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बेंगलुरू। देश में कोरोना की तीसरी लहर की आशंका जताई जा रही है। इस बीच, कर्नाटक के कोवि़ड  विशेषज्ञ समिति के अध्यक्ष डॉ. देवी शेट्टी ने कहा है कि यह कहना मुश्किल है कि कोरोना की तीसरी लहर कब आएगी और यह कितनी गंभीर होगी। लेकिन मैं कह सकता हूं कि हमारी सरकार अब काफी बेहतर तरीके से तैयार है। उन्होंने कहा कि लोगों को कोरोना के उचित व्यवहार का सम्मान करना होगा। उन्होंने कहा कि कोरोना वैक्सीन की झिझक को दूर करने की जरूरत है।देश में फिलहाल कोरोना की दूसरी लहर की रफ्तार धीमी हो रही है। दूसरी तरफ तीसरी लहर की टेंशन बढ़ती जा रही है। इस वक्त देश में 8 राज्य ऐसे हैं, जिन्होंने चिंताएं बढ़ाई है। इनमें से एक केरल है और बाकी 7 राज्य नॉर्थ ईस्ट के हैं और फिक्र बढ़ने की वजह है वहां का पॉजिटिविटी रेट। दरअसल, पॉजिटिविटी रेट इस बात को दर्शाती है कि एक दिन के भीतर जांचें गए नमूनों में से कितने फीसदी नमूनों में संक्रमण की पुष्टि हुई। केरल में ये दर साढ़े 10 फीसदी है।नॉर्थ ईस्ट में सिक्किम, मणिपुर, मेघालय और मिजोरम में स्थिति कंट्रोल से बाहर जाती नजर आ रही है क्योंकि यहां पॉजिटिविटी रेट देश के औसत 2 दशमलव 3 प्रतिशत से कई गुना ज्यादा है। अरुणाचल प्रदेश, नागालैंड और त्रिपुरा में भी पॉजिटिविटी रेट हाई है।देश में कोरोना की स्थिति की बात करें तो नॉर्थ ईस्ट में हालात कहीं ज्यादा खराब होते जा रहे हैं। इसीलिए ॉॉ प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने नॉर्थ ईस्ट के राज्यों के मुख्यमंत्रियों के साथ मीटिंग की थी और अब 16 जुलाई को भी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोजी एक और बैठक करने जा रहे हैं जिसमें 6 राज्यों के मुख्यमंत्री होंगे। ये राज्य हैं, तमिलनाडु, आंध्र प्रदेश, कर्नाटक, ओडिशा, महाराष्ट्र और केरल।

तिरुवनंतपुर। केरल में जीका वायरस के मामले इस वर्ष अप्रैल में ही आ गए थे। लेकिन उस वक्‍त लगे लॉकडाउन की वजह से इन लोगों का टेस्‍ट नहीं हो सका था। उस वक्‍त माइल्‍ड केस काफी संख्‍या में सामने आए थे। कई लोग अस्‍पताल में आए जिनको शरीर पर रेशेज, आंख का लाल होना और बुखार आदि की समस्‍या थी। लॉकडाउन के चलते जो प्रतिबंध लगे थे उनकी वजह से इनका सही से पता नहीं चल सका था।किम्‍सहेल्‍थ अस्‍पताल की वरिष्‍ठ कंसल्‍टेंट डॉक्‍टर राजलक्ष्‍मी ने बताया कि अप्रैल से ही उनके यहां पर इस तरह की समस्‍या को लेकर मरीज आ रहे थे। उनके मुताबिक इस तरह का सिलसिला मई में अपने चरम पर पहुंच चुका था। ये यहां पर मानसून आने के तुरंत बाद की बात है। उस वक्‍त राज्‍य में कोरोना के मामले भी काफी संख्‍या में सामने आ रहे थे। उस वक्‍त जो प्रतिबंध लगे थे उसकी वजह से मरीजों को टेलिकंसल्‍टेशन की सुविधा दी गई थी। इसके ही माध्‍यम से डॉक्‍टर उनको जानकारी दे या ले रहे थे। उस वक्‍त इस तरह के मरीज ओपीडी में नहीं आ रहे थे।राजलक्ष्‍मी ने आगे कहा कि हमनें डेंगू और चिकनगुनिया समेत खसरे की जांच के लिए कुछ सैंपल भी भेजे थे लेकिन ये सभी नेगेटिव आए थे। उन्‍होंने खुद ने कई माइल्‍ड केस देखे थे लेकिन वो उस वक्‍त अस्‍पताल नहीं आ सकते थे। उनके मुताबक दो दिन पहले ही सरकार की तरफ से इसकी टेस्‍ट की सुविधा उपलब्‍ध करवाई गइ्र है। वहां पर इसके सैंपल भेजे गए हैं। इससे हमें केवल इस बात का पता चल सकेगा कि कौन सी जगह पर जीका वायरस अधिक तेजी से फैल रहा है। उसके हिसाब से हम तैयारी कर सेंगे। आपको बता दें कि केरल में जीका वायरस का पहला मामला इस वर्ष 8 जुलाई को सामने आया था। इससे एक गर्भवती महिला पीडि़त थी। इस महिला का इलाज करने वाले डॉक्‍टर न्‍यास ने बताया कि जीका वायरस का मैनेजमेंट और इसका इलाज करना काफी आसान है। हालांकि गर्भवती महिला यदि इससे पीडि़त होती है तो उसके गर्भ में पल रहे शिशु पर इसका असर होने के चांस रहते हैं। जीका वायरस के लक्षम जिस किसी में दिखाई देते हैं उनका सैंपल टेस्टिंग के लिए भेज दिया जाता है।गौरतलब है कि राज्‍य में अब तक जीका वायरस के करीब 28 मामले सामने आ चुके हैं। स्‍वास्‍थ्‍य मंत्री वीणा जॉर्ज के मुताबिक इसमें पांच नए मामले भी शामिल हैं। जीका वायरस के बढ़ते मामलों को देखते हुए केरल के कई जिलों में इसकी रोकथाम की शुरूआत हो चुकी हे। अगले सात दिनों में इसके लिए कंट्रोल रूम भी बना दिया जाएगा।

दिल्ली। भारत सरकार ने बताया राज्यों/केंद्र शासित प्रदेशों को अब तक 40.31 करोड़ से अधिक वैक्सीन खुराक प्रदान की जा चुकी हैं‌ और 83,85,790 और खुराक पाइपलाइन में हैं। वहीं राज्यों/केंद्र शासित प्रदेशों और निजी अस्पतालों के पास 1.92 करोड़ से अधिक शेष और अप्रयुक्त वैक्सीन खुराक अभी भी उपलब्ध हैं।

क्या कहते हैं सरकार के आंकड़े :-कोरोना महामारी से भारत अभी भी जूझ रहा है। महामारी की दूसरी लहर से देश के स्वास्थ्य पर खासा असर पड़ा। ऐसे में कोरोनावायरस की वैक्सीन सभी की उम्मीद बन गई। भारत में कोविड-19 टीकाकरण का अभियान भी जोरो शोरों से चल रहा है। COVID-19 टीकाकरण अद्यतन राज्यों/संघ राज्य क्षेत्रों को 40.31 करोड़ से अधिक वैक्सीन खुराक प्रदान की गईं 1.92 करोड़ से अधिक शेष और अप्रयुक्त खुराक अभी भी राज्यों/संघ राज्य क्षेत्रों और निजी अस्पतालों के पास उपलब्ध हैं जिन्हें प्रशासित किया जाना है।

नई दिल्ली। केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय ने सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के साथ 'भारत कोविड आपातकालीन प्रतिक्रिया और स्वास्थ्य प्रणाली तैयारी पैकेज: चरण II' योजना के तहत तैयारियों की समीक्षा की। केंद्र सरकार से शीघ्र अनुमोदन प्राप्त करने के लिए उन्हें अपने व्यय प्रस्ताव जल्द से जल्द भेजने का आग्रह किया गया है।

पटना। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी स्‍टाइल का कुर्ता (Modi Kurta) लोगों के बीच क्रेज बन चुका है। होली होली (Holi) हो या दीपावली (Diwali), मोदी पिचकारी (Modi Pichkari) या मोदी पटाखा (Modi Crackers) से बाजार पट जाता है। अब मुजफ्फरपुर के एक मूर्तिकार जयप्रकाश प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी (PM Narendra Modi) की आकृति के गुल्लक (Modi Piggy Bank) बनाकर चर्चा में हैं। इसके माध्‍यम से वे बच्चों के बीच प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के संदेशों का प्रसार करना चाहते हैं।

पीएम मोदी के नाम पर बनाया मोदी गुल्‍लक;-जयप्रकाश ने समाचार एजेंसी एएनआइ (ANI) को बताया प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने पिछले साल कोरोनावायरस के संक्रमण (CoronaVirus Infection) से बचाव के लिए जनता कर्फ्यू (Janata Curfew) की घोषणा की थी। जयप्रकाश ने कहा कि प्रधानमंत्री देश को बचाने की कोशिश में लगे हैं तो उन्होंने पैसे बचाने के लिए उनके नाम पर गुल्‍लक (Piggy Bank) बनाने का निर्णय किया।

नई दिल्ली। उत्तर भारत में मानसून के आगमन के साथ ही जहां लोगों को गर्मी से राहत मिली है वहीं कई जगहों पर परेशानियां बढ़ गई है। कई राज्यों में भारी बारिश के कारण पड़े तबाही मच गई है। उत्तर प्रदेश, बिहार, हिमाचल, उत्तराखंड, गुजरात, महाराष्ट्र और पश्चिम बंगाल समेत कई राज्यों में मूसलाधार बारिश आफत बनकर आई है। मौसम विभाग का कहना है कि अगले 4-5 दिन दिल्ली में बारिश के साथ ही हिमाचल, उत्तर प्रदेश और उत्तराखंड में कुछ स्थानों पर भारी से बहुत भारी वर्षा हो सकती है। आईएमडी की तरफ से राजस्थान और जम्मू-कश्मीर के लिए आरेन्ज अलर्ट जारी किया गया है। हिमाचल प्रदेश और उत्तराखंड के लिए भी येलो अलर्ट जारी किया गया है। मौसम विभाग के अनुसार मध्यप्रदेश, छत्तीसगढ़, पंजाब, हरियाणा में आज हल्की से मध्यम बारिश की संभावना है।

आज इन राज्यों में भारी बारिश की चेतावनी:-मौसम विभाग ने अगले 24 घंटों के दौरान उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड, हिमाचल प्रदेश, कर्नाटक, गोवा, केरल, महाराष्ट्र और पश्चिम बंगाल के कुछ हिस्सों में भारी बारिश की संभावना जताई है। वहीं, बिहार, झारखंड, पश्चिम बंगाल, राजस्थान, छत्तीसगढ़, पंजाब, हरियाणा, जम्मू-कश्मीर और दिल्ली के कुछ इलाकों में मध्यम बारिश के आसार हैं।

 

राजधानी दिल्ली में अगले 6 दिन में हल्की से मध्यम बारिश:-मौसम विभाग के मुताबिक राजधानी दिल्ली में अगले छह दिनों में दिल्ली में हल्की से मध्यम बारिश होने का अनुमान है। आईएमडी के मुताबिक इससे गर्मी से कुछ राहत मिलने की उम्मीद है। बता दें कि दिल्ली में मानसून की पहली बारिश मंगलवार को हुई थी जो आम तौर पर 27 जून के आस-पास होनी चाहिए थी लेकिन दिल्लीवासियों को इसके लिए 16 दिनों तक इंतजार करना पड़ा।

यूपी के इन इलाकों में बारिश का अनुमान;-राजधानी लखनऊ के कई इलाकों में आज बारिश का अनुमान है। आंचलिक मौसम विज्ञान केंद्र के निदेशक जेपी गुप्ता का कहना है कि गुरुवार से प्रदेश में मौसम बदल सकता है। जहां राजधानी में आंशिक बादल छाएंगे वहीं प्रदेश भर में छिटपुट बारिश के आसार हैं। वहीं, कुछ जिलों सहारनपुर, मेरठ, बिजनौर, मुजफ्फरनगर, अमरोहा, मुरादाबाद, रामपुर, पीलीभीत, बलिया, लखीमपुर खीरी समेत कई इलाकों में भारी बारिश की चेतावनी जारी की गई है।

 

हरियाणा, पंजाब और राजस्थान का मौसम;-मौसम विभाग ने कहा है कि हरियाणा और पंजाब में हल्की से मध्यम बारिश देखने को मिलेगी। वहीं राजस्थान के कुछ जिलों में बादल छाए रहने और वज्रपात की आशंका जताई है। मौसम विभाग ने कहा है कि अगले 24 घंटों के दौरान कोटा, बारां, सिरोही, सवाईमाधोपुर, टोंक, बाडमेर, पाली, जालौर जिलों में कहीं कहीं बादल गरजने के साथ-साथ वज्रपात की भी संभावना है।

 उत्तराखंड में भारी से बहुत भारी बारिश का अलर्ट;-मौसम विभाग के पूर्वानुमान के मुताबिक, गुरुवार के लिए राज्य में कोई अलर्ट नहीं है। हालांकि, कई जगह हल्की से मध्यम बारिश हो सकती है। 16 जुलाई को देहरादून और नैनीताल में भारी बारिश की संभावना है। 17 को उत्तरकाशी, देहरादून, नैनीताल, अल्मोड़ा, पिथौरागढ़ में कहीं कहीं भारी से बहुत भारी बारिश संभव है। 18 को देहरादून, पौड़ी, बागेश्वर, नैनीताल, पिथौरागढ़ में कहीं कहीं भारी से बहुत भारी बारिश का येलो अलर्ट रहेगा। पिछले 24 घंटे में राज्यभर में झमाझम बारिश हुई है।

 र्वोत्तर भारत के इन राज्यों में 4 दिन भारी बारिश की चेतावनी;-भारत मौसम विज्ञान विभाग (आईएमडी) के अनुसार पूर्वोत्तर भारत में अगले 4 दिन भारी बारिश की संभावना है। शुक्रवार 16 जुलाई से 19 जुलाई तक पूर्वोत्तर में भारी बारिश के साथ व्यापक वर्षा होने की संभावना है। शुक्रवार से रविवार तक अरुणाचल प्रदेश, असम और मेघालय में भारी से बहुत भारी बारिश की संभावना का संकेत दिया है। सोमवार को बारिश की तीव्रता कम होकर अलग-अलग जगहों पर भारी बारिश होगी। उपरोक्त भविष्यवाणियों के मद्देनजर, आईएमडी ने इस अवधि के दौरान राज्यों पर ऑरेंज अलर्ट रखा है। इस बीच, नागालैंड, मणिपुर, मिजोरम और त्रिपुरा में इस पूर्वानुमान अवधि के दौरान अलग-अलग स्थानों पर भारी वर्षा होगी।

वाशिंगटन (नासा)। जलवायु परिवर्तन को लेकर बार-बार चेतावनी दी जा रही है। कई देश की मार साफतौर पर झेल भी रहे हैं। तेजी से ग्‍लेशियर पिघल रहे हैं समुद्र का जलस्‍तर लगातार बढ़ रहा है। इस बीच नासा की चेतावनी और डराने वाली है। दरअसल, नासा ने कहा है कि मौसमी बदलाव के पीछे एक बड़ी वजह चांद भी हो सकता है। नासा ने निकट भविष्‍य में चांद के अपनी ही धुरी पर डगमगाने की भी संभावना जताई है। अपनी एक रिपोर्ट में अमेरिका की स्‍पेस एजेंसी ने कहा है कि जिस तरह से जलवायु परिवर्तन में तेजी आ रही है और समुद्र का जलस्‍तर बढ़ रहा है ऐसे में 2030 में चांद भी डगमगा सकता है। चांद के इस तरह से डगमगाने से धरती पर प्रलयकारी बाढ़ तक आ सकती है।नासा द्वारा किया गया ये शोध क्लाइमेट चेंज पर आधारित जर्नल नेचर में पिछले माह पब्लिश हुआ था। इस रिसर्च रिपोर्ट में चाद पर होने वाली हलचल की वजह से धरती पर आने वाली विनाशकारी बाढ़ को न्‍यूसेंस फ्लड कहा है। हालांकि जब कभी भी धरती पर हाई टाइड आता है उसमें आने वाली बाढ़ को इसी नाम से जाना जाता है। लेकिन नासा के शोध में कहा गया है कि 2030 तक धरती पर आने वाली न्‍यूसेंस फ्लड की संख्‍या काफी बढ़ जाएगी। इस रिपोर्ट में कहा गया है कि पहले इनकी तादाद भले ही कम होगी लेकिन बाद में इसमें तेजी आ जाएगी।नासा का शोध बताता है कि चांद की स्थिति में आया थोड़ा सा भी बदलाव धरती पर जबरदस्‍त बाढ़ ला सकता है। यूनिवर्सिटी ऑफ हवाई के सहायक प्रोफेसर फिल थॉम्‍पसन का कहना है कि जैसे-जैसे जलवायु परिवर्तन बढ़ेगा वैसे-वैसे ही धरती पर प्राकृतिक मुश्किलें भी बढ़ जाएंगी। आपको बता दें कि चांद अपने लूनार साइकिल में जो 18.6 वर्ष का समय लेता है उसके आधे वक्‍त में धरती पर बढ़ते समुद्र के जलस्‍तर के चलते हाई टाइड की संख्‍या अधिक हो जाएगी। बाकी समय में इसका असर देखा जा सकेगा। इस दौरान धरत का समुद्रीय जलस्‍तर एक दिशा की तरफ अधिक रहेगा।नासा के एडमिनिस्‍ट्रेटर बिल नेलसन के मुताबिक चांद की गुरुत्‍वाकर्षण शक्ति जो ज्‍वार की वजह बनती है और क्‍लाइमेट चेंज धरती पर आने वाली बाढ़ की बड़ी वजह होगा। इसकी वजह से समुद्र तट के पास रहने वाले और निचले इलाकों में खतरा बढ़ जाएगा। उनका ये भी कहना है कि धरती पर आने वाली बाढ़ चांद, धरती और सूरज की स्थित पर निर्भर करेगा कि इसमें कितना बदलाव होता है।

सऊदी अरब।‌ शनिवार से सऊदी अरब‌ एक और डाउनसाइज़्ड हज की मेजबानी करेगा, जिसमें शामिल होने के लिए कोरोनावायरस के खिलाफ टीकाकरण कराए हुए निवासियों को पूरी तरह से अनुमति होगी। वहीं विदेशी मुस्लिम तीर्थयात्रियों को दूसरे वर्ष के लिए रोक दिया जाएगा। बता दें कि ऐसा करके राज्य पिछले साल की सफलता को दोहराना चाहता है जिसके तहत पिछले वर्ष पांच दिवसीय मुस्लिम अनुष्ठान के दौरान वायरस का कोई प्रकोप नहीं देखा गया था।

हज में सम्मिलित लोग:-इस्लाम का एक प्रमुख स्तंभ जो अपने जीवनकाल में कम से कम एक बार सक्षम मुसलमानों के लिए आवश्यक है। सऊदी अरब के इस वार्षिक हज में सऊदी अरब के 60,000 निवासियों को भाग लेने की अनुमति दी गई है। जो बीते वर्ष 2020 में कोरोनावायरस के प्रकोप के चलते कहीं अधिक है। लेकिन यदि सामान्य समय की बात की जाए तो यह संख्या बहुत कम है। साल 2019 की बात करें तो दुनिया भर के लगभग 2.5 मिलियन मुसलमानों ने वार्षिक हज में भाग लिया था। बरहाल 2021 का संस्कार शुरू होने से 1 दिन पहले ही शनिवार को लोगों का पहुंचना आरंभ हो जाएगा।

क्या कहना है हज मंत्रालय का;-जुलाई महीने की शुरुआत में ही हर मंत्रालय ने कहा कि वह वैश्विक कोरोना महामारी के चलते स्वास्थ्य संबंधी सावधानियों के उच्चतम स्तर" पर काम कर रहा था। महामारी और नए रूपों के उद्भव के आलोक में "ऑनलाइन जांच प्रणाली के माध्यम से 558,000 से अधिक आवेदकों में से चुना गया, यह कार्यक्रम उन लोगों तक ही सीमित है, जिन्हें पूरी तरह से टीका लगाया गया है और 18-65 वर्ष की आयु में कोई पुरानी बीमारी नहीं है। साथ ही सख्त सामाजिक दूरी के उपायों के अलावा, मंत्रालय ने कहा कि वह धार्मिक स्थलों के आसपास तीर्थयात्रियों को फेरी लगाने के लिए शिविरों, होटलों और बसों तक संपर्क-मुक्त पहुंच की अनुमति देने के लिए एक "स्मार्ट हज कार्ड" पेश करेगा। यह कार्ड प्रणाली किसी भी लापता तीर्थयात्री का पता लगाने में भी मदद करेगी।अधिकारियों ने काबा के चारों ओर बनी मक्का की ग्रैंड मस्जिद में ज़मज़म झरने से पवित्र पानी की बोतलें निकालने के लिए ब्लैक-एंड-व्हाइट रोबोट तैनात किए हैं, जिसके लिए दुनिया भर के मुसलमान प्रार्थना करते हैं।काबा में श्रद्धेय ब्लैक स्टोन - जिसे यह प्रथागत है लेकिन तीर्थयात्रा के दौरान स्पर्श करना अनिवार्य नहीं है उसे पहुंच से बाहर रखने की उम्मीद है।

बीजिं। भारतीय विदेश मंत्री एस जयशंकर ने दुशांबे तजाकिस्तान में शंघाई सहयोग संगठन सम्मेलन के दौरान चीन विदेश मंत्री वांग यी से कहा वास्तविक नियंत्रण रेखा पर यथास्थिति में कोई एकतरफा परिवर्तन भारत को स्वीकार्य नहीं है और पूर्वी लद्दाख में शांति की पूर्ण बहाली के बाद ही समग्र संबंध विकसित हो सकते हैं। पूर्वी लद्दाख में मौजूदा स्थिति से द्विपक्षीय संबंधों पर नकारात्मक तरीके से प्रभाव पड़ रहा है।सितंबर 2020 में मास्को में अपनी पिछली बैठक को याद करते हुए, जयशंकर ने उस समय हुए समझौते पर पालन करने और पूर्वी लद्दाख में एलएसी के साथ शेष मुद्दों को जल्द से जल्द हल करने की आवश्यकता पर जोर दिया। जयशंकर ने कहा सीमा पर यथास्थिति चीन द्वारा बदलने की कोशिश की गई थी, जिसके कारण दोनों देशों के संबंध खराब हुए हैं। ​चीन को दोनों देशों के मध्य हुए समझौते का पालन करना चाहिए था।वांग की जयशंकर के साथ बातचीत पर गुरुवार को अपनी वेबसाइट पर पोस्ट किए गए एक बयान में, चीनी विदेश मंत्रालय ने कहा, भारतीय मंत्री ने कहा कि भारत-चीन संबंध निचले स्तर पर बने हुए हैं, जबकि गलवान घाटी और पैंगोंग झील सीमा पर स्थिति आमतौर पर सैनिकों की वापसी के बाद आसान हो रही है। भारत और चीन के बीच संबंध अभी भी निचले स्तर पर हैं जो किसी के हित में नहीं है। चीन उन मुद्दों पर समाधान निकालने के लिए तैयार है, जिनके लिए भारतीय पक्ष के साथ बातचीत और परामर्श के माध्यम से तत्काल उपचार की आवश्यकता है।वांग ने आगे कहा दोनों पक्षों के बीच समझौते और आम सहमति का कड़ाई से पालन करना, संवेदनशील विवादित क्षेत्रों में कोई भी एकतरफा कार्रवाई करने से परहेज करना, गलतफहमी और गलत निर्णय के कारण स्थिति की दोहराने से बचना होगा। आज, चीन और भारत अपने-अपने क्षेत्रों और बड़े पैमाने पर दुनिया में शांति और समृद्धि के लिए अधिक महत्वपूर्ण जिम्मेदारियों को निभाते हैं। उन्होंने कहा कि हमें अपने साझा रणनीतिक हितों पर अधिक ध्यान देना चाहिए और दोनों देशों के लोगों को अधिक लाभ पहुंचाना चाहिए।सन्य अधिकारियों के अनुसार, प्रत्येक पक्ष के पास वर्तमान में संवेदनशील क्षेत्र में वास्तविक नियंत्रण रेखा पर लगभग 50,000 से 60,000 सैनिक हैं 

नई दिल्‍ली। मध्‍य और दक्षिण एशियाई देशों में और अधिक तालमेल बिठाने और आपसी संबंधों को मजबूत करने के मकसद से उजबेकिस्‍तान के ताशकंद में दो दिवसीय सेंट्रल एंड साउथ एशिया कांफ्रेंस की शुरुआत हुई है। इस बाबत उजबेकिस्‍तान की एजेंसी फॉर इंफॉर्मेशन एंड मास कम्‍यूनिकेशन के फस्‍र्ट डिप्‍टी डायरेक्‍टर दिलशोद सेद्जानोव ने कहा है कि सेंट्रल एंड साउथ एशिया कांफ्रेंस का असल मकसद यहां के एक्‍सपर्ट और अधिकारियों के बीच आपसी रिश्‍तों को और मजबूत करना है।15-16 जुलाई के बीच हो रही इस कांफ्रेस में भारत की तरफ से विदेश मंत्री एस जयशंकर शामिल हैं। ताशकंद में हो रही इस कांफ्रेंस का शीर्षक इंटरनेशनल कांफ्रेंस ऑन सेंट्रल एंड साउथ एशिया रिजनल कनेक्टिविटी, चैलेंज एंड ऑपरच्‍युनिटी रखा गया है। इस कांफ्रेंस से पहले उजबेकिस्‍तान में मौजूद भारतीय राजदूत मनीष प्रभात ने इसको लेकर भारतीय नजरिए की जानकारी दी थी। उनका कहना था कि भारत वर्ष 2000 से ही यहांक सभी देशों को आपस में जोड़ने की बात कहता रहा है। ईरान और रूस पहले से ही उत्‍तरी ट्रांसपोर्ट कॉरिडोर पर काम कर रहे हैं। आज इस मुद्दे पर इस प्‍लेटफार्म के माध्‍यम से कई सारे देश एक साथ आए हैं। भारत की पूरी कोशिश है कि वो इसमें शामिल सभी देशों से आपसी संबंधों केा और अधिक मजबूत करे।मनीष ने चाहबहार पोर्ट के बाबत पूछे गए एक सवाल के जवाब में कहा कि मध्‍य एशियाई क्षेत्र में ईरान स्थित ये चाहबहार पोर्ट आपसी व्‍यापार में बड़ी भूमिका निभा सकता है। भारत इसको काफी कुछ डेवलेप कर चुका है। भारत चाहता है कि देशों की ये आपसी कनेक्टिविटी इस पोर्ट के माध्‍यम से हो। इससे मध्‍य एशिया में व्‍यापार बढ़ेगा। मौजूदा समय में व्‍यापार का जरिया अफगानिस्‍तान है। चाहबहार पोर्ट पूरे मध्‍य एशिया के लिए बेहद खास हो सकता है।आपको बता दें कि मध्‍य एशिया पूरी तरह से जमीन से घिरा हुआ है। इसलिए भारत यहां पर व्‍यापार के लिए नए रास्‍ते तलाश रहा है। जमीन के साथ साथ वो एयर कॉरिडोर को भी एक विकल्‍प के रूप में देख रहा है। ये सभी बातें इस कांफ्रेंस का हिस्‍सा हैं। भारत की राय और विचारों को यहां पर विदेश मंत्री एस जयशंकर रखेंगे। ये कांफ्रेंस उजबेकिस्‍तान के राष्‍ट्रपति शावकत मिर्जीयोयेव के प्रयास से हो रही है।

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