Editor

Editor

जयपुर। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने रविवार को राजस्थान के चित्तौड़गढ़ में सभा को संबोधित करते हुए कहा कि अब सरकार बनते ही अलग से जल शक्ति मंत्रालय बनाएंगे। समुद्र का पानी मीठा करके सूखाग्रस्त क्षेत्र में पहुंचाएंगे।मोदी ने लोगों से पूछा कि आपको पाकिस्तान को जवाब देने वाली सरकार चहिए या आतंकी हमले के बाद चुप बैठने वाली सरकार चाहिए। उन्होने कहा कि देश को विश्वास है कि मोदी खुद पर वार झेल सकता है, अपना राजनीतिक अस्तित्व भी दांव पर लगा सकता है, लेकिन देश को झुकने नही देगा। उन्होंने लोगों से पूछा कि देश को कमजोर बनाने वाली कांग्रेस चाहिए या मजबूत बनाने वाली भाजपा चाहिए। मोदी ने पहली बार वोट देने वाले युवाओं से 21वीं सदी के निर्माण के लिए वोट देने की अपील की। उन्होंने कहा कि मोदी हर दिन पल-पल और पाई-पाई का हिसाब देता है और लेता भी है।मोदी का प्रचार अभियान जोधपुर और बाड़मेर जैसे दो हाई प्रोफाइल लोकसभा क्षेत्रों की सभाओं से शुरू होगा। प्रधानमंत्री बाड़मेर, जोधपुर व उदयपुर में सभा करेंगे। मोदी की दूसरी बाड़मेर में होगी। इसके बाद सोमवार को उदयपुर और जोधपुर में सभाएं होंगी।राजस्थान में 29 अप्रैल और छह मई को होने वाले मतदान के दोनों चरणों के लिए नामांकन प्रक्रिया समाप्त हो गई है। ऐसे में राष्ट्रीय स्तर के स्टार प्रचारकों के दौरे शुरू हो रहे हैं। लोकसभा चुनाव की अधिसूचना जारी होने से पहले प्रधानमंत्री ने फरवरी में टोंक व चुरू में जनसभाएं की थीं। अधिसूचना जारी होने के बाद प्रधानमंत्री का राजस्थान में यह पहला दौरा होगा। अभी तक प्रस्तावित कार्यक्रम के अनुसार चार मई तक राजस्थान में प्रधानमंत्री की करीब 10 से 12 सभाएं होनी हैं।
राजनीतिक दृष्टि से अहम हैं बाड़मेर और जोधपुर की सभाएं-प्रधानमंत्री की इन चार सभाओं में से बाड़मेर और जोधपुर की सभाएं राजनीतिक दृष्टि से काफी अहम हैं। यह दोनों आपस में लगती हुई सीटें हैं, लेकिन दोनों राजनीतिक दृष्टि से काफी अहम हैं। बाड़मेर राजस्थान का पाकिस्तान से लगता हुआ जिला है। यहां सेना भी तैनात है। यहां से भाजपा प्रत्याशी कैलाश चौधरी का मुकाबला अटल बिहारी वाजपेयी की सरकार में रक्षा मंत्री रह चुके जसवंत सिंह के पुत्र मानवेंद्र सिंह से है। मानवेंद्र सिंह दो बार भाजपा सांसद रह चुके हैं, लेकिन अब कांग्रेस में हैं। मानवेन्द्र सिंह राजपूत समुदाय के स्वाभिमान की बात करते हुए कांग्रेस में गए थे। खुद जसवंत सिंह ने पिछली बार टिकट नहीं मिलने पर यहां से निर्दलीय चुनाव लड़ा था, हालांकि हार गए थे। ऐसे में यह सीट राजनीतिक दृष्टि से भाजपा के लिए काफी अहम हो गई है।इसी तरह प्रधानमंत्री सोमवार को जोधपुर में सभा करेंगे। जोधपुर में भाजपा के प्रत्याशी केंद्रीय मंत्री गजेंद्रसिंह शेखावत हैं। उनका मुकाबला राजस्थान के मुख्यमंत्री अशोक गहलोत के पुत्र वैभव गहलोत से है। केंद्रीय मंत्री होने के अलावा गजेंद्र सिंह शेखावत राजस्थान में पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष पद की दौड़ में थे और उस समय उन्हें राजस्थान में पार्टी का भविष्य का चेहरा माना जा रहा था। ऐसे में यह बहुत ही हाई प्रोफाइल मुकाबला हो गया है। इस सीट की अहमियत का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह भी आने वाले दिनों में जोधपुर में रोड शो करेंगे। इनके अलावा प्रधानमंत्री की सभाएं चित्तौड़गढ़ और उदयपुर में हैं। ये दोनों ही सीटें आदिवासी वोटों के लिहाज से अहम सीटें हैं।

नई दिल्ली। दिल्ली पुलिस की क्राइम ब्रांच को शनिवार तक रोहित शेखर की हत्या का मकसद अवैध संबंध लग रहा था। लेकिन उस एंगल पर सुबूत नहीं मिले है। इसके बाद अब पुलिस संपत्ति के एंगल पर जांच कर रही है। पिछले तीन दिनों से रोहित के घर में डेरा डाल कर क्राइम ब्रांच जांच कर रही है। सभी को अंदर ही हिरासत में रखकर पूछताछ की जा रही है। जरूरत पड़ने पर किसी को बाहर ले जाया जाता है।उज्ज्वला के दूसरे पति के बेटे सिद्धार्थ के बारे में जांच में पता चला है कि उसमें संतान पैदा करने की क्षमता नहीं है इसलिए उन्होंने शादी नहीं की। पुलिस की जांच अपूर्वा के इर्द-गिर्द घूम रही है। पुलिस को लग रहा है कि अपूर्वा यह सोच रही हो कि सिद्धार्थ तो बेकार ही है। रोहित की हत्या कर देने पर एनडी तिवारी की सारी संपत्ति का मालिक वह बन जाएगी। इसलिए अब पुलिस अब संपत्ति के एंगल पर जांच कर रही है।
रोहित शेखर की मां ने दी पुलिस को ये जानकारी;-पुलिस पूछताछ में रोहित शेखर की मां उज्ज्वला ने अपूर्वा के बारे में अहम जानकारी दी है। उन्होंने बताया कि रोहित शेखर मेट्रोमोनियल साइट के जरिये 2017 में पहली बार अपूर्वा से लखनऊ मिले थे। उज्ज्वला ने कहा कि मेरे परिवार के रिश्तेदार राजीव और उनकी पत्नी के संदर्भ में जो शक किया जा रहा है वह गलत है। रोहित की मां ने कहा कि अपूर्वा को राजीव और एक महिला से परेशानी थी। अपूर्वा का परिवार मनी माइडेड है। मैं वक्त आने पर कुछ खुलासा करूंगी।
उज्ज्वला ने रोहित की पत्नी पर लगाए गंभीर आरोप:-उज्ज्वला ने आरोप लगाया कि मेरे दोनो बेटे रोहित और सिद्धार्थ की प्रॉपर्टी अपूर्वा और उसका परिवार हड़पना चाहते थे। क्योंकि ये घर सुप्रीम कोर्ट से पास है जहां अपूर्वा प्रक्टिस करती है। रोहित की मां ने कहा कि अपूर्वा का परिवार पैसे का लालची है। जल्द आपको सब पता चल जाएगा। विवाह के पहले अपूर्वा का बॉय फ्रेंड था। अपूर्वा के पिता गलत बोल रहे है।
रोहित के परिवार से नाराज थी अपूर्वा:-रोहित शेखर की मां उज्ज्वला ने बताया कि राजीव के बेटे कार्तिक को सिद्धार्थ अपनी प्रॉपर्टी का हिस्सा देना चाहता था। इस बात से अपूर्वा नाखुश थी। राजीव और उसकी पत्नी ने 40 साल से हमारी सेवा कर रही है। राजीव ने एनडी तिवारी की भी सेवा की है। उज्ज्वला ने कहा कि राजीव मेरे रिशेतदार है और एनडी तिवारी के OSD रहे है। फोन कॉल से वक्त आने पर सब पता चल जाएगा कि किसने किसको फोन किया।
शनिवार को आठ घंटे पुलिस ने की पूछताछ;-शनिवार को दिन भर चली पूछताछ में क्राइम ब्रांच ने रोहित की पत्नी अपूर्वा शुक्ला और मां उज्ज्वला सहित परिवार के आठ सदस्यों से आठ घंटे तक गहन पूछताछ की। ये पूछताछ रोहित की पत्नी अपूर्वा, मां उज्ज्वला शर्मा, रोहित के बड़े भाई सिद्धार्थ शर्मा, ससुर पीके शुक्ला, घरेलू नौकर गोलू, ड्राइवर अभिषेक और एक महिला नौकरानी सहित कुल 8 लोगों से हुई। पुलिस ने इन लोगों से करीब 80 सवाल पूछे गए। इसमें खासकर पत्नी अपूर्वा पुलिस की रडार पर रहीं।
आधी रात को रोहित के फोन से 12 लोगों को फोन कॉल;-पुलिस सूत्रों के मुताबिक पूछताछ की जद में रोहित की पत्नी के अलावा भाई सिद्धार्थ और मां उज्ज्वला भी हैं। पुलिस अधिकारियों के मुताबिक जांच में सबसे चौंकाने वाला तथ्य यह सामने आया है कि घटना वाले दिन सोमवार की आधी रात रोहित के फोन से एक व्यक्ति को 12 फोन किए गए। लिहाजा पुलिस इस नंबर के अलावा रोहित के फोन से किए गए अन्य 18 नंबरों की काल डिटेल रिकॉर्ड (सीडीआर) खंगाल रही है। दरअसल प्राथमिक रिपोर्ट में सोमवार की देर रात ही रोहित की हत्या की बात सामने आई है

नई दिल्ली। सुप्रीम कोर्ट के चार जजों ने न्यायपालिका के इतिहास में पहली बार 12 जनवरी 2018 को एक प्रेस कॉन्फ्रेंस की। यह पहला मौका था जब सुप्रीम कोर्ट के न्यायाधीशों ने देश के सामने आकर सुप्रीम कोर्ट में चल रही कथित अनियमितताओं को लेकर प्रेस कांफ्रेंस की। उस वक्त सुप्रीम कोर्ट के वरिष्ठ जज जस्टिस चेलमेश्वर के अलावा जस्टिस रंजन गोगोई (मौजूदा मुख्य न्यायाधीश), जस्टिस जोसेफ और जस्टिस मदन लोकूर ने मीडिया से बात की।
जस्टिस दीपक मिश्रा पर क्या था आरोप:-सुप्रीम कोर्ट के 4 वरिष्ठ न्यायाधीशों जस्टिस चेलमेश्वर, जस्टिस मदन लोकुर, जस्टिस कुरियन जोसेफ, जस्टिस रंजन गोगोई ने मीडिया से मुखातिब होकर प्रशासनिक अनियमितताओं के आरोप लगाए थे। इन चारों जजों का आरोप था कि मुख्य न्यायाधीश केस आवंटित करने का काम न्यायसंगत तरीके से नहीं कर रहे हैं। इन चारों न्यायाधीशों ने अपनी शिकायत सार्वजनिक करने के साथ ही एक लंबी-चौड़ी चिट्ठी भी जारी की। जस्टिस चेलमेश्वर ने मीडिया से बात करते हुए कहा, 'करीब दो महीने पहले हम 4 जजों ने चीफ जस्टिस को पत्र लिखा और मुलाकात की। हमने उनसे बताया कि जो कुछ भी हो रहा है, वह सही नहीं है। प्रशासन ठीक से नहीं चल रहा है। यह मामला एक केस के असाइनमेंट को लेकर था।' उन्होंने कहा - हम चीफ जस्टिस को अपनी बात समझाने में असफल रहे। इसलिए हमने राष्ट्र के समक्ष पूरी बात रखने का फैसला किया।
आमतौर पर मीडिया से दूर रहते हैं जज:-शीर्ष अदालत के जजों की यह प्रेस कॉन्फ्रेंस अपने आप में बेहद खास और ऐतिहासिक थी। आमतौर पर जज मीडिया से दूरी बनाकर रखते हैं और सार्वजनिक तौर पर न्यायपालिका का पक्ष रखने की जिम्मेदारी चीफ जस्टिस की ही होती है। उस वक्त चीफ जस्टिस दीपक मिश्रा और दूसरे नंबर के सीनियर जज जस्टिस चेलमेश्वर के बीच कई मुद्दों को लेकर मतभेद की खबरें थीं
जस्टिस चलमेश्वर:-जस्टिस चलमेश्र्वर का जन्म 23 जून 1953 को आंध्र प्रदेश के कृष्णा जिले में हुआ था। उन्होंने 12वीं तक की शिक्षा वहीं के हिंदू हाई स्कूल से ली। इसके बाद चेन्नई के प्रतिष्ठित लोयोला कॉलेज से साइंस में स्नातक किया। 1976 में आंध्र यूनिवर्सिटी से कानून की पढ़ाई पूरी की। वह 1995 में एडिशनल एडवोकेट जनरल बने। 1997 में आंध्र प्रदेश हाईकोर्ट में एडिशनल जज और 2007 में गुवाहाटी हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश रहे। वह 2010 में केरल हाईकोर्ट के चीफ जस्टिस बनाए गए। फिर 10 अक्टूबर 2011 को सुप्रीम कोर्ट में जज बने। 64 वर्षीय जस्टिस चलमेश्र्वर सर्वोच्च न्यायालय में तत्कालीन मुख्य न्यायाधीश दीपक मिश्रा के बाद दूसरे सबसे वरिष्ठ जज थे। वह जस्टिस दीपक मिश्रा के पहले ही सेवानिवृत्त हो गए थे।
महत्वपूर्ण फैसले:अभिव्यक्ति की आजादी और आधार कार्ड पर फैसले दिए। उन्होंने निजता को मूलभूत अधिकार माना। वह जजों की नियुक्ति के लिए बने कोलेजियम सिस्टम का विरोध करते रहे हैं। इसके लिए उन्होंने नेशनल जूडिशियल एप्वांयटमेंट कमीशन का समर्थन किया। वह एनजेएसी को 2015 में असंवैधानिक घोषित करने वाली बेंच में शामिल थे लेकिन बहुमत के फैसले के साथ नहीं थे। यानी उन्होंने एनजेएसी के पक्ष में अपनी राय रखी थी।
जस्टिस रंजन गोगोई:-जस्टिस गोगोई का जन्म 18 नवंबर 1954 को हुआ था। वह 1978 में बार के सदस्य बने। उन्होंने गुवाहाटी में वकालत की। 2001 में गुवाहाटी हाईकोर्ट के जज बने। 2010 में पंजाब और हरियाणा हाईकोर्ट के जज बनाए गए। 2011 में पंजाब और हरियाणा हाईकोर्ट के चीफ जस्टिस बने और अप्रैल 2012 में सुप्रीम कोर्ट के जज के रूप में नियुक्त हुए। असम के पूर्व मुख्यमंत्री स्व. केसी गोगाई के पुत्र 63 वर्षीय जस्टिस रंजन गोगोई सर्वोच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश हैं। जस्टिस दीपक मिश्रा के बाद उन्हें मुख्य न्यायाधीश बनाया गया।
महत्वपूर्ण फैसले: सौम्या मर्डर केस में ब्लॉग लिखने वाले जस्टिस काटजू को अदालत में बुला लिया था। वह उस बेंच का हिस्सा थे जिसने लोकसभा और विधानसभा चुनाव लड़ने वालों के लिए संपत्ति, शैक्षणिक योग्यता और मुकदमों की जानकारी देना अनिवार्य किया था। जस्टिस कर्णन को सजा सुनाने के साथ जाटों को मिले ओबीसी कोटा को खत्म करने वाली बेंच में भी शामिल थे।
जस्टिस कुरियन जोसेफ:जस्टिस कुरियन जोसेफ का जन्म 30 नवंबर 1953 को हुआ था। उन्होंने 1979 में केरल हाईकोर्ट में प्रैक्टिस शुरू की। वह 1994 से 1996 तक एडिशनल एडवोकेट जनरल रहे। साल 2000 में केरल हाईकोर्ट के जज बने। 2006 से 2008 तक केरल जूडिशियल एकेडमी के अध्यक्ष रहे। दो बार केरल हाईकोर्ट के चीफ जस्टिस रहने के बाद 2013 में हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश और 2013 में माननीय सुप्रीम कोर्ट के जज बने। जस्टिस जोसेफ भी अब रिटायर हो चुके हैं।
महत्वपूर्ण फैसले: बहुचर्चित तीन तालाक मामले में फैसला सुनाने वाली बेंच के सदस्य थे। नेशनल जूडिशियल एप्वांयटमेंट कमीशन को अस्वीकार्य करने वाली बेंच में भी थे।
जस्टिस एमबी लोकुर:जस्टिस मदन भीमराव लोकुर का जन्म 31 दिसंबर 1953 को हुआ था। उन्होंने अपनी पढ़ाई दिल्ली के प्रतिष्ठित मॉर्डन स्कूल से की। 1974 में सेंट स्टीफेंस कॉलेज से ग्रेजुएशन और दिल्ली लॉ फैकल्टी से 1977 में एलएलबी की शिक्षा पूरी की। वह 1981 में सुप्रीम कोर्ट में एडवोकेट ऑन रिकॉर्ड बने। 1998 में एडिशनल सॉलिसिटर जनरल ऑफ इंडिया रहे। 1999 में दिल्ली हाईकोर्ट के जज बने। 2010 में दिल्ली हाईकोर्ट में चीफ जस्टिस रहे। इसके बाद गुवाहाटी हाईकोर्ट व आंध्र प्रदेश हाईकोर्ट के भी मुख्य न्यायाधीश रहे। 2012 में सुप्रीम कोर्ट के जज बने। जस्टिस लोकुर पिछले साल दिसंबर में सेवानिवृत्त हो चुके हैं।
महत्वपूर्ण फैसले: उन्होंने खनन घोटाला मामले में फैसला दिया था। नाबालिग पत्‍‌नी के साथ यौन संबंध को बलात्कार बताते हुए भी फैसला सुनाया था।

नई दिल्ली। तानाशाही और क्रूरता के बारे में जब कभी हम चर्चा करते हैं तो हिटलर को हम लोग कैसे भूल सकते हैं। किसी खड़ूस व्यक्ति से बहस हो जाए तो वह हमें हिटलर सा लगता है, स्कूल का कोई सख्त टीचर हो या ऑफिस में हर पल आप पर नज़र रखने वाले बॉस हों आप उनको हिटलर कहकर बुलाने में जरा भी गुरेज नहीं करते।हिटलर की ज़िंदगी से जुड़ी कई दिलचस्प कहानियां हैं। किसी कहानी में वो हीरो की तरह नजर आता है तो किसी में विलेन। लेकिन सच ये है कि एडोल्फ हिटलर 20 वीं सदी का सबसे क्रूर तानाशाह था। प्रथम विश्व युद्ध के बाद 1933 में वह समाजवादी जर्मन वर्कर्स पार्टी को सत्ता में लाने के बाद उसने जर्मन सरकार पर अधिपत्य कर लिया।एडोल्फ हिटलर का जन्म आस्ट्रिया में 20 अप्रैल 1889 को हुआ। 17 वर्ष की उम्र में पिता के निधन के बाद वो वियना चला गया। पैसों की तंगी के कारण वह पोस्टकार्डों पर चित्र बनाकर काम चलाने लगा। यही वो समय था जब हिटलर के मन में साम्यवादियों और यहूदियों के प्रति घृणा ने जन्म लिया।हिटलर ने एक विशाल जर्मन साम्राज्य की स्थापना का लक्ष्य जमर्नी की जनता के सामने रखा। उसका मानना था कि ऐसा करने से जर्मन सुख से रह सकेंगे। धीरे-धीरे उसका प्रभाव बढ़ने लगा। उसने स्वास्तिक को अपने दल का चिह्र बनाया जो और भूरे रंग की पोशाक पहने सैनिकों की टुकड़ी तैयार की। 1923 में उसने अपनी आत्मकथा मीन कैम्फ ("मेरा संघर्ष") लिखी। इसमें उसने लिखा कि आर्य जाति सभी जातियों से श्रेष्ठ है और जर्मन आर्य हैं। उन्हें विश्व का नेतृत्व करना चाहिए। यहूदी सदा से संस्कृति में रोड़ा अटकाते आए हैं। जर्मन लोगों को साम्राज्यविस्तार का पूर्ण अधिकार है। फ्रांस और रूस से लड़कर उन्हें जीवित रहने के लिए भूमि प्राप्ति करनी चाहिए।1930-32 में जर्मनी में बेरोज़गारी बहुत बढ़ गई। संसद में नाजी दल के सदस्यों की संख्या 230 हो गई। 1932 के चुनाव में हिटलर को राष्ट्रपति के चुनाव में सफलता नहीं मिली। जर्मनी की आर्थिक दशा बिगड़ती गई और विजयी देशों ने उसे सैनिक शक्ति बढ़ाने की अनुमति की। 1933 में चांसलर बनते ही हिटलर ने जर्मन संसद को भंग कर दिया, साम्यवादी दल को गैरकानूनी घोषित कर दिया और राष्ट्र को स्वावलंबी बनने के लिए ललकारा।
60 लाख यहूदियों की कराई थी हत्या:-1933 में जर्मनी की सत्ता पर जब एडोल्फ हिटलर काबिज हुआ था तो उसने वहां एक नस्लवादी साम्राज्य की स्थापना की थी। वह यहूदियों से सख्त नफरत करता था। यहूदियों के प्रति हिटलर की इस नफरत का नतीजा नरसंहार के रूप में सामने आया। होलोकास्ट इतिहास का वो नरसंहार था, जिसमें छह साल में तकरीबन 60 लाख यहूदियों की हत्या कर दी गई थी। इनमें 15 लाख तो सिर्फ बच्चे थे।
दूसरे विश्वयुद्ध का सबसे बड़ा कारण था हिटलर:-द्वितीय विश्व युद्ध तब हुआ, जब हिटलर के आदेश पर नाजी सेना ने पोलैंड पर आक्रमण किया। फ्रांस और ब्रिटेन ने पोलैंड को सुरक्षा देने का वादा किया था और वादे के अनुसार उन दोनो ने नाज़ी जर्मनी के खिलाफ युद्ध की घोषणा कर दी। इसके बाद जर्मनी ने रूस पर आक्रमण किया। जब अमेरिका द्वितीय विश्वयुद्ध में सम्मिलित हो गया तो हिटलर की सामरिक स्थिति बिगड़ने लगी।
हर पल सताता था मौत का डर;-हिटलर को अपनी मौत का बहुत डर था। ऐसा कहते हैँ कि कहीं उसके खाने में ज़हर न मिला दिया गया हो। यही वजह थी कि वह अपने सेवकों के चखने के बाद ही खाना खाता था। उसे ऐसा लगता था कि इंग्लैण्ड उसे मारना चाहता है जिस कारण वह हर वक्त चौंकन्ना रहता था।
शादी के अगले दिन कर ली थी आत्महत्या;-आत्महत्या करने से कुछ घंटों पहले ही उसने अपनी प्रेमिका ईवा ब्राउन से शादी की थी। 'हिटलर्स लास्ट डे: मिनट बाई मिनट' क़िताब के मुताबिक, 30 अप्रैल को उसने खुद को गोरी मार ली थी। उस वक्त वह उस बंकर के कांफ्रेंस रूम में था जिसमें वह रहता था। क़िताब के अनुसार, हिटलर दूसरे विश्वयुद्ध में जर्मनी की हार से बहुत दुखी था और इसी कारण वह अवसाद में चला गया था। उसके आत्महत्या करने के तुरंत बाद उसकी बीवी ईवा ब्राउन ने भी जहर खाकर आत्महत्या कर ली थी।

बीजापुर।छत्तीसगढ़ में 23 अप्रैल को Lok Sabha Elections 2019 के तीसरे चरण का मतदान किया जाना है। राज्य के पामेड गांव के जंगलों में दो नक्सलियों को मार गिराया है। छत्तीसगढ़ पुलिस और ग्रेहाउंड्स फोर्स द्वारा चलाए जा रहे संयुक्त ऑपरेशन के तहत नक्सलियों को मारा गया है। जनरल (नक्सल विरोधी ऑपरेशन) सुंदरराज पी ने कहा कि खुफिया जानकारी पर, ग्रेहाउंडस की एक टीम, छत्तीसगढ़ पुलिस की स्पेशल टास्क फोर्स (एसटीएफ) और जिला बल ने अंतर-राज्यीय सीमा के साथ नक्सल विरोधी अभियान शुरू किया था। ये अभियान राज्य की राजधानी रायपुर से लगभग 500 किमी दूर शुरु किया गया था। घटनास्थल से कुछ हथियार भी बरामद किए गए है। इलाके में अभी भी तलाशी अभियान जारी है।गौरतलब है कि पिछले कई महीनों से राज्य में नक्सली द्वारा हमलों में तेजी आई है। शनिवार को पुलिस ने दंतेवाड़ा में तीन नक्सलियों को गिरफ्तार किया है। जिले के कटेककल्याण थाना क्षेत्र में आने वाले डुमपारा और तुमकल गांव के जंगल से नक्सलियों को पकड़ा था।पुलिस अधीक्षक अभिषेक पल्लव ने बताया कि पकड़े गए नक्सिलयों के पास से छह इलेक्ट्रॉनिक डेटोनेटर बरामद किए गए थे। बता दें कि छत्तीसगढ़ में दूसरे चरण के मतदान के दौरान भी नक्सली मुठभेड़ हुई थी। तब नक्सली बड़ी घटना के अंजाम देने के इरादे से IED स्थापित करने के लिए आए थे।

नई दिल्ली। जरूरी फंड नहीं मिल पाने के कारण इस समय जेट एयरवेज भारी संकट से जूझ रही हैं। एयरवेज ने क्रैश हो रही उनकी फ्लाइट को बचाने के लिए सरकार से भी दरख्वास्त की है। परेशान कर्मचारियों की दुख भरी तस्वीरें सोशल मीडिया पर वायरल है, जहां इस बीच जेट एयरवेज के कर्मचारियों ने शनिवार को वित्त मंत्री अरुण जेटली से उनके आवास पर मुलाकात की है। बता दें कि जेट एयरवेज के 23 हजार कर्मचारियों का वेतन अटक गया है। बकाया वेतन के भुगतान के लिए कर्मचारियों ने राष्ट्रपति राम नाथ कोविद से लेकर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी तक को पत्र लिख इस मामले में हस्तक्षेप करने की मांग की है।जेट एयरवेज के सीईओ विनय दूबे ने बताया कि हमने वित्त मंत्री अरुण जेटली से मुलाकात की। हमने उनके सामने अपनी बात रखी है। हमने उनसे एक खुली और पारदर्शी बोली प्रक्रिया करने का अनुरोध किया है, उन्होंने हमें इसका आश्वासन भी दिया और यह भी बताया कि ब्याज की अभिव्यक्ति के हिस्से के रूप में 4 पार्टियां थीं जो जेट एयरवेज में रुचि रखती थीं।नकदी के भारी संकट से जूझ रही जेट एयरवेज में फिलहाल 23,000 कर्मचारी कार्यरत है और कंपनी इन्हें समय पर सैलरी का भुगतान नहीं कर पा रही है, इन कर्मचारियों में पायलट भी शामिल हैं। जेट एयरवेज के भविष्य को लेकर जारी अनिश्चितता के बीच दो कर्मचारी संघों ने अब इस मामले पर प्रधानमंत्री और राष्ट्रपति को पत्र लिखा है। इसी हफ्ते ठीक इसी तरह का एक पत्र सोसाइटी फॉर वेलफेयर ऑफ इंडियन पायलट (एसडबल्यूआईपी) और जेट एयरक्रॉफ्ट मेंटेनेंस इंजीनियरिंग वेलफेयर एसोसिएशन (जेएएमईडब्ल्यूए) ने सैलरी बकाया भुगतान के निपटान में मदद मांगी है।पत्रों में कहा गया, "हम आपसे अनुरोध करते हैं कि इस स्थिति पर तात्कालिकता के साथ विचार करें, जिसकी जरूरत है और जेट एयरवेज (इंडिया) लिमिटेड के प्रबंधन को प्रभावित कर्मचारियों की बकाया राशि का भुगतान करने के लिए निर्देशित करें।" एक पत्र में कहा गया, "हम आपसे यह आग्रह भी करते हैं कि आपातकालीन धन के प्रबंध की प्रक्रिया में तेजी लाई जाए, क्योंकि इस वक्त हर मिनट और हर निर्णय महत्वपूर्ण है।"गौरतलब है कि पूंजी के अभाव में बुधवार को परिचालन स्थगित करने से जेट एयरवेज के कर्मचारी सड़क पर आ गए हैं।

नई दिल्‍ली। बालाकोट में आतंकियों के ठिकानों पर एयर स्ट्राइक के बाद पाकिस्‍तानी विमानों की घुसपैठ का मुंहतोड़ जवाब देने वाले विंग कमांडर अभिनंदन वर्तमान(Abhinandan Vardhaman ) के लिए भारतीय वायुसेना ने 'वीर चक्र' की सिफारिश की है। इससे पहले यह खबर थी कि भारतीय वायुसेना ने सुरक्षा कारणों के चलते विंग कमांडर अभिनंदन का कश्‍मीर से तबादला कर दिया है। वह श्रीनगर स्थित एयरबेस पर तैनात थे। बताया जाता है कि उन्‍हें पश्चिमी सेक्‍टर के किसी महत्‍वपूर्ण बेस पर ही तैनात किया जाएगा। बता दें कि पुलवामा आतंकी हमले के बाद भारतीय वायुसेना ने पाकिस्‍तान के बालाकोट में आतंकियों के ठिकानों पर एयर स्‍ट्राइक की थी। इस कार्रवाई के बाद बीते 27 फरवरी को पाकिस्‍तानी वायुसेना कुछ एफ-16 लड़ाकू विमानों ने भारतीय वायु क्षेत्र में घुस आए थे। उस समय भारतीय विमानों ने इनका पीछा करते हुए एक पाकिस्तानी एफ-16 विमान को मार गिराया था। इस कोशिश में भारतीय वायुसेना का एक मिग बाइसन जेट गुलाम कश्‍मीर में क्रैश हो गया था। इस विमान को विंग कमांडर अभिनंदन वर्तमान उड़ा रहे थे। हालांकि, अपना विमान क्रैश होने से पहले ही इस बहादुर भारतीय फाइटर पायलट ने एक पाकिस्तानी एफ-16 फाइटर जेट को मार गिराया था। इसके बाद पाकिस्‍तानी सैनिकों ने अभिनंदन वर्तमान को पकड़ लिया था। रिपोर्टों के मुताबिक, पाकिस्‍तानियों के चंगुल में फंसने के बाद भी जांबाज भारतीय पायलट ने भारतीय वायुसेना के बारे में दुश्‍मनों को कुछ नहीं बताया था। आखिरकार, चौतरफा अंतरराष्‍ट्रीय दबाव के बाद पाकिस्‍तान को भारतीय पायलट अभिनंदन वर्तमान को वापस सौंपना पड़ा था। अभिनंदन वर्तमान की स्‍वदेश वापसी पर देश भर में खुशियां मनाई गई थीं।

 

मुंबई। भारतीय नौसेना ने शनिवार दोपहर करीब 12.20 बजे मझगांव डॉक शिपबिल्डर्स में गाइडेड मिसाइल विध्वंसक पोत 'इंफाल' का जलावतरण किया। इसे देश में ही डिजायन और निर्मित किया गया है। 'प्रोजेक्ट 15ब्रेवो' के तहत यह तीसरा पोत है। इससे पहले 2015 में 'विशाखापट्टनम' और 2016 में 'मुर्मागोवा' का जलावतरण किया गया था। तीनों पोत 2021 से नौसेना का हिस्सा हो जाएंगे।नौसेना की परंपरा के अनुसार जलावतरण से पूर्व नौसेना प्रमुख एडमिरल सुनील लांबा की पत्नी और नौसेना पत्नी कल्याण संगठन की प्रमुख रीना लांबा ने पोत के एक हिस्से पर नारियल फोड़ा। इस मौके पर एडमिरल लांबा ने कहा, 'एमडीएल, भारतीय नौसेना, डीआरडीओ, ओएफबी, बीईएल व अन्य सार्वजनिक उद्यमों और निजी उद्योग के तालमेल से देश के सामरिक उद्देश्यों को हासिल करने के लिए बल का स्तर बनाए रखा गया है।' एडमिरल लांबा ने पोत निर्माण में शामिल पूरी टीम को बधाई दी और कहा कि ऐसे पोत को डिजायन कर नौसेना डिजायन महानिदेशालय 'खरीददार' से 'निर्माणकर्ता' बनने के नौसेना के सपने को साकार करने में योगदान दे रहा है। उन्होंने कहा, 'भारतीय नौसेना इस बात के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध और गौरवान्वित है कि हमारे सभी युद्धपोतों और पनडुब्बियों को आज ऑर्डर पर देश में ही बनाया जा रहा है।'
पोत की खासियतें;-लंबाई - 163 मीटर
चौड़ाई - 17.4 मीटर
वजन- 7,300 टन
अधिकतम गति - 30 नॉट
इंजन - 04 (गैस टर्बाइन)
अन्य फीचर
-दो बहुउद्देश्यीय हेलीकॉप्टर ले जाने और उनका संचालन करने में सक्षम
-रडार ट्रांसपेरेंट डैक फिटिंग की वजह से दुश्मन द्वारा खोज पाना मुश्किल
-वर्टिकली लांच मिसाइल सिस्टम से दूर तक मार कर सकने में सक्षम

नई दिल्ली। चुनावी सरगर्मी के बीच कांग्रेस नेता नवजोत सिंह सिद्धू ने बेरोजगारी से लेकर सरकारी कंपनियों को बर्बाद करने के आरोप लगाते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर तीखा हमला बोला। भाजपा के राष्ट्रवाद की चुनावी पिच पर सियासी बाउंसर फेंकते हुए सिद्धू ने कहा कि निजी उद्योगपतियों को फायदा पहुंचाते हुए सरकारी कंपनियों को तहस-नहस कर देना राष्ट्रदोह है और पीएम मोदी इसके लिए जिम्मेदार हैं।नोटबंदी से बढ़ी बेरोजगारी से लेकर अर्थव्यवस्था के आंकड़ों के साथ उन्होंने पीएम को चुनावी बहस की चुनौती देते हुए उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार की नाकामी छुपाने को पीएम मोदी बेतुके मुद्दे उठा रहे हैं। लोकसभा चुनाव के तीसरे चरण के मतदान से पहले कांग्रेस ने मुद्दों पर मोदी सरकार की घेरेबंदी के लिए सिद्धू को मैदान में उतारा।
कांग्रेस ने सिद्धू को मैदान में उतारा:-कांग्रेस मुख्यालय में प्रेस कांफ्रेंस करते हुए नवजोत सिंह सिद्धू ने कहा कि सरकार की गलत नीतियों पर सवाल उठाने वालों को राष्ट्र विरोधी तो देश के लिए शहीद होने वालों को भाजपा देशद्रोही करार देती है। मगर बीएसएनएल, ओएनजीसी, भेल, एनटीपीसी आदि कंपनियों को खस्ताहाली में पहुंचाना असल देशद्रोह है। सरकारी कंपनियों को बदहाली में पहुंचाने के लिए प्रधानमंत्री को सीधे जिम्मेदार ठहराते हुए उन्होंने कहा कि रिलांयस को 4जी स्पेक्ट्रम तत्काल दे दिया गया लेकिन बीएसएनएल को आज तक यह नहीं मिला है।उद्योगपतियों के लिए दरियादिली दिखाने का आरोप लगाते हुए सिद्धू ने कहा कि मोदी जनता के पीएम नहीं अडानी और अंबानी के बिजनेस डेवलपमेंट मैनेजर बन गए हैं। अपने आरोपों के पक्ष में सिद्धू ने पांच साल में इन दोनों औद्योगिक समूहों को देश-विदेश में मिले डेढ़ दर्जन से अधिक कारोबारी ठेके का ब्योरा दिया।;
सिद्धू ने लगाए केंद्र सरकार के गंभीर आरोप:-नोटबंदी की वजह से 50 लाख लोगों के बेरोजगार होने के आंकड़े का हवाला देते हुए सिद्धू ने कहा कि एक ओर छोटे कारोबार बर्बाद हुए, दूसरी ओर पेटीएम जैसी कंपनियों के व्यारे-न्यारे हुए। कांग्रेस नेता ने नोटबंदी के एक दिन बाद पूरे देश में पेटीएम में प्रकाशित हुए विज्ञापन की प्रति दिखाते हुए कहा कि इसमें गुपचुप खेल हुआ है। अमीर और गरीब के बीच की खाई पांच साल में और बढ़ने का दावा करते हुए सिद्धू ने कहा कि एक फीसद लोगों के पास जितना धन है, वह देश के 50 फीसद गरीब लोगों के बराबर है।
पीएम मोदी पर सिद्धू ने की अभद्र टिप्पणी:-अर्थव्यवस्था पर सरकार को आड़े हाथों लेते हुए सिद्धू ने कहा कि जीएसटी व नोटबंदी से कारोबार और उद्योग चौपट हुआ है, इसी वजह से जीएसटी का संग्रह लक्ष्य से इस वर्ष एक लाख करोड़ कम हुआ है। जबकि पांच वर्ष में भारत पर कर्ज 27 लाख करोड रूपये से भी ज्यादा बढ़ा है जो आजादी के बाद सबसे अधिक है। इन आंकड़ों के सहारे सिद्धू ने पीएम पर तंज कसते हुए उन्हें निकम्मा करार दिया और कहा कि आप चौकीदार हैं तो जनता मालिक है। अब जनता ही तय करेगी कि उसे चौकीदार रखना है या नहीं।
सिद्धू पर भाजपा का पलटवार:-नवजोत सिंह सिद्धू के आरोपों पर भाजपा ने भी करारा पलटवार किया है। प्रधानमंत्री मोदी पर सिद्धू के हमले को हास्यास्पद बताते हुए भाजपा के राष्ट्रीय प्रवक्ता शाहनवाज हुसैन ने तंज किया। उन्होंने कहा कि यह वही सिद्धू हैं जो भारत के प्रधानमंत्री को गाली देते हैं और पाकिस्तान के प्रधानमंत्री के लिए ताली बजाते हैं।शाहनवाज हुसैन ने कहा कि यह वही सिद्धू हैं जिनसे आचरण से कांग्रेस भी खुद को अलग कर रही थी, अब उसे गले लगा रही है। शाहनवाज ने कहा कि सच्चाई यह है कि सिद्धू को ठेका दिया जाता है, पहले किसी सीरियल में हंसने के ठेका था, अब सच्चे दिल से देश की सेवा करने वाले और राष्ट्र के हित के समर्पित प्रधानमंत्री का अपमान करने के लिए उतारा गया है। उन्होंने कहा कि इसका जवाब कांग्रेस को भी मिलेगा।

हैदराबाद। भारत में ISIS के विस्तार के शक में राष्ट्रीय सुरक्षा एजेंसी (NIA) पूरी तरह से चौकन्‍नी है। भारत में ISIS मॉड्यूल के खिलाफ एनआइए ने हैदराबाद से एक आइएसआइएस समर्थक को गिरफ्तार कर लिया है। आइएसआइएस का यह समर्थक हैदराबाद की किंग्स कॉलोनी में रह रहा था। शनिवार सुबह से ही एनआइए हैदराबाद के दो और वर्धा में एक जगह पर छापेमारी कर रही थी।बता दें कि इसके पहले एनआइए ने अगस्त 2018 में छापेमारी के दौरान आइएसआइएस से जुड़े दो समर्थकों को हैदराबाद से गिरफ्तार किया था। इन दोनों समर्थकों पर भारत में आइएसआइएस की विचारधारा को फैलाने का आरोप था। अगस्त 2018 में हुई गिरफ्तारी में दोनों समर्थकों की पहचान मोहम्मद अब्दुल्ला बाषित और मोहम्मद अब्दुल कादिर के तौर पर हुई थी।शनिवार सुबह हैदराबाद और वर्धा में हुई छापेमारी पर एनआइए ने जानकारी दी थी। एनआइए ने बताया था कि इस साल फरवरी में समर्थकों के खिलाफ दायर हुई चार्जशीट पर आइएसआइएस मॉड्यूल के खिलाफ ताजा छापेमारी की गई है। समर्थकों के खिलाफ नए इनपुट के आधार पर एनआइए की टीम ने आइएसआइएस के दो स्थानों पर तलाशी ली है। वहीं, इस पूरे मामले पर और अधिक जानकारी देने से एनआइए ने साफ मना कर दिया था।

 

 

Page 1 of 457

हमारे बारे में

नार्थ अमेरिका में भारत की राष्ट्रीय भाषा 'हिन्दी' का पहला समाचार पत्र 'हम हिन्दुस्तानी' का शुभारंभ 31 अगस्त 2011 को न्यूयॉर्क में भारत के कौंसल जनरल अम्बैसडर प्रभु दियाल ने अपने शुभ हाथों से किया था। 'हम हिन्दुस्तानी' साप्ताहिक समाचार पत्र के शुभारंभ का यह पहला ऐसा अवसर था जब नार्थ अमेरिका में पहला हिन्दी भाषा का समाचार पत्र भारतीय-अमेरिकन्स के सुपुर्द किया जा रहा था। यह समाचार पत्र मुख्य सम्पादकजसबीर 'जे' सिंह व भावना शर्मा के आनुगत्य में पारिवारिक जिम्मेदारियों को निर्वाह करते हुए निरंतर प्रकाशित किया जा रहा है Read more....

ताज़ा ख़बरें