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वाशिंगटन। हमेशा से कहा जाता रहा है कि अल्कोहल का सेवन स्वास्थ्य के लिए हानिकारक है। इसकी लत व्यक्ति के साथ उसके परिवार को भी गर्त में ले जाती है। अब वैज्ञानिकों ने भी शोध कर इसके दुष्परिणामों के प्रति आगाह किया है। एक शोध के मुताबिक, अल्कोहल लेने की बुरी आदत कॉलेज के छात्रों को खराब जीवनशैली के कुचक्र में फंसा देती है। इससे उनकी पढ़ाई तो प्रभावित होती ही है, साथ ही उन्हें मानसिक तनाव और कम नींद की शिकायत रहने लगती है।इस शोध के लिए अमेरिका की बिंघमटन यूनिवर्सिटी के शोधार्थियों ने देश के विभिन्न विश्वविद्यालयों के 558 छात्र-छात्राओं पर सर्वे किया। इस दौरान उन्होंने पाया कि ज्यादा मात्रा में अल्कोहल का सेवन करने से छात्रों के शैक्षणिक प्रदर्शन में गिरावट आने के साथ ही वह मानसिक रूप से भी तनावग्रस्त रहते हैं और ऐसे छात्र नींद न आने से भी परेशान थे।बिंघमटन यूनिवर्सिटी के एसिस्टेंट प्रोफेसर लीना कहती हैं कि हमने रोबस्ट डाटा-मीनिंग तकनीक के जरिए कॉलेज के ऐसे छात्रों की पहचान की जो मादक द्रव्य के सेवन के चलते समाज से कटे रहते थे। कम नींद और मानसिक तनाव के कारण वह एक गंभीर संकट से गुजर रहे होते हैं। उनके व्यवहार में भी काफी बदलाव देखा जा सकता है। उन्होंने कहा कि हमें ऐसे पदार्थों के सेवन में संयम बरतना चाहिए, ताकि हम अपने परिवार और काम के प्रति संवेदनशील रहें।
ज्‍यादा शराब पीने के नुकसान:-इसमें कोई रहस्‍य नहीं है कि शराब के सेवन से कई प्रकार की स्‍वास्‍थ्‍य समस्‍याएं हो सकती हैं जिसमें लीवर की बीमारी सिरोसिस और साथ ही सड़क यातायात दुर्घटनाओं में घायल होने की वजह पैदा कर सकता है। शोधकर्ताओं के अनुसार शराब का अधिक सेवन से 60 से अधिक बीमारियों के साथ जुड़ा होता है। यहां पर शराब से नुकसानों के बारे में बताया गया है।
डिमेंशिया यानी पागलपन:-उम्र बढ़ने के साथ लोगों में औसत रूप से लगभग 1.9 प्रतिशत की दर से मस्तिष्क सिकुड़ता है। इसे सामान्य माना जाता है। लेकिन अधिक शराब पीने से मस्तिष्क के कुछ महत्वपूर्ण हिस्सों में इस संकुचन की गति बढ़ जाती है जिसके कारण स्मृति हानि और डिमेंशिया के अन्य लक्षण दिखाई देते हैं।
एनीमिया:-बहुत अधिक मात्रा में शराब पीने से ऑक्‍सीजन ले जाने वाली लाल रक्त कोशिकाओं की संख्‍या असामान्‍य रूप से कम होने का कारण बनता है। इस अवस्‍था को एनीमिया कहते हैं, जिससे कारण थकान, सांस लेने में तकलीफ या सांस का उखड़ना जैसी समस्‍याएं देखने को मिलती हैं।
कैंसर:-वैज्ञानिकों के अनुसार, खतरा तब और अधिक बढ़ जाता है जब शरीर में शराब एसीटैल्डिहाइड, शक्तिशाली कैसरजन में परिवर्तित हो जाता है। शराब के अधिक उपयोग से मुंह, गले, ग्रासनली, लीवर, स्तन, पेट और मलाशय के कैंसर होने का खतरा बहुत अधिक रहता हैं। कैंसर के खतरा उन लोगों को बहुत अधिक होता है जो बहुत अधिक शराब पीने के साथ तम्बाकू का सेवन भी करते हैं।
हृदय रोग:-अधिक शराब पीने के कारण प्लेटलेट्स की ब्‍लड क्लॉट्स के रूप में जमा होने की संभावना अधिक होती है जिसके कारण हार्ट अटैक या स्ट्रोक हो सकता है। शोधकर्ताओं ने पाया कि ज्‍यादा शराब पीने वाले उन लोगों में मौत का खतरा दोगुना हो जाता है, जिन्‍हें पहले हार्ट अटैक आ चुका है।
सोरायसिस:-लीवर सेल्‍स के लिए शराब जहर के सामान है। अधिक शराब पाने वाले अनेक लोगों को सिरोसिस की शिकायत रहती हैं जो कि कभी-कभी घातक हालत सिद्ध होती है। इस अवस्‍था में लीवर भारी होने के कारण कार्य करने में भी असमर्थ हो जाता है। लेकिन यह बताना कठिन होता है कि किस शराब पीने वाले को सिरोसिस होगा या नहीं।

दुबई। सऊदी की रहने वाली दो सगी बहनों ने अपने देश से भागने के बाद जॉर्जिया से मदद की गुहार लगाई है। दोनों बहनों का दावा है कि अगर उन्‍हें जबरन सऊदी अरब लौटा दिया गया उनका कत्‍लेआम हो जाएगा। उन्‍होंने कहा है कि उनके पिता और भाई उनकी तलाश में जॉर्जिया पहुंच चुके हैं। दोनों बहनों ने राजनयिक संरक्षण की मांग की है।दोनों बहनों ने यह यह अपील सोशल मीडिया के जरिए किया है। जाॅर्जियासिस्‍ट्स नामक एक ट्विटर अकाउंट में उन्‍होंने अपनी पहचान का खुलासा किया है। ट्वीटर में उन्‍होंने खुद को 28 वर्षीय महा अल-सुबी और 25 वर्षीय वफा अल-सूबी के रूप में अपनी पहचान बताई है। उन्‍होंने इस ट्वीटर अकाउंट पर अपने पासपोर्ट की प्रतियां भी पोस्‍ट किया है। इससे उनकी सहज रूप से पहचान की जा सके।बता दें कि जॉर्जिया में प्रवेश के लिए सऊदी के लिए वीजा की जरूरत नहीं होती है। यहां मुक्‍त वीजा है। इसके चलते यहां पीड़‍ित सऊदी महिलाएं भाग कर आती हैं। उन्‍होंने दावा किया है कि सऊदी अरब में महिलाएं मर्दों के दुर्व्‍यवहार का शिकार हैं। कई सऊदी महिलाएं इस अपमान से तंग आकर भाग जाती हैं। उन्‍होंने कहा कि इसका हमारे पास प्रमाण है। उन्‍हाेंने कहा देश से भागी सऊदी महिलाओं के साथ गंदा व्‍यवहार किया जाता है। उन्‍हें हिरासत में रखा जाता है।

वाशिंगटन। अमेरिकी विशेषज्ञों का दावा है कि भारत के उपग्रह रोधी मिसाइल (ASAT) के परीक्षण से नई दिल्‍ली और बीजिंग के बीच स्‍पेश वार की शुरुआत हो सकती है। विशेषज्ञों ने यह आशंका जाहिर किया है कि दोनों देशों के बीच स्‍पेश में प्रतिद्वंद्विता का दौर शुरू हो सकता है। बता दें कि भारत ने पिछले महीने एक उपग्रह रोधी मिसाइल का परीक्षण किया था। अमेरिकी विशेषज्ञों का कहना है कि भारत ने यह परीक्षण बीजिंग को लक्षित करके किया है। एशले जे टेलिस, स्‍ट्रैटेजिक अफेयर्स के लिए टाटा चेयर और कार्नेजी एडॉमेंट फार इंटरनेशनल पीस के वरिष्‍ठ साथी ने मंगलवार को कहा कि भारत का ASAT परीक्षण एक तरह से चीन के लिए ही था। भारत को अंतरिक्ष प्रतियोगिता के लिए अब तैयार रहना होगा।हालांकि, इस परीक्षण के बाद भारत ने दुनिया के समक्ष अपने रुख को साफ करते हुए कहा था हम एक लोकतांत्रिक देश है और अपनी जिम्‍मेदारियों को भलीभांति समझते हैं। भारत का कहना है कि उसके समस्‍त प्रयास आत्‍मरक्षा और विकास के लिए है। भारत के इस परीक्षण से किसी भी देश को आपत्ति नहीं होनी चाहिए।बता दें कि 27 मार्च को भारत ने अपने ही एक उपग्रह को उसकी कक्षा में अंतरिक्ष मिसाइल से नष्‍ट कर दिया था। इसके सफल परीक्षण के साथ ही यह तकनीक विकसित करने वाला भारत दुनिया का चौथा मुल्‍क बन गया है। इसके पहले यह क्षमता अमेरिका, रूस और चीन के पास थी। विशेषज्ञों का दावा है कि निश्चित रूप से चीन ने अमेरिका के जवाब में अपनी स्‍पेश क्षमताओं काे विकसित किया है। लेकिन नई दिल्‍ली को अब इस चीनी कार्यक्रम से खतरा उत्‍पन्‍न हो गया है। उन्‍होंने कहा कि भारत को बढ़ते चीनी खतरों के बावजूद अंतरिक्ष के उपयोग करने की अपनी क्षमता में सुधार करना चाहिए। इसके साथ ही अंतरिक्ष की सुरक्षा और नागरिक उपयोग की प्रतिबद्धता को बनाए रखना होगा।

नई दिल्‍ली। उत्तर कोरिया की प्रमुख न्‍यूक्लियर साइट पर हो रही हलचल ने एक बार फिर से अमेरिका को चौकन्‍ना कर दिया है। अमेरिका को शक है कि उत्तर कोरिया परमाणु बम बनाने के लिए किसी रेडियोएक्टिव मेटेरियल को रिप्रोसेस करने में लगा है। यह सबकुछ हनाई में किम जोंग उन और डोनाल्‍ड ट्रंप की वार्ता के विफलता के बाद हुआ है। यह वार्ता फरवरी में हुई थी।आपको बता दें कि किम और ट्रंप तीसरी मुलाकात की मंशा जता चुके हैं। लेकिन इससे पहले ही इस उत्तर कोरिया के परमाणु कार्यक्रम के बारे में सामने आई जानकारी इसकी सफलता पर प्रश्‍नचिन्‍ह लगाने के लिए काफी है। किम ने पिछले दिनों कहा था कि वह केवल तभी तक बातचीत को तैयार है जब तक ट्रंप इसके प्रति उचित रवैया दिखाते हैं। अन्‍यथा उत्तर कोरिया के पास सभी विकल्‍प पूरी तरह से खुले हैं।सेंटर फॉर स्‍ट्रेटेजिक एंड इंटरनेशनल स्‍टडीज की तरफ से कहा गया है कि उपग्रह से जो चित्र मिले हैं उनके मुताबिक योंगब्‍योन न्‍यूक्लियर साइट पर यूरेनियम इनरिच फेसेलिटी और रेडियोकेमेस्‍ट्री लैब के निकट 12 अप्रैल को पांच रेलकार दिखाई दी हैं। इस तरह की रेल कार का इस्‍तेमाल रेडियोएक्टिव मैटेरियल को एक जगह से दूसरी जगह ले जाने के लिए होता है। लिहाजा तीसरी वार्ता से पहले यह अच्‍छी खबर नहीं है।आपको बता दें कि अभी तक की दो शिखर वार्ताओं में दोनों देशों के प्रमुखों के बीच हाथ मिलाने से ज्‍यादा कुछ नहीं मिला है। ऐसा इसलिए, क्‍योंकि पिछले वर्ष सिंगापुर वार्ता में भी दोनों नेताओं के बीच कुछ सहमति तो जरूर बनी थी, लेकिन समझौते पर आकर बात अटक गई थी। हनोई में तो किम ने साफ तौर पर मेज पर कुछ शर्तों के साथ अपनी बात शुरू की थी। उनकी पहली शर्त उत्तर कोरिया से सभी प्रतिबंध हटाने को लेकर थी, जिसपर ट्रंप पूरी तरह से असहमत थे और वार्ता अधूरी छोड़कर चले गए थे। उन्‍होंने उस वक्‍त कहा था कि इस शर्त के साथ वार्ता को आगे बढ़ाना बेमानी था, लिहाजा उन्‍होंने वहां से चले जाना बेहतर समझा।इतना ही नहीं, यदि दोनों शिखर वार्ताओं पर गौर करें तो उस दौरान अमेरिकी सैटेलाइट से मिली तस्‍वीरों ने भी वार्ताओं को विफल बनाने का काम किया है।

 

पेरिस। फ्रांस की राजधानी पेरिस में स्थित 12वीं सदी का नोटे्र डाम कैथेड्रल चर्च सोमवार को भीषण आग में तबाह हो गया। आग से चर्च की पूरी छत और मीनारें ध्वस्त हो गईं। फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों ने देशवासियों से वादा किया है कि वह पांच साल के भीतर 850 साल पुराने इस ऐतिहासिक चर्च का पुनर्निर्माण कराएंगे। उन्होंने इस चर्च को देश की आत्मा करार दिया। चर्च के पुनर्निर्माण के लिए मदद मिलने लगी है, दूसरे दिन अब तक 100 करोड़ यूरो की मदद मिल चुकी है। फायर ब्रिगेड के प्रमुख जीन-क्लाउड गैलेट ने मंगलवार को कहा, ‘नोट्रे डाम कैथेड्रल चर्च के मुख्य ढांचे और दो बेल टावर्स को बचा लिया गया है। लेकिन पूरी छत नष्ट हो गई और मुख्य मीनार भी नहीं बची।’
आग का कारण स्पष्ट नहीं;-ऐतिहासिक चर्च में आग लगने का कारण अभी साफ नहीं हो पाया है। चर्च में बड़े पैमाने पर जीर्णोद्धार का काम चल रहा था। जांच अधिकारियों ने जीर्णोद्धार में लगे मजदूरों से पूछताछ की, लेकिन अधिकारियों ने किसी भी तरह की अनहोनी से इन्कार कर दिया और फिलहाल इसे एक हादसा बताया है।
युद्धों में सुरक्षित रहा था चर्च:-एक पुल से धू-धू कर जलते चर्च को देखने वाले कंसल्टेंट स्टीफन सिग्नेयूरी ने कहा, ‘नोट्रे डाम कैथेड्रल सभी युद्धों और बमबारी में बचा रहा। हमने यह कभी नहीं सोचा था कि यह आग में तबाह हो सकता है।’
यूनेस्को की विश्व धरोहरों में शामिल:-यूनेस्को ने 1991 में इस चर्च को विश्व धरोहरों की सूची में शामिल किया था। इस चर्च का निर्माण साल 1163 से 1345 के बीच कराया गया था। चर्च को देखने के लिए हर साल एक करोड़ से ज्यादा सैलानी आते हैं।
कई राष्ट्राध्यक्षों ने जताया दुख:-अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ट्वीट कर चर्च में आग लगने पर दुख जताया और कहा, ‘भीषण आग को देखना बहुत दुखद है।’ जबकि जर्मनी की चांसलर एंजिला मर्केल ने इस चर्च को यूरोपीय संस्कृति का प्रतीक बताया। संयुक्त राष्ट्र के महासचिव एंटोनियो गुतेरस और वेटिकन ने भी दुख व्यक्त किया है।
चर्च के पुनर्निर्माण के लिए अब तक 100 करोड़ यूरो मिले:-इस ऐतिहासिक चर्च के पुनर्निर्माण के लिए फ्रांस के अरबपति से लेकर कारोबारी और निजी-सरकारी कंपनियां दिल खोलकर मदद का एलान कर रही हैं। फ्रांस के अरबपति कारोबारी बर्नार्ड अर्नाल्ट ने मंगलवार को कहा कि उनका परिवार और उनकी कंपनी चर्च के पुनर्निर्माण में 20 करोड़ यूरो (करीब 1570 करोड़ रुपये) का योगदान देगा। अर्नाल्ट एलवीएमएच के चेयरमैन और सीईओ हैं। यह लक्जरी सामान बनाने वाली दुनिया की सबसे बड़ी कंपनी है। वहीं, लक्जरी सामान बनाने वाली फ्रांस की कंपनी र्केंरग ने भी 10 करोड़ यूरो की मदद का एलान किया है। तेल क्षेत्र की बड़ी कंपनी टोटल ने भी 10 करोड़ यूरो देने की घोषणा की है।कॉस्मेटिक सामान बनाने वाली दुनिया भर में मशहूर लॉरियल 20 करोड़ यूरो देगी। इंवेस्टर मार्क लैड्रेइय एक करोड़ यूरो, और कंस्ट्रक्शन कंपनी मार्टिन व ओलिवर भी एक करोड़ यूरो की मदद करेगी। एप्पल ने भी मदद की घोषणा की है, लेकिन उसने रकम नहीं बताई है। वहीं एयर फ्रांस ने पुनर्निर्माण के लिए आने वाले विशेषज्ञों को मुफ्त यात्रा की सुविधा देने का एलान किया है।

नई दिल्‍ली। फ्रांस की राजधानी पेरिस में सीन नदी के तट पर स्थित 850 साल पुराना मशहूर चर्च नॉत्र डाम कैथेड्रल (जिसे लेडी ऑफ पेरिस भी कहा जाता है) भीषण आग के बाद पूरी तरह से बर्बाद हो गया। इसमें आग की शुरुआत गिरजाघर के गुंबद से हुई थी जिसने बाद में पूरी इमारत को अपनी चपेट में ले लिया। इस चर्च के नष्‍ट होने से माना जा रहा है कि एक युग का भी अंत हो गया। जिस वक्‍त इसमें आग लगी उस वक्‍त यहां पर इसके नवीनीकरण का काम चल रहा था। इस घटना से आहत फ्रांस के राष्‍ट्रपति मैक्रोन ने नोट्रे-डेम का निर्माण फिर से कराने की बात कही है। उनके मुताबिक इसके लिए धन एकत्रित किया जाएगा और विदेशों से प्रतिभाशाली व्‍यक्तियों की मदद लेकर इसको पुनर्जिवित किया जाएगा। फ्रांस के अरबपति फ्रांकोइस-हेनरी पिनाउल्ट ने भी इसमें सहयोग करने की घोषणा की है।
चर्च के पुनर्निर्माण के लिए अब तक 70 करोड़ यूरो मिले:-इस ऐतिहासिक चर्च के पुनर्निर्माण के लिए फ्रांस के अरबपति से लेकर कारोबारी और निजी-सरकारी कंपनियां दिल खोलकर मदद का एलान कर रही हैं। फ्रांस के अरबपति कारोबारी बर्नार्ड अर्नाल्ट ने मंगलवार को कहा कि उनका परिवार और उनकी कंपनी चर्च के पुनर्निर्माण में 20 करोड़ यूरो (करीब 1570 करोड़ रुपये) का योगदान देगा। अर्नाल्ट एलवीएमएच के चेयरमैन और सीईओ हैं। यह लक्जरी सामान बनाने वाली दुनिया की सबसे बड़ी कंपनी है। वहीं, लक्जरी सामान बनाने वाली फ्रांस की कंपनी र्केंरग ने भी 10 करोड़ यूरो की मदद का एलान किया है। तेल क्षेत्र की बड़ी कंपनी टोटल ने भी 10 करोड़ यूरो देने की घोषणा की है। कॉस्मेटिक सामान बनाने वाली दुनिया भर में मशहूर लॉरियल 20 करोड़ यूरो देगी।इंवेस्टर मार्क लैड्रेइय एक करोड़ यूरो, और कंस्ट्रक्शन कंपनी मार्टिन व ओलिवर भी एक करोड़ यूरो की मदद करेगी। एप्पल ने भी मदद की घोषणा की है, लेकिन उसने रकम नहीं बताई है। वहीं एयर फ्रांस ने पुनर्निर्माण के लिए आने वाले विशेषज्ञों को मुफ्त यात्रा की सुविधा देने का एलान किया है।
आइए इससे जुड़ी कुछ दिलचस्‍प बातों पर एक नजर डाल लेते हैं:-
-जहां तक इस चर्च के इतिहास की बात है तो यह काफी दिलचस्‍प रहा है। इन 850 वर्षों में यह चर्च कई बार हिंसा और आगजनी का शिकार हुआ, लेकिन हर बार ही इसको दोबारा खड़ा कर दिया गया।
-इस चर्च का निर्माण वर्ष 1163 से 1345 बीच बिशप मॉरिस डे सली के नेतृत्‍व में कराया गया था। यह चर्च पेरिस के सबसे लोकप्रिय स्‍थलों में से एक था। हर साल इसे देखने के लिए एक करोड़ से ज्यादा सैलानी आते थे।
-इस चर्च की गुंबद की ऊंचाई करीब 295 फीट थी। 12-13वीं सदी में बनी इस मध्‍ययुगीन गोथिक आर्किटेक्‍ट देखते ही देखते लोगों की आंखों से सामने खत्‍म हो गया।
-इसमें कई कांस्य की मूर्तियां लगी हुई थीं। हालांकि आग लगने से एक सप्‍ताह पूर्व ही इन मूर्तियों को यहां से हटा लिया गया था। को पिछले सप्ताह काम के लिए यहां से हटा दिया गया था।
-12वीं सदी का यह प्रसिद्ध नॉट्रे डैम कैथेड्रल चर्च। यह चर्च यूरोपीय संस्‍कृति का प्रतीक था। इसमें
-1991 में यूनेस्को ने इस चर्च को विश्व धरोहरों की सूची में शामिल किया था।
-1790 में फ्रांस में हुई क्रांति में इस चर्च को काफी नुकसान उठाना पड़ा था। 1844 और 1864 में इसका नवीनीकरण किया गया था। 2013 में इस चर्च ने 850 वर्ष पूरे किए थे।
-नेपोलियन प्रथम जब फ्रांस की सत्ता पर काबिज हुए थे तो यह चर्च उस पल का भी गवाह बना था। इतना ही नहीं यह चर्च फ्रांस के कई पूर्व राष्‍ट्रपतियों के अंतिम पलों का भी गवाह बना है।
-माना जाता है कि यहां पर कभी गालो-रोमन मंदिर हुआ करता था जो ब्रहस्‍पति ग्रह को समर्पित था। आज तक यह कोई नहीं जानता कि यह चर्च कब और कैसे सेंट स्‍टीफन को समर्पित हो गया। उस वक्‍त यह करीब 70 मीटर लंबा था जो चार गलियारों में विभाजित था। इसको मोजाक से सजाया गया था।
-1225-1250 में अपर गैलरी को बनाया गया था। इसके साथ ही चर्च के बाहर बने दो टावर का निर्माण भी इसी दौरान किया गया। इस चर्च में लकड़ी पर बनी नक्‍काशी बेहद सुंदर है। लकडि़यों के पिलर पर बने चर्च के निर्माण को Rayonnant style में बनाया गया है।
-1548 में इसमें लगी नॉत्र डाम की प्रतिमा को तोड़ दिया गया था। लुइस 14वें और लुइस 15वें काल में इसमें फिर बदलाव किया गया था।
-1801 में नेपोलियन बोनापार्ट ने इसकी मरम्‍मत के लिए एग्रीमेंट किया था। बाद में इसी चर्च में उनकी सत्‍ता का एलान किया गया और यहीं पर उनकी शादी भी हुई।
-1944 में लिब्रेशन ऑफ पेरिस के दौरान भी इसमें तोड़ाफोड़ी की गई थी। इस दौरान इसमें लगे रंग बिरंगे कांच को तोड़ दिया गया। 26 अगस्‍त को जर्मन से मुक्ति का जश्‍न भी यहां पर ही मनाया गया था।

 

 

पेशावर। पाकिस्‍तान के उत्‍तर पश्चिम शहर पेशावर में सुरक्षा बलों और आतंकवादियों के बीच हुई मुठभेड़ में पांच आतंकवादी ढेर हो गए। इस मुठभेड़ में पाकिस्‍तान का एक पुलिस अधिकारी भी मारा गया। हालांकि, पाकिस्‍तान में सक्रिय किसी आतंकवादी संगठन ने अभी इसकी जिम्‍मेेदारी नहीं ली है।सोमवार को पेशावर जिले में एक आवासीय परिसर में आतंकवादियों के छिपे होने की सूचना पर सुरक्षा बलों ने इमारत को घेर लिया। सुरक्षा…
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वाशिंगटन। अमेरिकी विदेश मंत्रालय ने ताइवान के साथ एक संभावित समझौते को मंजूरी दी है। इसके तहत ताइवान के एफ-16 लड़ाकू विमानों के पायलटों और इनकी रखरखाव से जुड़े कर्मियों के लिए अमेरिका 50 करोड़ डॉलर (करीब 3480 करोड़ रुपये) का सैन्य प्रशिक्षण कार्यक्रम शुरू करेगा।अमेरिकी विदेश मंत्रालय के एक अधिकारी ने मंगलवार को यह जानकारी देते हुए कहा, 'ताइवान की आत्मरक्षा क्षमता बनाए रखने के लिए यह हमारे समर्थन…
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