वॉशिंगटन। कोरोना वायरस (कोविड-19) उन लोगों के लिए ज्यादा घातक साबित हो रहा है, जो पहले से ही किसी बीमारी से पीडि़त हैं। अब एक नए अध्ययन में पाया गया है कि इस घातक वायरस की चपेट में आने वाले डायबिटीज और बीपी रोगियों की मुश्किलें बढ़ सकती हैं। ऐसे लोगों में कोरोना के चलते स्ट्रोक और मस्तिष्क में रक्तस्राव जैसी न्यूरोलॉजिकल जटिलताओं का खतरा बढ़ सकता है।शोधकर्ताओं के अनुसार, जीवन के लिए खतरा पैदा करने करने वाली ये समस्याएं आमतौर पर उच्च रक्तचाप (हाई ब्लड प्रेशर) और डायबिटीज पीडि़तों में पाई जा रही हैं। कोरोना पहले श्वसन तंत्र की कोशिकाओं पर हमला करता है, जो फेफड़ों में सूजन का कारण बनता है। इससे पीडि़तों में निमोनिया का खतरा बढ़ जाता है। यह वायरस शरीर की दूसरी प्रणालियों पर भी गहरा असर डाल सकता है। अमेरिका की पेंसिलवेनिया यूनिवर्सिटी के प्रमुख शोधकर्ता कोल्बे डब्ल्यू फ्रीमैन ने कहा, 'कोविड-19 का फेफड़ों से परे भी असर पड़ता है।' यह निष्कर्ष 1,357 कोरोना रोगियों पर किए गए एक अध्ययन के आधार पर निकाला गया है।गत जनवरी से अप्रैल के दौरान कोरोना की चपेट में आए इन मरीजों में से कुछ के मस्तिष्क का सीटी स्कैन किया गया था। जिन 81 मरीजों के मस्तिष्क की जांच की गई थी, उनमें से 18 में स्ट्रोक और मस्तिष्क में रक्तस्राव जैसी समस्याएं पाई गई। इनकी रक्त वाहिनियां भी अवरुद्ध मिली थीं। इन रोगियों में से करीब आधे डायबिटीज और उच्च रक्तचाप से पीडि़त थे। फ्रीमैन ने कहा, 'डायबिटीज और उच्च रक्तचाप पीडि़तों में न्यूरोलॉजिकल जटिलताओं का उच्च खतरा हो सकता है। इन लोगों पर करीबी नजर रखे जाने की जरूरत है।'

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