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लंदन। वैज्ञानिकों का दावा है कि उन्होंने बिना जीपीएस के चलने वाला ऐसा रोबोट बनाया है जो अपने आसपास के वातावरण में चीटियों की तरह अपना रास्ता खोज लेगा। फ्रेंच नेशनल सेंटर फॉर साइंटिफिक रिसर्च (सीएनआरएस) के शोधकर्ताओं ने बताया कि उन्हें रेगिस्तान की चीटियों से प्रेरणा मिली जो कि अपने आसपास का वातावरण समझकर अपना रास्ता खोज लेती हैं। वैज्ञानिकों ने इसी आधार पर रोबोट का नाम आंटबोट रखा है।बताया कि खाली जगह में रास्ता नापने के लिए चीटियां ध्रुवीक्रत प्रकाश और पराबैंगनी विकरण का इस्तेमाल करती हैं। विशेष रूप से कैटाग्लिफिस रेगिस्तानी चीटी भोजन की खोज में प्रकाश की दिशा में सीधे सैंकड़ो मीटर दूर चली जाती है। इसके बाद बिना खोए वह उसी लाइन से अपने घोसले में लौट आती है।शोधकर्ताओं ने बताया कि आंटबोट रोबोट चीटियों के नेविगेशन सिस्टम को कॉपी करके बनाया गया है। जिसकी वजह से यह बिना जीपीएस सिस्टम के भी रास्ता खोज लेता है। इस रोबोट में एक आप्टिकल कंपास और एक आप्टिकल मूवमेंट सेंसर लगा हुआ है। जिनके कारण यह ध्रुवीकृत प्रकाश और सूर्य के माध्यम से अपना रास्ता तय करेगा।
दुर्गम स्थानों के लिए उपयोगी:-वैज्ञानिकों ने बताया कि मात्र 2.3 किलोग्राम वजनी इस रोबोट में छह पैर हैं जो कि किसी भी जगह पर चलने के लिए उपयुक्त हैं। यह उन जगहों पर पहुंच सकता है जहां पहिएदार रोबोट और ड्रोन का इस्तेमाल नहीं किया जा सकता। इसके साथ ही आसमान में बादल होने के बाद भी यह काम करेगा।

नई दिल्‍ली। जम्‍मू कश्‍मीर के पुलवामा में हुए आतंकी हमले के बाद सभी की निगाह चीन पर लगी है। ऐसा इसलिए क्‍योंकि चीन ही वह देश है जो हमेशा से मसूद अजहर के मामले में अड़ंगा लगाता रहा है। मसूद अजहर का यहां जिक्र इसलिए किया जा रहा है क्‍योंकि सीआरपीएफ के काफिले पर जो हमला हुआ उसकी जिम्‍मेदारी जैश ए मोहम्‍मद ने ली है। इस आतंकी संगठन का हैडक्‍वार्टर भी पाकिस्‍तान के रावलपिंडी में है।
वर्ष 2000 में हुआ था जैश का गठन:-मौलाना मसूद अजहर ने वर्ष 2000 में जैश की स्थापना पूर्व सैन्य तानाशाह परवेज मुशर्रफ के कार्यकाल में की थी, तब से यह भारत के खिलाफ पाकिस्तान हुक्मरानों का सबसे घातक हथियार बना हुआ है। तब से यह भारत के खिलाफ पाकिस्तान हुक्मरानों का सबसे घातक हथियार बना हुआ है। इस संगठन के महत्व को इस तथ्य से समझा जा सकता है कि भारत, अमेरिका, ब्रिटेन जैसे देशों के दबाव को भी दरकिनार करते हुए पाकिस्तान चीन के साथ मिलकर उसको यूएन प्रतिबंधों से बचाता रहा है। मसूद अजहर आतंकी संगठन की आड़ में अल-रहमत ट्रस्ट के नाम से एक एनजीओ भी चलाता है। इसके जरिए भी पाकिस्‍तान उसको समाज सेवक का तमगा देता आया है। वहीं चीन अपने स्‍वार्थ के लिए भारत की मंशा पर पानी फेरता आया है। पुलवामा हमले के बाद माना जा रहा था कि इस मुद्दे पर दोबारा विचार करेगा, लेकिन फिलहाल ऐसा होता दिखाई नहीं दे रहा है।
चीन का रुख स्‍पष्‍ट;-चीन के विदेश मंत्री जेंग शुआंग ने सरकार का रुख स्‍पष्‍ट करते हुए कहा है कि हम इस हमले में शहीद हुए सभी जवानों के प्रति संवेदना प्रकट करते हैं। उन्‍होंने ये भी कहा कि चीन इस तरह के किसी भी हमले की निंदा करता है। उन्‍होंने उम्‍मीद जताई है कि दोनों देश क्षेत्र की शांति और स्थिरता बनाए रखने के लिए आपसी सहयोग करेंगे।जब उनसे आतंकी मसूद अजहर को वैश्विक आतंकी की सूची में डालने को लेकर सवाल पूछा गया तो उनका जवाब था कि जैश ए मोहम्‍मद को संयुक्‍त राष्‍ट्र की आतंकी लिस्‍ट में शामिल किया गया है। चीन इसको लेकर काफी संजीदा है और इस पर उसका रुख काफी रचनात्मक और जिम्मेदाराना है। उनका यह बयान इसलिए बेहद खास है क्‍योंकि चीन हमेशा से ही अजहर के मुद्दे पर वीटो का इस्‍तेमाल करते हुए उसको वैश्विक आतंकी लिस्‍ट में शामिल करने से रोकता आया है। ये हाल तब है जब अमेरिका, ब्रिटेन, फ्रांस इस मुद्दे पर भारत का साथ देते आए हैं। इसके अलावा चीन पाकिस्‍तान का निकट सहयोगी भी है।
चीन की कूटनीतिक बयानबाजी:-दरअसल, चीन ने इस मुद्दे पर बेहद कूटनीतिक बयानबाजी करते हुए अपना पुराना स्‍टेंड ही कायम रखा है। उसका कहना है कि वह इस मुद्दे पर भारत और पाकिस्‍तान के संपर्क में है। भारत द्वारा यूएन मिलिट्री ऑब्‍जरवर ग्रुप को जम्‍मू कश्‍मीर में आने की इजाजत न देने के सवाल पर जेंग का कहना था कि भारत और पाकिस्‍तान क्षेत्र के अहम देश हैं। चीन उम्‍मीद करता है कि दोनों देश हर विवादित मुद्दे को बातचीत के रास्‍ते हल करेंगे। इसके अलावा चीन इस बात की भी उम्‍मीद करता है कि दोनों देश क्षेत्र की शांति और सुरक्षा को मद्देनजर रखते हुए कोई भी कदम उठाएंगे। यहां पर ये भी बताना जरूरी होगा कि भारत ने विश्‍व समुदाय से अपील की है कि जैश ए मोहम्‍मद के प्रमुख मसूद अजहर को वैश्विक आतंकी घोषित करने का समर्थन करें।

वॉशिंगटन। दोस्तों और लायब्रेरी से किताबें लेने के बाद लोग अक्सर उन्हें लौटाना भूल जाते हैं, लेकिन टोरंटो की रिटायर लायब्रेरियन मैरी कोंडो ने एक किताब को लौटाने में 73 साल लगा दिए। 75 साल की मैरी के मुताबिक उनका बचपन अमेरिका के मैरीलैंड के मोंटगोमरी प्रांत में बीता।1945 में जब वह दो साल की थीं अपनी मां के साथ घर के करीब स्थित लायब्रेरी आईं थी और यहां उनके नाम पर द पोस्टमैन नामक किताब जारी की गई थी। बाद में वह टोरंटो में बस गईं। हाल ही में अलमारी में सफाई के दौरान उन्हें वो किताब नजर आई। उन्होंने एक माफीनामा लिखा और उसी लायब्रेरी पहुंच गईं। मजे की बात तो ये रही कि कोई जुर्माना नहीं लगाया गया, क्योंकि मोंटगोमरी लायब्रेरी में बच्चों की किताबों पर जुर्माना नहीं लगता है।कोंडो ने लायब्रेरी को पत्र लिखकर कहा कि जब वह दो या तीन साल की थी, तब उनकी मां ने उनके लिए किताब ली थीं। लायब्रेरियन के रूप में उनके अनुभव ने उन्हें पुस्तक वापस करने के लिए प्रेरित किया।मोंटगोमरी काउंटी पब्लिक लायब्रेरी एडमिनिस्ट्रेशन की कार्यवाहक निदेशक अनीता वासलो ने कहा 'यह निश्चित रूप से हमारी सबसे पुरानी चीज है जो हमारे पास वापस आ गई है।' पुस्तकालय की एक नीति है कि बच्चों द्वारा देर से पुस्तक वापस करने पर भी उनपर जुर्माना नहीं लगाया जाता है। इसलिए मैरी जुर्माना देने से बच गईं।

वाशिंगटन। राष्‍ट्रपति डोनाल्‍ड ट्रंप जल्‍द ही अमेरिका में राष्‍ट्रीय आपातकाल की घोषणा करेंगे। इसके लिए ट्रंप एक कार्यकारी आदेश पर हस्‍ताक्षर करेंगे। इस आपातकाल का लक्ष्‍य अमेरिका-मैक्सिको सीमा पर दीवार के निर्माण में निधि को हासिल करना है। ट्रंप के इस कदम से अमेरिका की सियासत गरमा सकती है। अब यह देखना दिलचस्‍प होगा कि विपक्ष के हमलों को व्‍हाइट हाउस किस तरह से निपटता है।
आपातकाल के बाद ट्रंप को मिलेगी अपार शक्ति:-ट्रंप के इस कदम से दीवार के निर्माण के लिए 5.6 बिलियन अमरीकी डालर प्राप्त करने में मदद मिलेगी। दरअसल, अमेरिका में आपातकाल की घोषणा के बाद समस्‍त शक्तियां राष्‍ट्रपति में निहित हो जाती हैं। आपातकाल में समस्‍त वित्‍तीय शक्तियां भी राष्‍ट्रपति को प्राप्‍त हो जाती है। जाहिर है कि राष्‍ट्रपति की वित्‍तीय सहायता के लिए कांग्रेस के समर्थन की जरूरत नहीं होगी। वह आसानी से इसके लिए निधि हालिस कर लेंगे। बता दें कि ट्रंप ने मैक्सिको सीमा पर इस दीवार को राष्‍ट्रीय सुरक्षा के लिए जरूरी कदम बताते आए हैं। इसका मकसद अवैध आप्रवासियों को देश में प्रवेश से रोकने और नशीली दवाओं पर अंकुश लगाना है।
सैंडर्स- ट्रंप निभाएंगे देश की सुरक्षा का अपना वचन:-व्हाइट हाउस की प्रेस सचिव सैंडर्स सारा ने कहा कि राष्ट्रपति ट्रंप इस धन विधेयक पर हस्ताक्षर करेंगे। इसके पूर्व ट्रंप राष्‍ट्रीय आपातकाल के ओदश पर हस्‍ताक्षर करेंगे। सारा ने कहा कि इस आपातकाल का मकसद राष्‍ट्रीय सुरक्षा और मानवीय संकट से देश को उबारना है। प्रेस सचिव ने कहा कि राष्‍ट्रपति चुनाव के वक्‍त ट्रंप ने अपनी देश की सुरक्षा के लिए जो वचन दिए थे, वह अपने संकल्‍प पर कायम हैं। सीनेट के प्रमुख नेता मिच मैककोनेल के इस कदम को सार्वजनिक करने के तुरंत बाद व्हाइट हाउस का बयान आया।
विपक्ष ने ट्रंप को घेरा, कहा शक्ति का दुरुपयोग:-राष्‍ट्रपति के इस कदम को लेकर विपक्ष की तीखी प्रतिक्रिया आई है। डेमोक्रेट्स ने कहा कि वह ट्रंप के इस कदम को सर्वोच्‍च अदालत में चुनौती देंगे। सीनेट के अल्पसंख्यक नेता चक शूमर और हाउस की स्पीकर नैंसी पेलोसी ने कहा कि राष्ट्रीय आपातकाल की घोषणा करना एक निरर्थक और कानूनविहीन कार्य है। यह राष्ट्रपति पद की शक्ति का घोर दुरुपयोग है। विपक्ष ने कहा है कि ट्रंप को यह एक हताशा भरा कदम है। विपक्ष की इस प्रतिक्रिया पर सैंडर्स ने कहा कि हम किसी भी कानूनी चुनौतियों के लिए तैयार हैं। सैंडर्स ने कहा कि राष्‍ट्रपति अपना काम कर रहे हैं और कांग्रेस को अपना काम करना च‍ाहिए।
ट्रंप ने एक माह पूर्व आपातकाल लगाने की दी थी धमकी;-जनवरी के प्रथम हफ्ते वरिष्ठ डेमोक्रेट सांसदों से मुलाक़ात के बाद ट्रंप ने ये धमकी दी थी वह संसद की मंज़ूरी के बिना मेक्सिको सीमा पर दीवार खड़ी करने के लिए राष्ट्रीय आपातकाल घोषित कर सकते हैं। तब उन्‍होंने डेमोक्रेट सांसदों से मेक्सिको सीमा पर दीवार खड़ी करने लिए फंड को मंज़ूरी देने की गुज़ारिश की थी। ट्रंप के इस क़दम को, सरकार को दीवार बनाने के लिए ज़रूरी धन जारी करने के लिए विपक्ष पर दबाव बनाने की रणनीति के रूप में देखा जा रहा है।

 

वाशिंगटन। अमेरिकी खुफिया एजेंसी सीआइए (CIA) के पूर्व विश्लेषक और दक्षिण एशिया मामलों के विशेषज्ञ ब्रूस रिडेल ने गुरुवार को कहा कि जैश-ए-मुहम्मद (Jaish-e-Mohammad) द्वारा जम्मू-कश्मीर के पुलवामा में सीआरपीएफ काफिले पर आत्मघाती हमले की जिम्मेदारी लेना पाकिस्तानी खुफिया एजेंसी आइएसआइ (ISI) की भूमिका पर सवाल खड़े करती है।ब्रूस रिडेल ने कहा, इससे पता चलता है कि इस ऑपरेशन के मास्टरमाइंड को आइएसआइ का समर्थन हासिल है। उन्होंने कहा कि इस हमले के तार सीधे तौर पर पाकिस्तान से जुड़ते हैं और इसने पाकिस्तानी प्रधानमंत्री इमरान खान के समक्ष पहली बहुत बड़ी चुनौती पेश कर दी है।रिडेल ने कहा, 'यह इमरान खान के लिए वास्तविक चुनौती होगी, उनके प्रशासन के लिए पहली गंभीर चुनौती।' अमेरिका में पाकिस्तान के पूर्व राजदूत हुसैन हक्कानी ने कहा, 'पाकिस्तान को जैश-ए-मुहम्मद के खिलाफ कार्रवाई करनी ही होगी।'ओबामा सरकार में राष्ट्रीय सुरक्षा परिषद के एक पूर्व अधिकारी अनीश गोयल ने कहा कि इस भयावह हमले से पता चलता है कि कश्मीर में अभी भी पाकिस्तान के आतंकवादी समूह सक्रिय हैं।हमले का इस तरह से जिम्मेदारी लेकर, जैश-ए-मोहम्मद स्पष्ट रूप से संकेत दिया है कि वो इस क्षेत्र में परेशानी पैदा करते रहेगा और इससे पाकिस्तान और भारत के बीच तनाव बढ़ता रहेगा।न्होंने कहा कि इस हमले के मद्देनजर, प्रधानमंत्री मोदी पर कश्मीर में सक्रिय सभी आतंकी समूहों के खिलाफ कार्रवाई करने का दबाव बढ़ेगा।

 

 

 

इस्लामाबाद। कुलभूषण जाधव मामले में अंतरराष्ट्रीय न्यायालय में अपना पक्ष रखने के लिए पाकिस्‍तान का एक प्रतिनिधिमंडल शुक्रवार को हेग के लिए रवाना हुआ है। यह जानकारी यहां के एक वरिष्ठ अधिकारी ने दी है। अंतरराष्‍ट्रीय कोर्ट में इस मामले की सुनवाई 18 फरवरी को होगी। एक वरिष्ठ अधिकारी ने डॉन को बताया कि पाकिस्तान के अटॉर्नी जनरल अनवर मंसूर आईसीजे में पाकिस्तानी प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व करेंगे। बता दें कि आईसीजे की 10 सदस्यीय पीठ ने भारत की अपील पर निर्णय करने तक जाधव की सजा के तामील पर रोक लगा रखी है।गौरतलब है कि पाकिस्तान की एक सैन्य अदालत ने भारतीय नागरिक जाधव को अप्रैल, 2017 में जासूसी और आतंकवाद के आरोप में मौत की सजा सुनाई थी। पाकिस्‍तान सेना के इस फैसले के खिलाफ भारत ने अंतरराष्‍ट्रीय कोर्ट का रुख किया था। इसके बाद कोर्ट ने जाधव की मौत की सजा को स्‍थगित कर दिया था। जाधव केस में भारत और पाकिस्‍तान ने अंतरराष्‍ट्रीय कोर्ट में पहले ही अर्जियां और जवाब लगा रखे हैं। कोर्ट ने अगली सुनवाई 18 से 21 फरवरी मुकर्रर की थी।इस मामले में भारत ने जाधव का पक्ष लेते हुए कहा था कि सभी आरोप बेबुनियाद है। भारत का दावा है कि पाकिस्‍तान ने जाधव को ईरान से अगवा किया था। भारत का कहना है कि जाधव नौसेना से सेवानिवृत के बाद अपने कारोबार के लिए ईरान गए थे। उनका सरकार या जासूसी से कोई लेनादेना नहीं है। अपने लिखित दलीलों में भारत ने पाकिस्‍तान पर वियना संधि के उल्‍लंघन का आरोप लगाया है। इस मामले में पाकिस्‍तान का दावा है कि जाधव के खिलाफ उसके पास सारे सबूत है। पाकिस्‍तान यह भी दावा करता रहा है कि खुद जाधव ने विध्‍वंसक गतिविधियों में शामिल होने की बात कबूल की है।पाकिस्तान का कहना है कि उसके सुरक्षाबलों ने मार्च, 2016 में बलूचिस्तान प्रांत में जाधव को गिरफ्तार किया था जहां वह ईरान से कथित रूप से घुस आए थे। अंतरराष्ट्रीय न्यायालय में पाकिस्तान ने कहा था कि जाधव कोई साधारण व्यक्ति नहीं हैं, क्योंकि वह जासूसी और विध्वंसक गतिविधियां करने के इरादे से देश में घुसे थे।

वाशिंगटन। कश्मीर के पुलवामा जिले में जैश-ए-मोहम्मद द्वारा किए गए आत्‍मघाती हमले के बाद व्‍हाइट हाउस ने इस्‍लामाबाद को सख्‍त चेतावनी दी है। अमेरिका ने दो टूक कहा है कि पाकिस्‍तान तत्‍काल आतंकवादियों के सभी तरह के सहयोग और समर्थन बंद करे। अमेरिका ने साफ कहा है कि पाकिस्‍तान आतंकवादियों का सुरक्षित पनाहगार है।अमेरिका ने पाकिस्तान स्थित आतंकी संगठन जैश-ए-मोहम्मद द्वारा किए गए हमले की कड़ी निंदा की है। शुक्रवार…
बर्लिन। वैज्ञानिकों ने यह खोज लिया है कि कैसे पृथ्वी पर हर जगह पाया जाने वाला एक आम कवक हमारे शरीर के प्रतिरक्षा तंत्र को अपंग बना देता है और एक घातक संक्रमण विकसित कर सकता है। शोधकर्ताओं ने बताया कि कवक एस्परगिलस फ्यूमिगेटस हमारे घरों में कुशन, पर्दे, फर्श पर सामान्य रूप से पाया जाता है। यह सूक्ष्म बीजाणु होते हैं जो हवा के माध्यम से उड़कर आते हैं।…
नई दिल्ली। दुनिया भर में लगातार बढ़ती जनसंख्या और जलवायु परिवर्तन ने प्राकृतिक संसाधनों को खतरे में डाल दिया है। सबसे ज्यादा खतरा पानी को लेकर है, जो बहुत तेजी से कम हो रहा है। ऐसे में बहुत से जानकार और विश्लेषक आशंका जता चुके हैं भविष्य में अगला विश्वयुद्ध पानी को लेकर हो सकता है। इसके संकेत अभी से दिखने भी लगे हैं। अब एक ताजा रिपोर्ट में बताया…
लागोस। नाइजीरिया के राष्ट्रपति मुहम्मदु बुहारी की एक चुनावी रैली के दौरान भगदड़ में कई लोगों की मौत हो गई और दर्जनों घायल हुए हैं। हालांकि, अभी तक मरने वालों की संख्‍या स्‍पष्‍ट नहीं हो पाई है। घायलों को अस्‍पताल में भर्ती कराया गया है। एक सप्‍ताह के अंदर राष्‍ट्रपति बुहारी की चुनावी रैली में भगदड़ का यह दूसरा हादसा है। बता दें कि नाइजीरिया में शनिवार को चुनाव होना…
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नार्थ अमेरिका में भारत की राष्ट्रीय भाषा 'हिन्दी' का पहला समाचार पत्र 'हम हिन्दुस्तानी' का शुभारंभ 31 अगस्त 2011 को न्यूयॉर्क में भारत के कौंसल जनरल अम्बैसडर प्रभु दियाल ने अपने शुभ हाथों से किया था। 'हम हिन्दुस्तानी' साप्ताहिक समाचार पत्र के शुभारंभ का यह पहला ऐसा अवसर था जब नार्थ अमेरिका में पहला हिन्दी भाषा का समाचार पत्र भारतीय-अमेरिकन्स के सुपुर्द किया जा रहा था। यह समाचार पत्र मुख्य सम्पादकजसबीर 'जे' सिंह व भावना शर्मा के आनुगत्य में पारिवारिक जिम्मेदारियों को निर्वाह करते हुए निरंतर प्रकाशित किया जा रहा है Read more....

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