करते हुए कहा कि आतंकी वाहनों के जरिए किसी भी शहर, गली की भीड़-भाड़ वाली जगह को निशाना बना सकते हैं। जगह ऐसे चुनी जाती है, जो धार्मिक या राजनीतिक रूप से दूसरे समूह के लोगों के लिए महत्वपूर्ण हों।

विश्व में ऊर्जा की समस्या को खत्म करने के लिए वैज्ञानिक काफी समय से कृत्रिम सूरज बनाने की कोशिश में थे। दो साल के कठोर प्रयास के बाद जर्मनी ने आखिरकार कृत्रिम सूरज बनाने में सफलता प्राप्त कर ली है। आज सूरज को सबके सामने लाया गया। इन दिनों रीन्युअल एनर्जी पर काफी जोर दिया जा रहा है। जर्मनी काफी समय से ही इसपर काम कर रहा था। इसलिए जर्मन स्पेस सेंटर ने एक कृत्रिम सूरज बनाया है। जैसे चीन ने कृत्रिम बारिश बनानकर महारथ हासिल की थी, ठीक उसी तरह जर्मनी कई सालों से इसपर शोध कर रहा था।कार्बन मुक्त बिजली बनाने के लिए परीक्षण की शुरुआत बहुत साल पहले ही हो गई थी। जर्मनी के परीक्षण सेंटर में हीलियम का इस्तेमाल करके पहला प्लाज्मा बनाया जा चुका है। परीक्षण कारखाने में शोधकर्ता सूरज की प्रक्रियाओं की तरह होने वाले नाभिकीय संलयन पर लंबे समय से शोध कर रहे थे ताकि उसका इस्तेमाल धरती पर ऊर्जा पैदा करने के लिए किया जा सके और आखिरकार इतने साल बाद 2017 के मार्च में इसको सफलता मिल गई है। वेंडेलश्टाइन 7एक्स टेस्ट संयंत्र दुनिया के सबसे बड़े संलयन (फ्यूज़न) टेस्ट संयंत्रों में से एक है। 2017 से वेंडेलश्टाइन संस्थान प्लाज्मा बनाने के लिए डॉयटेरियम का इस्तेमाल शुरू कर चुकी है। इस हाइड्रोजन आइसोटोप के इस्तेमाल से बिजली बनाने की प्रक्रिया के दौरान बहुत कम रेडियोएक्टिविटी उत्पन्न होती है।  जर्मनी के ग्राइफ्सवाल्ड शहर के रिएक्टर वेंडेलश्टाइन में 10 करोड़ डिग्री के तापमान पर परमाणु विस्फोट किया गया, जो पहले संभव नहीं था। इसके लिए पहले प्लाज्मा का निर्माण किया गया। कंट्रोल सेंटर की निगरानी में 10 मिलीग्राम हीलियम एक वैक्यूम चेंबर के चुंबकीय क्षेत्र में भेजी गई। उसे 10 लाख डिग्री सेल्सियस तक गर्म किया गया। 

कैसे बनता है प्लाज्मा:-इस परमाणु शोध संयंत्र में कार्बन मुक्त बिजली बनाने के लिए परीक्षण की शुरुआत हुई। वैक्यूम चैंबर में माइक्रोवेव हीटर से अत्यंत विरल हीलियम को गर्म किया जाता है। इसके जरिये गैस का आयनीकरण हो जाता है और वह प्लाज्मा का रूप ले लेती है। 

लीबिया के पास भूमध्य सागर में एक बचाव नौका को रबर की दो डूबी हुई नाव मिली हैं जिसके बाद करीब 250 लोगों के डूबने की आशंका जताई जा रही है। स्पेनिश संस्था प्रोएक्टिवा ओपन आर्म्स की प्रवक्ता लॉरा लानुजा ने बताया कि उसकी नाव गोल्फो अजूरो को लीबियाई तट से करीब 15 किलोमीटर दूर रबर की नौकाओं के पास 5 शव तैरते दिखे।उन्होंने बताया, हमें नहीं लगता कि इसके अलावा कोई दूसरा स्पष्टीकरण हो सकता है कि ये नौकायें लोगों से भरी होंगी। उन्होंने कहा कि ऐसी हर नौका में करीब 120-140 लोग सफर कर रहे होते हैं। लानुजा ने कहा कि जो शव मिले हैं वह अफ्रीकी लोगों के हैं जिनकी उम्र 16 से 20 साल के बीच है।राहत और बचाव कार्य में शामिल इटली के तटरक्षक बल के एक प्रवक्ता ने पांच शवों के बरामद होने की पुष्टि की है। शवों को प्रोएक्टिव ग्रुप के जहाज गोल्फो अज्जुरो पर रखा गया है और यह जहाज किसी भी आपात स्थिति से निपटने के लिये यहीं तैनात रहेगा। प्रवासियों से भरी नौका डूबने की घटनाएं आम हैं क्योंकि अक्सर ही मानव तस्कर, इनमें क्षमता से ज्यादा लोगों को बिठा देते हैं।यूरोपीय संघ और तुर्की के बीच एक समझौते के बाद ग्रीस जाने वाले रास्ते को बंद करने के बाद बड़ी संख्या में प्रवासी अब भूमध्य सागर के रास्ते इस ओर आते हैं। प्रवास के लिए अंतरराष्ट्रीय संगठन के अनुसार इस वर्ष अब तक भूमध्य सागर पार करने की कोशिश में 559 प्रवासी की मौत हो चुकी है। वहीं 2016 में कुल 5000 प्रवासियों को इसी प्रयास में अपनी जान गंवानी पड़ी थी।

 

अफगानिस्तान के हेलमंद प्रांत के प्रमुख जिले संगिन पर तालिबान ने फिर से कब्जा कर लिया है। तालिबान को इस जिले से खदेड़ने के लिए 2001 में अमेरिकी और ब्रिटिश बलों नाकों चने चबाने पड़े थे। यहां भारी संख्या में उनके सैनिक मारे भी गए थे। इस जिले पर दोबारा कब्जे को आतंकियों की बढ़ती ताकत के तौर पर देखा जा रहा है।अफगानिस्तान में अफीम की खेती के लिए मशहूर हेलमंद प्रांत का बड़ा हिस्सा अब तालिबान के कब्जे में है। तालिबान के प्रवक्ता कारी युसूफ अहमदी ने बताया कि तालिबान आतंकियों ने पुलिस मुख्यालय और सैन्य अड्डे पर बुधवार रात कब्जा कर लिया है। आतंकियों ने जिस जिले पर कब्जा किया है वहां अब अफगान सेना नहीं रहती है। इस वजह से ये स्थान खाली पड़े थे।प्रांतीय सरकार के प्रवक्ता उमर जवाक ने कहा कि सुरक्षा बल नागरिकों को हताहत होने से बचाने और सामरिक दृष्टिकोण से जिले से तीन किमी दूर हो गए थे। आपको बता दें कि हाल में यहां हुए हमले में करीब 100 अफगान जवानों की मौत हुई है। इसके अलावा गुरुवार को ही अफगानिस्तान के कुंदुज प्रांत में तालिबान आतंकियों ने नौ पुलिस कर्मियों को गोलियों से भून डाला। सभी की मौके पर ही मौत हो गई।हेलमंद प्रांत तालिबान का एक प्रमुख केंद्र रहा है। पाकिस्तान से नज़दीकी सामरिक रूप से इसे और महत्वपूर्ण बना देती है। नॉर्थ अटलांटिक ट्रीटी ऑर्गनाइज़ेशन (नाटो) की फौज जब अफगानिस्तान में तैनात थी, हेलमंद में उसके साथ तालिबान लड़ाकों की ज़बरदस्त लड़ाई हुई थी। 2001 से 2015 के बीच अमेरिका के 456 जन अफगानिस्तान में मारे गए हैं जिसमें 100 से ज्यादा संगिन या उसके पास हुई लड़ाई में खेत रहे।

 

 

टेक्सास के स्कर्टज शहर में रहने वाली एक युवती का कार एक्सीडेंट में हाथ कटने के बाद डॉक्टर की एक टीम ने उसे 11 महीने की सर्जरी के बाद वापस जोड़ दिया है। यह पहली बार ऐसा संभव हुआ है जब टेक्सास में किसी का हाथ कट जाने के बाद उसे जोड़ा गया हो। एक अंग्रेजी वेबसाइट में प्रकाशित खबर के अनुसार, अप्रैल 2016 में केसली वार्ड नामक महिला अपनी कार से वापस घर जा रही थी। उसी दौरान हुए कार हादसे में उसका दाहिना हाथ कट गया। केसली के हाथ पर लोहे का एक टुकड़ा आकर गिर गया था। सैन एंटोनियो मिलिट्री मेडिकल सेंटर की डॉक्टरों की टीम ने इस सर्जरी को सफल तरीके से अंजाम दिया। इस दौरान 11 महीने का समय लगा है। इस ऑपरेशन में शामिल रहे एक डॉक्टर ने बताया कि सर्जरी के बाद केसली बेहतर हो रही हैं। अब वो अपने आप से छोटे मोटे काम भी कर पाती हैं। डॉक्टर ने कहा, 'केसली की सर्जरी सफल होने के बाद अब वो केले उठाकर रख पा रही हैं। इसके अलावा भी वो कई काम कर सकती हैं।'वहीं, केसली ने बताया कि उन्हें याद नहीं है कि आखिर उस रात क्या हुआ था। वह अपने ऑफिस से घर आ रही थीं, तभी एक्सीडेंट हुआ। उन्होंने कहा, 'मेरी कार कई बार पलट गई थी। मैं कार में उलटी लटकी हुई थी और सीट बेल्ट भी बंधी थी।' उन्होंने आगे बताया कि इसके बाद स्थानीय पुलिस ने आकर मुझे कार से निकाला। इसी दौरान कार से बाहर आते समय एक युवक ने मेरे हाथ को दिखाते हुए कहा था कि इसके तो हाथ कट गए हैं। कार हादसे को 11 महीने गुजर जाने के बाद अब केसली कहती हैं कि उन्हें पूरी उम्मीद है कि एक दिन उनका हाथ वापस से पहले जैसे हो जाएगा। उनके इलाज में अभी तक लाखों रुपये खर्च हो चुके हैं। वहीं, इस सफल सर्जरी के बाद केसली ने अपने हाथ पर एक टैटू भी बनवाया है। इस टैटू पर लिखा है कि 'मेरी कहानी अभी खत्म नहीं हुई है।' 

पक्षियों पर शोध करने वाले चार व्यक्तियों के एक समूह ने ऑस्ट्रेलिया की सबसे रहस्यमयी चिड़िया नाइट पैरेट देखी है। इस चिड़िया को विलुप्त माना जाता है और करीब एक सदी से यह चिड़िया नहीं देखी गई थी।शोधकर्ता एड्रियन बॉयल, निगेल जैकेट, जार्ज स्वान और ब्रूस गेटविच ने एक अभयारण्य में इस चिड़िया को देखा और विस्तृत हवाई नक्शे के जरिये इसकी पहचान की। उन्होंने इस अभयारण्य में डेरा डाल लिया और आमतौर पर रात में बोलने वाले इस पक्षी की आवाज सुनी।आस्ट्रेलिया में ब्रूम बर्ड ऑब्जर्वरी के प्रबंधक एवं इस समूह में शामिल निगेन ने कहा, एक रात पहले, हमने चिड़िया की आवाज सुनी। हमारे आसपास पांच छह तरह की आवाजें आ रही थीं, जिसमें से कुछ आवाजें बहुत अनजानी सी थी। हमें नहीं पता था कि यह आवाज किस चिड़िया की है, लेकिन फिर हमे लगा कि यह आवाज नाइट पैरेट की हो सकती है।उन्होंने बताया कि अगले दिन हम उस इलाके में घूमने के लिए गए, तभी एक चिड़िया बिल्कुल हमारे पैरों के पास से निकल गई। उस समूह में शामिल एक अन्य सदस्य ब्रूस गेटविच हालांकि उस चिड़िया की तस्वीर लेने में सफल हो गए। करीब एक सदी पहले पश्चिमी आस्ट्रेलिया में यह पक्षी देखा गया था। इसके बाद साल 2000 में इसे देखे जाने की अफवाह उड़ी थी, लेकिन उस समय इसे देखे जाने का कोई प्रमाण नहीं था।

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ट्रंप प्रशासन द्वारा श्रम मंत्री पद के लिए नामित अलेक्जेंडर अकोस्टा ने अमेरिका में कुशल श्रमिकों की कमी होने की बात को स्वीकार करते हुए कहा है कि एच-1बी वीजा का मकसद अमेरिकी कर्मचारियों को हटाना नहीं है।अकोस्टा ने अपने नाम की पुष्टि के लिए जारी सुनवाई के दौरान सीनेटरों से कहा कि कुछ अमेरिकियों ने नौकरियों को विदेशों में जाते हुए देखा है। कुछ अमेरिकियों ने विदेशी कर्मचारियों के…
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