नई दिल्‍ली। भारत में बनी पायलट रहित रेलगाड़ी ‘ट्रेन 18’ (Train 18) अब दूसरे देशों को भी बेची जाएगी। भारतीय रेलवे इसकी योजना बना रहा है। जब भारत में ‘ट्रेन 18’ की बोगियों की मांग पूरी हो जाएगी, उसके बाद इस ट्रेन की बोगियों को दूसरे देशों को बेचा जाएगा। रेलवे बोर्ड के सदस्य ने पीटीआई को बताया कि, ‘ट्रेन 18’ को दक्षिण अमेरिकी और दक्षिण एशियाई देशों को बेचे जाने की योजना है। रेलवे बोर्ड के सदस्य राजेश अग्रवाल ने बताया कि, इंटीग्रल कोच फैक्ट्री में 60 हजार बोगियों का निर्माण किया जा चुका है। उन्होंने कहा कि, आईसीएफ द्वारा निकट भविष्य में 40 ‘ट्रेन 18’ तैयार कर ली जाएंगी।बोर्ड के सदस्य राजेश अग्रवाल ने अपने बयान में कहा, "कुछ दक्षिण एशियाई और कुछ दक्षिण अमेरिकी देशों ने ‘ट्रेन 18’ की बोगियां खरीदने में दिलचस्पी दिखाई है। भारतीय रेलवे घरेलू जरूरतें पूरी होने के बाद उनकी मांग पर विचार करेगा।"बता दें कि, ‘ट्रेन 18’ भारत की पहली स्वचालित ट्रेन है। इस ट्रेन को पिछले साल शुरू किया गया था। अभी यह ट्रेन नई दिल्ली से वाराणसी के बीच चल रही है। उपयोग में आने से पहले ‘ट्रेन 18’ का नाम वंदे भारत एक्सप्रेस कर दिया गया था।बोर्ड मेंबर अग्रवाल ने बताया कि आईसीएफ ने पिछले साल 2018-19 में 3,262 कोच तैयार किये थे और इसके साथ ही आईसीएफ दुनिया की सबसे बड़ी कोच निर्माता बन गई थी, जो कि हमारे लिए गर्व की बात है। साथ ही उन्होंने बताया कि, आईसीएफ अगले साल करीब 4,000 कोचों का निर्माण कर अपना खुद का ही रिकॉर्ड तोड़ना चाहती है।Train 18 का स्‍लीपर वर्जन होगा Train 19: अग्रवाल ने यह भी बताया कि आईसीएफ अपनी फैक्ट्री में ‘ट्रेन 18’ के स्लीपर वर्जन ‘ट्रेन 19’ का डिजाइन, डेवलपमेंट और निर्माण भी कर रही है जो कि, इसी साल पूरा कर लिया जाएगा।रेलवे बोर्ड के सदस्य के अनुसार, भारतीय रेलवे द्वारा कोच निर्माण इकाईयों के इंफ्रास्ट्रक्चर के विकास के लिए करीब 2,500 करोड़ रुपये की परियोजनाओं पर काम करने की योजना बनाई जा रही है

 

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