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सऊदी अरब।‌ शनिवार से सऊदी अरब‌ एक और डाउनसाइज़्ड हज की मेजबानी करेगा, जिसमें शामिल होने के लिए कोरोनावायरस के खिलाफ टीकाकरण कराए हुए निवासियों को पूरी तरह से अनुमति होगी। वहीं विदेशी मुस्लिम तीर्थयात्रियों को दूसरे वर्ष के लिए रोक दिया जाएगा। बता दें कि ऐसा करके राज्य पिछले साल की सफलता को दोहराना चाहता है जिसके तहत पिछले वर्ष पांच दिवसीय मुस्लिम अनुष्ठान के दौरान वायरस का कोई प्रकोप नहीं देखा गया था।

हज में सम्मिलित लोग:-इस्लाम का एक प्रमुख स्तंभ जो अपने जीवनकाल में कम से कम एक बार सक्षम मुसलमानों के लिए आवश्यक है। सऊदी अरब के इस वार्षिक हज में सऊदी अरब के 60,000 निवासियों को भाग लेने की अनुमति दी गई है। जो बीते वर्ष 2020 में कोरोनावायरस के प्रकोप के चलते कहीं अधिक है। लेकिन यदि सामान्य समय की बात की जाए तो यह संख्या बहुत कम है। साल 2019 की बात करें तो दुनिया भर के लगभग 2.5 मिलियन मुसलमानों ने वार्षिक हज में भाग लिया था। बरहाल 2021 का संस्कार शुरू होने से 1 दिन पहले ही शनिवार को लोगों का पहुंचना आरंभ हो जाएगा।

क्या कहना है हज मंत्रालय का;-जुलाई महीने की शुरुआत में ही हर मंत्रालय ने कहा कि वह वैश्विक कोरोना महामारी के चलते स्वास्थ्य संबंधी सावधानियों के उच्चतम स्तर" पर काम कर रहा था। महामारी और नए रूपों के उद्भव के आलोक में "ऑनलाइन जांच प्रणाली के माध्यम से 558,000 से अधिक आवेदकों में से चुना गया, यह कार्यक्रम उन लोगों तक ही सीमित है, जिन्हें पूरी तरह से टीका लगाया गया है और 18-65 वर्ष की आयु में कोई पुरानी बीमारी नहीं है। साथ ही सख्त सामाजिक दूरी के उपायों के अलावा, मंत्रालय ने कहा कि वह धार्मिक स्थलों के आसपास तीर्थयात्रियों को फेरी लगाने के लिए शिविरों, होटलों और बसों तक संपर्क-मुक्त पहुंच की अनुमति देने के लिए एक "स्मार्ट हज कार्ड" पेश करेगा। यह कार्ड प्रणाली किसी भी लापता तीर्थयात्री का पता लगाने में भी मदद करेगी।अधिकारियों ने काबा के चारों ओर बनी मक्का की ग्रैंड मस्जिद में ज़मज़म झरने से पवित्र पानी की बोतलें निकालने के लिए ब्लैक-एंड-व्हाइट रोबोट तैनात किए हैं, जिसके लिए दुनिया भर के मुसलमान प्रार्थना करते हैं।काबा में श्रद्धेय ब्लैक स्टोन - जिसे यह प्रथागत है लेकिन तीर्थयात्रा के दौरान स्पर्श करना अनिवार्य नहीं है उसे पहुंच से बाहर रखने की उम्मीद है।

बीजिं। भारतीय विदेश मंत्री एस जयशंकर ने दुशांबे तजाकिस्तान में शंघाई सहयोग संगठन सम्मेलन के दौरान चीन विदेश मंत्री वांग यी से कहा वास्तविक नियंत्रण रेखा पर यथास्थिति में कोई एकतरफा परिवर्तन भारत को स्वीकार्य नहीं है और पूर्वी लद्दाख में शांति की पूर्ण बहाली के बाद ही समग्र संबंध विकसित हो सकते हैं। पूर्वी लद्दाख में मौजूदा स्थिति से द्विपक्षीय संबंधों पर नकारात्मक तरीके से प्रभाव पड़ रहा है।सितंबर 2020 में मास्को में अपनी पिछली बैठक को याद करते हुए, जयशंकर ने उस समय हुए समझौते पर पालन करने और पूर्वी लद्दाख में एलएसी के साथ शेष मुद्दों को जल्द से जल्द हल करने की आवश्यकता पर जोर दिया। जयशंकर ने कहा सीमा पर यथास्थिति चीन द्वारा बदलने की कोशिश की गई थी, जिसके कारण दोनों देशों के संबंध खराब हुए हैं। ​चीन को दोनों देशों के मध्य हुए समझौते का पालन करना चाहिए था।वांग की जयशंकर के साथ बातचीत पर गुरुवार को अपनी वेबसाइट पर पोस्ट किए गए एक बयान में, चीनी विदेश मंत्रालय ने कहा, भारतीय मंत्री ने कहा कि भारत-चीन संबंध निचले स्तर पर बने हुए हैं, जबकि गलवान घाटी और पैंगोंग झील सीमा पर स्थिति आमतौर पर सैनिकों की वापसी के बाद आसान हो रही है। भारत और चीन के बीच संबंध अभी भी निचले स्तर पर हैं जो किसी के हित में नहीं है। चीन उन मुद्दों पर समाधान निकालने के लिए तैयार है, जिनके लिए भारतीय पक्ष के साथ बातचीत और परामर्श के माध्यम से तत्काल उपचार की आवश्यकता है।वांग ने आगे कहा दोनों पक्षों के बीच समझौते और आम सहमति का कड़ाई से पालन करना, संवेदनशील विवादित क्षेत्रों में कोई भी एकतरफा कार्रवाई करने से परहेज करना, गलतफहमी और गलत निर्णय के कारण स्थिति की दोहराने से बचना होगा। आज, चीन और भारत अपने-अपने क्षेत्रों और बड़े पैमाने पर दुनिया में शांति और समृद्धि के लिए अधिक महत्वपूर्ण जिम्मेदारियों को निभाते हैं। उन्होंने कहा कि हमें अपने साझा रणनीतिक हितों पर अधिक ध्यान देना चाहिए और दोनों देशों के लोगों को अधिक लाभ पहुंचाना चाहिए।सन्य अधिकारियों के अनुसार, प्रत्येक पक्ष के पास वर्तमान में संवेदनशील क्षेत्र में वास्तविक नियंत्रण रेखा पर लगभग 50,000 से 60,000 सैनिक हैं 

नई दिल्‍ली। मध्‍य और दक्षिण एशियाई देशों में और अधिक तालमेल बिठाने और आपसी संबंधों को मजबूत करने के मकसद से उजबेकिस्‍तान के ताशकंद में दो दिवसीय सेंट्रल एंड साउथ एशिया कांफ्रेंस की शुरुआत हुई है। इस बाबत उजबेकिस्‍तान की एजेंसी फॉर इंफॉर्मेशन एंड मास कम्‍यूनिकेशन के फस्‍र्ट डिप्‍टी डायरेक्‍टर दिलशोद सेद्जानोव ने कहा है कि सेंट्रल एंड साउथ एशिया कांफ्रेंस का असल मकसद यहां के एक्‍सपर्ट और अधिकारियों के बीच आपसी रिश्‍तों को और मजबूत करना है।15-16 जुलाई के बीच हो रही इस कांफ्रेस में भारत की तरफ से विदेश मंत्री एस जयशंकर शामिल हैं। ताशकंद में हो रही इस कांफ्रेंस का शीर्षक इंटरनेशनल कांफ्रेंस ऑन सेंट्रल एंड साउथ एशिया रिजनल कनेक्टिविटी, चैलेंज एंड ऑपरच्‍युनिटी रखा गया है। इस कांफ्रेंस से पहले उजबेकिस्‍तान में मौजूद भारतीय राजदूत मनीष प्रभात ने इसको लेकर भारतीय नजरिए की जानकारी दी थी। उनका कहना था कि भारत वर्ष 2000 से ही यहांक सभी देशों को आपस में जोड़ने की बात कहता रहा है। ईरान और रूस पहले से ही उत्‍तरी ट्रांसपोर्ट कॉरिडोर पर काम कर रहे हैं। आज इस मुद्दे पर इस प्‍लेटफार्म के माध्‍यम से कई सारे देश एक साथ आए हैं। भारत की पूरी कोशिश है कि वो इसमें शामिल सभी देशों से आपसी संबंधों केा और अधिक मजबूत करे।मनीष ने चाहबहार पोर्ट के बाबत पूछे गए एक सवाल के जवाब में कहा कि मध्‍य एशियाई क्षेत्र में ईरान स्थित ये चाहबहार पोर्ट आपसी व्‍यापार में बड़ी भूमिका निभा सकता है। भारत इसको काफी कुछ डेवलेप कर चुका है। भारत चाहता है कि देशों की ये आपसी कनेक्टिविटी इस पोर्ट के माध्‍यम से हो। इससे मध्‍य एशिया में व्‍यापार बढ़ेगा। मौजूदा समय में व्‍यापार का जरिया अफगानिस्‍तान है। चाहबहार पोर्ट पूरे मध्‍य एशिया के लिए बेहद खास हो सकता है।आपको बता दें कि मध्‍य एशिया पूरी तरह से जमीन से घिरा हुआ है। इसलिए भारत यहां पर व्‍यापार के लिए नए रास्‍ते तलाश रहा है। जमीन के साथ साथ वो एयर कॉरिडोर को भी एक विकल्‍प के रूप में देख रहा है। ये सभी बातें इस कांफ्रेंस का हिस्‍सा हैं। भारत की राय और विचारों को यहां पर विदेश मंत्री एस जयशंकर रखेंगे। ये कांफ्रेंस उजबेकिस्‍तान के राष्‍ट्रपति शावकत मिर्जीयोयेव के प्रयास से हो रही है।

वाशिंगटन। भारतीय प्रतिभाओं के दम पर पूरे विश्व में डंका बजा रहे अमेरिका की सरकार को विशेषज्ञों ने आगाह किया है। विशेषज्ञों ने कहा है कि अमेरिका की गलत वीजा नीति के कारण भारतीय प्रतिभा अब अमेरिका के बजाय कनाडा जा रही है। यह ऐसे समय में हो रहा है, जब अमेरिका चीन की बढ़ती लगातार ताकत से लड़ने के लिए प्रतिस्पद्र्धा को तेज करने का प्रयास कर रहा है। विशेषज्ञों ने अमेरिकी संसद को वीजा नीति में परिवर्तन के लिए तेजी से कार्य करने को कहा है। उन्होंने कहा कि विशेष रूप से एच 1 बी वीजा और देशों के कोटा निर्धारण को लेकर तत्काल नियमों में परिवर्तन करना चाहिए। यदि वीजा नियमों में ग्रीन कार्ड और स्थायी निवास की सहूलियतों को आसान नहीं किया गया तो बेहतरीन भारतीय प्रतिभा से अमेरिका को वंचित होना पड़ेगा।नेशनल फाउंडेशन फॉर अमेरिकन पालिसी के स्टुअर्ट एंडरसन ने चेतावनी दी है कि भारतीयों के लिए रोजगार आधारित श्रेणियों में वीजा का बैकलाग 9 लाख से ज्यादा है। 2030 तक यह संख्या 21 लाख से ज्यादा हो जाएगी। एंडरसन ने सीनेट की आव्रजन संबंधी समिति के सामने ये आंकड़े पेश करते हुए कहा कि यदि अमेरिका ने अपनी पुरानी नीतियों को नहीं बदला तो भारतीय प्रतिभा का कनाडा के लिए पलायन और तेज हो जाएगा। अमेरिका के विश्वविद्यालय में 2016-17 से 2018-19 के बीच के शिक्षा सत्र में कंप्यूटर साइंस और इंजीनियरिंग में 25 फीसद भारतीय छात्रों में कमी आई है।

ब्रूसेल्‍स। यूरोपीय संघ के शीर्ष कोर्ट ने कहा है कि कंपनियां अपने यहां पर काम करने वाली मुस्लिम महिलाओं के सिर पर लगे स्‍कार्फ या हिजाब को कुछ खास परिस्थिति में ही हटवा सकती है। शीष्र कोर्ट ने ये फैसला दो मामलों पर सुनवाई के बाद सुनाया है। इनमें से एक मामले में जर्मनी की एक कंपनी में काम करने वाली महिला को इसके लिए सस्‍पेंड कर दिया गया था। आपको बता दें कि हिजाब सिर को ढकते हुए कंधों तक आता है। इसका उपयोग महिलाएं करती हैं। इसको लेकर कुछ वर्षों से यूरोप में बहस चल रही है। वहीं कुछ लोग इसको मुस्लिमों के साथ हो रहे व्‍यवहार से जोड़कर देख रहे हैं।कोर्ट के सामने आए दोनों ही मामलों में महिलाएं स्‍पेशल केयर से जुड़ी हुई थी। एक अन्‍य महिला म्‍यूलर ड्रग स्‍टोर चेन से जुड़ी थी। जिस वक्‍त उन्‍होंने अपनी जॉब की शुरुआत की थी उस वक्‍त वो इस तरह के हिजाब का इस्‍तेमाल नहीं करती थीं। लेकिन कुछ समय के बाद उन्‍होंने इसको लगाना शुरू कर दिया था। उनको कहा गया कि ये सब कुछ यहां पर करने की इजाजत नहीं है। इसके लिए महिलाओं को सख्‍त हिदायत दी गई थी और कहा गया था कि उन्‍हें सस्‍पेंड तक किया जा सकता है। कंपनी की तरफ से कहा गया था कि उनको यहां पर बिना हिजाब लगाए आना होगा या फिर उन्‍हें दूसरी नौकरी तलाश करनी होगी।अब कोर्ट ने इस मामले में दिए अपने आदेश में कहा कि हिजाब को प्रतिबंधित करना क्‍या धर्म की आजादी का उल्‍लंघन है या इसकी मंजूरी देना बिजनेस के उसूलों के खिलाफ है। या इससे वहां पर आने वाले ग्राहक पर काई असर पड़ता है। कोर्ट ने अपने आदेश में कहा कि इस तरह का फैसला थोपने से पहले कंपनी को इसके लिए उचित वजह बताने की जरूरत है। यदि कंपनी अपनी छवि को एक न्‍यूट्रल रखना चाहती है, तो वो ऐसा कर सकती है।

वाशिंगटन। अफगानिस्तान में तालिबान तेजी से विस्तार कर रहा है। एक के बाद एक जिले पर कब्जे के साथ ही अब उसने गजनी और कंधार पर भी हमले शुरू कर दिए हैं। ऐसी स्थिति में भी काबुल के अमेरिकी दूतावास में कोई खलबली और खौफ नहीं है। कामकाज पूरी तरह सामान्य रूप से चल रहा है। यहां दुभाषियों और अन्य अफगान सहयोगियों के वीजा जारी करने के लिए तेजी से काम शुरू कर दिया गया है।

दूतावास में अधिकारियों की सामान्य बैठक शुरू;-रविवार से यहां के अधिकारियों ने वीजा संबंधी साक्षात्कार लेने की तैयारी कर ली है। यहां हर रोज वीजा पाने वाले दो सौ लोगों का साक्षात्कार लिया जाएगा। दूतावास में अधिकारियों की सामान्य बैठक भी शुरू हो गई हैं। अमेरिकी मिशन के सह-प्रमुख स्काट वेनहाल्ट ने बताया कि कुछ लोग मेरे पास आए और कहा कि क्या हमारी नौकरी अब भी चलती रहेगी। मैंने कहा कि हम पक्के इरादे के साथ दूतावास खोले हैं और ठीक से चलाएंगे।

अमेरिका के काबुल दूतावास में 1400 अमेरिकी अधिकारी:-वेनहोल्ड ने कहा कि यहां के अमेरिकी अधिकारियों को यह विकल्प दिया था कि वे जोखिम को लेकर अपना पद छोड़ सकते हैं, लेकिन किसी भी अधिकारी ने ऐसा नहीं किया। अमेरिका की नब्बे फीसद से ज्यादा सेना यहां से जा चुकी है। सोमवार को यहां तैनात सेना के आख्रिरी जनरल स्काट मिलर ने भी अफगानिस्तान छोड़ दिया है। अमेरिका के काबुल दूतावास में 1400 अमेरिकी अधिकारी हैं और यहां चार हजार कर्मचारी काम करते हैं। इनकी सुरक्षा के लिए 650 से 1000 तक अमेरिकी सैनिक तैनात रहेंगे।

अमेरिकी फौज और नाटो फौज की वापसी शुरू:-बता दें है कि अफगानिस्‍तान से अमेरिकी फौज और नाटो फौज की वापसी शुरू हो चुकी है। अगस्‍त के अंत तक अमेरिका अपनी पूरी फौज को यहां से निकाल लेगा। अमेरिका की वापसी के साथ ही अफगानिस्‍तान में तालिबान ने हमले भी तेज कर दिए हैं। तालिबानी नेता शाहबुद्दीन के मुताबिक तालिबान ने अफगानिस्‍तान के 85 फीसद इलाके पर कब्‍जा कर लिया है। ये बात उन्‍होंने मास्‍को में एक प्रेस कांफ्रेंस में कही है। हालांकि अमेरिका ने कहा है कि तालिबान के अफगानिस्‍तान में बढ़त लेने का अर्थ ये नहीं है कि वो वहां पर आगे भी बना रहेगा।

लंदन। यूरोपीय यूनियन ने अपने सदस्‍य देशों में पर्यटन को बढ़ावा देने के मकसद से इसी माह कोविड-19 जीटल सर्टिफिकेट की शुरुआत की है। ये सर्टिफिकेट दरअसल, कोरोना से सुरक्षित होने का यूरोपीय संघ द्वारा जारी एक डिजीटली एप्रूव्‍ड सर्टिफिकेट है। आगे बढ़ने से पहले आपको ये बता दें कि कोरोना काल में विश्‍व स्‍तर पर पर्यटन के क्षेत्र में काफी गिरावट दर्ज की गई है। लेकिन अब जबकि धीरे-धीरे…
काबुल। अफगानिस्‍तान में तालिबान के प्रभुत्‍व से गदगद पाक‍िस्‍तान को करारा झटका लगा है। अफगानिस्‍तान में मनमानी का ख्‍वाब देख रहे पाक के लिए यह जोरदार झटका है। उधर, भारत की कूटनीतिक पहल रंग लाई है। तहरीक-ए-तालिबान के इस बयान से भारत की कुछ चिंता जरूर कम हुई होगी। तालिबान ने भारत से निष्पक्ष रहने की अपेक्षा जताई है और अफगानिस्तान के लोगों का साथ देने की अपील की है,…
जोहानिसबर्ग। गरीबी और असमानता पर लोगों के गुस्से के चलते दक्षिण अफ्रीका में कई इलाकों में पुलिस और प्रदर्शनकारियों के बीच झड़प हुई है। प्रदर्शनकारियों और लुटेरों ने मंगलवार को एक शापिंग मॉल को लूटपाट कर उसमें जमकर तोड़फोड़ की।सुरक्षा अधिकारियों का कहना है कि सरकार यह सुनिश्चित करने में लगी है कि हिंसा और लूट की घटनाएं और नहीं बढ़ें। सरकार के मंत्री भेकी सेले ने कहा कि कोई…
बीजिंग। दक्षिणी चीन सागर में एक बार फ‍िर अमेरिका और चीन के बीच तनाव बढ़ गया है। चीन की सेना ने कहा है कि सोमवार को एक अमेरिकी युद्धपोत पैरासेल द्वीप समूह के पास अवैध रूप से चीनी जल क्षेत्र में घुस आया था। हालांकि, चीन की नौसेना ने दूर खदेड़ दिया। बता दें कि यह घटना अंतरराष्ट्रीय अदालत की एक फैसले की बरसी के दिन सामने आई है। इसमें…
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नार्थ अमेरिका में भारत की राष्ट्रीय भाषा 'हिन्दी' का पहला समाचार पत्र 'हम हिन्दुस्तानी' का शुभारंभ 31 अगस्त 2011 को न्यूयॉर्क में भारत के कौंसल जनरल अम्बैसडर प्रभु दियाल ने अपने शुभ हाथों से किया था। 'हम हिन्दुस्तानी' साप्ताहिक समाचार पत्र के शुभारंभ का यह पहला ऐसा अवसर था जब नार्थ अमेरिका में पहला हिन्दी भाषा का समाचार पत्र भारतीय-अमेरिकन्स के सुपुर्द किया जा रहा था। यह समाचार पत्र मुख्य सम्पादकजसबीर 'जे' सिंह व भावना शर्मा के आनुगत्य में पारिवारिक जिम्मेदारियों को निर्वाह करते हुए निरंतर प्रकाशित किया जा रहा है Read more....

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