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वाराणसी। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने रविवार को मन की बात में काशी में पिछले दिनों हुए संपूर्णानंद संस्कृत विश्वविद्यालय के खेल मैदान में आयोजित संस्कृत क्रिकेट प्रतियोगिता का जिक्र किया। इसमें संस्कृत विद्यालयों के बटुक खिलाड़ी अपने पारंपरिक गणवेश धोती व कुर्ता में टीका-त्रिपुंड लगाकर मैदान पर क्रिकेट खेल रहे थे। यही नहीं कमेंट्री भी संस्कृत भाषा में किया जा रहा था। 'दैनिक जागरण' ने 19 फरवरी के अंक में संस्कृत क्रिकेट प्रतियोगिता को प्रमुखता से प्रकाशित किया था। वहीं दूसरे दिन जागरण के संपादकीय पेज पर भी 'देव भाषा की जीत' शीर्षक से संस्कृत में आयोजित क्रिकेट प्रतियोगिता के बारे में विस्तृत जानकारी छपी थी।इस पर प्रधानमंत्री कार्यालय की नजर पड़ी। यही नहीं इस प्रतियोगिता के संबंध में प्रधानमंत्री कार्यालय ने शनिवार को मैच के आयोजन शास्त्रार्थ महाविद्यालय (दशाश्वमेध) के आचार्य डा. पवन शुक्ला ने फोन कर क्रिकेट प्रतियोगिता की पूरी जानकारी मांगी थी।

अहमदाबाद। अभी अहमदाबाद में भारत और इंग्लैंड के बीच सीरीज का चौथा व अंतिम टेस्ट होना बाकी है। इस टेस्ट का परिणाम कुछ भी क्यों ना हो, लेकिन इतना तो तय हो चुका है कि इंग्लैंड की टीम 18 जून से लॉ‌र्ड्स में होने वाले विश्व टेस्ट चैंपियनशिप के फाइनल से बाहर हो चुकी है। इसमें कोई शक नहीं कि भारत दौरे पर भारतीय स्पिनरों ने इंग्लैंड को काफी नुकसान पहुंचाया है, लेकिन इससे ज्यादा नुकसान इंग्लैंड को पहुंचा है उसकी अपनी बनाई हुई रोटेशन पॉलिसी से।पूरी दुनिया जानती है कि यदि किसी टीम को भारत में टेस्ट जीतना है तो उसे अपने सर्वश्रेष्ठ स्पिनर को अंतिम एकादश में जरूर रखना चाहिए, लेकिन शायद या तो इंग्लैंड को यह बात समझ में नहीं आती या फिर उसे अपने बाकी खिलाड़ियों पर अति आत्मविश्वास था जो उसने अहमदाबाद में खेले गए तीसरे टेस्ट मैच से पहले ही अपने सर्वश्रेष्ठ स्पिनर मोइन अली को रोटेशन पॉलिसी का हवाला देते हुए भारत दौरे पर सिर्फ एक टेस्ट मैच खिलाकर वापस इंग्लैंड भेज दिया। अहमदाबाद में मोइन के बिना खेलना इंग्लैंड को इतना भारी पड़ा कि उसे ना सिर्फ 10 विकेट से हार का सामना करना पड़ा, बल्कि वह विश्व टेस्ट चैंपियनशिप के फाइनल में पहुंचने की दौड़ से बाहर हो गया।ग्लैंड की टीम के भारत दौरे पर आने से पहले ही न्यूजीलैंड की टीम विश्व टेस्ट चैंपियनशिप के फाइनल में अपनी जगह पक्की कर चुकी थी। फाइनल के दूसरे स्थान के दावेदार के लिए भारत-इंग्लैंड सीरीज का परिणाम अहम मायने रखे हुए था। हालांकि, इस स्थान के लिए इंग्लैंड की टीम सबसे जोरदार दावेदार थी। इंग्लैंड को फाइनल में पहुंचने के लिए 3-0 या 3-1 से यह सीरीज जीतना जरूरी था। ऊपर से ऑस्ट्रेलिया ने दक्षिण अफ्रीका दौरे पर नहीं जाकर इंग्लैंड के लिए काम आसान ही किया था।चेन्नई में भारत के खिलाफ पहला टेस्ट जीतने के बाद इंग्लैंड की उम्मीदों को और अधिक बल मिला था। वहीं भारत को फाइनल में पहुंचने के लिए परिणाम को 2-1 से अपने पक्ष में करना ही काफी था और भारत फिलहाल सीरीज में इसी अंतर से आगे है। भारत अगर चौथा टेस्ट ड्रॉ भी करा लेता है तो भी वह विश्व टेस्ट चैंपियनशिप के फाइनल में पहुंच जाएगा। हालांकि, ऑस्ट्रेलिया ने दक्षिण अफ्रीका नहीं जाकर अपने लिए मुश्किल जरूर खड़ी की, लेकिन यदि भारत-इंग्लैंड सीरीज ड्रॉ हो जाती है तो ऑस्ट्रेलिया की टीम बिना खेले ही फाइनल में पहुंच जाएगी।अब यह समझ से परे नजर आता है कि जब आप विश्व टेस्ट चैंपियनशिप के फाइनल में पहुंचने के लिए सबसे अहम सीरीज खेल रहे हो तो अपने सर्वश्रेष्ठ खिलाड़ी को क्यों खेलने का मौका नहीं दे रहे हो। खिलाड़ी का काम मैच खेलना है और यदि सामने बहुत महत्वपूर्ण मैच है तो भी कोई खिलाड़ी तब तक खेलने से इन्कार नहीं करता जब तक कि वह गंभीर रूप से चोटिल ना हो। और सवाल यह भी उठता है कि यदि आपको अपने सर्वश्रेष्ठ खिलाड़ी को सबसे अहम मैच में नहीं खिलाना है तो आप उसे किसी दौरे पर ले ही क्यों जा रहे हो।भारत आने से पहले इंग्लैंड की टीम श्रीलंका दौरे पर गई थी और वहां दो टेस्ट की सीरीज 2-0 से जीतकर भारत आई थी। हालांकि, कोरोना पॉजिटिव होने की वजह से मोइन को उस दौरे पर कोई मैच खेलने का मौका नहीं मिला और वह भारत दौरे पर पहले टेस्ट मैच में भी नहीं खेले थे। हालांकि, चेन्नई में दूसरे टेस्ट में मोइन की वापसी हुई और उन्होंने दोनों पारियों में कुल मिलाकर आठ विकेट लिए। वह उस मैच में इंग्लैंड के सबसे सफल गेंदबाज साबित हुए थे।हालांकि, यह अलग बात है कि इसके बावजूद इंग्लैंड को उस टेस्ट में हार का मुंह देखना पड़ा था। इस मैच के बाद मोइन को रोटेशन पॉलिसी के आधार पर इंग्लैंड वापस भेज दिया गया। हो सकता था कि यदि इंग्लैंड की टीम मोइन को तीसरे टेस्ट में अंतिम एकादश में शामिल करती तो वहां मिल रही स्पिन का मोइन फायदा उठा सकते थे और उनकी मौजूदगी भारतीय बल्लेबाजों की मानसिकता पर भी असर डालती। ऐसे में मैच का परिणाम इंग्लैंड के पक्ष में भी हो सकता था। लेकिन, ऐसा लगता है कि इंग्लैंड एवं वेल्स क्रिकेट बोर्ड (ईसीबी) का मानना है कि टीम की हार या जीत से ज्यादा मायने रोटेशन पॉलिसी रखती है।इंग्लैंड सहित अन्य टीमों के भी कई पूर्व खिलाड़ी ईसीबी की रोटेशन पॉलिसी की आलोचना कर चुके हैं। इसके बावजूद ईसीबी को इसमें कोई खामी नजर नहीं आती है। बात सिर्फ मोइन की नहीं है और भी कई खिलाड़ी हैं जो किसी मैच में अच्छा प्रदर्शन करने के बावजूद रोटेशन पॉलिसी की वजह से अगले मैच में नहीं खेल पाए। चेन्नई में पहले टेस्ट की दूसरी पारी में शानदार गेंदबाजी कर इंग्लैंड को जीत दिलाने वाले तेज गेंदबाज जेम्स एंडरसन भी रोटेशन पॉलिसी की वजह से दूसरे टेस्ट में नहीं खेल पाए थे।रोटेशन पॉलिसी के तहत स्टुअर्ट ब्रॉड को उनकी जगह शामिल किया गया। तीसरे टेस्ट में एंडरसन की अंतिम एकादश में वापसी हुई, लेकिन स्पिन की मददगार पिच पर वह मैच में कोई विकेट नहीं ले सके। हालांकि, एंडरसन उन खिलाडि़यों में शामिल हैं जिन्होंने इस रोटेशन पॉलिसी का समर्थन किया है। लेकिन, इसकी वजह समझी जा सकती है, क्योंकि वह 38 साल के हैं और उनकी उम्र को देखते हुए उनका अब लगातार खेलना संभव नजर नहीं आता है।एंडरसन ने इस पॉलिसी का बचाव करते हुए दूसरे टेस्ट से बाहर होने पर कहा था, 'आपको बड़ी तस्वीर देखनी चाहिए। विचार यह था कि अगर मैं चूक गया, तो इससे मुझे फिट होने और गुलाबी गेंद के टेस्ट के लिए आक्रमण करने का सबसे अच्छा मौका मिलेगा। मैं अच्छा और ताजा महसूस कर रहा हूं और अगर फिर से टीम में बुलाया जाता है तो मैं जाने के लिए तैयार हूं? जितना क्रिकेट हमें खेलने को मिलेगा, उसके लिए मैं इसे बड़ी तस्वीर में देख सकता हूं।'जाहिर है कि एंडरसन खुद इस बात का मान रहे थे कि अब उनमें इतना दमखम नहीं बचा है कि वह लगातार खेल सकें और इसलिए उन्होंने तरोताजा होने की बात कही थी। जोस बटलर भी पहला टेस्ट खेलने के बाद रोटेशन पॉलिसी की वजह से स्वदेश लौट गए थे। बटलर, एंडरसन और मोइन से भी ज्यादा अजीब उदाहरण तो क्रिस वोक्स का नजर आता है।इंग्लैंड के ऑलराउंडर वोक्स को दक्षिण अफ्रीका, श्रीलंका और भारत के खिलाफ सीरीज के लिए टीम में चुना गया था, लेकिन खेलने का मौका एक बार भी नहीं मिला। उन्हें बिना खेले ही रोटेशन पॉलिसी का हवाला देकर स्वदेश भेज दिया गया। हालांकि, दक्षिण अफ्रीका के डेल स्टेन और वेस्टइंडीज के कीरोन पोलार्ड उन खिलाड़ियों में शामिल हैं, जो ईसीबी की रोटेशन पॉलिसी का समर्थन कर रहे हैं। उनका मानना है कि इससे इंग्लैंड को नई पौध तैयार करने का मौका मिलेगा। लेकिन, इसमें कोई दो राय नहीं कि फिलहाल तो यह रोटेशन पॉलिसी इंग्लैंड को नुकसान पहुंचाती नजर आ रही है। 

नई दिल्ली।विराट कोहली की कप्तानी वाली आरसीबी के युवा ओपनर बल्लेबाज देवदत्त पडीक्कल ने विजय हजारे ट्रॉफी टूर्नामेंट के लीग मुकाबले में अपनी टीम कर्नाटक का प्रतिनिधित्व करते हुए उड़ीसा के खिलाफ धमाकेदार बल्लेबाजी का मुजायरा पेश किया। पडीक्कल साल 2020 आइपीएल सीजन में अपनी बल्लेबाजी के दम पर खूब चर्चा में आए थे। युवा देवदत्त अपनी आक्रामक बल्लेबाजी के लिए जाने जाते हैं और उड़ीसा के खिलाफ उन्होंने अपनी इसी खूबी का बखूबी परिचय देते हुए 152 रन की धमाकेदार पारी खेल डाली। 

देवदत्त पडीक्कल ने 140 गेंदों पर बनाए 152 रन:-उड़ीसा के खिलाफ कर्नाटक की शुरुआत काफी मजबूत रही और ओपनर बल्लेबाज देवदत्त पडीक्कल व कप्तान समर्थ आर के बीच पहले विकेट के लिए 140 रन की शानदार साझेदारी करते हुए टीम को बेहतरीन शुरुआत दी। समर्थ का विकेट 60 रन के स्कोर पर गिरा और उन्होंने अपनी पारी में 4 चौके लगाए। इसके बाद देवदत्त ने दूसरे विकेट के लिए सिद्धार्थ के साथ मिलकर 65 रन की साझेदारी की और फिर सिद्धार्थ भी 41 रन पर आउट हो गए। इसके बाद देवदत्त ने तीसरे विकेट के लिए करुण नायर के साथ मिलकर 75 रन की साझेदारी कर डाली और फिर आउट हो गए। देवदत्त ने अपनी पारी में कुल 140 गेंदों का सामना किया और 152 रन बनाए साथ ही इस पारी के दौरान उन्होंने 5 छक्के व 14 चौके लगाए। इसके अलावा कर्नाटक की तरफ से अनिरुद्ध जोशी ने सिर्फ एक रन का योगदान दिया तो वहीं अभिमन्यु मिथुन ने 5 छक्कों की मदद से 17 गेंदों पर नाबाद 40 रन की पारी खेली। उनकी इस पारी के दम पर टीम का स्कोर 50 ओवर में 5 विकेट पर 329 रन तक पहुंचा। उड़ीसा की तरफ से सूर्यकान्त प्रधान और हर्षित राठौड़ को दो-दो सफलता मिली जबकि कप्तान शांतनु मिश्रा को एक विकेट मिला। 

नई दिल्ली।भारतीय क्रिकेट टीम के तेज गेंदबाज इशांत शर्मा ने अपना 100वां टेस्ट मैच इंग्लैंड के खिलाफ 32 साल की उम्र में खेला जबकि उन्होंने अपना पहला टेस्ट मैच साल 2007 में बांग्लादेश के खिलाफ खेला था और उस वक्त उनकी उम्र सिर्फ 18 साल थी। यानी इन 14 साल में उन्होंने जो 100 टेस्ट मैचों का सफर तय किया वो बेहद खास और कमाल का रहा। सबसे बड़ी बात ये रही कि, उन्होंने इन 100 टेस्ट मैचों का सफर तीन भारतीय कप्तानों के साथ तय किया। 

इशांत ने राहुल द्रविड़ की कप्तानी में खेला था पहला टेस्ट मैच:-18 साल की उम्र में जब इशांत शर्मा ने पहली बार साल 2007 में बांग्लादेश के खिलाफ अपने टेस्ट डेब्यू किया था तब भारतीय क्रिकेट टीम के कप्तान राहुल द्रविड़ थे यानी द्रविड़ की कप्तानी में उन्होंने अपने टेस्ट करियर का पहला मुकाबला खेला। इस मैच में इशांत शर्मा को सिर्फ एक ही विकेट मिला था और टीम इंडिया को पारी व 239 रन से बड़ी जीत मिली थी। 

इशांत ने अपना 50वां टेस्ट एम एस धौनी की कप्तानी में खेला-2007 में टेस्ट डेब्यू के बाद इशांत शर्मा के क्रिकेट का सफर आगे बढ़ता गया और उन्होंने 50 टेस्ट का पड़ाव भी छू लिया और ये टेस्ट मैच उन्होंने साल 2013 में मोहाली में उस समय टीम के टेस्ट कप्तान रहे एम एस धौनी की अगुआई में खेला था। इस मैच में इशांत शर्मा को तीन विकेट मिले थे और टीम इंडिया को 6 विकेट से जीत मिली थी। 

100 वां टेस्ट विराट की कप्तानी में इशांत ने खेला:-अब इशांत शर्मा ने अपने टेस्ट करियर का के 100वें टेस्ट मैच का आंकड़ा विराट कोहली की कप्तानी में छुआ। इशांत शर्मा कपिल देव के बाद भारत के दूसरे ऐसे तेज गेंदबाज बने जिन्होंने 100 टेस्ट मैच खेलने का कमाल किया। ओवरऑल वो भारत के 11वें ऐसे खिलाड़ी बने जिन्होंने 100 टेस्ट मैच खेलने का कमाल किया और सबसे पहले भारत की तरफ से ये कमाल की उपलब्धि सुनील गावस्कर ने हासिल की थी। 

नई दिल्ली।भारत और इंग्लैंड के बीच चार मैचों की टेस्ट सीरीज का दूसरा मुकाबला पिच के कारण विवादों में दिखा, क्योंकि कई दिग्गजों ने पिच पर सवाल उठाए थे। हालांकि, इंग्लैंड के अनुभवी तेज गेंदबाज स्टुअर्ट ब्रॉड को चेन्नई की पिच से कोई समस्या नहीं है। ब्रॉड ने कहा है कि भारत के साथ खेले गए दूसरे टेस्ट मैच में मिली हार के बाद चेन्नई की पिच को लेकर हमारी तरफ से कोई समस्या नहीं है और न ही चेन्नई की पिच में कोई खराबी थी।चेन्नई में भारत और इंग्लैंड के बीच खेले गए पहले दो टेस्ट मैचों में स्पिनरों को जमकर मदद मिली। ऐसे में क्रिकेट एक्सपर्ट बोले कि पिच खराब थी और विश्व टेस्ट चैंपियनशिप के कारण इंटरनेशनल क्रिकेट काउंसिल यानी आइसीसी खराब रेटिंग देगी, जिससे भारत को विश्व रैंकिंग में फायदा नहीं मिलेगा। हालांकि, ऐसा नहीं हुआ। वहीं, भारत ने पहला मुकाबला हारने के बाद दूसरे मुकाबले में जीत हासिल कर सीरीज को 1-1 से बराबर कर दिया था।भारत के ऑफ स्पिनर आर अश्विन को उनके हरफनमौला प्रदर्शन के लिए प्लेयर ऑफ द मैच चुना गया था। ब्रॉड ने डेली मेल को लिखे अपने कॉलम में लिखा, "हमारे नजरिए से दूसरे टेस्ट मैच की पिच की आलोचना नहीं है। घरेलू मैदान पर कुछ ऐसे ही मेजबान टीम को मदद मिलती है और आपका यह हक है कि आप इसका लाभ उठाएं। भारतीय टीम ने हमसे अच्छा खेल दिखाया, वो काफी क्षमतावान खिलाड़ी हैं, जबकि वो पिच हमारे लिए बिल्कुल अलग थी।"उन्होंने आगे कहा, "यह कुछ ऐसा ही है जैसे हमने 2018 में लॉर्डस में भारत को हराया था। गेंद स्विंग कर रही थी, जब हम बल्लेबाजी कर रहे थो यह पिच अलग थी और जब भारत बल्लेबाजी कर रहा था को पिच अलग दिख रही थी। ऐसा इसलिए होता है, क्योंकि हमने 30 साल ऐसी जगह पर खेला है जहां पर गेंद हवा में स्विंग करती है। भारत 107 और 130 पर ऑलआउट हो गया था और हम पारी से मैच जीते थे।"तेज गेंदबाज ब्रॉड ने इसी कड़ी में आगे कहा, "हमने मैच में बेहतर प्रदर्शन नहीं किया। चेन्नई की पिच पर हम अपनी क्षमता के अनुसार नहीं खेले। हम नहीं चाहते कि खुद को बहुत ज्यादा इस मैच की वजह से निराश करें, मैच में भारत की टीम ने अच्छा खेल दिखाया।" दोनों टीमों के बीच तीसरा टेस्ट मोटेरा के सरदार पटेल स्टेडियम में 24 फरवरी से खेला जाना है, जोकि डे-नाइट टेस्ट मैच होगा। ब्रॉड का कहना है कि गुलाबी गेंद से होने वाले इस मैच में परिस्थितियां इंग्लैंड में पक्ष में रहेगी।

कोलंबो। श्रीलंकाई टीम से जुड़ी एक बड़ी खबर सामने आई है। टीम के तेज गेंदबाज लाहिरु कुमारा को कोरोना वायरस से संक्रमित पाया गया है। श्रीलंका क्रिकेट (एसएलसी) ने सोमवार को प्रेस विज्ञप्ति जारी कर इस बात की जानकारी दी है कि लाहिरु कुमारा को कोविड 19 टेस्ट में पॉजिटिव पाया गया है। क्रिकबज की रिपोर्ट के अनुसार, श्रीलंका को वेस्टइंडीज का दौरा करना है और इससे पहले ही लाहिरु कुमारा कोरोना से संक्रमित पाए गए हैं।श्रीलंकाई क्रिकेट बोर्ड ने लाहिरु कुमारा को लेकर जारी की विज्ञप्ति में कहा है, "लाहिरु का आरटी-पीसीआर टेस्ट रविवार को किया गया था, जिसमें उनका नतीजा पॉजिटिव आया। लाहिरु को सरकार के कोरोना प्रोटोकॉल का पालन करने के लिए कहा गया है। एसएलसी भी स्वास्थ्य प्रोटोकॉल का पालन करके सामान्य ऑपरेशन जारी रखेगी।" वेस्टइंडीज दौरे से पहले टीम के लिए एक बड़ी खबर है, क्योंकि वे अभी प्रैक्टिस लिए मैदान पर नहीं उतरेंगे।श्रीलंका और विंडीज के बीच तीन मैचों की टी20 सीरीज और तीन मैचों की वनडे मुकाबलों की सीरीज खेली जानी है जो तीन से 14 मार्च तक चलेगी। लाहिरु कुमारा का सीमित ओवर की सीरीज में भाग लेना संभव नहीं है, लेकिन उम्मीद है कि वह 21 मार्च से शुरु होने वाली टेस्ट सीरीज में टीम के साथ जुड़ेंगे। हालांकि, यह उनके समय पर स्वस्थ होने पर निर्भर करेगा। लाहिरु कुमारा लंबे समय से श्रीलंका की टेस्ट टीम के अहम सदस्य हैं।24 वर्षीय लाहिरु कुमारा ने 2016 में डेब्यू करने के बाद 22 टेस्ट मैच खेले हैं, जिसमें उन्होंने 68 सफलताएं हासिल की हैं। 13 वनडे इंटरनेशनल और 6 टी20 इंटरनेशनल मैच भी वे खेल चुके हैं। वनडे क्रिकेट में लाहिरु कुमारा ने 13 विकेट चटकाए हैं, जबकि 6 विकेट उनको टी20 क्रिकेट में मिली है। लाहिरु ने देश के लिए अंडर 19 क्रिकेट भी खेली है। ऐसे में वे टीम के लिए अनुभवी खिलाड़ी बन चुके हैं।

क्राइस्टचर्च। अनुभवी भारतीय ऑफ स्पिनर आर अश्विन ने सोमवार को एक बार फिर से अपना हास्य पक्ष दिखाया है, क्योंकि उन्होंने न्यूजीलैंड के बल्लेबाज डेवन कॉनवे पर जोरदार टिप्पणी की। हालांकि, डेवन कॉनवे पर आर अश्विन कोई मजाक नहीं किया, लेकिन उनकी तारीफ करते हुए उनको एक मजेदार बात कही है। दरअसल, ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ T20 इंटरनेशनल सीरीज के पहले मैच में डेवन कॉनवे ने एक तूफानी पारी खेली।न्यूजीलैंड की…
अहमदाबाद। भारत के तेज गेंदबाज इशांत शर्मा ने सोमवार को कहा कि विश्व टेस्ट चैंपियनशिप (डब्ल्यूटीसी) उनके लिए विश्व कप की तरह है और वह चाहते हैं कि इस साल के अंत में होने वाले फाइनल मैच में उनकी टीम खेले। भारत और इंग्लैंड के बीच चार मैचों की सीरीज वर्तमान में 1-1 की बराबरी पर है और अब दोनों टीमें मोटारा क्रिकेट स्टेडियम में बुधवार से शुरू हो रहे…
क्राइस्टचर्च।ऑस्ट्रेलियाई टीम के सीमित ओवरों के कप्तान आरोन फिंच को पिछले साल रॉयल चैलेंजर्स बैंगलोर यानी आरसीबी ने अपने साथ जोड़ा था, लेकिन आरोन फिंच अच्छा प्रदर्शन आइपीएल 2020 में नहीं कर पाए थे। ऐसे में आरसीबी ने उन्हें रिलीज कर दिया था। बाद में आरोन फिंच ने खुद को ऑक्शन के लिए डाला और आइपीएल 2021 खेलने की मंशा जाहिर की, लेकिन ऑस्ट्रेलियाई दिग्गज पर किसी भी टीम ने…
नई दिल्ली। भारत के खिलाफ खेली जाने वाली चार मैचों की टेस्ट सीरीज के लिए चुनी गई टीम में इंग्लैंड ने बल्लेबाज ओली पोप को शामिल किया है। चोट की वजह से क्रिकेट से दूर रहने वाले 23 साल के ओली पूरी तरह से फिट हो गए हैं। बुधवार को उनको भारत के खिलाफ चुनी गई टीम में शामिल किया गया।भारत और इंग्लैंड के बीच खेली जाने वाली टेस्ट सीरीज…
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