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लखनऊ। अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में अपने जुझारूपन के लिए विख्यात यशपाल शर्मा का लखनऊ के साथ उत्तर प्रदेश में भी लम्बा समय बीता। लखनऊ के ग्रीष्मकालीन अखिल भारतीय शीशमहल क्रिकेट प्रतियोगिता के साïथ आगरा के अखिल भारतीय शहीद क्रिकेट में अपने हाथ दिखाने वाले यशपाल शर्मा तीन वर्ष तक उत्तर प्रदेश टीम के कोच भी रहे। उनकी देखरेख में कप्तान ज्ञानेन्द्र पाण्डेय ने रणजी ट्राफी में उत्तर प्रदेश की टीम से शानदार प्रदर्शन कराने में भी सफलता प्राप्त की।मध्य क्रम के बेहतरीन बल्लेबाज यशपाल शर्मा को जुझारूपन के चलते सात वर्ष तक कोई भी गेंदबाज उनको शून्य पर आउट नहीं कर पाया। पूर्व अंतरराष्ट्रीय क्रिकेटर ज्ञानेन्द्र पाण्डेय ने बताया कि यश पाजी के साथ मेरा काफी लम्बा तथा पुराना अनुभव रहा है। वह घरेलू क्रिकेट को काफी प्रोत्साहित भी करते थे।यशपाल शर्मा की मौत की खबर आज सुबह मिलने पर ज्ञानेन्द्र पाïण्डेय को यकीन ही नहीं हुआ। यशपाल शर्मा के जुझारूपन को देखते हुए उनको रणजी टीम का कोच बनाया गया। उस समय टीम के कप्तान ज्ञानेन्द्र पाण्डेय थे। ज्ञानेन्द्र ने बताया कि उन्होंने बतौर कोच उत्तर प्रदेश की रणजी ट्राफी टीम के हर सदस्य को मानसिक रूप से भी काफी मजबूत किया। यशपाल शर्मा वर्ष 2000 से 2002 तक रणजी ट्राफी में उत्तर प्रदेश की रणजी टीम के मुख्य कोच रहे। ज्ञानेन्द्र ने बताया कि वह संतुलित टीम बनाने के लिए सभी के प्रदर्शन पर प्रमुखता से नजर रखते थे। वह हमेशा खिलाडिय़ों को हर फार्मेट में बेहतर करने के लिए प्रेरित कर मैदान में खूब अभ्यास कराते थे। हर टीम के खिलाफ उनका नजरिया अलग ही होता था। वह टीम को जीत के ट्रैक पर लाने के लिए अक्सर गुस्सा हो जाते थे। उनका हर खिलाड़ी के साथ बेहतर तालमेल रहता था। उस दौर में उत्तर प्रदेश को दो मैचों में हार के बाद कोच यशपाल शर्मा गुस्सा होकर ड्रेसिंग रूम छोड़कर चले गए थे। इसका बड़ा असर हो गया। टीम ने अगले दो मैचों में राजस्थान और विदर्भ पटखनी देकर नाकआउट में प्रवेश किया था।ज्ञानेन्द्र ने कहा कि वाकई यशपाल पाजी का जवाब नहीं था। जब वह कोच बनाए गए तो तब तक उनके बारे में बहुत नहीं जानता था। एक सीनियर क्रिकेटर के नाते तो मैं कई बार उनसे मिला लेकिन कभी बहुत बातचीत नहीं हुई। ज्ञानेन्द्र ने बताया कि उन दिनों मैं गेंदबाजी कम करने लगा था, इसको लेकर वह काफी नाराज हो गए। वह मुझे बतौर गेंदबाज अच्छा प्रदर्शन करते हुए पहले ही देख चुके थे। इसके बाद व्यक्तिगत रूप से मुझे गेंदबाजी के टिप्स देते थे। कोच की कमान संभालने के बाद एक दिन नेट पर मुझे गेंदबाजी करते हुए बोले...तू मैच में लंबी बॉंलिंग क्यों नहीं करता। मैच में भी बालिंग किया कर यार....तेरी गेंद में वेरीऐशन है, जमकर विकेट निकालेगा। यश पाजी के प्रोत्साहन के बाद से ही मै मैचों में भी नियमित गेंद डालने लगा। गेंदबाजी में यश पाजी ने ही आत्मविवास बढ़ाया जिसके कारण इतने विकेट लेने में सफल रहा। वह बिंदास व्यक्ति और महान क्रिकेटर थे। उत्तर प्रदेश की टीम को छोडऩे के बाद भी वह लगातार मुझे फोन पर समझाते रहते थे।

 

उनके आते ही ड्रे्सिंग रूम में गूंजते थे हंसी के ठहाके:-पूर्व क्रिकेटर और उत्तर प्रदेश सरकार में मंत्री मोहसिन रजा ने बताया कि यशपाल भाई को कुछ दिनों पहले ही फोन आया था। नोएडा में उनका एक काम था, नहीं पता था कि इतनी जल्दी वह हम सबको छोड़कर चले जाएंगे। शीशमहल क्रिकेट टूर्नामेंट में यशपाल भाई खेलने आते थे। मैच कैसा भी हो किसी भी स्थिति में हो अगर ड्रे्सिंग रूम में यशपाल भाई हैं तो फिर हंसी मजाक के अलावा कुछ नहीं होता था। यशपाल भाई को लखनऊ बहुत अच्छा लगता था। वह कहते थे यार मोहसिन तेरा शहर बहुत अच्छा है। 

भोपाल। राज्यसभा सदस्य दिग्विजय सिंह (Digvijay Singh) के  हिंदू विरोधी बयानों को लेकर कांग्रेस पार्टी के भीतर से विरोधी सुर उठने लगे हैं। पार्टी के वरिष्‍ठ नेता भी यह मानने लगे हैं कि हिंदू विरोधी बयानों ने कांग्रेस को बड़ा नुकसान पहुंचाया है। महत्‍वपूर्ण बात यह भी है कि इस संबंध में कांग्रेस की अंतरिम अध्‍यक्ष सोनिया गांधी (Sonia Gandhi) से पार्टी नेता अब संवाद कर रहे हैं।वहीं मध्य प्रदेश के गृहमंत्री नरोत्तम मिश्रा (Narottam Mishra) ने दिग्विजय पर निशाना साधते हुए ट्वीट किया है। उन्होंने लिखा कि कांग्रेस के युवराज के राजनीतिक गुरु दिग्विजय सिंह की हिंदू विरोधी मानसिकता के खिलाब अब उन्हीं की पार्ट में आवाज बुलंद हो गई है।मामला ऑल इंडिया कांग्रेस के सदस्‍य विश्‍वबंधु राय द्वारा लिखे एक पत्र का है। 11 जुलाई को सोनिया गांधी को लिखे पत्र में उन्होंने कहा है कि हिंदुत्‍व और हिंदू विरोधी बयानों से पार्टी को नुकसान हो रहा है। उन्‍होंने इस पर विस्‍तार से आपत्ति दर्ज कराई है। राय ने ऐसे बयानों पर रोक लगाने की मांग की है। मालूम हो कि दिग्विजय सिंह पहले भी कई बार हिंदू विरोधी बयान देकर विवादों में रह चुके हैं।दिग्विजय सिंह ने हाल ही में मोहन भागवत के बयान पर प्रतिक्रिया दी और कहा कि देश में हिंदू और मुस्लिम का डीएनए एक ही है। ऐसे में लव जिहाद जैसे कानून की जरूरत नहीं है। इस बयान पर भारतीय जनता पार्टी ने उन्हें घेरा था। बता दें कि उनके बयानों से कभी-कभी पार्टी भी असहज हो जाती है।

चेन्नई। तमिलनाडु (Tamil Nadu) के मुख्यमंत्री एम के स्टालिन ( Chief Minister M.K. Stalin) ने आज प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी (Prime Minister Narendra Modi) से राज्य के लिए कोरोना वैक्सीन की मांग की है। मुख्यमंत्री स्टालिन ने अनुरोध किया है कि राज्य के लिए वैक्सीन की एक करोड़ खुराक का विशेष आवंटन किया जाए। साथ ही उन्होंने प्रधानमंत्री मोदी से वैक्सीन के आवंटन में हुए असंतुलन में सुधार करने की अपील की। मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य को  वैक्सीन की किल्लत का सामना करना पड़  रहा है।

जनसंख्या के अनुपात में नहीं है खुराकें:-द्रविड़ मुनेत्र कड़गम ( Dravida Munnetra Kazhagam, DMK) के प्रमुख ने राज्य को जनसंख्या के अनुपात में वैक्सीन काफी कम मिली है। उन्होंने कहा कि केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय  (Ministry of Health and Family Welfare) ने वादा किया था  कि राज्यों में वैक्सीन के योग्य 18 से 44 वर्ष के आयुवर्ग की आबादी के लिए खुराकें मुहैया कराई जाएंगी। स्टालिन ने अपने पत्र में कहा कि तमिलनाडु (Tamil Nadu) को प्रति हजार की आबादी के लिए 302 वैक्सीन का आवंटन किया गया था, गुजरात, कर्नाटक और राजस्थान जैसे  राज्यों को 533, 493 और 446 वैक्सीन की खुराकें  दी गई थी। इससे यह स्पष्ट पता चलता है कि तमिलनाडु के साथ अन्याय हुआ। 8 जुलाई तक तमिलनाडु ने केवल 29,18,110 वैक्सीन की खुराकें केंद्र सरकार से प्राप्त की जो यहां के  18-44 वर्ष के आयुवर्ग के लिए है।

 

राज्य में रुक गया है टीकाकरण अभियान ;-मुख्यमंत्री ने कहा कि वैक्सीन की किल्लत से राज्य में टीकाकरण अभियान को आगे बढ़ाना मुश्किल हो गया है। उन्होंने यह भी कहा कि वैक्सीन को लेकर राज्य सरकार द्वारा चलाए जा रहे जागरुकता अभियान के बेहतर नतीजे मिल रहे हैं। वैक्सीन की खुराक के लिए लोगों की लंबी कतारें लग रहीं हैं। उल्लेखनीय है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी इसी शुक्रवार तमिलनाडु समेत अन्य 6 राज्यों में कोरोना हालात की समीक्षा के लिए मुख्यमंत्रियों से चर्चा करेंगे। 

नई दिल्ली:- स्वास्थ्य मंत्रालय ने कहा है कि देश के कई हिस्सों में कोविड प्रोटोकाल का घोर उल्लंघन देखा जा रहा है जो अब तक मिले लाभ को समाप्त कर सकता है। देश में महामारी की स्थिति पर एक संवाददाता सम्मेलन को संबोधित करते हुए स्वास्थ्य मंत्रालय में संयुक्त सचिव लव अग्रवाल ने कहा कि लोग कोरोना की तीसरी लहर के बारे में "मौसम अपडेट" के रूप में बात करते हैं, लेकिन यह समझने में विफल रहते हैं कि कोविड को लेकर उपयुक्त व्यवहार या उसके पालन को लेकर कमी ही भविष्य की किसी भी लहर को रोकेगा या पैदा करेगा।प्रेस कॉन्फ्रेंस में मौजूद नीति आयोग के सदस्य (स्वास्थ्य) डॉ. वीके पॉल ने कहा कि विश्व स्तर पर कोरोना की तीसरी लहर देखी जा रही है और लोगों से यह सुनिश्चित करने के लिए प्रयास करने का आह्वान किया जाता है कि यह भारत में न हो।उन्होंने कहा कि 13 जुलाई को समाप्त हुए सप्ताह में देश के 55 जिलों में 10 फीसद से अधिक कोरोना की पॉजिटिविटी रेट दर्ज की गई है। कोविड प्रबंधन में राज्यों का सहयोग करने के लिए महाराष्ट्र, छत्तीसगढ़, असम, मेघालय, ओडिशा, मिजोरम, अरुणाचल प्रदेश, मणिपुर, नागालैंड और त्रिपुरा 10 राज्यों में केंद्रीय टीमों की प्रतिनियुक्ति की गई है।केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय के आंकड़ों के अनुसार, मध्य प्रदेश द्वारा अपने मौत के आंकड़ों में बदलाव करते हुए 2,020 नई मौतों के साथ भारत में कोरोना से मौत का आंकड़ा मंगलवार को 4,10,784 हो गया। केंद्रीय स्‍वास्‍थ्‍य मंत्रालय के मुताबिक, देश में बीते 24 घंटों के दौरान कोरोना संक्रमण के कुल 31443 मामले सामने आए हैं। देश में रिकवरी रेट में तेजी आई है और ये अब 97.28 फीसद तक जा पहुंचा है। देश के एक्टिव मामलों की संख्‍या अब 431315 हो गई है, जो बीते 109 में सबसे कम है।

पुणे। रूसी प्रत्यक्ष निवेश कोष (आरडीआईएफ) के सीईओ किरिल दिमित्रीव ने कहा कि सीरम इंस्टीट्यूट ऑफ इंडिया (एसआईआई) सितंबर में स्पुतनिक वी का उत्पादन शुरू करेगा। कुछ अन्य निर्माता भी भारत में इस वैक्सीन का उत्पादन करने के लिए तैयार हैं।

रूसी प्रत्यक्ष निवेश कोष:-रूसी प्रत्यक्ष निवेश कोष, जो कि विश्व स्तर पर टीकाकरण को बढ़ावा दे रहा है, उसने कहा कि योजना भारत में प्रति वर्ष वैक्सीन की 300 मिलियन से अधिक खुराक का निर्माण करने की थी, जिससे यह स्पुतनिक वी के लिए प्रमुख उत्पादन केंद्रों में से एक बन गया।रूसी प्रत्यक्ष निवेश कोष (आरडीआईएफ) ने एक बयान में कहा, 'पार्टियां सितंबर 2021 में पहले बैच के साथ भारत में प्रति वर्ष वैक्सीन की 300 मिलियन से अधिक खुराक का उत्पादन करने का इरादा रखती हैं।'RDIF ने आगे कहा कि मात्रा के हिसाब से दुनिया की सबसे बड़ी वैक्सीन निर्माता सीरम इंस्टीट्यूट ऑफ इंडिया,(SII) को रूस के गामालेया सेंटर से सेल और वेक्टर नमूने पहले ही मिल चुके हैं। इसने यह भी कहा कि ड्रग कंट्रोलर जनरल ऑफ इंडिया (DCGI) द्वारा अनुमोदित आयात के साथ, खेती की प्रक्रिया शुरू हो गई है।RDIF, (आरडीआईएफ) ने कहा कि स्पुतनिक वी को अब तक दुनिया भर के 67 देशों में पंजीकृत किया गया है, जिसमें लगभग 3.5 बिलियन लोग शामिल हैं।अभी तक, भारत में स्पुतनिक वी का विपणन डॉ रेड्डीज लैबोरेटरीज लिमिटेड द्वारा किया जाता है। इससे पहले कल, गमलेया संस्थान ने कहा था कि उसके द्वारा किए गए एक अध्ययन के दौरान, स्पुतनिक वी के साथ टीकाकरण ने अल्फा (बी.1.1.7) सहित नए वेरिएंट के खिलाफ सुरक्षात्मक न्यूट्रलाइजिंग टाइटर्स का उत्पादन किया है - पहली बार यूके में पहचाना गया - बीटा (बी.1.351) - पहली बार दक्षिण अफ्रीका में पहचाना गया - गामा (पी.1) - पहली बार ब्राजील में पहचाना गया - और डेल्टा (बी.1.617.2 और बी.1.617.3), पहली बार भारत में पहचाना गया।रतीय दवा नियामक ने स्पुतनिक वी के प्रतिबंधित आपातकालीन उपयोग की अनुमति दी है। इससे पहले, दुनिया के सबसे बड़े वैक्सीन निर्माता सीरम इंस्टीट्यूट ऑफ इंडिया ने वैक्सीन की खुराक की आपूर्ति के लिए एस्ट्राजेनेका के साथ साझेदारी की थी। जिसके तहत भारत में, वैक्सीन को 'COVISHIELD' नाम से प्रशासित किया जा रहा है। 

 रांची। कभी मतांतरण के काम में लगे पादरी राबर्ट सॉलोमन राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) की विचारधारा और संघ के अधिकारियों से मिले तो उनके प्रेम से इतने प्रभावित हुए कि स्वयं मतांतरित होकर डा. सुमन कुमार संघ के प्रचारक बन गए। संघ ने भी नया प्रयोग किया कि आरएसएस के विचारों को समझने के लिए इंडोनेशिया के जकार्ता से भेजे गए पादरी को अपनाने का निर्णय लिया और उस समय के प्रचारकों ने इन्हें इतना प्रेम दिया कि वे फिर भारत के ही होकर रह गए। आक्सफोर्ड यूनिवर्सिटी में आर्गेनिक रसायन में रिसर्च करने के दौरान ही वे पादरी बन चुके थे और मतांतरण के काम से इनका भारत के तमिलनाडु की राजधानी चेन्‍नई में आना-जाना 1982 से शुरू था।संघ की गतिविधियों को नजदीक से समझने के लिए ईसाई मिशनरियों ने 25 वर्ष की उम्र में 1984 में इन्हें भारत भेजा और दो वर्षों में संघ के कामों को नजदीक से देखने और हिंदू चिंतन व दर्शन से इतने प्रभावित हुए की स्वयं को हिंदू बनना स्वीकार किया। 1986 में मतांतरित होकर आर्य समाज पद्धति से हिंदू सनातन धर्म स्वीकार कर लिया। उसी वर्ष संघ के प्रचारक बन गए और हिंदू जागरण मंच के काम में लगाए गए। संघ के वरिष्ठ प्रचारक और आरोग्य भारती के राष्ट्रीय संगठन मंत्री डा. अशोक वार्ष्‍णेय कहते हैं कि सुमन कुमार को उस समय के संघ के प्रचारकों ने पुत्र की तरह पाला। ठाकुर राम गोविंद सिंह तो उनको पुत्र और वे उन्हें पिता मानने लगे थे, जो उत्तर प्रदेश के हिंदू जागरण मंच के संगठन मंत्री थे। ईसाई होने के कारण संघ ने नया प्रयोग करते हुए इन पर विश्‍वास किया और वे भी संघ की विचारधारा में पूरी तरह रंग गए। सुमन कुमार ने भाषा की समस्या को दूर करने के लिए वर्तमान अखिल भारतीय बौद्धिक प्रमुख स्वांत रंजन से काफी सहयोग लि‍या। आज हिंदू जागरण मंच के उत्तर पूर्व क्षेत्र (झारखंड-बिहार) के संगठन मंत्री का दायित्व निभा रहे हैं और संघ के तृतीय वर्ष में प्रशिक्षित हैं।

बुंदेलखंड के उरई जिला में संघ के संपर्क में आए : दैनिक जागरण से बातचीत में सुमन कुमार ने बताया कि वे सबसे पहले बुंदेलखंड के उरई जिला में संघ के संपर्क में आए। जहां मैंने आवास रखा था वहीं नजदीक में संघ की शाखा लगती थी। मैं शाखा पर जाने लगा। संघ की शाखा सभी वर्ग के लोगों के लिए शुरू से ही खुला है। स्वयंसेवकों के कामों को नजदीक से देखा। उस समय के उत्तर प्रदेश के क्षेत्र प्रचारक जयगोपालजी के संपर्क में आया। उनका बौद्धिक सुना। उसी दौरान अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद के संगठन मंत्री स्वतंत्र देव सिंह जो अभी उत्तर प्रदेश में भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष हैं के संपर्क में आया। फिर संघ के प्रचारक ओंकार भावे जी, जो विहिप के संगठन मंत्री भी थे से संपर्क हुआ। मेरे सामने भाषा की समस्या थी। हिंदी आती नहीं थी। ओंकार भावे ने संघ की अंग्रेजी में पुस्तकें उपलब्ध कराई। स्वामी विवेकानंद की पुस्तकों को पढ़ा। फिर संघ के कामों को देखने के बाद मैंने तीन माह में ही मिशनरी को अपनी रिपोर्ट भेज दी।

अपनी रिपोर्ट में लिखा, जिनका मतांतरण कराते हैं उनका हो जाता है राष्ट्रांतरण : बतौर सुमन कुमार, भारत में भेजने से पहले मुझे बताया गया था कि संघ के लोग चर्च को तोड़ देते हैं। बाइबिल जला देते हैं। पादरियों पर हमला करते हैं। परंतु मुझे ऐसा कुछ नहीं दिखा। मिशनरियों को भेजे गए अपनी रिपोर्ट में मैंने लिखा की जिनका आप मतांतरण कराते हैं उनका राष्ट्रांतरण हो जाता है। ये लोग पादरियों को परेशान नहीं करते हैं। संघ विध्वंसक काम नहीं करता है। ये लोग भारत को कर्म भूमि, देव भूमि मानते हैं। ईसा मसीह का प्रचार करो परंतु मतांतरण मत करो। भारत में रहना है तो भारत को समझिए, भारत को जानिये और भारतीयता में रंगिये।

कानपुर में गुजरा लंबा वक्‍त : सुमन कुमार बताते हैं कि 1986 में गोरखपुर में हुई प्रचारक बैठक में मुझे संघ प्रचारक घोषित कर दिया गया। उसके बाद हिंदू जागरण मंच के काम को देखने की जिम्मेदारी दी गई। केंद्र कानपुर रखा गया। कारवालो नगर स्थित संघ कार्यालय में रहता था। काफी लंबा वक्‍त यहां गुजरा, संभाग प्रचारक रामशीष जी, सह प्रांत प्रचारक बालकृष्ण त्रिपाठी ने बहुत ज्यादा सहयोग किया। वहीं पर रहते हुए मैं हिंदू जागरण मंच का महानगर, विभाग, संभाग एवं प्रांत संगठन मंत्री का दायित्व संभाला। वर्ष 2000 में मेरा केंद्र लखनऊ हो गया और अवध प्रांत का संगठन मंत्री बन गया।

2004 में झारखंड प्रांत के संगठन मंत्री बने : सुमन कुमार ने कहा कि उस समय के सरकार्यवाह और वर्तमान समय में सरसंघचालक डा. मोहन भागवतजी ने मुझे वर्ष 2004 में झारखंड भेजा। वे झारखंड-बिहार का क्षेत्र प्रचारक रहते हुए यहां की परिस्थिति को समझ रहे थे। उस समय झारखंड के प्रांत प्रचारक डा. अशोक वार्ष्‍णेय थे। कानपुर के साथ-साथ यहां भी उनका पूरा सहयोग मिला।

कार्डिनल से मिली चुनौतियों का किया सामना : सुमन कुमार बताते हैं कि जब मैं झारखंड आया उस समय यहां मतांतरण तेज गति से चल रहा था। सिमडेगा और गुमला के इलाके में ज्यादा था। कार्डिनल का भी काफी प्रभाव था। एक वर्ष तक झारखंड को जानने का काम किया। फिर प्रवास करना शुरू किया। समाज में विश्‍वास पैदा किया कि ईसाई मिशनरियां आपकी हितैषी नहीं हैं। दो वर्षों तक कार्डिनल का विरोध किया। वे भी मुझे बाहरी कह कर लोगों को भड़काते थे। रांची के ओरमांझी में आदिवासी जमीन पर बनाए जा रहे चर्च को ध्वस्त कर दिया। जनजातियों को बताने का काम किया कि सरना और सनातन एक मां के पुत्र हैं। कार्डिनल को मतांतरण विषय पर चर्चा करने का भी प्रस्ताव दिया, परंतु वे आए नहीं। कार्यक्रमों में आरएसएस के वरिष्ठ प्रचारक इंद्रेश कुमार को बुलाना शुरू किया, पाहन, पुजारी को सम्मानित किया, जिसका असर लोगों पर पड़ऩा शुरू हुआ। घर वापसी कार्यक्रम के तहत अब तक 8000 लोगों की घर वापसी करवा चुका हूं। आज झारखंड के सभी जिलों में हिंदू जागरण मंच का काम चल रहा है। 2015 से झारखंड-बिहार के क्षेत्र संगठन मंत्री हूं और केंद्र पटना है। पूरे बिहार में भी अब संगठन का अच्छा काम शुरू हो गया है।

नई दिल्ली। दक्षिण-पश्चिम मानसून ने आज दिल्ली के साथ पूरे देश को कवर कर लिया। मौसम विभाग ने आज राजस्थान और जम्मू-कश्मीर के लिए ऑरेंज अलर्ट और हिमाचल प्रदेश, उत्तराखंड और उत्तर प्रदेश के लिए यलो अलर्ट जारी करके भारी बारिश की चेतावनी दी है। मौसम विभाग के अनुसार, कोंकण, गोवा और मध्य महाराष्ट्र के लिए रेड अलर्ट और गुजरात, कर्नाटक के कुछ हिस्सों, महाराष्ट्र और असम के लिए बारिश का ऑरेंज अलर्ट जारी किया है।

अगले दो घंटे में दिल्ली में बारिश की संभावना:-मौसम विभाग ने बताया कि अगले दो घंटों में वेस्‍ट दिल्ली, सेंट्रल दिल्‍ली, नई दिल्‍ली, साउथ-वेस्‍ट दिल्‍ली, साउथ-ईस्‍ट दिल्‍ली, ईस्‍ट दिल्‍ली में बारिश होगी। इसके अलावा एनसीआर में गुरुग्राम, फरीदाबाद, हिंडन एयरफोर्स स्‍टेशन, गाजियाबाद, नोएडा, ग्रेटर नोएडा, महेंद्रगढ़ सोहना वगैरह में भी बारिश होने वाली है। मौसम विभाग ने हफ्ते भर के लिए दिल्‍ली के मौसम का पूर्वानुमान जारी कर दिया है। आज और कल गरज के साथ हल्‍की बारिश का अनुमान है। 15 और 16 जुलाई को आसमान साफ रह सकता है। 17 जुलाई से फिर बारिश शुरू हो जाएगी।

 

इन राज्यों में भारी बारिश का अलर्ट;-मौसम विभाग के अनुसार, कोंकण, गोवा और मध्य महाराष्ट्र के लिए रेड अलर्ट और गुजरात, कर्नाटक के कुछ हिस्सों, महाराष्ट्र और असम के लिए ऑरेंज अलर्ट जारी किया है। विभाग ने बताया कि मध्य प्रदेश, आंध्र प्रदेश, बिहार, झारखंड और पश्चिम बंगाल के कुछ हिस्सों और केरल के लिए येलो अलर्ट जारी किया गया है। दक्षिण-पश्चिम मॉनसून के रविवार को आगमन के बाद देश के विभिन्न भागों में भारी बारिश हो रही है, वहीं कुछ इलाकों में आंधी और बिजली गिरने की घटनाएं भी हुई हैं।

पहाड़ी राज्यों में भारी बारिश से तबाही, हालात बेकाबू:-बता दें कि बारिश, तूफान और बादल फटने की कई घटनाओं से कम से कम तीन राज्यों में तबाही मची है. पहाड़ी राज्यों में हालात बेकाबू हैं। मौसम विभाग ने चेतावनी दी है कि उत्तराखंड, राजस्थान और जम्मू कश्मीर में अगले 48 घंटे में भारी बारिश के आसार हैं।

वाशिंगटन। अफगानिस्तान में तालिबान तेजी से विस्तार कर रहा है। एक के बाद एक जिले पर कब्जे के साथ ही अब उसने गजनी और कंधार पर भी हमले शुरू कर दिए हैं। ऐसी स्थिति में भी काबुल के अमेरिकी दूतावास में कोई खलबली और खौफ नहीं है। कामकाज पूरी तरह सामान्य रूप से चल रहा है। यहां दुभाषियों और अन्य अफगान सहयोगियों के वीजा जारी करने के लिए तेजी से काम शुरू कर दिया गया है।

दूतावास में अधिकारियों की सामान्य बैठक शुरू;-रविवार से यहां के अधिकारियों ने वीजा संबंधी साक्षात्कार लेने की तैयारी कर ली है। यहां हर रोज वीजा पाने वाले दो सौ लोगों का साक्षात्कार लिया जाएगा। दूतावास में अधिकारियों की सामान्य बैठक भी शुरू हो गई हैं। अमेरिकी मिशन के सह-प्रमुख स्काट वेनहाल्ट ने बताया कि कुछ लोग मेरे पास आए और कहा कि क्या हमारी नौकरी अब भी चलती रहेगी। मैंने कहा कि हम पक्के इरादे के साथ दूतावास खोले हैं और ठीक से चलाएंगे।

अमेरिका के काबुल दूतावास में 1400 अमेरिकी अधिकारी:-वेनहोल्ड ने कहा कि यहां के अमेरिकी अधिकारियों को यह विकल्प दिया था कि वे जोखिम को लेकर अपना पद छोड़ सकते हैं, लेकिन किसी भी अधिकारी ने ऐसा नहीं किया। अमेरिका की नब्बे फीसद से ज्यादा सेना यहां से जा चुकी है। सोमवार को यहां तैनात सेना के आख्रिरी जनरल स्काट मिलर ने भी अफगानिस्तान छोड़ दिया है। अमेरिका के काबुल दूतावास में 1400 अमेरिकी अधिकारी हैं और यहां चार हजार कर्मचारी काम करते हैं। इनकी सुरक्षा के लिए 650 से 1000 तक अमेरिकी सैनिक तैनात रहेंगे।

अमेरिकी फौज और नाटो फौज की वापसी शुरू:-बता दें है कि अफगानिस्‍तान से अमेरिकी फौज और नाटो फौज की वापसी शुरू हो चुकी है। अगस्‍त के अंत तक अमेरिका अपनी पूरी फौज को यहां से निकाल लेगा। अमेरिका की वापसी के साथ ही अफगानिस्‍तान में तालिबान ने हमले भी तेज कर दिए हैं। तालिबानी नेता शाहबुद्दीन के मुताबिक तालिबान ने अफगानिस्‍तान के 85 फीसद इलाके पर कब्‍जा कर लिया है। ये बात उन्‍होंने मास्‍को में एक प्रेस कांफ्रेंस में कही है। हालांकि अमेरिका ने कहा है कि तालिबान के अफगानिस्‍तान में बढ़त लेने का अर्थ ये नहीं है कि वो वहां पर आगे भी बना रहेगा।

वाशिंगटन। अफगानिस्तान में तालिबान तेजी से विस्तार कर रहा है। एक के बाद एक जिले पर कब्जे के साथ ही अब उसने गजनी और कंधार पर भी हमले शुरू कर दिए हैं। ऐसी स्थिति में भी काबुल के अमेरिकी दूतावास में कोई खलबली और खौफ नहीं है। कामकाज पूरी तरह सामान्य रूप से चल रहा है। यहां दुभाषियों और अन्य अफगान सहयोगियों के वीजा जारी करने के लिए तेजी से काम शुरू कर दिया गया है।

दूतावास में अधिकारियों की सामान्य बैठक शुरू;-रविवार से यहां के अधिकारियों ने वीजा संबंधी साक्षात्कार लेने की तैयारी कर ली है। यहां हर रोज वीजा पाने वाले दो सौ लोगों का साक्षात्कार लिया जाएगा। दूतावास में अधिकारियों की सामान्य बैठक भी शुरू हो गई हैं। अमेरिकी मिशन के सह-प्रमुख स्काट वेनहाल्ट ने बताया कि कुछ लोग मेरे पास आए और कहा कि क्या हमारी नौकरी अब भी चलती रहेगी। मैंने कहा कि हम पक्के इरादे के साथ दूतावास खोले हैं और ठीक से चलाएंगे।

अमेरिका के काबुल दूतावास में 1400 अमेरिकी अधिकारी:-वेनहोल्ड ने कहा कि यहां के अमेरिकी अधिकारियों को यह विकल्प दिया था कि वे जोखिम को लेकर अपना पद छोड़ सकते हैं, लेकिन किसी भी अधिकारी ने ऐसा नहीं किया। अमेरिका की नब्बे फीसद से ज्यादा सेना यहां से जा चुकी है। सोमवार को यहां तैनात सेना के आख्रिरी जनरल स्काट मिलर ने भी अफगानिस्तान छोड़ दिया है। अमेरिका के काबुल दूतावास में 1400 अमेरिकी अधिकारी हैं और यहां चार हजार कर्मचारी काम करते हैं। इनकी सुरक्षा के लिए 650 से 1000 तक अमेरिकी सैनिक तैनात रहेंगे।

अमेरिकी फौज और नाटो फौज की वापसी शुरू:-बता दें है कि अफगानिस्‍तान से अमेरिकी फौज और नाटो फौज की वापसी शुरू हो चुकी है। अगस्‍त के अंत तक अमेरिका अपनी पूरी फौज को यहां से निकाल लेगा। अमेरिका की वापसी के साथ ही अफगानिस्‍तान में तालिबान ने हमले भी तेज कर दिए हैं। तालिबानी नेता शाहबुद्दीन के मुताबिक तालिबान ने अफगानिस्‍तान के 85 फीसद इलाके पर कब्‍जा कर लिया है। ये बात उन्‍होंने मास्‍को में एक प्रेस कांफ्रेंस में कही है। हालांकि अमेरिका ने कहा है कि तालिबान के अफगानिस्‍तान में बढ़त लेने का अर्थ ये नहीं है कि वो वहां पर आगे भी बना रहेगा।

लंदन। यूरोपीय यूनियन ने अपने सदस्‍य देशों में पर्यटन को बढ़ावा देने के मकसद से इसी माह कोविड-19 जीटल सर्टिफिकेट की शुरुआत की है। ये सर्टिफिकेट दरअसल, कोरोना से सुरक्षित होने का यूरोपीय संघ द्वारा जारी एक डिजीटली एप्रूव्‍ड सर्टिफिकेट है। आगे बढ़ने से पहले आपको ये बता दें कि कोरोना काल में विश्‍व स्‍तर पर पर्यटन के क्षेत्र में काफी गिरावट दर्ज की गई है। लेकिन अब जबकि धीरे-धीरे विश्‍व दोबारा पटरी पर वापस लौटने की कोशिश कर रहा है तो कुछ देश अपने पर्यटन उद्योग को भी नई ऊंचाई देना चाहते हैं। इसी मकसद से इसकी शुरुआत की गई है। आपको ये भी बता दें कि यूरोपीयन यूनियन केवल उन्‍हीं विदेशी पर्यटकों को अपने यहां पर आने की मंजूरी दे रहा है जिन्‍होंने उनके द्वारा मंजूर की गई कोरोना  वैक्‍सीन की खुराक ली है। हालांकि यूरोपीय संघ के नियमों को मानने के लिए इसका कोई भी सदस्‍य देश बाध्‍य नहीं है। इस माह की शुरुआत में यूरोपीयन यूनियन ने कोविड-19 के डिजीटल सर्टिफिकेट की शुरुआत की है। इस सर्टिफिकेट के साथ कोई भी व्‍यक्ति 27 देशों में मुक्‍त रूप से घूम सकता है। इसके लिए शर्त है कि उसको यूरोपीयन मेडिसिन एजेंसी द्वारा एप्रूव्‍ड चार वैक्‍सीन में से किसी एक की खुराक मिली हो। इसमें मॉडर्ना, एस्‍ट्राजेनेका, फाइजर और जॉनसन एंड जॉनसन की वैक्सीन शामिल है। ऐसे व्‍यक्ति को या तो अपनी नेगेटिव रिपोर्ट करवानी दिखानी होगी या फिर ये साबित करना होगा कि वो हाल ही में कोरोना महामारी से उबरा है।गौरतलब है कि अमेरिका और ब्रिटेन ने बड़ी संख्‍या में विदेश से आने वालों को न कहा है। वहीं दूसरी तरफ ईयू का ये डिजीटल सर्टिफिकेट कोरोना काल में पर्यटन को बढ़ावा देने और अर्थव्‍यवस्‍था में तेजी लाने का जरिया बन सकता है। गौरतलब है कि यूरोपीय संघ भारत में बनाई जा रही एस्‍ट्राजेनेका की वैक्‍सीन को मान्‍यता नहीं दे रहा है, जबकि ये वैक्‍सीन गरीब और मध्‍यम आय वाले कई देशों में लोगों को लगाई जा रही है। इसके अलावा इसमें चीन और यूरोप में बनाई जा रही वैक्‍सीन भी शामिल है।यहां पर ध्‍यान देने वाली बात ये भी है कि यूरोपीय संघ में शामिल विभिन्‍न देश अपने यहां पर अलग-अलग नियम बनाने को लेकर पूरी तरह से स्‍वतंत्र हैं। कई यूरोपीय देश जिसमें फ्रांस, इटली, बेल्जियम, जर्मनी, स्विटजरलैंड शामिल हैं, ने उन लोगों को अपने यहां पर आने की मंजूरी दी है जिन्‍होंने यूरोपीय संघ से मिली मंजूरी के अलावा भी कोई दूसरी कोरोना वैक्‍सीन ली हुई है।

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नार्थ अमेरिका में भारत की राष्ट्रीय भाषा 'हिन्दी' का पहला समाचार पत्र 'हम हिन्दुस्तानी' का शुभारंभ 31 अगस्त 2011 को न्यूयॉर्क में भारत के कौंसल जनरल अम्बैसडर प्रभु दियाल ने अपने शुभ हाथों से किया था। 'हम हिन्दुस्तानी' साप्ताहिक समाचार पत्र के शुभारंभ का यह पहला ऐसा अवसर था जब नार्थ अमेरिका में पहला हिन्दी भाषा का समाचार पत्र भारतीय-अमेरिकन्स के सुपुर्द किया जा रहा था। यह समाचार पत्र मुख्य सम्पादकजसबीर 'जे' सिंह व भावना शर्मा के आनुगत्य में पारिवारिक जिम्मेदारियों को निर्वाह करते हुए निरंतर प्रकाशित किया जा रहा है Read more....

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