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दुनिया (855)

नई दिल्‍ली। हांगकांग में हिंसक प्रदर्शनों और शांति का दौर खत्म होता नहीं दिख रहा है। विवादित प्रत्यर्पण बिल विरोध से शुरू हुए इन प्रदर्शनों को दो महीने से ज्यादा का वक्त हो का है। अब लोग लोकतंत्र की मांग कर रहे हैं। दो दिन से प्रदर्शनकारियों हांगकांग एयरपोर्ट को अपने कब्जे में ले रखा है। उधर चीन की सरकार प्रदर्शनकारियों की निंदा की है और यह भी कहा है कि वह चुप नहीं ठेगा। हालांकि, यह सब ऐसे ही नहीं हो रहा है। इसमें कई महत्वपूर्ण प्रसंग हैं, जो दशकों पुराने हैं।
99 साल की लीज पर किया गया था चीन के हवाले:-दरअसल, हांगकांग अन्य चीनी शहरों से काफी अलग है। 150 साल के ब्रिटेन के औपनिवेशिक शासन के बाद हांगकांग को 99 साल की लीज पर चीन को सौंप दिया गया। हांगकांग द्वीप पर 1842 से ब्रिटेन का नियंत्रण रहा। जबकि द्वितीय विश्व युद्ध में जापान का इस पर अपना नियंत्रण था। यह एक व्यस्त व्यापारिक बंदरगाह बन गया और 1950 में विनिर्माण का केंद्र बनने के बाद इसकी अर्थव्यवस्था में बड़ा उछाल आया। चीन में अस्थिरता, गरीबी या उत्पीड़न से भाग रहे लोग इस क्षेत्र की ओर रुख करने लगे।
1984 में हुआ था सौदा:-पिछली सदी के आठवें दशक की शुरुआत में जैसे-जैसे 99 साल की लीज की समयसीमा पास आने लगी ब्रिटेन और चीन ने हांगकांग के भविष्य पर बातचीत शुरू कर दी। चीन की कम्युनिस्ट सरकार ने तर्क दिया कि हांगकांग को चीनी शासन को वापस कर दिया जाना चाहिए। दोनों पक्षों ने 1984 में एक सौदा किया कि एक देश, दो प्रणाली के सिद्धांत के तहत हांगकांग को 1997 में चीन को सौंप दिया जाएगा। इसका मतलब यह था कि चीन का हिस्सा होने के बाद भी हांगकांग 50 वर्षों तक विदेशी और रक्षा मामलों को छोड़कर स्वायत्तता का आनंद लेगा।
विवाद की जड़:-1997 में जब हांगकांग को चीन के हवाले किया गया था तब बीजिंग ने एक देश-दो व्यवस्था की अवधारणा के तहत कम से कम 2047 तक लोगों की स्वतंत्रता और अपनी कानूनी व्यवस्था को बनाए रखने की गारंटी दी थी। लेकिन 2014 में हांगकांग में 79 दिनों तक चले अंब्रेला मूवमेंट के बाद लोकतंत्र का समर्थन करने वालों पर चीनी सरकार कार्रवाई करने लगी। विरोध प्रदर्शनों में शामिल लोगों को जेल में डाल दिया गया। आजादी का समर्थन करने वाली एक पार्टी पर प्रतिबंध लगा दिया गया।
बीजिंग का कब्जा:-हांगकांग का अपना कानून और सीमाएं हैं। साथ ही खुद की विधानसभा भी है। लेकिन हांगकांग में नेता, मुख्य कार्यकारी अधिकारी को 1,200 सदस्यीय चुनाव समिति चुनती है। समिति में ज्यादातर बीजिंग समर्थक सदस्य होते हैं। क्षेत्र के विधायी निकाय के सभी 70 सदस्य, विधान परिषद, सीधे हांगकांग के मतदाताओं द्वारा नहीं चुने जाते हैं। बिना चुनाव चुनी गईं सीटों पर बीजिंग समर्थक सांसदों का कब्जा रहता है।
चीनी पहचान से नफरत:-हांगकांग में ज्यादातर लोग चीनी नस्ल के हैं। चीन का हिस्सा होने के बावजूद हांगकांग के अधिकांश लोग चीनी के रूप में पहचान नहीं रखना चाहते हैं। खासकर युवा वर्ग। केवल 11 फीसद खुद को चीनी कहते हैं। जबकि 71 फीसद लोग कहते हैं कि वे चीनी नागरिक होने पर गर्व महसूस नहीं करते हैं। यही कारण है कि हांगकांग में हर रोज आजादी के नारे बुलंद हो रहे हैं और प्रदर्शनकारियों ने चीन समर्थित प्रशासन की नाक में दम कर रखा है।

थिंपू। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी अपने दो दिवसीय भूटान दौरे से रविवार शाम दिल्ली आ गए। पीएम मोदी के दूसरे कार्यकाल का यह पहला भूटान दौरा था। दिल्ली एयर पोर्ट पर विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने पीएम मोदी का स्वागत किया है।रविवार को पीएम मोदी ने सबसे पहले रॉयल यूनिवर्सिटी में विद्यार्थियों को संबोधित किया था। इस दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने थिंपू के ताशिचेदोज़ोंग पैलेस में एक सांस्कृतिक कार्यक्रम में भाग भी लिया था।इसके पहले उन्होंने भूटान के नेता प्रतिपक्ष पेमा गिमत्सो से मुलाकात की थी। इससे पहले वह थिंपू में नेशनल मेमोरियल चोर्टेन गए थे।साथ ही आज उन्होंने रॉयल यूनिवर्सिटी में विद्यार्थियों के संबोधित भी किया था। अपने संबोधन की शुरुआत उन्होंने दोनों देशों के रिश्तों के साथ की। साथ ही उन्होंने कहा कि इन दोनों देशों को बौद्ध धर्म जोड़े हुए है। इस दौरान उन्होंने भूटान के छात्रों को भारत में आने के लिए अमंत्रित किया। उन्होंने कहा कि भारत मेंशिक्षा के क्षेत्र में काफी काम किया जा रहा है। इसलिए भूटानी छात्र वहां आ सकते हैं। उन्होंने आगे कहा कि गरीबी उन्मूलन के लिए भारत में तेजी से काम चल रहा है
भारत और भूटाना की साझा संस्कृति:-पीएम मोदी ने दोनों देशों के रिश्तों के जिक्र करते हुए कहा कि दोनों देशों की संस्कृति जुड़ी हुई है। साथ ही उन्होंने छात्रों से परीक्षा के वक्त तनाव मुक्त रहने के लिए कहा और अपनी किताब एग्जाम वॉरियर्स का जिक्र भी किया।उन्होंने कहा कि मैंने ये किताब गौतम बुद्ध से प्रेरित होकर लिखी है।
भारत आएंगे भूटान के वैज्ञानिक:-पीएम मोदी ने कहा कि यह बहुत खुशी की बात है कि भूटान के छोटे उपग्रह को डिजाइन करने और लॉन्च करने के लिए युवा भूटानी वैज्ञानिक भारत की यात्रा करेंगे। उन्होंने छात्रों से कहा कि मुझे उम्मीद है कि किसी दिन जल्द ही, आप में से कई वैज्ञानिक, इंजीनियर और इनोवेटर होंगे।
भारत का सबसे बड़ी स्वास्थ्य सेवा:-पीएम ने कहा कि भारत दुनिया की सबसे बड़ी स्वास्थ्य सेवा योजना आयुष्मान भारत का घर है। ये योजना 500 मिलियन भारतीयों को स्वास्थ्य आश्वासन देती है। भारत में दुनिया की सबसे सस्ती डेटा कनेक्टिविटी है, जो प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रूप से लाखों लोगों को सशक्त बना रही है।
भारत में हो रहा एतिहासिक बदलाव:-पीएम मोदी ने कहा कि आज, भारत तमाम सेक्टर में ऐतिहासिक बदलावों का गवाह बन रहा है। पिछले पांच साल में बुनियादी ढांचे के निर्माण कीर रफ्तार दोगुनी हो गई है।
पहले दिन हुआ इतने समझौते;-शनिवार को दौरे के पहले दिन पीएम मोदी ने कहा कि भूटान जैसा दोस्त और पड़ोसी कौन नहीं चाहता? ऐसे दोस्त के विकास का साथी बनना भारत के लिए भी सम्मान की बात है। इस दौरान पीएम मोदी ने रूपया कार्ड लांच करने के साथ ही 9 समझौता ज्ञापनों (एमओयू) पर हस्ताक्षर किए। इनमें से एक समझौते के तहत इसरो थिम्पू में अर्थ स्टेशन बनाएगा। इसके अलावा दोनों देशों के बीच एक बिजली खरीद समझौता भी हुआ। अन्य समझौते के तहत विमान हादसे और दुर्घटना की जांच, न्यायिक शिक्षा, अकादमिक और सांस्कृतिक आदान-प्रदान, विधिक शिक्षा और शोध के क्षेत्र में एमओयू किए गए।
भूटान में लांच हुआ रुपे कार्ड:-प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भूटान में रुपे कार्ड लांच किया है। उन्होंने यहां के सर्वाधिक पुराने मठों में शुमार सिमतोखा जोंग (मठ) में एक खरीदारी करते हुए इसे लांच किया। इस कार्ड को दो चरणों में लांच किया जाना है। पहले चरण में भारतीय बैंक भारतीयों के लिए ऐसे रुपे कार्ड जारी करेंगे, जिनका भूटान में प्रयोग हो सकेगा। दूसरे चरण में भूटान के बैंकों को ऐसे रुपे कार्ड जारी करने का अधिकार दिया जाएगा, जिनका प्रयोग भारत आने वाले भूटानी नागरिक कर सकेंगे। मोदी के दौरे पर भारत और भूटान के बीच 10 समझौता ज्ञापन (एमओयू) पर हस्ताक्षर हुआ। एमओयू शोध, उड्डयन, आइटी, ऊर्जा और शिक्षा क्षेत्र में किए गए।रॉयल भूटान यूनिवर्सिटी और भारत के विभिन्न आइआइटी के बीच हुआ समझौता भी इसमें शामिल है। मोदी और शेरिंग ने भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) के सहयोग से तैयार ग्राउंड अर्थ स्टेशन और सैटकॉम नेटवर्क का उद्घाटन भी किया। भारत ने भूटान के लोगों की जरूरत को देखते हुए घरेलू गैस (एलपीजी) की आपूर्ति भी 700 टन मासिक से 1,000 टन मासिक करने का फैसला किया है। भूटान की विदेशी मुद्रा की जरूरत को देखते हुए भारत ने भूटान के साथ मौजूदा स्टैंड बाय स्वैप अरेंजमेंट में 10 करोड़ डॉलर की अतिरिक्त व्यवस्था की है।
जलविद्युत परियोजना का किया उद्घाटन-प्रधानमंत्री मोदी ने यहां मांगदेछू जलविद्युत प्लांट का भी उद्घाटन किया। 4,500 करोड़ रुपये लागत वाली 720 मेगावाट की इस परियोजना को दोनों देशों ने मिलकर पूरा किया है। भारत ने इसके लिए 70 प्रतिशत राशि कर्ज के रूप में और 30 फीसद राशि अनुदान के रूप में दी है। मोदी ने कहा, ‘जलविद्युत दोनों देशों के बीच सहयोग का अहम क्षेत्र है। दोनों देशों के प्रयास से भूटान की जलविद्युत क्षमता 2,000 मेगावाट से ज्यादा हो गई है। मुङो भरोसा है कि हम अन्य परियोजनाओं को भी तेजी से पूरा करेंगे।’

ढाका। बांग्लादेश में डेंगू का प्रकोप जारी है। इससे लगभग 40 लोगों की मौत हो गई है। अधिकारियों के अनुसार जनवरी से अब-तक पूरे देश में 50 हजार से अधिक मामले सामने आ चुके हैं। देश में यह संख्या किसी भी वर्ष की तुलना में पांच गुना अधिक है।बता दें कि विश्व स्वास्थ्य संगठन(WHO) के अनुसार डेंगू एक मच्छर जनित वायरल संक्रमण है, जो फ्लू जैसी बीमारी का कारण बनता है। इसके लक्षणों में सिरदर्द, मांसपेशियों और जोड़ों में दर्द और शरीर पर चकत्ते शामिल हैं। यह जनलेवा बीमारी मुख्य रूप से एडीज प्रजाति के मच्छर के काटने से होता।
आधिकारिक आंकड़ें:-आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार, इस साल बीमारी के कुल 51,476 मामले सामने आए हैं। इस महीने 17 अगस्त तक 33,015, जबकि जुलाई में 16,253 मामले दर्ज किए गए हैं। इसमें शनिवार को सुबह 8 बजे तक इसके 1,460 नए मरीज शामिल हैं।
2018 का रिकॉर्ड तोड़ा:-इससे पहले बांग्लादेश में एक ही वर्ष में डेंगू के सबसे अधिक मामले 2018 में 10,148 दर्ज किए गए थे। बांग्लादेश के स्वास्थ्य विभाग के एक अधिकारी अब्दुर रशीद ने कहा कि प्रभावित रोगियों में से 7,864 मरीज देश भर के विभिन्न अस्पतालों में अभी भी भर्ती हैं, जबकि लगभग 85 प्रतिशत रोगियों को अस्पताल से छुट्टी मिल गई है। स्वास्थ्य विभाग ने कहा कि डेंगू से जिन 40 लोगों की मौत हुई है उनमें से 39 राजधानी ढाका से हैं।
सितंबर में चरम पर होता है डेंगू:-डेंगू पिछले कुछ वर्षों में सितंबर में चरम पर होता था। ऐसे में आने वाले दिन में इसमें और बढ़ोतरी देखने को मिल सकता है, लेकिन अधिकारियों को उम्मीद है कि मजबूत नियंत्रण उपायों के बाद से मामलों में धीरे-धीरे कम हो जाएगी। स्थिति अब स्थिर है। यह बंद नहीं हुआ, लेकिन यह भयावह भी नहीं हो रहा है। इंस्टीट्यूट ऑफ एपिडेमियोलॉजी, रोग नियंत्रण और अनुसंधान की निदेशक मीरजादी सबरीना फ्लोरा ने कहा कि यदि नियंत्रण उपायों को जारी रखा जाता है तो सितंबर तक स्थिति समान्य हो जाएगी।
ग्लोबल वार्मिंग है वजह:-फ्लोरा ने बताया कि इस साल डेंगू के मामलों में ग्लोबल वार्मिंग की वजह से बढ़ोतरी देखने को मिली है। उन्होंने कहा कि बारिश के स्वरूप (Rain Pattern) में बदलाव को देखने को मिला है। यह एक वैश्विक समस्या का हिस्सा है। कुल मिलाकर यह जलवायु परिवर्तन का एक प्रभाव है।

न्यूयॉर्क। शोधकर्ताओं का कहना है कि बृहस्पति और एक स्थिर ग्रह में 4.5 अरब साल पहले हुई टक्कर की वजह से बृहस्पति की कोर का घनत्व कम हो गया और इसका विस्तार अनुमान से ज्यादा फैल गया। इस टक्कर के कारण ही बृहस्पति ग्रह घूम रहा है। नासा के जूनो स्पेसक्राफ्ट से प्राप्त डाटा का विश्लेषण करने वाले शोधकर्ताओं ने बताया कि भले ही यह घटना 4.5 अरब वर्ष पहले हुई हो, लेकिन अब भी बृहस्पति की कोर का घनत्व बढ़ने और उसमें भारी सामग्री जमने के लिए अरबों वर्ष लगेंगे।राइस यूनिवर्सिटी और चीन की सन-येत-सेन यूनिवर्सिटी के खगोलविदों ने बताया कि जूनो द्वारा एकत्र किए गए हैरान करने वाले गुरुत्वीय डाटा से इस टक्कर के के बारे में जाना जा सकता है। राइस यूनिवर्सिटी के खगोलविद और इस अध्ययन के सह लेखक एंडिया इसला ने कहा, ‘ यह हैरान करने वाला है, इससे पता चलता है कि कुछ बड़ा हुआ होगा जिससे बृहस्पति के कोर में हलचल मच गई होगी और इसका इतना विशाल प्रभाव सामने आया।’ नेचर जर्नल में प्रकाशित इस अध्ययन में बताया गया कि सिद्धांतों के हवाले से यह कहा जाता है कि शुरुआत में बृहस्पति का कोर ठोस था।यह एक ठोस चट्टानी और बर्फीला ग्रह था। फिर इसने सूरज के जन्म के समय निकली गैस और धूल को अपने वातावरण में समेट लिया। इस अध्ययन के प्रमुख शांग-फि लीयू ने सबसे पहले यह सुझाव दिया था कि जूनो के डाटा को बृहस्पति पर पड़ने वाले एक विशाल प्रभाव से समझा जा सकता है, जिसकी वजह से ठोस ग्रह धूल और गैस में बदल गया। शोधकर्ताओं ने अपने हजारों कंप्यूटर सिमुलेशन के माध्यम से यह समझा कि कैसे एक टक्कर ने बृहस्पति के कोर पर प्रभाव डाला। उन्होंने पाया कि जिस स्थिर ग्रह से बृहस्पति की टक्कर हुई वह गोली की तरह से बृहस्पति से टकराया होगा। इस टक्कर ने बृहस्पति को बिखेर दिया और इसकी कोर का घनत्व बेहद ही कम हो गया।
क्या है जूनो स्पेसक्राफ्ट;-जूनो अमेरिकी अंतरिक्ष एजेंसी नासा का मिशन है। यह स्पेसक्राफ्ट पांच अगस्त 2011 को लांच किया गया था। जूनो मिशन को बृहस्पति के विकास और उत्पत्ति के बारे में बेहतर ढंग से समझाने के लिए डिजाइन किया गया था। इस स्पेसक्राफ्ट का उद्देश्य ग्रह की बाहरी और आंतरिक संरचना की जांच, गुरुत्वाकर्षण और चुंबकीय क्षेत्रों के बारे में पता लगाना था।

नई दिल्‍ली। फॉक्‍स चैनल पर कुछ दिन पहले एक डॉक्‍यूमेंट्री प्रसारित की गई। यह डॉक्‍यूमेंट्री हॉलीवुड एक्‍ट्रेस मर्लिन मुनरो पर थी। इसमें कुछ ऐसी बातें सामने आईं जो अब से पहले अंधेरे में थीं। इस डॉक्‍यूमेंट्री में लीघ वीनर (Photographer Leigh Wiener), जो एक चर्चित फोटोग्राफ्रर थे और लाइफ मैगजीन के लिए फ्रीलांस करते थे, के बेटे को दिखाया गया था। वीनर का जिक्र यहां पर इसलिए भी जरूरी है क्‍योंकि वह एक मात्र फोटोग्राफ्रर थे जिन्‍होंने मुनरो के डेडबॉडी की फोटो कैमरे में कैद की थींं। इसके लिए उन्‍होंने गार्ड को रिश्‍वत के तौर पर स्‍कॉच दी थी। आपको बता दें मुनरो का निधन 5 अगस्‍त 1962 को तड़के हुआ था लेकिन, उनका निधन कैसे हुआ यह आज तक रहस्‍‍य है। डॉक्‍यूमेंट्री के मुताबिक वीनर उन चंद लोगों में शुमार थे जिन्‍हें मुनरो की मौत की खबर थी।
फोटो लेने के लिए रिश्‍वत के तौर पर दी स्‍कॉच;-वीनर ने मुनरो की डेडबॉडी की फोटो लेने में करीब पांच रील इस्‍तेमाल की थीं। यह फोटो ऐसे वक्‍त सामने आई हैं जब वीनर का भी निधन हो चुका है। उनके बेटे के मुताबिक इन फोटो को लेने के लिए मॉरचरी के गार्ड को उन्‍होंने शराब की बोतल बतौर रिश्‍वत दी थी। इस दौरान उन्‍होंने दो फोटो खींची। इनमें से एक फोटो में उनके पांव की अंगुली मं टैग लगा था जिसको 81128 का नंबर दिया गया था। इसके अलावा एक दूसरी फोटो में मुनरो का चेहरा दिखाई दिया था। इसके अलावा कुछ दूसरी फोटो भी उन्‍होंने खींची थीं। इसको दुर्भाग्‍य ही कहा जाएगा कि बेहद कम उम्र में हॉलीवुड के शीर्ष पर अपनी पहचान बनाने वाली मुनरो की जब मौत हुई तो उनके जनाजे में शामिल होने वाले बेहद कम लोग थे। जीते जी जिस खूबसूरत चेहरे के आगे-पीछे गाडि़यों की लाइनें लगा करती थीं निधन के बाद बेहद खामोशी से उसको दफना दिया गया था।
अमेरिकी राष्‍ट्रपति समेत मुनरो के कई से थे संबंध:-मुनरो हॉलीवुड की वो खूबसूरत एक्‍ट्रेस थीं जिनके कई लोगों से संबंध थे। कहा तो यहां तक जाता है कि राष्‍ट्रपति ज जॉन एफ केनेडी भी इसी फहरिस्‍त में आते थे। इतना ही इस बात की भी चर्चा हमेशा रही कि जिस रात मुनरो का निधन हुआ था उस रात केनेडी वहां उस कमरे में मौजूद थे। आपको बता दें कि मुनरो के निधन की सबसे पहली खबर उनके हाउसकीपर को लगी थी। वह अपने कमरे में मृत पाई गई थीं। उनके बैड के साथ रखे मेज पर दवाईयों की शीशी पूरी तरह से खाली थी। उनके एक हाथ में फोन का रिसीवर मौजूद था। करीब साढ़े पांच बजे उनकी बॉडी को कार में डालकर वेस्‍टवुड विलेज मॉरचरी ले जाया गया। यहां से साढ़े आठ बजे इसको ऑटोप्‍सी के लिए लॉस एंजेलिस कॉर्नर आफिस ले जाया गया। इसमें मौत की वजह को अधिक दवाओं का प्रयोग बताया गया था। इसमें मौत का समय 5 बजकर 25 मिनट बताया गया था। यहीं पर उनकी बॉडी को मॉरचरी की 33 नंबर स्‍टील की ड्राउर में रखा गया। यहीं पर मुनरो की फोटो खींचने के लिए वीनर को रिश्‍वत देनी पड़ी थी।
कुछ सवाल बरकरार;-उनके निधन पर संदेह के बादल इसलिए भी गर्माए क्‍योंकि उनकी मौत के कुछ घंटे बाद ही उनकी चीजों को भी वहां से हटा दिया गया। वेस्‍टवुड मेमोरियल पार्क सिमेट्री में उनको दफनाया गया। मुनरो के कमरे से करीब एक दर्जन दवाई की बोतलें जांच के लिए ली गई थीं, लेकिन इनमें से कुछ का ही जिक्र रिपोर्ट में किया गया। उनकी फोटो लेने की इजाजत किसी को नहीं दी गई थी। उनकी अचानक मौत की खबर मिलने के साथ ही हर कोई हैरत में था। खासतौर पर मीडिया इसको लेकर अधिक उत्‍सुक था। लेकिन किसी को भी मुनरो के शव के पास आने की इजाजत नहीं दी गई थी। एबॉट एंड हास्‍ट कंपनी ने मुनरो की अंतिम यात्रा की जिम्‍मेदारी निभाई थी। उनके निधन के दो दिन बाद लाइफ मैगजीन के कवर पेज पर उनकी आखिरी जीती जागती इमेज प्रकाशित हुई थी।
मुनरो का आखिरी मैकअप सबसे मुश्किल काम:-मुनरो के निधन को कई लोगों ने झकझोर दिया था। इनमें से एक उनके मैकअप आर्टिस्‍ट एलन सैंडर भी थे। सैंडर को मुनरो ने एक बार कहा था कि यदि उनकी मौत सैंडर से पहले हुई तो वह उनका मैकअप कर उन्‍हें अंतिम विदाई देंगे। ऐसा हुआ भी लेकिन सैंडर के लिए यह मैकअप करना जीवन का सबसे मुश्किल काम था। आपको बता दें कि मुनरो को दफनाने की कोई फोटो नहीं खींची गई थी। 8 अगस्‍त 1962 को वेस्‍टवुड मेमोरियल पार्क में मुनरो को दफना दिया गया। इसका पूरा जिम्‍मा मुनरो के एक्‍स हसबैंड डीमेगियो ने उठाया था।
अपनी नशीली आंखों के मशहूर थीं मुनरो:-मुनरो अपने चेहरे की मादकता, नशीली आंखे और होठों की खूबसूरती के लिए प्रसिद्ध थीं। मुनरो का जन्म 1 जून 1926 को लॉस एंजिल्स (अमेरिका) में हुआ था। उनका बचपन बेहद अभाव में बीता था। इतना ही नहीं यहां पर उनका शोषण भी हुआ । जब वह मॉडलिंग की दुनिया में आयीं, तो उन्होंने वहां के अनुभव से काफी कुछ सीख ली 16 वर्ष की अवस्था में मुनरो का विवाह जिम डोहार्टी से हुआ, किन्तु यह अधिक दिनों तक नहीं चल पाया । इसके बाद हुए उन्‍होंने दोबारा भी विवाह किया लेकिन उनका वैवाहिक जीवन कभी सफल नहीं रहा। फिल्मों में आने से पूर्व वह कैलेण्डर गर्ल के रूप में प्रसिद्धि पा चुकी थीं ।

नई दिल्ली। 1947 में भारत और पाकिस्तान को अंग्रेजों से आजादी मिली। भारतीय स्वतंत्रता एक्ट 1947 के अनुसार तमाम रियासतों को यह चयन करने की सुविधा दी गई कि वे भारत के साथ रहना चाहते हैं या फिर पाकिस्तान के साथ जुड़ना चाहते हैं। उस समय जम्मू-कश्मीर देश की सबसे बड़ी रियायत हुआ करती थी। इस रियासत पर महाराजा हरि सिंह शासन करते थे। वहां की बहुसंख्यक मुस्लिम आबादी के हिसाब से पाकिस्तान को यह पूरा भरोसा था कि यह रियासत उसके साथ जाएगी, लेकिन हरि सिंह अपने राज्य को न तो पाकिस्तान और न ही भारत में मिलाना चाहते थे। लिहाजा उन्होंने स्वतंत्र रहने का फैसला किया।
भारत से मांगी मदद;-हरि सिंह से तिरस्कृत होने के बाद पाकिस्तान ने कश्मीर को हथियाने का एक दूसरा हथकंडा अपनाया। उसने पाकिस्तानी सेना को कबाइली आक्रमणकारियों के वेश में जम्मू कश्मीर पर कब्जा करने को भेजा। इन आक्रमणकारियों को स्थानीय मुस्लिमों का भी सहयोग मिला। परेशान महाराजा हरि सिंह ने भारत से मदद मांगी।
भारत से समझौता;-26 अक्टूबर 1947 को हरि सिंह ने भारत के साथ समझौता किया। उन्होंने दस्तावेजों पर हस्ताक्षर करके जम्मू-कश्मीर को भारत में शामिल करने की आधिकारिक सहमति दी। शर्त यह रखी कि भारत अपनी सेना भेजकर आक्रमणकारियों को जम्मू-कश्मीर से खदेड़ दे।
संयुक्त राष्ट्र का दखल:-भारतीय सेना ने आक्रमणकारियों को खदेड़ना शुरू किया। भारत ने 1 जनवरी 1948 को संयुक्त राष्ट्र की सुरक्षा परिषद के सामने कश्मीर मुद्दा रखा। संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद ने 21 अप्रैल 1948 को प्रस्ताव 47 पारित किया। इसके तहत दोनों देशों को संघर्ष विराम के लिए कहा गया। साथ ही पाकिस्तान से कहा कि वह जम्मू-कश्मीर से शीघ्र पीछे हटे।
जनमत संग्रह;-जब भारतीय सेना कश्मीर में दाखिल हुई थी तो कश्मीरी नेता शेख अब्दुल्ला ने मुद्दे पर जनमत संग्रह कराने का समर्थन किया था। संयुक्त राष्ट्र की सुरक्षा परिषद द्वारा युद्धविराम संधि की अलग व्याख्या होने से भारत-पाक संतुष्ट नहीं थे। बहरहाल नवंबर 1948 में दोनों देश जनमत संग्रह को राजी हुए। बाद में भारत ने इससे किनारा कर लिया और कहा कि पाकिस्तान पहले अपनी सेनाएं कश्मीर से हटाए।
चीन से युद्ध:-चीन भी कश्मीर के हिस्से पर अपना हक जताता रहा है। 1962 में उसने भारत से युद्ध करके आक्साइ चिन इलाके पर कब्जा कर लिया। दोनों देशों को अलग करने के लिए वास्तविक नियंत्रण रेखा खींची गई

पोर्ट सिटी। यूक्रेन के पोर्ट सिटी शहर में शनिवार की तड़के एक होटल में आग लगने से आठ लोगों की मौत हो गई। इस हादसे में दस लोग घायल हैं। घायलों को उपचार के लिए अस्‍पताल में भर्ती कराया है।शनिवार को दक्षिण शहर के टोक्‍यो स्‍टार होटल में सुबह अचानक आग लगने से हड़कंप मच गया। अग्निशमन के एक अफसर के मुताबिक आग लगने के कारणों का पता नहीं चल…
नई दिल्ली। जम्मू कश्मीर के मुद्दे को लेकर पाकिस्तान को इस्लामिक सहयोग संगठन का साथ मिला है। इसी की वजह से इस्लामिक सहयोग संगठन (OIC) ने भारत से घाटी में बीते 13 दिनों से जारी कर्फ्यू को तुरंत हटाकर वहां के हालात को सामान्य करने की अपील की है। विदेश मंत्री शाह महमूद कुरैशी ने एक वीडियो संदेश में ओआईसी के इस फैसले के बारे में जानकारी भी दी है।…
इस्लामाबाद। संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में मुंह की खाने के बाद भी पाकिस्तान अपनी ओछी हरकतों से बाज नहीं आ रहा है। पाकिस्तान के विदेश मंत्री शाह महमूद कुरैशी ने शनिवार को एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में कहा कि उनकी सेना और पूरा देश भारत का मुकाबला करने के लिए तैयार हैं। उन्होंने कहा कि अगर भारत की तरफ से कोई भी मिसएडवेंचर होता है तो उन्हें माकूल जवाब दिया जाएगा।…
बीजिंग।चीन ने शनिवार को व्‍यावसायिक इस्‍तेमाल के लिए अपना रॉकेट सफलता पूर्वक लॉन्‍च कर दिया। चीन के सरकारी टेलीविजन चैनल सीसीटीवी की रिपोर्ट के मुताबिक, चीन की सरकारी स्‍पेस एजेंसी के इस कदम से देश में निजी कंपनियों द्वारा कमर्शियल उपग्रहों के प्रक्षेपण को बढ़ावा मिलेगा। रिपोर्ट में कहा गया है कि 23 टन वजनी स्‍मार्ट ड्रैगन-1 रॉकेट ने तीन उपग्रहों को सफलतापूर्वक उनकी निर्धारित कक्षा में पहुंचाया। यह लॉन्चिंग…
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नार्थ अमेरिका में भारत की राष्ट्रीय भाषा 'हिन्दी' का पहला समाचार पत्र 'हम हिन्दुस्तानी' का शुभारंभ 31 अगस्त 2011 को न्यूयॉर्क में भारत के कौंसल जनरल अम्बैसडर प्रभु दियाल ने अपने शुभ हाथों से किया था। 'हम हिन्दुस्तानी' साप्ताहिक समाचार पत्र के शुभारंभ का यह पहला ऐसा अवसर था जब नार्थ अमेरिका में पहला हिन्दी भाषा का समाचार पत्र भारतीय-अमेरिकन्स के सुपुर्द किया जा रहा था। यह समाचार पत्र मुख्य सम्पादकजसबीर 'जे' सिंह व भावना शर्मा के आनुगत्य में पारिवारिक जिम्मेदारियों को निर्वाह करते हुए निरंतर प्रकाशित किया जा रहा है Read more....

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