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नई दिल्‍ली। ट्वीटर पर 'ट्रोल' होने से ट्वीटर के सीइओ जैक डोरसे भी नहीं बच पाए हैं। जैक इन दिनों अपने एक ट्वीट को लेकर ट्रोल हो रहे हैं, जिसमें उन्‍होंने म्‍यांमार को पर्यटन स्‍थल के तौर पर प्रचारित किया है। हालांकि म्‍यांमार के हालात दुनिया में किसी से छिपे नहीं हैं। वहां रोहिंग्‍या मुसलमानों पर कितने अत्‍याचार किए गए, किसी को बताने की जरूरत नहीं है। ऐसे में जैक का ट्वीट उन पर भारी पड़ गया है।हालांकि यह पहली बार नहीं है, जब ट्विटर के चीफ एग्जीक्यूटिव जैक डोरसे किसी विवाद में घिरे हों। दरअसल, ट्वीट करते हुए जैक ने लिखा, 'म्यांमार बहुत सुंदर देश है। लोग खुशी से भरे हुए हैं और भोजन बेहतरीन है। मैंने यांगून, मंडले और बागान के शहरों का दौरा किया। हमने देश भर के कई मठों का भी दौरा किया।' दूसरे ट्वीट में उन्होंने लिखा कि मैंने मेडिटेशन रिट्रीट के लिए नवंबर में म्यांमार का दौर किया था।जैक के इस ट्वीट पर दुनियाभर से लोग विरोध जता रहे हैं। म्यांमार में रोहिंग्या मुस्लिमों पर हो रहे अत्याचारों को नजरअंदाज कर जैक के इस ट्वीट को लेकर ट्वीटर पर लगातार उन पर हमला हो रहा है। बता दें कि 2017 में म्यांमार की सेना ने रोहिंग्या मुस्लिमों पर कार्रवाई की थी। इसमें हजारों लोगों की हत्या कर दी गई थी। सेना की इस कार्रवाई पर मानवाधिकार संस्थाओं ने कहा था कि सेना ने भूमि जला दी है और मनमानी हत्याओं और बलात्कार किए हैं।गौरतलब है कि जैक डोरसे के ट्विटर पर 4.12 मिलियन फॉलोअर्स हैं। इससे पहले जैक ने एक फोटो ट्वीट की थी, जिसमें वह अपने हाथ में पोस्टर पकड़े हुए नजर आ रहे थे। पोस्ट में लिखा था 'ब्राह्मण पितृसत्ता का नाश हो।'

वांशिगटन। अमेरिका में मेक्सिको की सीमा पर दीवार निर्माण को लेकर एक सियासी महासंग्राम चल रहा है। अमेरिका के राष्‍ट्रपति डोनाल्‍ड ट्रंप ने इस मुद्दे को अपनी नाक का विषय बना रखा है। हालांकि, राष्‍ट्रपति चुनाव में प्रचार के दौरान उन्‍होंने अमेरिकी जनता से इस दीवार को बनाने का वादा किया था। आइए जानते हैं कि आखिर दीवार के पीछे का सच क्‍या है। अमेरिका में इसे लेकर क्‍यों हंगामा मचा है। इसके अलावा इसके भौगोलिक, सामाजिक संदर्भों के साथ वैज्ञानिकों के विरोध का कारण भी जानेंगे।
अवैध प्रवासी अमेरिका के लिए खतरा;-हर साल करीब साढ़े तीन लाख अवैध प्रवासी अमेरिका में दाखिल होते हैं, जिनमें से बड़ी संख्या मेक्सिको से आने वालों की है। सीमा पार से लगातार अवैध नशीले पदार्थों की तस्करी, खतरनाक गिरोहों एवं अंतरराष्ट्रीय अपराधिक संगठनों की गतिविधियां और अवैध इमीग्रेशन बड़े पैमाने पर हो रहा है। यह केवल अमेरिकी समुदाय और बच्चों के लिए नहीं बल्कि अमेरिका की कानून व्‍यवस्‍था के लिए खतरा है। अमेरिकी कस्टम्स ऐंड बॉर्डर प्रोटेक्श ( सीबीपी) के डाटा के अनुसार सीमा गश्ती दल ने मार्च में दक्षिण पश्चिम सीमा पर रिकॉर्ड 37,393 लोगों को गिरफ्तार किया था।
अमेरिका-मैक्सिको देश की सीमा रेखा पर खड़ी होती दीवार:-दरअसल, अमेरिका और मेक्सिको की संवेदनशील सीमा करीब 3,200 किलोमीटर लंबी है। इसमें से लगभग 1,100 किलोमीटर पर अब तक बाड़ लगाने का काम हो चुका है। ये सीमा चार अमेरिकी राज्यों और छह मेक्सिकन राज्यों से होकर गुजरती है। इसमें रेगिस्तानी इलाकों से लेकर बड़े शहर तक आते हैं। न्यू मेक्सिको में एक छोटी दूरी को घेरना ही मुश्किल है। वहीं कुछ दूसरी जगहों पर सीमा सुरक्षा बल के लोग निगरानी रखते हैं।
ट्रंप ने कहा था- मैं एक शानदार दीवार बनाउंगा:-अमेरिकी राष्ट्रपति पद के लिए अपनी उम्मीदवारी के समय ट्रंप ने कहा था कि अमेरिका की दक्षिणी सीमा पर मैं एक शानदार दीवार बनाउंगा। मुझसे अच्छी दीवार तो कोई बना नहीं सकता। मैं मेक्सिको से इसका खर्च वसूलूंगा। चुनावी रैली के दौरान ट्रंप ने मेक्सिको से आने वालों में ज्यादातर के ड्रग्स और अपराध साथ लाने का आरोप लगाया था। ट्रंप मेक्सिको के साथ लगी अमेरिकी सीमा पर दीवार बनाना चाहते हैं। अगर ऐसा हुआ तो यह दुनिया की सबसे बड़ी निर्माण योजना होगी। हालांकि, कई सालों से बॉर्डर पर स्टील के कांटेदार तारों को लगाने का प्रोजेक्ट ही पूरा नहीं हुआ है।
मेक्सिकोवासियों का अमेरिका जाने का सपना टूटा:-अमेरिका में अवैध रूप से रहने वाले ऐसे मेक्सिकन लोगों का परिवार पीछे रह जाता है। वे न तो अपने परिवार को अमेरिका ला सकते हैं और न ही अपना जीवन बेहतर करने के लिए कोई अच्छी नौकरी कर पाते हैं। दो देशों के बीच बनी बाड़ से अलग हुए परिवार कभी एक दूसरे को गले नहीं लगा पाते। कई बार ऐसे खास आयोजन किए जाते हैं, जिनमें ज्यादा से ज्यादा एक दूसरे की अंगुलियां छू पाते हैं। रेगिस्तानी रास्ते पार करते हुए सीमा पर पहुंचे कई मेक्सिकोवासियों का अमेरिका जाने का सपना करीब जाकर टूटता है और वे जेल जा पहुंचते हैं। कई लोग मानव तस्करों को सीमा पार करवाने के लिए बहुत सारे पैसे देते हैं। कई बार इन्हें सीमा पार करते हुए गोली मार दी जाती है।
सीमा दीवार के खिलाफ खड़े हुए वैज्ञानिक:-अमेरिका-मेक्सिको की लंबी सीमा पर दीवार को लेकर राजनीतिक और सामाजिक पहलू चाहे जो हो, लेकिन वैज्ञानिकाें ने इस दीवार का खुलकर विरोध किया है। आखिर इस विरोध की वजह क्‍या है। वैज्ञानिकों का मत है कि इस दीवार से इंसानों के साथ-साथ यहां के जीव-जंतुओं पर भी विपरीत असर पड़ेगा। इनका मानना है कि इससे कई दुर्लभ प्रजातियां खत्‍म हो जाएंगी। इसका प्रभाव दोनों देशों की जैव विविधता पर पड़ेगा। इसलिए अब वैज्ञानिकों ने अब इसके खिलाफ मुहिम छेड़ दी है।
मेक्सिको सीमा पर जैव विविधता का संकट:-उनका मानना है कि अगर ऐसा हुआ तो दोनों देशों की करीब एक हजार प्रजातियां सीधे तौर पर प्रभावित होंगी। बड़े सींगों वाली भेड़, ग्रे रंग वाला भेड़िया और सोनोरन हिरण जैसी दुर्लभ प्रजातियों की संख्या में कमी आएगी। हो सकता है कि अमेरिका में जगुआर और तेंदुए पूरी तरह विलुप्त हो जाएं। बायोसाइंस जर्नल में छपे लेख के मुताबिक, ऐसा इसलिए होगा क्योंकि दीवार और कंटीली तारों की वजह से जानवरों को पीने के पानी, खाने और साथी के साथ रहने में मुश्किलें आएंगी।

वाशिंगटन। अमेरिका में राजनीतिक गतिरोध चरम पर पहुंच गया है। इसके चलते अमेरिका एक बार फिर आर्थिक शट डाउन की दहलीज पर खड़ा है। अमेरिकी राष्‍ट्रपति डोनाल्‍ड ट्रंप के पदभार संभालने के बाद यह तीसरा मौका है, जब दुनिया का सबसे शक्तिशाली और समृद्ध देश इस स्थिति में पहुंचा है। हालांकि, ट्रंप ने सरकारी खर्च के बिल पर हस्‍ताक्षर कर दिए हैं, जिससे अमेरिका में शट डाउन मामला थोड़े समय के लिए टल गया है।हाल में अमेरिका में हुए मध्यावधि चुनाव में कांग्रेस के निचले सदन यानी प्रतिनिधि सभा में डेमोक्रेट की बड़ी जीत के बाद यह कयास लगाए जा रहे थे कि राष्ट्रपति ट्रंप के लिए अब बड़ी मुश्किलें खड़ी हो सकती है। दरअसल, इस चुनाव के बाद प्रतिनिधि सभा में डेमोक्रेट बहुमत में आ गए और रिपब्लिकन पार्टी का वर्चस्‍व टूट गया। चुनाव के इन परिणामों के साथ यह तय हो गया था कि अब ट्रंप को कई मामलों में डेमोक्रेट के विरोध का समाना करना पड़ सकता है। अमेरिका में जिस तरह से आव्रजन नियमों में संशोधनों को लेकर डेमोक्रेट ने ब्रेक लगाया है, उससे अमेरिका में एक नया संकट खड़ा हो गया है। आव्रजन नियमों में संशोधनों के तहत ही ट्रंप प्रशासन की मेक्सिको सीमा पर दीवार निर्माण की योजना है। इसलिए ट्रंप ने कांग्रेस द्वारा मेक्सिको सीमा पर दीवार निर्माण के लिए पर्याप्त रकम न देने पर मजबूरन आंशिक सरकारी शट डाउन कराने की चेतावनी दी है। इसके लिए उन्‍होंने डेमोक्रेटिक पार्टी को जिम्‍मेदार ठहराया है।
गतिरोध: क्‍या है मामला;-आव्रजन नियमों में संशोधनों को लेकर कांग्रेस के निचले सदन में ट्रंप और डेमोक्रेट के बीच रस्‍साकसी का खेल चल रहा है। डेमोक्रेट के अड़ि‍यल रूख के चलते अमेरिकी राष्ट्रपति ने संकेत दिया कि अगर वो आव्रजन नियमों में संशोधनों का समर्थन नहीं करते तो वे संघीय सरकार के शट डाउन की अनुमति दे देंगे। इसके लिए एक सप्‍ताह का वक्‍त दिया गया था। समय सीमा निर्धारित होने के बाद कांग्रेस में दोनों राजनीतिक दलों के बीच संघर्ष तेज हो गया है। बता दें कि रिपब्लिकन सदस्यों की तरफ से लाया गया आव्रजन बिल पिछले हफ्ते संसद से मंजूरी नहीं पा सका था। इसमें ट्रंप ने मेक्सिको के साथ लगती अमेरिका की दक्षिणी सीमा पर दीवार बनाने के लिए 25 अरब डॉलर मांगे थे। इसके बाद ट्रंप ने ट्वीट कर कहा, अगर डेमोक्रेट मुझे सीमा सुरक्षा के लिए वोट नहीं देते, जिसमें दीवार बनाने का मामला भी शामिल है, तो मैं सरकार के शट डाउन के लिए तैयार हूं।
फौरी राहत: सरकारी खर्च के लिए विधेयक 197 के मुकाबले 230 मतों से पारित:-इससे पहले गत गुरुवार रात प्रतिनिधि सभा के सदस्यों ने फरवरी तक के सरकारी खर्च के लिए विधेयक को 197 के मुकाबले 230 मतों से पारित कर दिया था। अधिकारियों ने कहा कि अब एक लाख से ज्यादा सक्रिय सैन्यकर्मी अपनी सेवाएं जारी रखेंगे, लेकिन 'कामबंदी' समाप्त होने तक उन्हें भुगतान नहीं किया जा सकता। व्हाइट हाउस के एक अधिकारी ने कहा कि ट्रंप ने इस संकट के कारण अपनी रिजॉर्ट यात्रा की योजना रद कर दी है। ट्रंप ने पहली बार शट डाउन के समय ट्विटर पर लिखा था, वे हमारी महान सेना या अत्यंत खतरनाक दक्षिणी सीमा की सुरक्षा के लिए अच्छा नहीं सोच रहे। डेमोक्रेट कर कटौती की बड़ी सफलता को बेकार करने में मदद के लिए यह कामबंदी चाहते हैं। दरअसल, अमेरिका में सीनेट की ओर से सरकारी खर्चे का बिल खारिज हो गया है, जिसकी वजह से ट्रंप सरकार के पहले साल के कार्यकाल में ही कामकाज बंद हो गया है. इस बिल को पक्ष और विपक्ष के बीच तनातनी को लेकर मंजूरी नहीं मिल पाई। इसके बाद से यहां राजन‍ीतिक संघर्ष तेज हो गया है।
सभी सरकारी महकमे 21 दिसंबर तक खुले रहेंगे:-ट्रंप ने संघीय सरकार के वित्‍त पोषण बढ़ाने, देश को आंशिक शट डाउन से बचाने और प्रस्तावित सीमा दीवार पर अपेक्षित लड़ाई को टालने के लिए सरकारी खर्च विधेयक को मंजूरी दे दी हैं। इससे होमलैंड सिक्योरिटी डिपार्टमेंट और कई अन्य सरकारी एजेंसियां 21 दिसंबर तक खुली रहेंगी।
क्‍या है एंटी-डिफिशिएंसी ऐक्ट यानी शट डाउन:-अमेरिका में एंटी-डिफिशिएंसी एक्ट के तहत देश में पैसे को लेकर कोई दिक्कत होने पर संघीय कर्मचारियों को छुट्टी पर भेज दिया जाता है। इसे शट डाउन कहा जाता है। यदि सरकार शट डाउन की घोषणा करती है तब इस दौरान कर्मचारियों को काम पर आने के लिए मना किया जाता है। उन्हें सैलरी भी नहीं दी जाती है। साथ ही ऐसे में सरकार को संघीय बजट पास करना होता है।इस स्थिति में अमेरिकी सरकार संघीय बजट लाती है, जिसे प्रतिनिधि सभा और सीनेट, दोनों में पारित कराना जरूरी होता है। लेकिन प्रतिनिधि सभा में ट्रंप की पार्टी का बहुमत नहीं है।मौजूदा हालात में ऐसा अनुमान है कि आठ लाख से ज्यादा संघीय कर्मचारी गैरहाजिर रहेंगे। केवल आपाताकालीन सेवाएं ही खुली रहेंगी। मसलन- सुरक्षा, पुलिस विभाग, अस्‍पताल आदि-आदि।अमेरिका में पांच वर्ष में दूसरी बार शट डाउन होने के संकेत हैं। इसके पूर्व 2013 में शट डाउन की स्थिति पैदा हुई थी। यह शट डाउन करीब 16 दिनों तक चला था। उस वक्‍त अमेरिका के राष्‍ट्रपति बराक ओबामा थे। अब तक अमरीका में 1976 के बाद से 18 बार काम बंदी या शट डाउन हो चुका है। बताया जा रहा है कि इस बार यह शट डाउन जल्दी खत्म नहीं होगा, क्योंकि दोनों पार्टियां विधेयक को लेकर अपनी मांग पर अड़ी है।
मध्यावधि चुनावों में विपक्षी डेमोक्रेट का दबदबा:-अमेरिका में हुए महत्वपूर्ण मध्यावधि चुनावों में विपक्षी डेमोक्रेट ने कांग्रेस के निचले सदन प्रतिनिधि सभा में अपना नियंत्रण कायम कर लिया था। ये चुनावी नतीजे राष्ट्रपति ट्रंप के लिए एक बड़ा झटका था। इस चुनाव के बाद 435 सीटों वाले प्र‍तिनिधि सभा में डेमोक्रेट का बहुमत हो गया। इसके बाद से ही डेमोक्रेटिक पार्टी की ओर से संकेत मिलने लगे थे ट्रंप के लिए और कठिन स्थिति बन सकती है। खासकर आव्रजन, कर और स्वास्थ्य देखभाल सुधारों समेत उनके अहम मुद्दों पर व्यापक विधाई परिवर्तन चाहते हैं। हालांकि, इस चुनाव में सीनेट में रिपब्लिकन पार्टी की जीत हुई थी।

 

 

मास्को। रूस की एक अदालत ने पूर्व पुलिसकर्मी को 56 हत्याओं के मामले में दोषी करार दिया। दोषी पुलिसकर्मी पहले से ही 22 महिलाओं की हत्या के मामले में आजीवन कारावास की सजा काट रहा है। पूर्व पुलिसकर्मी को रूस का खतरनाक सीरियल किलर कहा जा रहा है। दोषी पुलिसकर्मी का नाम मिखाइल पॉपकोव है।इरकुत्स्क के क्षेत्रीय अभियोजक के कार्यालय ने एक बयान में कहा, 'साइबेरियाई शहर इरकुत्स्क की अदालत ने मिखाइल पॉपकोव को 56 हत्याओं का दोषी माना है। ये मर्डर 1992 से 2007 के बीच किए गए।' अभियोजकों ने पॉपकोव को मनोरोगी बताया, जिसे लोगों की हत्या करने में मजा आता है। वह 10 लड़कियों के साथ दुष्कर्म करने का भी दोषी पाया गया।पॉपकोव को दूसरी बार आजीवन कारावास की सजा मिली है, एक मामले में वह पहले से ही सजा काट रहा है। वहीं, पूर्व पुलिसकर्मी होने के नाते उसे मिलने वाली पेंशन को भी रोक दिया गया है। बता दें कि साल 2015 में पॉपकोव को 11 महिलाओं की हत्या के मामले में सजा मिली थी। बाद में उसने 59 अन्य हत्याओं का भी जुर्म कबूल कर लिया। हालांकि सोमवार को उसे 56 मर्डर के मामले में सजा सुनाई गई, क्योंकि जांचकर्ता तीन अपराधों को साबित करने में कामयाब नहीं रहे।बताया जा रहा है कि गाड़ी में लिफ्ट देने के नाम पर वह कइयों की हत्या कर चुका है। कई हत्याएं उसने अपनी पुलिस कार में की हैं। कहा जा रहा है कि पॉपकोव ने जितनी हत्याएं की हैं, वह रूस और पूर्व सोवियत संघ के इतिहास में सबसे ज्यादा और सबसे खतरनाक है।

इस्‍लामाबाद। पाकिस्‍तान में भारतीय उच्‍चायोग के अधिकारी ने पाक अधिकृत कश्‍मीर (पीओके) के एक मंत्री को बैठक में शामिल होता देख, विरोध स्‍वरूप वहां से वॉक आउट(बैठक से बाहर निकल गए) कर दिया। रविवार को इस्‍लामाबाद में भारतीय राजनयिक शुभम सिंह ने सार्क चार्टर बैठक से वॉक आउट किया। इस बैठक में पीओके के मंत्री चौधरी मोहम्‍मद सईद को वक्‍ता के रूप में मौका दिया गया था।भारत ने पाकिस्तान के इस कदम पर कड़ा विरोध जताया और सईद के बोलने से पहले ही बैठक से वॉक आउट कर दिया। पीओके भारत का अभिन्‍न अंग है। इसे लेकर भारत कभी कोई समझौता स्‍वीकार नहीं करता है। पीओके को लेकर भारत के इस रुख से एक बार फिर पाकिस्‍तान को सबक मिल गया। दरअसल, भारत की ओर से पीओके की सरकार और किसी भी मंत्री को मान्यता नहीं दिए जाने की कूटनीतिक रणनीति है।सिर्फ पाकिस्‍तान में ही नहीं, भारत अंतरराष्‍ट्रीय मंचों पर भी पीओके को लेकर अपनी रणनीति साफ कर चुका है। भारत अपनी इस रणनीति के तहत चुने हुए भारतीय जनप्रतिनिधि और सरकारी अधिकारी, कूटनीतिक आदि पीओके के मंत्रियों और अधिकारियों के साथ मंच शेयर नहीं करते हैं। देर शाम तक भी यह स्पष्ट नहीं हो सका कि भारत ने इसके विरोध में इस्लामाबाद को कोई प्रतिक्रिया औपचारिक तौर पर भी दी।बता दें कि पाकिस्तान के न्योते को अस्वीकार करते हुए भारत की विदेश मंत्री सुषमा स्वराज ने कहा है कि भारत सार्क सम्मेलन में शामिल नहीं होगा। सुषमा स्वराज ने पाकिस्तान को दो-टूक कह दिया कि आतंकवाद और बातचीत साथ-साथ नहीं चल सकती है।

नई दिल्‍ली। चीन के सान्‍या शहर में 8 दिसंबर की रात मेक्सिको वेनेसा पोंसे डि लियोन मिस वर्ल्‍ड का ताज पहनाया गया। यह पल जाहिरतौर पर न सिर्फ वेनेसा के लिए बल्कि पूरे मेक्सिको के लिए बेहद खास था। खास इसलिए क्‍योंकि वेनेसा ये खिताब जीतने वाली मेक्सिको की पहली महिला हैं। मिस वर्ल्ड 2018 के टॉप फाइव में मिस मेक्सिको वेनेसा पोंसे डि लियोन के अलावा मिस थाईलैंड निकोलीन पिचापा लिमनकन, मिस यूगांडा क्विन अब्नेक्यो, मिस जमैका कदिजा रोबिनसन और मिस बेलारूस मारिया वसिलविच शामिल थीं।26 वर्षीय वेनेसा को मिस वर्ल्‍ड का ताज भारत की मानुषी छिल्‍लर ने पहनाया जिन्‍होंने यह खिताब पिछले वर्ष जीता था। मानुषी छिल्लर ने 17 साल के अंतराल के बाद भारत को 2017 का मिस वर्ल्ड खिताब दिलवाया था। जहां तक भारत की बात है तो इस बार इस खिताब के लिए सान्‍या में मिस इंडिया 2018 अनुक्रीति वास ने हिस्‍सा लिया था। लेकिन टॉप 30 तक पहुंचने के बाद उनका सफर थम गया। लेकिन इस बात को हर कोई जानता है। जो नहीं जानता वो ये कि आखिर किस जवाब की वजह से वेनेसा को यह खिताब मिला।आप इतना जरूर जानते होंगे कि मिस वर्ल्‍ड में शामिल सभी प्रतियोगियों को कई चरणों से गुजरना होता है। मिस वर्ल्‍ड के लिए जो अंतिम प्रतियोगी मंच पर पहुंचते हैं उन्‍हें वहां मौजूद चयनकर्ताओं के सामने कुछ सवालों का जवाब देना होता है। यह इस प्रतियोगिता का अंतिम चरण होने के साथ बेहद खास भी होता है। चयनकर्ताओं में अलग-अलग क्षेत्रों के दिग्‍गज लोग शामिल होते हैं। ऐसे में प्रतियोगियों का जवाब ही उन्‍हें ताज दिलाने की काबलियत रखता है। सान्‍या में शनिवार 8 दिसंबर 2018 की रात जो समारोह आयोजित किया गया वहां पर भी इस चरण में वेनेसा के अलावा कई प्रतियोगी शामिल हुईं। यह सभी के लिए बेहद उत्‍सुक करने वाली बात है कि आखिर वेनेसा से क्‍या पूछा गया और उन्‍होंने उसका क्‍या जवाब दिया कि वह मिस वर्ल्‍ड का ताज जीत गईं।दरअसल, फाइनल राउंड में वेनेसा का नंबर आने पर उनसे पूछा गया कि मिस वर्ल्ड बनने पर वे किस तरह दूसरों की मदद करेंगी? इसके जवाब में वेनेसा ने कहा कि वह अपने पद का उसी तरह इस्तेमाल करेंगी जैसा पिछले तीन साल से करती आ रही हैं। उनका कहना था कि हमें सभी का ध्यान रखना चाहिए, प्यार करना चाहिए। किसी की मदद करना बहुत मुश्किल काम नहीं है। आप जब भी कभी बाहर जाएं तो कोई ना कोई ज़रूर होगा जिसे मदद की दरकार रहती है, तो आप हमेशा उसकी मदद के लिए तैयार रहें। यही वो जवाब था जिसने वेनेसा को मिस वर्ल्‍ड का ताज दिलवाया। उनका यह जवाब वहां मौजूद सभी चयरकर्ताओं को पूरी तरह से सटीक लगा।वेनेसा का जन्म मेक्सिको के मुआनजुआटो शहर में हुआ है। वह करीब 174 सेंटिमीटर लंबी हैं। इसका जिक्र यहां पर इसलिए भी करनान जरूरी है क्‍योंकि इस प्रतियोगिता में शामिल महिलाओं का कद काफी मायने रखता है। उन्होंने इसी साल मई में मिस मेक्सिको का ख़िताब जीता था। उनको इंग्लिश के अलावा स्पैनिश भाषा भी आती है। इसके अलावा अपना खाली समय वह अपना पसंदीदा आउटडोर गेम खेलकर बिताती हैं। इसके अलावा वेनेसा को वॉलीबॉल खेलना भी पसंद है। इन सभी के अलावा वह काफी समय से लड़कियों के पुनर्वास के लिए भी काम कर रही हैं। वह इस तरह का काम करने वाली एक संस्‍था की बोर्ड ऑफ डायरेक्टर भी हैं।यहां पर ये भी ध्‍यान देने वाली बात है कि वेनेसा पोंसे डि लियोन ने इंटरनेश्नल बिजनेस में ग्रेजुएशन किया है। इसके अलावा उन्होंने ह्यूमन राइट्स में भी डिप्लोमा हासिल किया है। उनकी खास बात ये भी है कि वह आदिवासी इलाकों के बच्चों को अलग-अलग संस्कृतियों की शिक्षा देने वाले नेनेमी नामक स्कूल में पढ़ाती भी हैं। ही उन्होंने स्कूबा डाइविंग में भी सर्टिफिकेट प्राप्त किया है।

वाशिंगटन। आर्मी जनरल मार्क मिली को ज्वाइंट चीफ ऑफ आर्मी स्टाफ का अगला चेयरमैन मनोनीत किया गया है। यह घोषणा अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने शनिवार को की। हालांकि मिली के शीर्ष सैन्य पद पर नियुक्ति के लिए सीनेट को मंजूरी देना बाकी है। नियमों के मुताबिक डनफोर्ड का ज्वाइंट चीफ ऑफ आर्मी स्टाफ का कार्यकाल एक अक्टूबर 2019 तक है।ट्वीट कर फैसले की जानकारी देते हुए ट्रंप ने कहा…
नई दिल्‍ली। पाकिस्‍तान और अमेरिका के बीच रिश्‍तों की खाई लगातार चौड़ी होती जा रही है। ऐसे में पाक पीएम इमरान खान का बयान इस खाई को और बड़ा कर सकता है। पाकिस्‍तान को लेकर पहले से ही अमेरिका के राष्‍ट्रपति डोनाल्‍ड ट्रंप के मन में काफी नाराजगी भरी हुई है। ऐसे में इमरान के भाड़े के ट्टटू वाला बयान भविष्‍य में और गुल खिलाएगा। यह बात जगजाहिर है कि…
बीजिंग। चीन में दो महीने पहले सरकार के खिलाफ प्रदर्शन में शामिल रहे 10 पूर्व सैनिकों को गिरफ्तार किया गया है। यह प्रदर्शन पूर्व सैनिकों ने पेंशन और सेवानिवृत्ति से जुड़े अन्य लाभ नहीं मिलने से उपजे असंतोष के चलते किया था।सरकारी चैनल के मुताबिक, शैंडोंग प्रांत में चार से सात अक्टूबर तक प्रदर्शन हुआ था। इसमें चीन के अलग-अलग हिस्सों से करीब 300 लोग शामिल हुए थे। सरकार ने…
पेरिस। फ्रांस की राजधानी पेरिस में ईंधन कर में बढ़ोतरी के खिलाफ लोगों का 'येलो वेस्ट' आंदोलन हिंसक हो चुका है। ये विरोध प्रदर्शन अब बेल्जियम और नीदरलैंड तक पहुंच गया है। पुलिस और 'येलो वेस्ट' प्रदर्शनकारियों के बीच शनिवार को हुई भिड़ंत से तनाव और ज्यादा बढ़ गया, जिसके बाद पुलिस ने प्रदर्शनकारियों पर आंसू गैस का प्रयोग किया। गृह मंत्रालय के अधिकारियों के साथ बैठक के बाद, प्रधानमंत्री…
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नार्थ अमेरिका में भारत की राष्ट्रीय भाषा 'हिन्दी' का पहला समाचार पत्र 'हम हिन्दुस्तानी' का शुभारंभ 31 अगस्त 2011 को न्यूयॉर्क में भारत के कौंसल जनरल अम्बैसडर प्रभु दियाल ने अपने शुभ हाथों से किया था। 'हम हिन्दुस्तानी' साप्ताहिक समाचार पत्र के शुभारंभ का यह पहला ऐसा अवसर था जब नार्थ अमेरिका में पहला हिन्दी भाषा का समाचार पत्र भारतीय-अमेरिकन्स के सुपुर्द किया जा रहा था। यह समाचार पत्र मुख्य सम्पादकजसबीर 'जे' सिंह व भावना शर्मा के आनुगत्य में पारिवारिक जिम्मेदारियों को निर्वाह करते हुए निरंतर प्रकाशित किया जा रहा है Read more....

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