वाशिंग्‍टन। अमेरिकी विदेश मंत्री माइक पोम्पियो की सीरिया यात्रा पर पूरी दुनिया की नजर है। उनकी यह यात्रा ऐसे समय हुई है, जब करीब तीन हफ्ते पहले अमेरिकी राष्‍ट्रपति डोनल्‍ड ट्रंप ने सीरिया से अमेरिकी सैनिकों को हटाने का ऐलान किया था। ऐसे में अमेरिकी विदेश मंत्री का यह दौरा काफी अहम माना जा रहा है। माइक ने यहां एक तीर से जहां ड्रेमोक्रेट्स की नीतियों पर निशाना साधा है, वहीं उन्‍होंने उन अटकलों को खारिज कर दिया है कि अमेरिकी सैनिक यहां से पूरी तरह से हटने वाले हैं। उधर, ईरान के विदेश मंत्री जवाद जरीफ ने माइक की प्रतिक्रिया में कहा कि अमेरिका जहां भी दखल देता है, वहां दमन और नाराजगी का दौर शुरू हो जाता है। अमेरिकी दखल के बाद उस देश में उथल-पु‍थल शुरू हो जाता है।अपनी इस यात्रा के दौरान माइक ने यह साफ कर दिया कि जब तक ईरान और उसके स‍मर्थित लड़ाके यहां से बाहर नहीं जाते तब तक अमेरिका सीरिया को किसी तरह की मदद नहीं करेगा। खासकर सीरिया के राष्‍ट्रपति बशर अल असद के नियंत्रण वाले इलाके में पुनर्निर्माण में कोई सहयोग नहीं देगा। इस मौके पर उन्‍होंने कहा कि सीरिया से ईरान के हर लड़ाके को निकलने में उनका देश सहयोगियों के साथ मिलकर काम करता रहेगा। उनका यह बयान उनके लिए राहत देने वाला हो सकता है, जो सीरिया में अमेरिकी मौजुदगी को सही मानते हैं।
पूर्व राष्‍ट्रपति ओबामा के बहाने ड्रेमोक्रेट की नीतियों पर साधा निशाना;-अमेरिकी विदेश मंत्री ने पूर्व राष्‍ट्रपति बराक ओबामा का नाम लिए ड्रेमोक्रेट की मध्‍य पूर्व नीति की निंदा की। उन्‍होंने कहा कि ड्रेमोकेट्स की मध्‍य पूर्व की नीति पूरी तरह से निंदनीय और गलत है। उन्‍होंने कहा कि उनकी मध्‍य पूर्व के देशों में उनका आकलन पूरी तरह से गलत साबित हुआ है। बता दें कि सीरिया से अमेरिकी सैनिकों को हटाने के ट्रंप के बयान से अमेरिका में कई विशेषज्ञ काफी हतप्रभ हुए थे। अब अमेरिकी विदेश मंत्री ने यह भरोसा देने में जुटे हैं कि अमेरिका की आतकंवाद या सीरिया की नीति में कोई बदलाव नहीं आया है।
अमेरिका का लक्ष्‍य सीरिया में एक बेहतर व्‍यवस्‍था कायम करना:-उन्‍होंने साफ किया कि अमेरिकी सैनिक आतंक के खिलाफ संघर्ष पूरा होने तक सीरिया से वापस नहीं जाएगी। उन्‍होंने कहा कि पूरी दुनिया की सुरक्षा के लिए खतरा बनें इस्‍लामिक स्‍टेट समूह और अल कायदा को पस्‍त करने के लिए हम सीरिया के साथ मिलकर काम करेंगे। अमेरिकी विदेश मंत्री ने कहा कि मध्‍य पूर्व में अमेरिका का लक्ष्‍य एक बेहतर व्‍यवस्‍था कायम करना है। माइक का यह बयान अमेरिका में उन लोगों को रराहत देने वाली हो सकती है।अपनी यात्रा के दौरान उन्‍होंने कहा कि ईरान के खिलाफ अमेरिकी प्रतिबंध कड़ाई से लागू होंगे। बता दें कि सीरिया में जारी संघर्ष में ईरान और रूस सीरिया सरकार का समर्थन कर रहे हैं। ये दोनों देश सीरिया को हथियार और सैन्‍य सहायता के अलावा सैनिक भी मुहैया कराता है। अमेरिका का मानना है कि ईरान और रूस इस क्षेत्र में अस्थि‍रता पैदा कर रहे हैं। माइक ने कहा कि अमेरिका इस क्षेत्र और दुनिया में ईरान के बुरे प्रभाव और कार्रवाईयों को रोकने के लिए हम अपने अभियान को कमजोर नहीं होने देंगे।
सीरिया को लेकर अमरीका का क्‍या है स्‍टैंड;-दरअसल, सीरिया में अमेरिका के दो हजार सैनिक तैनात हैं। वह सीरिया, तुर्की, खाड़ी के अरब देशों और जॉर्डन के साथ मिलकर कुछ विद्रोही समूहों का समर्थन कर रहा है। यह अमेरिकी सैनिक इस्‍लामिक स्‍टेट आइएस के साथ संघर्ष कर रहे हैं।
क्‍या कहा था ट्रंप ने:-दिसंबर, 2018 को अमरीकी राष्ट्रपति ने कहा था कि वह सीरिया के सभी सैनिकों को हटा रहे हैं। इसकी वजह ये है कि यहां आईएस को परास्‍त किया जा चुका है। इस दौरान ट्रंप ने कहा था कि सैनिकों को धीरे-धीरे हटाया जाएगा

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