*लोगों का रूझान फिर सरकारी स्कूलों की तरफ

 

-प्रमोद धीर

पंजाब स्कूल शिक्षा बोर्ड द्वारा घोषित सैशन 2018-19 के दसवीं व बाहरवीं के परिणामों में सरकारी स्कूलों ने प्राइवेट स्कूलों से ज्यादा परिणाम देकर नया इतिहास बनाया है। सरकारी स्कूलों के बहुत ही उच्च विद्या प्राप्त, मेहनती व योग्य अध्यापकों ने तनदेही से मेहनत करके विद्यार्थियों को बढ़िया पढ़ाई करवा कर इस वर्ष प्राइवेट स्कूलों से बढ़िया परिणाम देकर अपनी काबिलीयत दिखा दी है।
दसवीं कक्षा के परिणामों में सरकारी स्कूलों के विद्यार्थी अग्रणी
इस वर्ष दसवीं के परिणामों में सरकारी स्कूलों का पास प्रतिशतता 88.21 प्रतिशत रही है जो कि सभी तरह के स्कूलों से ज्यादा है। सरकारी स्कूलों का परिणाम पिछले वर्ष से 30.07 प्रतिशत बढ़ा है। सरकारी स्कूल परिणामों में प्राइवेट स्कूलों से 8.7 प्रतिशत आगे रहे है। लड़कियों का परिणाम पिछले वर्ष से 21.5 व लड़कों का परिणाम 28.99 प्रतिशत बढ़ा है। ग्रामीण क्षेत्र के सरकारी स्कूलों में 35.5 प्रतिशत व शहरी क्षेत्र के स्कूलों में 29.51 प्रतिशत की बढ़ौतरी दर्ज की गई है। ग्रामीण क्षेत्र के स्कूलों ने शहरी क्षेत्र के स्कूलों से बढ़िया परिमाण दिए है। कुल 336 विद्यार्थी मैरिट में आए है। स्पोर्ट्स कैटागिरी में पंजाब भर से में से स.स.स.स. खमाणों (फतेहगढ़ साहिब) की जसलीन कौर ने दूसरे स्थान पर आकर सरकारी स्कूलों का सिर गर्व से ऊंचा किया है। पिछले वर्षो से इस बार मैरिट में सरकारी स्कूलों का नाम चमका है।
बाहरवीं कक्षा के परिणामों में भी सरकारी स्कूलों में बढ़त
इस बार बाहरवीं कक्षा में सरकारी स्कूलों का पास प्रतिशतता 88.14 प्रतिशत रही। बाहरवीं के परिणामों में पिछले वर्ष से 20.44 प्रतिशत बढौतरी दर्ज की गई। सरकारी स्कूलों का परिणाम प्राइवेट स्कूलों से लगभग 5 प्रतिशत ज्यादा रहा। मैरीटोरअस सरकारी स्कूलों ने 99.46 प्रतिशत की पास प्रतिशतता से अनोखी मिसाल कायम की है। ग्रामीण क्षेत्र के सरकारी स्कूलों ने 86.94 प्रतिशत परिणाम देकर शहरी क्षेत्र के स्कूलों के परिणाम 85.73 प्रतिशत को पछाड़ा। लड़कियों की पास प्रतिशतता 90.86 व लड़कों की पास प्रतिशतता 82.83 प्रतिशत रही।

दसवीं के परिणामों में समाजिक शिक्षा, मैथ, अंग्रेजी, हिंदी, साइंस आदि विषयों के परिणामों तथा बाहरवीं के आर्ट्स, कामर्सस, मैडीकल, नान मैडीकल के विषयों के परिणाम पिछले वर्ष से कहीं ज्यादा बढ़िया रहे है। इन विषयों के साथ साथ वह अपने कंप्यूटर साइंस के विषय के बारे में जानकारी दे दूं तो अच्छा है।
कंप्टूयर साइंस विषय के परिणाम भी रहे शानदार
सरकारी स्कूलों में 2005 से लगातार कंप्यूटर साइंस विषय पढ़ाया जा रहा है। पहले इस विषय के पेपर संबंधित परीक्षा केन्द्रों से ही चैक होते थे। पिछले वर्ष 2017-18 में पहली बार कंप्यूटर साइंस के पेपर बोर्ड द्वारा बाकी विषयों की तरह चैक करवाने शुरू किए गए, जिस कारण कंप्यूटर साइंस विषय में दसवीं कक्षा के परिणाम में बोर्ड की पास प्रतिशतता 83.87 प्रतिशत था, पर इस वर्ष 2018-19 में कंप्यूटर अध्यापकों द्वारा करवाई सख्त मेहनत से कंप्यूटर साइंस विषय के परिणामों में बोर्ड की पास प्रतिशतता 99.34 रही। इसी तरह बाहरवीं कक्षा के परिणामों में कंप्यूटर साइंस विषय में पिछले वर्ष बोर्ड की पास प्रतिशतता 85.59 प्रतिशत थी तथा इस वर्ष बोर्ड की पास प्रतिशतता 99.63 प्रतिशतता रही है। परिणाम स्वरूप कंप्यूटर अध्यापकों की बढ़िया कार्यगुजारी सामने आई है। अब सरकार को भी चाहिए कि विद्यार्थियों की कंप्यूटर विषय में बढ़ती रूची को देखते हुए स्कूलों की कंप्यूटर लैबों को अपडेट किया जाए, नए कंप्यूटर, फर्नीचर आदि दिए जाएं तथा कंप्यूटर अध्यापकों का शोषण बंद करके उनकी पूरे वेतन सहित शिक्षा विभाग में शिफ्ट करके बनती पूरी सुविधाएं दी जाएं ताकि वह ओर तनदेही से अपनी सेवाएं निभा सकें।
सरकारी स्कूलों के उच्च पुजीशनों वाले बहुत विद्यार्थी गरीब वर्ग से संबंधित है जो कि बढ़ी फीसों वाले स्कूलों में पढ़ने वाले बच्चों से किसी तरह भी कम नहीं। इस बार सौ प्रतिशत परिणाम बहुत सारे सरकारी स्कूलों के आए है। इसी कारण सचिव शिक्षा कृष्ण कुमार ने सोशल मीडिया पर समूह अध्यापकों, जिला शिक्षा अधिकारियों, पिं्रसीपल, मुख्य अध्यापकों, नान टीचिंग स्टाफ व संबंधित कमेटियों/टीमों आदि को दसवीं व बाहरवीं के शानदार परिणामों के लिए मुबारकें देकर सराहनीय काम किया है, जिससे सभी का हौंसला बढ़ा है।
सरकार तथा अध्यापकों के बीच सचिव शिक्षा विभाग द्वारा समूह काडरों के अध्यापकों की हक्की मागें भी अच्छी भूमिका अदा करके हल करवानी चाहिए। अक्सर सरकारें अध्यापकों पर हमेशा शिकंजे कसके उनको किसी ना किसी तरीके से जलील करती रही है ताकि अध्यापक अपनी हक्की मागों के लिए किसी किस्म की अवाज ना उठाएं। बीते सैशन के दौरान अध्यापकों द्वारा अपनी जायज मागों के लिए कई बड़े रोष मार्च, रैलियां आदि किए गए, सरकार द्वारा बार बार बातचीत के लारे लगाए गए या बातचीत दौरान मागों का सार्थक हल निकालने की कोशिश नहीं की गई। पिछले कई वर्षो से एस.एस.ए/रमसा अधीन काम कर रहे अध्यापकों के वेतन बढ़ाने की बजाए कम करके पक्के करने के हुक्म किए गए जो कि शिक्षा सचिव द्वारा अध्यापक वर्ग के सम्मान को ठेस लगाने वाली बात थी।
वैसे कृष्ण कुमार जी की सार्थक सोच से शिक्षा विभाग में काफी सुधार भी आया है।
प्रदेश के समूह अध्यापक बहुत ही काबल है उन्होंने इस वर्ष अपनी डय़ूटी के साथ साथ अतिरिक्त समय लगाकर भी विद्यार्थीयों को मेहनत करवाई जिस कारण इस बार बोर्ड के परिणाम बढ़िया आए है। अध्यापकों ने साबित कर दिया है कि उनमें पूरी ऊर्जा तथा काबलियत है, जिस से वह सरकारी स्कूलों को शिक्षा की बुलंदियों तक पहुंचा सकते है पर सरकार को भी अध्यापकों पर विद्यार्थीयों की जरूरतों का ध्यान रखना चाहिए, उनको बनती सुविधाएं देनी चाहिए।
अध्यापकों से गैर शैक्षणिक काम लेना बंद करना चाहिए। इस वर्ष बेहतर परिणाम आने के कारण भविष्य में अभिभावक सरकारी स्कूलों में अपने बच्चे पढ़ाने को तरजीह देंगे, जिससे स्कूलों के अंदर बच्चों की संख्या जरूर बढ़ेगी। शिक्षा विभाग द्वारा 100 प्रतिशत परिणाम देने वाले स्कूलों के मुखीयों तथा 100 प्रतिशत परिणाम देने वाले विषय अध्यापकों का सम्मान किया जाए ताकि अन्यों को भी उत्साह मिले तथा आने वाले वर्षो में सरकारी स्कूलों के ओर बढ़िया परिणाम आए।
अब सरकार ने आई.टी.ई.एक्ट में संशोधन करके नया दि राइट आफ चिल्ड्रन टू फ्री एंड कंपलसरी एजूकेशन(अमैंडमैंट)-2019 एक्ट बना दिया है। इस एक्ट के अनुसार अब हर वर्ष 5वीं तथा 8वीं कक्षा में फेल होने पर विद्यार्थियों को अगली कक्षा में नहीं बैठने दिया जाएगा। उनको उसी कक्षा में रहकर दो माह बाद फिर पेपर देना होगा। मौका मिलने पर भी विद्यार्थी परिणाम ना सुधार सका तो उसको उसी कक्षा में बैठना पड़ेगा।
बीती 18 जुलाई 2018 को लोकसभा में यह बिल पास हो चुका है। मनिस्ट्री आफ ला एंड जसटिस ने प्रदेश सरकारों पर फैसला छोड़ दिया था। अब पंजाब सरकार ने भी इस एक्ट को स्वीकार करके इसे चालू सैशन में लागू करने की प्लानिंग शुरू कर दी है।
हर कोई बच्चे के अभिभावक चाहते है कि उनके बच्चे अंग्रेजी मीडियम स्कूलों में पढ़ें ताकि वह समय के साथ चल सकें पर मजबूरी के चलते अंग्रेेजी मीडियम के लिए उनको प्राइवेट स्कूलों में जाना पड़ता था। लोगों की इस मनसा को शिक्षा विभाग ने समझते हुए चालू सैशन से विज्ञान व गणित विषयों को अंग्रेजी मीडियम द्वारा सिखाने का प्रयास किया है। यदि यह कदम सफल हुआ तो समूह स्कूलों के बच्चे सरकारी स्कूलों में दाखिल होने से नहीं भांगेगे। सरकार अपने साधनों से स्कूलों की जरूरतों को पूरा कर दे तो गरीब व मध्यवर्गीय लोगों के सपने पहले जैसे ही पूरे होंगे तथा उनका सरकारी स्कूलों में फिर से भरोसा जागेगा।
उपरोक्त कारणों के मद्देनजर सरकारी स्कूलों की पटड़ी से उतरी गाड़ी फिर से रास्ते पर पड़ गई है। परिणाम स्वरूप इस वर्ष के सरकारी स्कूलों के परिणाम शानदार आए है। बढ़िया परिणाम आने के कारण अब फिर से लोगों का रूझान सरकारी स्कूलों की तरफ बढ़ना शुरू हो गया है। उम्मीद है कि अब सरकार भी अध्यापकों के नान टीचिंग काम कम करेंगी तथा आने वाले वर्षो में सरकारी स्कूलों में गिनती बढ़ेगी तथा अभिभावक प्राइवेट स्कूलों की लूटपास से बच सकेंगे।

कंप्यूटर अध्यापक, सरकारी हाई स्कूल, ढैपई (फरीदकोट)
फोन 098550-31081

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