नई दिल्ली। सीमित सैलरी और महंगाई वाले दौर में आपको कभी भी पैसों की अचानक जरूरत पड़ सकती है। वहीं दूसरी तरफ पर्सनल लोन की भी एक सीमा होती है कि आप एक खास रकम से ज्‍यादा का कर्ज नहीं ले सकते। हो सकता है आपकी जरूरत इतनी बड़ी हो कि आप अपनी प्रॉपर्टी ही बेचने की योजना बना रहे हों। हालांकि, बड़ी रकम का कर्ज लेने के लिए आप लोन अगेंस्‍ट प्रॉपर्टी (LAP) पर विचार कर सकते हैं। जिस प्रॉपर्टी को बेचकर आप अपनी जरूरत पूरी करना चाह रहे थे, उसी को मॉर्गेज/गिरवी रखने से आपका काम हो जाएगा। लोन अगेंस्‍ट प्रॉपर्टी के लिए आप रेजीडेंशियल या कमर्शियल प्रॉपर्टी का इस्‍तेमाल कर सकते हैं। आइए, विस्‍तार से इसके बारे में जानते हैं।
रीपेमेंट पीरियड: प्रॉपर्टी पर मिलने वाले लोन को वापस चुकाने की अवधि 15-20 साल तक की हो सकती है। सामान्य लोन के मुकाबले इसके रीपेमेंट की अवधि लंबी होती है। अगर आप इसे छोटा करेंगे तो ईएमआई बढ़ जाएगी, लेकिन लोन जल्‍द चुकता हो जाएगा। अगर आप ज्‍यादा ईएमआई नहीं दे सकते हैं तो बीच में जब भी आपके पास सरप्‍लस पैसे आएं तो आप एक साथ बड़ी रकम जमा करके लोन की अवधि घटा सकते हैं।
लोन अमाउंट: प्रॉपर्टी की कीमत के आधार पर लोन अमाउंट तैयार होता है। अधिकतर बैंक या अन्य लोन देने वाली कंपनी प्रॉपर्टी की मार्केट वैल्यू के आधार पर 50-75 फीसद के बीच लोन अमाउंट देती हैं। लोन अमाउंट इस बात पर निर्भर करता है कि प्रॉपर्टी किस जगह पर है उसकी हालत कैसी है। इस सब के बाद आवेदक का क्रेडिट स्कोर, आय का स्रोत आदि देखा जाता है।
ब्याज दर: प्रॉपर्टी पर लोन पर ब्याज दर अन्य लोन के मुकाबले काफी कम होती है, इसकी शुरुआत 9.65 फीसद प्रति वर्ष से होती है। वहीं पर्सनल लोन और गोल्ड लोन पर ब्याज दर इससे अधिक होती है।
लोन अगेंस्‍ट प्रॉपर्टी से मिली रकम का कहीं भी कर सकते हैं इस्‍तेमाल: पर्सनल लोन की तरह ही इस लोन की रकम का इस्तेमाल कहीं भी किया जा सकता है। सिर्फ इसका इस्तेमाल किसी गैर-कानूनी जगह नहीं होना चाहिए। इसका इस्तेमाल बच्चे की उच्च शिक्षा, बिजनेस विस्तार और विदेश यात्रा आदि के लिए किया जा सकता है।
प्रोसेसिंग फीस और प्री-पेमेंट चार्ज: अन्य लोन के ऑप्शन की तरह प्रॉपर्टी पर लोन में भी प्रोसेसिंग फीस शामिल होती है। ये फीस आमतौर पर लोन अमाउंट की 2 फीसद हो सकती है। इसी के साथ इसमें प्रीपेमेंट चार्ज भी लगाया जा सकता है।

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