नई दिल्ली। कर्मचारी भविष्य निधि (EPF) सभी सैलरी पाने वाले कर्मचारियों के लिए ईपीएफओ की तरफ से चलाई जाने वाली रिटायरमेंट सेविंग स्कीम है। कर्मचारी भविष्य निधि संगठन बीस या उससे अधिक कर्मचारी वाले संस्थानों के कर्मचारियों को पीएफ में निवेश की अनुमित देता है।ईपीएफ स्कीम के तहत एक कर्मचारी को अपनी बेसिक सैलरी का 12 फीसद इसमें योगदान करना होता है, इसी के साथ नियोक्ता की तरफ से भी उतना ही योगदान दिया जाता है। रिटायरमेंट के बाद कर्मचारी को ब्याज के साथ एक बड़ी रकम मिलती है और ईपीएस के तहत पेंशन भी मिलती है।ईपीएफओ का एक मेंबर 10 सालों तक फंड में योगदान करने के बाद ईपीएस के तहत पेंशन पाने योग्य हो जाता है। इसलिए कर्मचारियों को यह सलाह दी जाती है कि पुराने ईपीएफ अकाउंट को बंद करने की जगह नौकरी बदलने पर अपने पुराने ईपीएफ अकाउंट को नए नियोक्ता के पास ट्रांसफर कर दें।ईपीएफ मेंबर को 12 डिजिट का नंबर दिया जाता है, जिसे UAN कहते हैं। UAN को EPFO जारी करता है। ईपीएफओ नौकरी बदलने पर ईपीएफ अकाउंट को ऑटोमैटिक ट्रांसफर करने देता है।
ऑटोमेटिक फंड ट्रांसफर कैसे करता है काम:-
1. जब कोई व्यक्ति नए संस्थान में जुड़ता हैं तो उस समय नियोक्ता उससे समग्र घोषणा पत्र भरने के लिए कहता है, जिसे F-11 भी कहते हैं। इस फॉर्म में बेसिक जानकारी और यूएएन के बारे में पूछा जाता है।
2. अगर यूएएन आधार नंबर से जुड़ा हुआ है और पिछली कंपनी की तरफ से वेरिफाई है तो पीएफ ऑटो ट्रांसफर प्रोसेस के बारे में रजिस्टर्ड मोबाइल नंबर पर एक मैसेज आएगा।
इन बातों का जरूर रखें ध्यान:-
1. सबसे पहले यह सुनिश्चित करें कि ऑटो ट्रांसफर प्रोसेस के लिए सही यूएएन दर्ज किया गया है।
2. अगर कर्मचारी ने ऑटो ट्रांसफर प्रोसेस रोकने का अनुरोध नहीं किया गया है तो मैसेज मिलने के 10 दिनों के अंदर ऑटो ट्रांसफर हो जाएगा।
3. ऑटो ट्रांसफर प्रोसस तब शुरू होगा जब कर्मचारी की नई कंपनी उसके नए ईपीएफ अकाउंट में पहला जमा योगदान देगी।
4. अगर कर्मचारी का यूएएन उसकी पिछली कंपनी की तरफ से वेरिफाई नहीं है तो कर्मचारी को अपने ईपीएफ ट्रांसफर के लिए ऑफलाइन अप्लाई करना होगा।

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